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  कामदेव के वाण और प्रजातंत्र के खतरे यशवन्त कोठारी      होली का प्राचीन संदर्भ ढूंढने निकला तो लगा कि बसंत के आगमन के साथ ही चारों तरफ कामदेव अपने वाण छोड़ने को आतुर हो जाते हैं मानो ...और पढ़े

व्यंग्य             अफसर का अभिनन्दन यशवंत कोठारी     शहर में जी एस टी का नया अफसर आया है , सुना है बड़ा कड़क ,इमानदार और उसूलों वाला अफसर है ,किसी को नहीं बक्षता .व्यापारियों में हडकंप मचा हुआ ...और पढ़े

आज़ादी   की तलाश  में .....                                                       यशवंत कोठारी   आज़ादी की साल  गिरह पर  आप सबको बधाई, शुभ कामनाएं .इन सालों में क्या खोया क्या पाया , इस का लेखा जोखा कोन करेगा.क्यों करेगा . हर अच्छा काम  मैने किया  ...और पढ़े

  चुनाव में खड़ा स्मग्लर                                                 यश वन्त कोठारी                वे एक बहुत बड़े स्मगलर थे। समय चलता रहा। वे भी चलते रहे। अब वे समाज सेवा करने लग गए। सुविधाएं बढ़ने लगीं। उनके पास सभी कुछ था। ...और पढ़े

  चुनावी - अर्थशास्त्र                            यशवंत कोठारी   विश्व के सबसे महंगे चुनाव भारत में होने जा रहे हैं .सत्रहवीं लोक सभा के लिए ये चुनाव पैसों की बरसात के सहारे सहारे चलेंगे. इस बार पैसा बरसेगा सत्तर लाख ...और पढ़े

व्यंग्य-- चुनाव ऋतु –संहार   यशवंत कोठारी हे!प्राण प्यारी .सुनयने ,मोर पंखिनी ,कमल लोचनी,सुमध्यमे , सुमुखी कान  धर कर सुन और गुन ऐसा मौका  बार बार नहीं आता ,इस कुसमय को सुसमय समझ और रूठना बंद कर ,चल आ ...और पढ़े