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Apisode -1)बारिश हो रही थी काव्य कॉलेज के बाहर खड़ी थी️, गाड़ी खराब हो गई थी !त...
घड़ी की टिक टिक आवाज आ रही थी। जिसके साथ ही फोन पर एक टिंग की आवाज आई।जिसे सुन ड...
पहला अध्याय: किस्मत की ठोकरशहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और टूटे हुए मकान मे...
रात का समय था , मुम्बई के हॉस्पिटल के एक वार्ड में एक खून से सनी हुई एक औरत को ल...
++Bina_dekhe_pyar+++मैं कोई पेशेवर लेखक तो नहीं लेकिन ऐसे ही थोड़ा लिखने का प्रय...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और...
भाग १ – शुरुआती संघर्षकमज़ोरी से जन्मी ताकत :डेविड गॉगिन्स का बचपन एक सामान्य बच...
कुछ ज्ञान की बातें 1 सूर्य कैसा है ! सूर्...
पार्ट - 1सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था।...
पक्षीलोक की सुबह आज कुछ अलग थी।आकाश सामान्य से अधिक उजला था, हवाओं में हल्की सी...
{रहे तेरी दुआ मुझ पर - जोदाहवां हिस्सा}{जादूई ताकत का हकदार और गुलनाज की शैतानी}[फलेशबेक जारी]नूर उस जिन्न के अक्स की बात सुन हैरान नही हुई उसे भी कही ना कही ये मालूम था कि शायद वह...
कुंभ्मन परेसान होकर कहता है--> ये....ये मुझे क्या हो रहा है । मैं....मैं ठीक से चल क्यों नही पा रहा हूँ। कुंम्भन अपने अंदर बहुत कमजोरी महसुस कर रहा था। कुंभ्मन गुस्से से कहता है-->...
राजमहल के सभा-कक्ष में सन्नाटा पसरा था। कुंवर प्रताप हल्की सी मुस्कान के साथ बोले,“दाजीराज, मीरा माँ … घर वापस कब आती थी?”उनके प्रश्न के साथ ही सबकी नज़रें एक साथ राणा उदय सिंह जी...
अस्पताल से निशा को लगभग 34 दिन के बाद छुट्टी दे दी गई संगीता अब हर वक्त उसके साथ रहकर उसका पूरा ख्याल रखती थी,,,,निशा के दोनों बच्चे भी अब अपनी मम्मा को ज्यादा परेशान नहीं करते शाय...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही थी।राधा की नींद सबसे पहले खुली।उसने करवट लेकर सीमा की तरफ देखा।सीमा अभी भी सो रही थी — लेकिन उसके चेहरे पर एक अलग सी शांति और हल्की चिंता...
एक साल बाद मैं गोवा में एक छोटे से क्लिनिक में काम करता था। मुंबई से दूर, अपनी पुरानी ज़िंदगी से दूर, उन यादों से दूर जो मुझे रात में जगाती थीं। यहाँ कोई मुझे नहीं जानता था। मैं बस...
मैं दादा-दादी की लाडली – 6दूसरी शादी — वही टूटा भरोसायह “मैं दादा-दादी की लाडली” की कहानी का छठा अध्याय है।बचपन की मासूमियत और टूटे सपनों के बाद,अब मेरी ज़िंदगी एक ऐसे मोड़ पर आ खड...
Doctor cabin. Shreya chair पर बैठी है, आँखें बंद, हल्का दर्द अभी भी बना है। Kabir और Karan दोनों उसके दोनों तरफ बैठे हैं — चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है।Doctor (शांत स्वर में)...
रात के दस बज चुके थे। बच्चों को सुलाने के बाद काया ने पूरे घर का चक्कर लगाया। ड्राइंग रूम की लाइट बंद की, बिखरे हुए खिलौने समेटे और फिर रसोई की ओर बढ़ी। अमूमन इस वक्त तक घर में एक ख...
(जीवन का प्रत्यक्ष विज्ञान-दर्शन — वेदांत 2.0) अज्ञात अज्ञानी मन स्वयं आनंद है, स्वयं ब्रह्म है। बस उसे कर्ता से द्रष्टा बना दो—कर्ता नहीं बचता। यही द्रष्टा...
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