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विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 5
द्वारा S Bhagyam Sharma

अध्याय 5 विवेक के पूरे चेहरे पर सदमे की रेखाएं फैल गई। "आप क्या बोल रहे हैं ? ए.बी.सी.डी. का मर्डर? कैसे सर?" दूसरी तरफ से सी.पी.जी. शर्मन बोल ...

फाँसी के बाद - 10
द्वारा Ibne Safi
  • 147

(10) सरला मोटर साइकल से उतर तो गई मगर फ़्लैट के दरवाजे की ओर नहीं बढ़ी । बस वहीँ खड़ी रही । शायद किसी अवसर की ताक में थी ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - अंतिम भाग
द्वारा Kumar Rahman
  • (11)
  • 375

 खुदकुशी “वक्त बर्बाद मत करो। इसे ठिकाने लगाओ और बाहर जाकर शूटिंग कंपलीट करो।” आने वाले ने तेज आवाज में कहा। “कैप्टन किशन!” उसकी आवाज सुनकर इंस्पेक्टर सोहराब ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 4
द्वारा S Bhagyam Sharma
  • 198

अध्याय 4 डॉ. अमरदीप ने पोरको को आश्चर्य से देखा ‌। "क्या आत्मा ?" अमरदीप के होंठो पर एक हंसी आई। "कौन सी आत्मा.... भाप…... वाली आत्मा...?" "मनुष्य की ...

फाँसी के बाद - 9
द्वारा Ibne Safi
  • 366

(9) “सुनिये कप्तान साहब !” – सीमा ज़रूरत से ज्यादा गंभीर होकर बोली – “वह ड्राइवर साहब मेरे मित्र हैं इसलिये मैं उनके विरुद्ध एक शब्द भी सुनना नहीं ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 3
द्वारा S Bhagyam Sharma
  • 453

अध्याय 3 रूपला बिल्कुल ऊंची चोटी पर चढ़कर खड़ी हुई तो नीचे उतर न पाने की वजह से तड़पने लगी। अपनी होंठों को बाहर निकाल कर बोली। "वि....वि... विष्णु...! ...

फाँसी के बाद - 8
द्वारा Ibne Safi
  • 588

(8) नीचे पहुंचा तो प्रकाश की मोटर स्टार्ट हो चुकी थी और सीमा अपनी कार में बैठने जा रही थी । फिर जैसे ही दरवाजा खोलकर ड्राइविंग सीट पर ...

द ईमेल भारत खतरे में - (भाग 3)
द्वारा मदन सिंह शेखावत
  • 348

बार बार ये गाना सभी इंटेलिजेंस संस्थाओ से सुना जा रहा था। कभी कभी तो ऐसा लग रहा था कि ये गाना हमारे लिए कोई वाइरस बन गया था ...

फाँसी के बाद - 7
द्वारा Ibne Safi
  • 564

(7) रात आर्लेक्चनू वाले तुम्हें उस समय कोठी में पहुँचा गये जब कि मैं मौजूद नहीं था । आने पर तुम्हें देखा मगर मेरे पास इतना समय नहीं था ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 2
द्वारा S Bhagyam Sharma
  • 417

अध्याय 2 चेन्नई। स्वर्णम मेडिकल सेंटर। न्यूरो वार्ड। डॉ. अमरदीप अपने सामने बैठे हुए उस 30 साल के युवा से बात कर रहे थे। "आपका नाम बताइए !" "पोरको" ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 33
द्वारा Kumar Rahman
  • (18)
  • 1.2k

डीएनए रिपोर्ट सार्जेंट सलीम शेक्सपियर कैफे से सीधे गुलमोहर विला पहुंचा था। उसने इंस्पेक्टर मनीष को वहीं बुलाया था। सार्जेंट सलीम के पहुंचने के कुछ देर बाद ही मनीष ...

फाँसी के बाद - 6
द्वारा Ibne Safi
  • 714

(6) “उसका वकील जिसने उसके मुक़दमे की पैरवी की थी और दो आदमी जिन्होंने अपने को रनधा का संबंधी बताया था ।” “वह दोनो...” “सीधे सादे देहाती थे ।” ...

विवेक तुमने बहुत सहन किया बस! - 1
द्वारा S Bhagyam Sharma
  • 828

मूल लेखक राजेश कुमार इस उपन्यास के मूल तमिल लेखक राजेश कुमार है। आपने 50 वर्षों में डेढ़ हजार उपन्यास लिखे और 2000 कहानियां लिखी। आपकी उपन्यास और कहानियों ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 32
द्वारा Kumar Rahman
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  • 1.4k

रक्सीना और शेक्सपियर सलीम ने टैक्सी ड्राइवर को शेक्सपियर कैफे पर रुकने के लिए कहा। टैक्सी रुकते ही उसका पीछा करने वाली कार तेजी से आगे निकल गई। सलीम ...

फाँसी के बाद - 5
द्वारा Ibne Safi
  • 714

(5) आर्लेक्चनू में प्रतिदिन कोई न कोई स्पेशल प्रोग्राम रहता था । आर्लेक्चनू के व्यवस्थापक इस बात को अच्छी तरह समझ चुके थे कि एक ही प्रकार के प्रोग्राम ...

फाँसी के बाद - 4
द्वारा Ibne Safi
  • 774

(4) हमीद सीमा की कोठी के पिछले भाग की ओर आया था । इस्तना उसे मालूम था कि रनधा अपने आदमियों के साथ जिस इमारत में दाखिल होता है, ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 31
द्वारा Kumar Rahman
  • (13)
  • 1.2k

पेंटिंग सार्जेंट सलीम को खुफिया विभाग के हेडक्वार्टर छोड़ने के बाद इंस्पेक्टर मनीष सीधे कोतवाली पहुंचा था। वहां कुछ देर बैठने के बाद वह दो सिपाहियों के साथ विक्रम ...

फाँसी के बाद - 3
द्वारा Ibne Safi
  • 930

(3) आज रमेश को न्यू स्टार के आफिस में काफ़ी देर हो गई थी । हाल ही में जो सनसनीपूर्ण घटनाएं नगर में हुई थीं उनका विचार करते हुए ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 30
द्वारा Kumar Rahman
  • (17)
  • 1.4k

डायरी बख्तावर खान की हवेली शहर के पास के एक कस्बे संदलगढ़ में थी। संदलगढ़ का पुराना नाम चंदनगढ़ था। अंग्रेजों ने जिस तरह से तमाम जगहों के नाम ...

द ईमेल भारत खतरे में - (भाग 2)
द्वारा मदन सिंह शेखावत
  • 663

"हवा में उड़ता जाए मेरा लाल दुप्पटा मल मल का"जब तक मे रात को 9 बजे घर पहुंचा बच्चे सो चुके थे। देव मेरा 5 साल का लड़का जो ...

फाँसी के बाद - 2
द्वारा Ibne Safi
  • 900

(2) यह नगर का वह भाग था जहां आधी रात व्यतीत होने के बाद भी चहल पहल रहती थी । इसका कारण यह था कि शरीफ़ों की इस बस्ती ...

फाँसी के बाद - 1
द्वारा Ibne Safi
  • 2k

लेखक : इब्ने सफ़ी अनुवादक : प्रेम प्रकाश   उर्दू भाषा के सर्वश्रेष्ठ जासूसी उपन्यासकार इब्ने सफ़ी इब्ने सफ़ी उपन्यास माला का संपादन करने वाले जाने माने कथाकार नीलाभ ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 29
द्वारा Kumar Rahman
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बाल की खाल इंस्पेक्टर कुमार सोहराब और सार्जेंट सलीम लॉन में आकर बैठ गए। सोहराब के चेहरे पर गहरी चिंता थी। उसने सिगार का एक गहरा कश लेते हुए ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 28
द्वारा Kumar Rahman
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जुर्म और मुजरिम मिनी की छत ढकी हुई थी। कार कुछ आगे जाने के बाद दाहिने तरफ मुड़ गई। कुछ दूर जाने पर सोहराब ने कार का बैक मिरर ...

द ईमेल भारत खतरे में - (भाग 1)
द्वारा मदन सिंह शेखावत
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मैं ईमेल पढ़ पाता हमारी प्रियतमा की सुबह के अभिवादन को सुनना जरूरी था। "गुड मॉर्निंग डार्लिंग" ओर सुरभि की भी शुरुआत बस रोज ऐसे ही होती थी। कुछ ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 27
द्वारा Kumar Rahman
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बॉडी डबल हाशना को जैसे सुबह होने का ही इंतजार था। वह सुबह छह बजे ही सोहराब की कोठी पर पहुंच गई। सोहराब लॉन में बैठा अखबार पढ़ रहा ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 26
द्वारा Kumar Rahman
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झूठ इंस्पेक्टर सोहराब को छोड़कर जब कैप्टन किशन वापस पहुंचा तो वहां शैलेष जी अलंकार खड़ा हुआ पलकें झपका रहा था। वह ऑफिस के दूसरे रास्ते से अंदर आया ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 25
द्वारा Kumar Rahman
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फिल्म हीरों का व्यापारी बना इंस्पेक्टर सोहराब इस वक्त कैप्टन किशन के सामने बैठा हुआ था। यह जगह कैप्टन किशन का ऑफिस थी। किसी के दफ्तर को देखकर उसके ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 24
द्वारा Kumar Rahman
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फकीर ट्रेन स्टेशन पर कुछ देर में पहुंचने वाली थी। इंस्पेक्टर सोहराब ने सार्जेंट सलीम को जगा दिया और उसकी जेब में दो हजार रुपये रखते हुए कहा, “तुम ...

शोलागढ़ @ 34 किलोमीटर - 23
द्वारा Kumar Rahman
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स्टूडियो उसी रात। काले रंग की दो बड़ी कारें डे स्ट्रीट रोड पर सन्नाटे को चीरती हुई तेजी से आगे बढ़ रहीं थीं। टायरों की चरचराहट रात के सन्नाटे ...