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अधूरी डायरी: हमेशा का वादाभाग 1: पहली मुलाकातदिल्ली की उस पुरानी लाइब्रेरी में,...
भाग: 1 — बाज़ार में ममताशहर की चकाचौंध से दूर, जहाँ ऊँची इमारतों का साया भी गरीबो...
दिल्ली की बड़ी सड़कों और भीड़-भाड़ के बीच, छोटे-छोटे सपनों को लेकर आई थी सुनीति...
रात इतनी गहरी थी कि चाँद की रौशनी भी शायद डर के छिप रही थी। बारिश की बूंदें पत्थ...
पहली मुलाकातगर्मी की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थीं, और स्कूल का पहला दिन था। स्कूल...
[5/1, 15:13] Vivek Kumar: शीर्षक: कलम की ताकत: लेखिका गीता कुमारी का संकल्पमेरा...
शाम के ठीक 6 बज रहे थे। बाहर बारिश की हल्की बूंदें गिर रही थीं, वैसी ही जैसी किस...
आज थाने में बड़ा शोर था। एक मासूम सी,, लगभग 23 साल की एक औरत थी। "औरत तो क्या बो...
अधूरी किताब का आखिरी पन्नाभाग 1: पहाड़ों की वह धुंधली सुबहशिमला की वादियों में आ...
घर की दहलीज ,सुबह की पहली किरणें बरामदे में बिछी सफेद चादर पर पड़ रही थीं, लेकिन...
भाग तीन"चिट्ठी का इंतजार"जहाँ आशा और भय बराबर खड़े होते हैंजहाँ शब्द टूटने लगते हैं, और मौन बोलने लगता है।अब चिट्ठियाँ सिर्फ ख़बर नहीं लाती थीं, वे मौन संकेत लाने लगी थीं, रामदीन क...
दिल्ली की एक छोटी सी कॉलोनी में, जनवरी का महीना था। ठंडी हवा चल रही थी, और घरों में हीटर चल रहे थे। शर्मा जी का घर हमेशा की तरह हलचल भरा था। उनकी बेटी नेहा की शादी की बात चल रही थी...
सुबह के ठीक 5:00 बजे थे। खन्ना मेंशन के उस विशाल बेडरूम में हल्की-सी नीली रोशनी फैली हुई थी। देब की नींद अचानक खुल गई। वह कुछ पल यूँ ही छत को घूरता रहा, फिर करवट बदली… और तभी उसे ए...
वक़्त जैसे एक पल के लिए ठहर गया था।रुशाली और मयूर सर, अब भी वैसे ही खड़े थे— इतने क़रीब कि एक साँस की दूरी भी ज़्यादा लग रही थी।रुशाली का हाथ अब भी मयूर सर के सीने पर था। उस सीने प...
Next Ep,,, jin का मुंह बन गया तो suga उसे घूरता हुआ "ह साला लालची भूखण्ड"ये सुन सभी बॉयज लोट पोट होकर हंसने लगे तो वही काजल अपनी हंसी कंट्रोल किए हुए थी। वही Jin लड़कियों की तरह म...
कमरे में सन्नाटा था।इतना गहरा… कि संस्कृति की सिसकियाँ भी उसे तोड़ नहीं पा रही थीं।वो वहीं बैठी रही। दुल्हन की तरह सजी… लेकिन किसी बेवा से भी ज़्यादा अकेली।धीरे-धीरे उसने फाइल अपने...
अभी तक आपने पढ़ा कि अनुराग ने पहली रात अनन्या की थकान का सम्मान करते हुए उसे नहीं जगाया और सुबह उसे प्यार से सुहाग का पूरा सामान उपहार में दिया। हीरे का मंगलसूत्र और चूड़ियाँ देखकर...
---शीर्षक: यादों के रंगलेखक: विजय शर्मा एरी---शहर के सबसे पुराने मोहल्ले की एक तंग-सी गली में स्थित था वर्मा स्टूडियो। लकड़ी का जर्जर बोर्ड, जिस पर कभी सुनहरे अक्षरों में लिखा था—...
"इतने कम समय में शादी????" कल्पना ने चिंतित होकर कल्पेश की ओर देखते हुए कहा। "वहीं तो कल्पना, इतने कम समय में इतना सारा इंतजाम करना है!!!!!" कल्पेश ने चिंतित स्वर में सभी से कहा। ...
दूसरे दिन विजय जल्दी ही निशा के ऑफिस पहुंच गया और उसने चौकीदार से कहकर निशा से मिलने के लिए कहा,,,,,चौकीदार उसकी चिट्ठी ले कर अंदर गया लेकिन निशा ने इस बार भी गुस्से में उस को एक त...
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