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एक्सीडेंट सुनकर जानवी डर जाती है और वो हॉस्पिटल की तरफ चली जाती है इधर उसी हॉस्प...
अध्याय 47, XLVII1 और अब हे मेरे बालको, अपने अपने मन में विचार करो, और अपने पिता...
️ राजू कुमार चौधरी – फ्रीलांस कहानी (लंबा संस्करण)नमस्ते! मेरा नाम राजू कुमार चौ...
: : प्रकरण : : 23 फ्लाइट ने टेक ओफ कर लिया था. और सब ल...
"कुछ बोझ कंधों पर नहीं, आत्मा पर होते हैं। और वो बोझ तब तक हल्के नहीं होते जब तक...
यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के लिए बनाई गई है। इसमें दिखाए गए...
[ नीलम कुलश्रेष्ठ ] नारी आंदोलन ,स्त्री समानता ,नारी विमर्श ,स्त्री के अधि...
कहानी मेरी है… मैं एक पेन हूँ… जी हाँ, आपने सही पढ़ा है… इंग्लिश में कहें त...
The subscriberरात के ठीक बारह बजे थे।मोबाइल की स्क्रीन पर सिर्फ़ एक नोटिफिकेशन च...
भूल-98 ‘लोकतंत्र’ नेहरू की देन?—असत्य है आपको यदा-कदा ही ऐसे लोग मिलेंगे, जो नेह...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
सुबह के छह बज रहे थे। शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में नींद के लिए जगह कब की खत्म हो चुकी थी। किराए के छोटे से कमरे में रखे एक पुराने से पलंग पर वह...
पहली मुलाकात गर्मी की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थीं, और स्कूल का पहला दिन था। स्कूल का गेट बच्चे और उनके माता-पिता से भरा हुआ था। हर कोई अपने दोस्तों से मिलने के लिए उत्साहित था। बि...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
इस रचना के सभी पात्र ओर घटनाएं काल्पनिक है इनका किसी धर्म ओर जाति ,मानव ,पशु से कोई लेना देना नहीं है । ये मात्र मेरे दिमाग ओर मेरी लेखनी की उपज है इस कहानी के सारे राइट्स मेरे अधी...
यशस्विनी 21वीं सदी में महिलाओं की बदलती भूमिकाविषय पर एक आलेख लेखन में व्यस्त है।अपने लैपटॉप पर हेडफोन से वॉइस टाइपिंग करने केसमय वह कई बार भावनाओं में डूबती- उतरती रही। उसने यह मह...
मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...
रामू: जो खुद को बहुत समझदार मानता है। श्यामू: रामू का पड़ोसी, जो थोड़ा सीधा है लेकिन मौके पर चौका मारता है। बसंती चाची: मोहल्ले की "न्यूज़ चैनल"। इन्हें सबके घर की खबर होती...
खामोश पेंटिंग की पहली साँस पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...
अनामिका और अविनाश दोनों उस पहाड़ी के किनारे टूटी हुई रेलिंग के पास खड़े डूबते हुए सूरज को देख रहे थे।आसमान में गुलाबी नारंगी आभा पीछे छोड़ता हुआ सूरज अपनी गति से नज़रों से ओझल हो र...
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