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सुमित घर पहुंचा तो बेला ने सामने आते हुए बोला क्या हुआ सुमित आप इतने गुस्से में...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 11 " दादू! एक बार कोले...
Part 5द ग्रैंड ग्रिमोइरे – वह खतरनाक किताब जिसमें शैतान को बुलाने की विधियाँ लिख...
अगली सुबह जब घर के सदस्य डाइनिंग टेबल पर नाश्ते के लिए इकट्ठा हुए, तो सबकी आँखें...
एपिसोड 1: किस्मत का ‘विसर्जन’ और वह अनोखा मेहमानमकान का हाल: बरेली की सबसे तंग ग...
बहुत मुश्किल में डाल दिया है तुमने |.. आज क्या मुझे अपनी चु...
राघव के लिए वह दिन सिर्फ एक हार नहीं था, बल्कि जैसे पूरी दुनिया ही उसके खिलाफ हो...
कॉपीराइट © 2026 साधना गौतमसर्वाधिकार सुरक्षित। इस पुस्तक का कोई भी भाग बिना लेखि...
एपिसोड 16: सच की जंगअगली सुबह पटना सेंट्रल कोर्ट के बाहर फिर वही भीड़, वही कैमरे...
तनय और मानव ने मोबाइल पर सीसीटीवी फुटेज खोल दी। शानवी पास खड़ी थी। उसकी आँखें नम...
वॉयनिच पांडुलिपि – दुनिया की सबसे रहस्यमयी और शापित किताब साल 1912। यूरोप की एक शांत और प्राचीन इमारत… जिसकी मोटी पत्थर की दीवारें सदियों का इतिहास अपने भीतर छुपाए बैठी थीं।...
सन्नाटे की गूँज माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
वाराणसी की गलियों में शाम का धुंधलका गहरा रहा था। गंगा की लहरों पर दीयों की रोशनी कॉंप रही थी, लेकिन शहर के बाहरी इलाके में स्थित 'अनंत विंटेज पैलेस' के अंदर एक अलग ही खेल...
एक एंकर अपनी न्यूज़ रूम में चिल्ला चिल्लाकर लोगों को एक जानकारी दे रही थी।"लोगों को भी सचेत रहना चाहिए, अगर सच्चाई सामने नहीं आती तो किसी बेगुनाह को जिंदगी भर सलाखों के पीछे सड...
मुंबई की चमकती ऊँची इमारतों में से एक — “नव्या ग्लोबल कॉर्प” का हेडक्वार्टर। शीशे की दीवारों से ढका वो टॉवर शहर की ताकत और महत्वाकांक्षा का प्रतीक था। और उसकी सबसे ऊपरी मंज़िल पर...
रात के ठीक 2:13 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का पिछला हिस्सा — जहाँ शायद ही कोई जाता हो — अँधेरे में डूबा हुआ था। वहीं था… मॉर्ग। दीवारों पर जमी सीलन, टिमटिमाती हुई...
'जैकब्स हॉस्टल' के बाहर सन्नाटे को चीरती हुई बर्फीली हवाएं चल रही थीं। छुट्टियों का सीजन था, इसलिए जो हॉस्टल कभी 500 लड़कों के शोर से गूँजता था, आज वहाँ मुर्दा शांति पसरी थी...
मुंबई की उस रात में उमस नहीं, एक दम घोटने वाली खामोशी थी. उपनगर की एक तंग गली के आखिरी छोर पर स्थित उस जर्जर इमारत का कमरा नंबर सत्रह, किसी जिंदा कब्र जैसा लग रहा था. घडी की सुइयां...
" इच्छा... तुम... नहीं नहीं तुम मेरी इच्छा नहीं हो सकती... " जोरो से हॅसते हुए आवाज गूंजती है.... " सही पहचाना में तेरी इच्छा नहीं हूँ मै.. वो हूँ जो तू सोच भी नही...
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