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हकीकत की हकीकत - 3
द्वारा Akshay jain
  • 75

                    कहा जाता है! कि इंसान गलतियों का पुतला होता है। और यदि कोई गलती नहीं करेगा तो सभी भगवान ...

हकीकत वास्तविकता - 2
द्वारा Akshay jain
  • 249

                 जीवन में “हकीकत" शब्द बहुत मायने रखता है। क्योंकि यदि आप अपने जीवन में हकीकत अथवा वास्तविकता को स्थान देते हैं ...

हकीकत वास्तविकता - 1
द्वारा Akshay jain
  • 453

हकीकत इस शब्द से महज सभी लोग पीछा छुड़ाते हैं। कोई नहीं जानना चाहता हकीकत को। सभी लोग आंखों को बंद करके जीना चाहते हैं और जीते भी हैं। ...

डॉक्टरों की हड़ताल
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 357

हड़ताल   टीकू के सीने दर्द लगातार बढ़ता ही जा रहा था। दर्द से आँखे मींचे  हुए वह दुहरा जा रहा था और बीच-बीच में उठकर मम्मी को देख ...

फांस
द्वारा Poonam Singh
  • 426

" फाँस " ----------"पिछले साल फसल अच्छी हुई थी तो फुस के घर की जगह पक्का घर बनवाय दिहे रहे और तुम्हरे लिए एक ठो टीवी भी खरीद दिहे रहे।" ...

एक ख़ून माफ़
द्वारा Dr Ranjana Jaiswal
  • 682

मैं समझ नहीं पा रही थी कि संचय को हो क्या गया है,वह मेरे सामने दूसरे युवा,सुंदर पुरूषों की प्रशंसा क्यों करता रहता है?क्या उसको अपनी कमियों का अहसास ...

आत्महत्या
द्वारा Priya Saini
  • 720

जब तुम अँधेरे से घिरे हुए हो और कहीं से एक रोशनी नज़र आये। तुम उस रोशनी का पीछा करते हुए आगे बढ़ो और पास जाकर पता चले ये ...

एकमेडिटेशन - 3
द्वारा VANDANA VANI SINGH
  • 363

इन दिनों जब से प्रयोग लिखना शुरू किया है मुझे भी बड़ी ख़ुशी मिल रही है। एसा लगता है कुछ है जो मुझे आप से जोड़ रहा कहानी लिखी ...

बंसी
द्वारा Poonam Singh
  • 544

      "बंसी" "कृष्णा,,,!! कृष्णा......!!ओ....कृष्णा, कहाँ गया।" माँ के बारम्बार पुकारने पर भी कृष्णा कहीं नज़र नहीं आया। "पता नहीं ये लड़का कहाँ चला जाता है बिना बताए...?" ...

एकमेडिटेशन - 2
द्वारा VANDANA VANI SINGH
  • 425

तीसरा प्रयोगअब बारी तीसरे प्रयोग की है , हम पहले दोनो प्रयोग में अगर सफल हुए ये तीसरे प्रयोग बड़ी आसानी से कर सकते है। इस प्रयोग में सिर्फ ...

एकमेडिटेशन - 1
द्वारा VANDANA VANI SINGH
  • 523

आज हम बात मेडिटेशन पे करेंगे ,  मेडिटेशन आज के समाज के लिए सबसे आवश्यक और महत्वपूर्ण है।  अगर मेडिटेशन का का अर्थ समझे  तो ध्यान  पड़ने में ये ...

सुसाइड क्यूं
द्वारा shilpi krishna
  • 398

#सुसाइड  क्यूं ???* क्यूं हमें जिंदगी से प्यारी मौत लगने लगती है ?*क्यूं हमें सुसाइड करने से पहले किसी का मोह नहीं रहता ?*क्या सुसाइड करने से सारी समस्या ...

वह एक दिन
द्वारा Lovelesh Dutt
  • 414

वह एक दिन--लवलेश दत्त‘उफ! यह तो बहुत मुसीबत हो गयी’, अखबार की हेडलाइन ‘देश में इक्कीस दिन के लिए संपूर्ण लॉक डाउन’ पर नज़र पढ़ते ही शर्मा जी के ...

क्रिप्टो करेंसी सही या गलत ।
द्वारा H M Writter0
  • 417

इस दुनिया में जीवन यापन करने के लिए व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है, अपनी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लोग एक दूसरे से लेनदेन करते ...

जिंदगी
द्वारा Venu G Nair
  • 596

  लोग कहते हे  " जिंदगी एक सफर है "।  लेकिन  ऐ  नहीं पता यह कब शुरू होता है और कब खतम।  हर इंसान अपनी जिंदगी अलग अलग जगह ...

मुस्कुराते हुए चेहरे दुनिया की सबसे खूबसूरत उम्मीद होते हैं।
द्वारा Amit Singh
  • 919

"मुस्कुराते हुए चेहरे दुनिया की सबसे सबसे खूबसूरत उम्मीद होते हैं "कहते हैं कि ये दुनिया उम्मीदों पर टिकी है | लेकिन इस उम्मीद की बुनियाद किस पर टिकी ...

आलोचक जात
द्वारा Sonu Kasana
  • 391

आपने इस शब्द के बारे में अवश्य ही बहुत कुछ सुन रखा होगा और कुछ ना कुछ समझ भी रखा होगा और निश्चित रूप से आपके लिए आलोचक के ...

परिचय - मेरे साथ चाणक्य निती
द्वारा Nimish Pansuriya
  • 875

             "चाणक्य नीति " , जब यह पुस्तक लोगों के सामने आती है तब अधिक प्रमाण में लोग इस पुस्तक को एक राजनीतिक मुद्दे ...

किर_दार 2
द्वारा sk hajee
  • 488

हम किर_दार के माध्यमसेहमारे बिच रहने वाली सोच को उजागर करने का प्रयास कर रहे है । बार-बार बदलने वाली इन्सानी फ़ितरत, लालच ... जरूर देखें और लाइक, कंमेट, शेयर ...

कैसा हक ?
द्वारा Sonu Kasana
  • 509

बीरबल के 2 पुत्र थे तथा उसकी पत्नी काफी अच्छी थी वे सब बहुत खुश थे बीरबल प्रतिदिन कार्य पर जाता तथा आजीविका कमा कर के लाता था। प्रतिदिन ...

सच : एक रहस्य
द्वारा Radhika Setia
  • 1.5k

कहने को तो बस कहानी है पर किसे पता यह सच है या कल्पना। आज मैं कहानी लिख रही हूं जिसमें ना तो राजा है ना रानी है, ना ...

सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या क्यूँ की.?
द्वारा Archana Yaduvanshi
  • 728

सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या क्यूँ की...?सुशांत सिंह राजपूत ने ख़ुदकुशी कर ली. मात्र चौंतिस साल की उम्र में एक सफल एक्टर, प्रसिद्ध व्यक्तित्व और शरीर से स्वस्थ इंसान ...

नहीं बनना हैडलाइन
द्वारा Shobhana Shyam
  • 591

एक ओर छल कपट, निष्कासन , एकाकी होने का दंश दूसरी ओर घर चलाने के लिए पाई-पाई का संघर्ष , सुगंधा तन मन से टूट चुकी थी| उस पर ...

स्वर्णिम भारत की और......
द्वारा Rishi Sachdeva
  • 543

कठिन समय है, मानवीय संवेदनाएँ काँच की तरह होती है, कब टूट जाये , पता ही नहीं लगता।मनोवैज्ञानिकों का कहना कि आज जो परिदृश्य है, उसमें आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक ...

दुःख या अवसाद
द्वारा Roopanjali singh parmar
  • 636

कुछ लोग इतने दुःखी होते हैं, कि जरा सी बातें ही इनकी आंखों को भर देती हैं। दुःख इस हद तक इनमें शामिल होता है कि ये सुख और ...

विचार !!
द्वारा Shubham Dudhat
  • 1.5k

अभी आप जो सोच रहे हो वही आपके विचार है या नही ?? जरा सोचिए।। क्या आप उसे रोक सकते हो?? हा, जरूर ।। पर उसके लिए आपको अपने ...

लॉक डाउन के पन्ने - प्रकृति कुछ कहती है :
द्वारा Rishi Sachdeva
  • 1.5k

"ज़िन्दगी न मिलेगी दुबारा" और निश्चित रूप से ये समय भी जीवन में दुबारा नहीं आएगा।अधिकांश लोगों का मानना है कि ये मानव निर्मित अभिशाप है, कुछ का कहना ...

कलियुग का मित्र - INTERNET - 1
द्वारा ADARSH PRATAP SINGH
  • 802

आइये हम जानते है कि इस कलियुग में बन रहे नए मित्र जैसे “INTERNET” दौर कलियुग का है जहाँ व्यक्ति ही असुर है और वही देवता है। भेदभाव करने ...

परिस्थिति - कुछ सवाल और एक सोच
द्वारा Priya Saini
  • 1.2k

हम  सदा परिस्थितियों पर ही निर्भर रहते हैं। परिस्थिति हमारे अनुकूल हो तो सब अच्छा लगता है और विपरीत हो तो वक़्त खराब लगता है। क्या परिस्थिति के खिलाफ़ ...

बचपन का डर
द्वारा ADARSH PRATAP SINGH
  • 1.1k

“अंधेरा ,डर दोनो का मेल अंधा स है प्रकाश के आते ही दोनों गायब से हो जाते है” {मेरी तरफ वो आदमी चलता ही आ रहा था। वो डरावना ...