सर्वश्रेष्ठ मानवीय विज्ञान कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

आलेख - नेचर मांगे मोर स्पेस
द्वारा S Sinha
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   इस आलेख में यह दिखाने का प्रयास किया गया कि दुनिया में बढ़ती जनसँख्या की मांग को पूरा करने के लिए हम किस तरह प्रकृति का दोहन कर ...

कंजी आंखें
द्वारा Shubhra Varshney
  • 213

कंजी आंखें "विभु तुमने स्कूल बैग लगा लिया? तुम्हें और तान्या को आज मैं ऑफिस जाते पर स्कूल छोड़ दूंगी।" टीवी कैबिनेट से पर्स उठाती गरिमा ने बेटे विभु ...

मुर्गी
द्वारा rajendra shrivastava
  • 588

लघु-कथा--   मुर्गी                                                     ...

रस्साकशी
द्वारा Alka Pramod
  • 660

                       सुबह के नौ बज गए थे ,पर रामी का कहीं अता पता न था ‘आज लगता है फिर ...

साहित्य और लोकप्रियता की कसौटी
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 399

साहित्य और लोकप्रियता की कसौटी          साहित्य के मूल्यांकन के अनेक मानदण्ड रहे हैं। सौष्ठववादी मूल्यांकन में कृति की आन्तरिक संरचना ही उसके विमर्श का आधार है। इसके ...

आभास - 2
द्वारा Priya Saini
  • 409

वक़्त बीतने लगा तो हमनें सोचा कि जब तक स्वेता नहीं आती हम अपने डायलॉग की रिहर्सल करते हैं। हम हँसी मजाक करते हुए अपने डायलॉग की रिहर्सल करने ...

आभास - 1
द्वारा Priya Saini
  • 613

न जाने कितनी बार मुझे ये आभास होता है कि यह घटना पहले भी घटित हो चुकी है। जबकि ये संभव ही नहीं है कि कोई भी घटना या ...

बिटिया के नाम पाती... - 5 - एक पाती अपने पसंदीदा रेडियो कार्यक्रम के नाम
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 551

मेरे प्रिय बिनाका गीतमालाढेर सारी प्यार भरी याद के साथ नमस्कार     आज बरसों बाद तुम्हारी याद आयी हो, ऐसा नहीं है। तुम्हारे जाने के बाद से मैंने तुम्हें ...

प्रणाम
द्वारा Ruchi Dixit
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 प्रणाम एक ऐसा शब्द है ,जो प्रेम और आस्था से  जुड़ा होने के कारण, आध्यात्म यह अपना विशेष महत्व रखता है| वैसे तो प्रणाम के कई अर्थ और गुण ...

बिटिया के नाम पाती... - 4 - एक पाती खुद के नाम
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 500

प्रिय वन्दूआज ज़िन्दगी के सफर में चलते चलते उस पड़ाव पर पहुँच चुकी हूँ, जहाँ से अतीत और भविष्य एक साथ नज़र आता है। ज़िन्दगी के गलियारे में झाँकते ...

परवरिश
द्वारा Atul Kumar Sharma ” Kumar ”
  • 793

आज न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया था। चारों तरफ खुशी का माहौल था। लोग न्याय व्यवस्था की तारीफ कर रहे थे। हो भी क्यों ना, आखिर पहली बार ...

बिटिया के नाम पाती... - 3
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 546

प्रिय पापा,स्नेह वंदनकहते हैं कि एक लड़की को खुद माँ बनने के बाद ही माँ की भावनाएं समझ में आती हैं और एक लड़का पिता बनने के बाद ही ...

बालश्रम
द्वारा Rajesh Kumar
  • 608

पूरे विश्व में बाल श्रम को रोकने के कड़े से कड़े कानून बनाये गए, बहुत से सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बाल श्रम के खिलाफ जनजागरण किया बहुत अच्छे परिणाम भी ...

द चोजन वन
द्वारा Dipti Methe
  • 604

                               द चोज़न वन...!               क़रीब सालभर बाद मैं अपने ...

प्रतिबिंब
द्वारा Dipti Methe
  • 547

                                          अर्थ 2.0             2099 ...

मानवता की जीवित लाश
द्वारा Apurva Raghuvansh
  • 535

हाय रे मानव! जातिक्या हो गया है तुझकोतू तो ऐसा नहीं था,फिर तुझको क्या हो गया है।आओ देखें मिलकर हम इस बार कब तक जीवित रहती है यह लाश,सुनने में ...

अरेंज मैरिज
द्वारा Kumar Gourav
  • 657

" बधाई हो आप बाप बनने वाले हैं । " सुनकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। उसने उत्साह से पूछा "कब? " डॉक्टर मुस्कुराई " बस चार महीने और इंतजार ...

और वो चला गया
द्वारा Pallavi Saxena
  • 1k

एक और सितारा खो गया। अभी उम्र ही क्या थी उसकी अभी जीवन चलना शुरू ही हुआ था। अभी इतनी जल्दी कैसे हार मान सकता था वो...?  इतना भी ...

घर वापसी
द्वारा Narendra
  • 426

                                             घर-वापसी माँ कितनी देर बाद हम खाना खाएंगे, ...

इतना डर अच्छा नहीं।
द्वारा Rahul shrivastava
  • 558

? नमस्कार मैं राहुल श्रीवास्तव‌। आज मैं आपको एक कहानी सुनाने जा रहा हूं और उस कहानी के जरिए हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि आज कोरोनावायरस का ...

भारतीय गोरैया पक्षी
द्वारा Sadanand Paul
  • 1.2k

 भारतीय गोरैया पक्षी (Indian Sparrow Birds) : डॉ. सदानंद पॉल हे फुतकी गोरैया ! गोरैया पक्षी (Sparrow Birds) की एक युगल जोड़ी सप्ताह में एक दिन कहीं से उड़ ...

हरामी
द्वारा Kumar Gourav
  • 904

हरामीसर्दी के मौसम में बस यात्रा में बदन सिकोड़े चुपचाप लघुशंका दबाए बैठा था । ड्राइवर ने ठेके पर दारू के लिए बस रोकी और मैं जल्दी से शंका ...

प्रवाह - छुआइन
द्वारा Yasho Vardhan Ojha
  • 661

                                 -:छुआइन:-"एगो रहे बुढ़िया, एगो ओकर बेटा अउर बेटा के मेहरारू। गांव के बहिरे ...

सोशल मीडिया प्रदूषण (सोशल साइटों से प्रभावित मानव जीवन)
द्वारा RAM NIVAS VERMA
  • 643

S.M. POLLUTION राइटर - राम निवास वर्मा विषय - सोशल मीडिया विचार, हिंदी आर्टिकल वातावरण में अचानक परिवर्तन होने से मनुष्य और जीव – जंतुओं का जीवन बहुत प्रभावित ...

लाश
द्वारा Devendra Prasad
  • 747

इस संसार में अगर को सत्य बात है तो वह है मृत्यु / एक न एक दिन सभी की मृत्यु आनी ही है चाहे कोई पशु हो पक्षी हो ...

अश्लीलता
द्वारा Rajesh Kumar
  • 2.2k

 सामाजिक तौर पर अश्लील शब्द नकारात्मकता का सूचक है  अश्लील शब्द उस व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है जिस का चरित्र काम वृत्ति प्रधान हो वह भी सामाजिक माहौल ...

हाँ... नपुंसक हूँ मैं
द्वारा राजीव तनेजा
  • 1.2k

“हाँ...नपुंसक हूँ मैं”बचाओ...बचाओ...की आवाज़ सुन अचानक मैं नींद से हड़बड़ा कर उठ बैठा। देखा तो आस-पास कहीं कोई नहीं था। माथे पर उभर आई पसीने की बूँदें चुहचुहा कर ...

मानो न मानो
द्वारा Shobhana Shyam
  • 985

हम पढ़े लिखे लोग हर चीज को विज्ञान और तर्क के तराजू  पर तोले बिना किसी बात पर  विश्वास नहीं करते | यही हाल सुगंधा का था , वह ...

मरना भी एक कला है
द्वारा Satish Sardana Kumar
  • 1.9k

 मरना भी एक कला है।भग्गू मरा तो पता चला।जैसे वह खामख्वाह जी रहा था वैसे ही एक दिन खामख्वाह मर गया।वरना मैंने इस तरह से आदमी मरते देखें हैं ...

क्यूं मुश्किल में जान फसाये है
द्वारा Ajay Kumar Awasthi
  • 833

     चमगादड़ एक ऐसा जीव है,जो रात के अंधेरे में उड़ता है,और जब सब जानवर सो रहे होते हैं, वो चुपके से उनके किसी नाजुक जगह को अपनी ...