सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • मैं पेड़ बनना चाहती हूँ

    शहर की सबसे ऊँची इमारत की 12वीं मंज़िल पर मेरा कमरा था। खिड़की से सिर्फ़ कंक्रीट...

  • Jab Papa Mere Best Friend Ban Gaye

    "अगर आपको पता चले आप जिन्हें  महत्व दे रहे हैं उनके लिए आपका कोई महत्व ही नह...

  • मांई के मांई

    मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनका महत्व शब्दों में पूरी तरह व्यक...

सूर्यकुल का सूर्यास्त - 12 By ALLA NOOR KHAN

अध्याय 12 ​काल मुख घाटी का संकटदरअसल, विराज की शिकार यात्रा पंद्रह दिन नहीं, बल्कि चौदह दिन में ही समाप्त हो गई थी। उसने जंगल में जितने दिन रहने की योजना बनाई थी, उससे एक दिन पहले...

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खोटा सिक्का - 3 By prem chand hembram

खोटा सिक्का – भाग 03संध्या का समय था। गौशाला में गायों को चारा दिया जा चुका था। पश्चिम दिशा में डूबते सूर्य की लालिमा पूरे आकाश में फैल गई थी। शिबू गौशाला के बाहर एक पुराने नीम के...

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एक दीपक जो कभी बुझा नहीं By Skp devine

---### अध्याय 1 : छोटा सा सपनाओडिशा के एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत वाले घर में उसका परिवार बड़ी मुश्किल से अपना जीवन गुजारता थ...

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समय के पंख और पिता की सीख By Anant Dhish Aman

बचपन की स्मृतियाँ अक्सर जीवन के किसी मोड़ पर अचानक लौट आती हैं और फिर मन को उन गलियों में ले जाती हैं जहाँ से हमारे व्यक्तित्व की यात्रा शुरू हुई थी।आज जब मैं अपने जीवन के अनेक उता...

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मैं पेड़ बनना चाहती हूँ By prachi Gurjar

शहर की सबसे ऊँची इमारत की 12वीं मंज़िल पर मेरा कमरा था। खिड़की से सिर्फ़ कंक्रीट, शोर और भागती हुई गाड़ियाँ दिखती थीं।  नाम है मीरा। उम्र 26। नौकरी, डेडलाइन, बॉस की डाँट  सब था। बस...

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यादगार रायबरेली यात्रा By Sudhir Srivastava

संस्मरण यादगार रायबरेली यात्रा (पुस्तक विमोचन, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह)      रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच का प्रथम भव्य राष्ट्रीय आयोजन दिनांक 5 मई को 'कलश उत्सव लान&#39...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 2 By miss k

दोस्तों आज मैं आपके लिए कुछ सवाल लेकर उपस्थित हुआ हूं। मुझे यकीन है कि आपके पास उनके जवाब होंगे। अच्छा तो मुझे ये बताइए कि क्या आपने कभी किसी से अपने प्यार का इजहार किया है ? पहले...

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Jab Papa Mere Best Friend Ban Gaye By miss k

"अगर आपको पता चले आप जिन्हें  महत्व दे रहे हैं उनके लिए आपका कोई महत्व ही नहीं है।"हर इंसान को जीवन  में एक दोस्त चाहिए। दोस्त जो हमारे साथ हमेशा खड़ा हो, हमसे दूर होकर भी...

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पवित्र बहु - 15 By archana

एपिसोड – “सच के आँसू”मंदिर के कोने में बैठी चित्रअब भी रो रही थी…उसकी सिसकियाँभोलेनाथ के सामने टूट रही थीं—“मैं गलत नहीं हूँ…”तभी…धीरे-धीरे कदमों की आहट आई।चित्र ने आँसू पोंछे भी न...

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वट वृक्ष रूपी प्राचार्य- प्रो डॉ बिमल कुमार मिश्र By Raunak

आदर्श महा० राजधनवार के प्राचार्य प्रो० डॉ. विमल मिश्र के व्यक्तित्व पर एक विद्यार्थी की आत्मीय अभिव्यक्तिकबीर दास जी की एक पंक्ति से मैं अपनी बात आरंभ करना चाहता हूँ -“सतगुरु शब्द...

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वोह मुलाकात By Vijay Erry

वोह मुलाकातभावपूर्ण हिंदी कहानीलेखक: विजय शर्मा ऐरीबरसात की हल्की-हल्की बूंदें आसमान से गिर रही थीं। शाम का समय था। शहर के पुराने रेलवे स्टेशन पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी। कोई अपने...

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साज़िश की गूँज By Irfan ayan Khan

गाँव की वह दोपहर और झुलसा देने वाली गर्म हवाएँ गवाह थीं कि आज एक रिश्ता दम तोड़ चुका था। धूल उड़ती उन गलियों में जब अयान के कदम घर से बाहर निकले, तो उसके पीछे सिर्फ उसकी परछाईं नहीं,...

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बुझता दीपक By prem chand hembram

बुझता दीपक (एक मार्मिक कथा)कोयले की धूल और लाल मिट्टी से घिरे छोटे-से गाँव में झींगुर और जगा की दोस्ती मिसाल मानी जाती थी।लोग कहते—“एक लँगड़ा है, दूसरा आलसी…फिर भी दोनों की जोड़ी र...

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मुक्त - भाग 13 By Neeraj Sharma

एक लकीर...... उपन्यास लिखने की कोशिश, इसमें है हम लोग कैसे कैसे काम कर के भी यही कहते है, हाँ परमात्मा, खुदा, अल्लाह को यही मंजूर था.....इसका धारावाहिक नहीं है ये लगातार चलती एक जो...

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जिंदगी एक परीक्षा है By Vijay Erry

---जिंदगी एक परीक्षा है लेखक: विजय शर्मा एरी  ---पहला अध्याय: कस्बे की गलियाँ और बचपनअमित का बचपन पंजाब के एक छोटे कस्बे में बीता। गलियाँ संकरी थीं, लेकिन उनमें जीवन की चहल-पहल थी।...

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मांई के मांई By Anant Dhish Aman

मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनका महत्व शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। वे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध नहीं होते, बल्कि जीवन की भावनात्मक जड़ों से जुड...

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कागज़ के सामने हारता इंसान - बोधार्थी रौनक़ । By Raunak

कागज़ के सामने हारता इंसान गाँव की पगडंडी पर धूल वैसे ही उड़ती है जैसे वर्षों से उड़ती आई है। फर्क इतना भर आया है कि अब आदमी के हाथ में हल कम और कागज़ ज़्यादा दिखते हैं। कागज़-जिन प...

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डबल स्टैंडर्ड By Shree Kriti

शाम का गहरा मगर सुहाना वक्त था। सत्तर वर्ष की मीरा देवी ड्राइंग रूम के आरामदेह सोफे पर बैठीं अपनी ब्याहता बेटी, चित्रा, से फोन पर बात कर रही थीं। किचन से मसालों की बड़ी ही अच्छी खु...

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कलम की स्याही और समाज का सच By Vijay Erry

इसलिए मैं अब आपको एक पूर्ण, विस्तृत, साहित्यिक शैली की हिंदी कहानी दूँगा, जो 500 शब्दों में होगी। इसमें गहराई, पात्रों का विकास, संवाद, घटनाओं का विस्तार और समाज की परतों का चित्रण...

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हंटर - 2 By Ram Make

छाया झील के पश्चिमी तट पर बने अग्रज हवेली के प्रशिक्षण मैदान में, निधी अपने तीरंदाजी कौशल कि प्रैक्टिस कर रही थी, जबकि वरुण एक कोने में अपनी सेबर आर्ट की प्रैक्टिस कर रहा था ।उसका...

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जीवन के मौसम By PRINCE PREMKUMAR

मैं आशा करती हूँ कि आपका जीवन शांति और आनंद से भरा हो, ऐसा आनंद जो आपको जीवन के हर मोड़ पर स्थिरता का एहसास दिलाए।मैं आशा करती हूँ कि आप हर सुबह उठें और याद रखें कि दुनिया में अभी...

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डिजिटल सन्नाटा: एक अनकही कहानी !! By Anjali kumari Sharma

शहर की ऊंची इमारतों के बीच, एक छोटे से कमरे में बैठी मैं अक्सर सोचती हूँ कि हम कितना आगे निकल आए हैं। मेरे सामने रखा लैपटॉप और बगल में रखा फोन—ये दोनों मेरी दुनिया के सबसे बड़े दरव...

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जीवंत देवता By prem chand hembram

जीवंत देवता अदालत खचाखच भरी थी…पर एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ था—जैसे दीवारें भी आज कुछ अलग सुनने को तैयार हों।कटघरे में पंडित रामदीन खड़े थे…सूरज की तपिश से झुलसा चेहरा…पर आँखों म...

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अंधविश्वास - अंधेरा नहीं, सोच बदलो - 1 By Kaushik dave

Chapter 1: डर की शुरुआतरतनपुर…एक छोटा सा गाँव… गुजरात के किनारे बसा हुआ।दिन में ये गाँव बिल्कुल साधारण लगता था —मिट्टी के घर, कच्ची सड़कें, खेतों में काम करते लोग,और बच्चों की हँसी...

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कैद बा-मशक्कत By कमल चोपड़ा

​कैद बा-मशक्कतकमल चोपड़ा​प्रहार से बचने के लिए पीछे हटी थी, मुक्का उसे न लगकर दीवार में जा लगा था। दर्द से बिलबिलाता और गुस्से में फनफनाता हुआ पति लगभग पागल-सा हो आया था। पत्नी का...

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पुरस्कार By कमल चोपड़ा

पुरस्कारकमल चोपड़ा​सदानंद एक सीधा-सादा आदमी था। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों का पेट पालता। रोजाना की तरह आज भी वह काम पर जा रहा था कि किसी ने पीछे से आवाज देकर उसे रोका,...

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झूठ-सच By कमल चोपड़ा

झूठ-सच कमल चोपड़ा​   राजकुमार श्वेतांक की उम्र पंद्रह वर्ष थी। एक दिन घूमते-घूमते वह वन की ओर निकल गया। अचानक उस पर एक शेर ने हमला कर दिया। राजकुमार के हाथों से हथियार छूट गए। वह ल...

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खोया हुआ विश्वास By कमल चोपड़ा

खोया हुआ विश्वास​  कमल चोपड़ाबंटी को खाली हाथ घर लौटा देखकर माँ ने हैरानी से पूछा— "नमक की थैली कहाँ है? मैंने तुझे दस रुपए देकर नमक की थैली लेने भेजा था ना?"​जवाब में बंटी ने सुबक...

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स्वाभिमान By कमल चोपड़ा

स्वाभिमान​  कमल चोपड़ास्कूल से आते ही विशू ने मां से कहा—'मां! मुझे आज ही नए कपड़े लेकर दो।'​'क्यों?' माँ ने पूछा।​'कल मेरे सबसे अच्छे दोस्त निखिल का जन्मदिन है...

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तक़लीफ़ By राज बोहरे

 तक़लीफ़ दोपहर की धूप अपनी पूरी तल्खी के साथ शहर की पुरानी सिविल लाइन की मंत्री निवास की बिल्डिंग पर झुकी हुई थी। बाहर खड़े नीम के पेड़ की छाया भी जैसे सिमटकर खुद में सिमट गई थी। भी...

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मानवता की जीत By prem chand hembram

मानवता की जीत (अंतिम संस्करण)धनबाद जिले की छाती पर बसा रहिमनगर…एक छोटा सा कस्बा—जहाँ जिंदगी सरल थी, पर समाज दीवारों में बँटा हुआ।कुएँ अलग थे…रास्ते अलग थे…और दिल—अपने-अपने डर और दा...

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एक छोटी सी भूल By prem chand hembram

एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील रामगोपाल वर्मा के हृदय को चीर गए।उन्होंने जीवन में अनेक कठिनाइयाँ देखी थीं,परंतु क...

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हर कदम परीक्षा By कमल चोपड़ा

हर कदम परीक्षा​ कमल चोपड़ाकाम की तलाश में इधर-उधर धक्के खाने के बाद निराश होकर मधुकांत घर लौटने लगा तो पीछे से आवाज आई, 'ऐ भाई, यहाँ कोई मजदूर मिलेगा क्या?'​मधुकांत ने मुड़...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त - 12 By ALLA NOOR KHAN

अध्याय 12 ​काल मुख घाटी का संकटदरअसल, विराज की शिकार यात्रा पंद्रह दिन नहीं, बल्कि चौदह दिन में ही समाप्त हो गई थी। उसने जंगल में जितने दिन रहने की योजना बनाई थी, उससे एक दिन पहले...

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खोटा सिक्का - 3 By prem chand hembram

खोटा सिक्का – भाग 03संध्या का समय था। गौशाला में गायों को चारा दिया जा चुका था। पश्चिम दिशा में डूबते सूर्य की लालिमा पूरे आकाश में फैल गई थी। शिबू गौशाला के बाहर एक पुराने नीम के...

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एक दीपक जो कभी बुझा नहीं By Skp devine

---### अध्याय 1 : छोटा सा सपनाओडिशा के एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत वाले घर में उसका परिवार बड़ी मुश्किल से अपना जीवन गुजारता थ...

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समय के पंख और पिता की सीख By Anant Dhish Aman

बचपन की स्मृतियाँ अक्सर जीवन के किसी मोड़ पर अचानक लौट आती हैं और फिर मन को उन गलियों में ले जाती हैं जहाँ से हमारे व्यक्तित्व की यात्रा शुरू हुई थी।आज जब मैं अपने जीवन के अनेक उता...

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मैं पेड़ बनना चाहती हूँ By prachi Gurjar

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यादगार रायबरेली यात्रा By Sudhir Srivastava

संस्मरण यादगार रायबरेली यात्रा (पुस्तक विमोचन, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह)      रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच का प्रथम भव्य राष्ट्रीय आयोजन दिनांक 5 मई को 'कलश उत्सव लान&#39...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 2 By miss k

दोस्तों आज मैं आपके लिए कुछ सवाल लेकर उपस्थित हुआ हूं। मुझे यकीन है कि आपके पास उनके जवाब होंगे। अच्छा तो मुझे ये बताइए कि क्या आपने कभी किसी से अपने प्यार का इजहार किया है ? पहले...

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Jab Papa Mere Best Friend Ban Gaye By miss k

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पवित्र बहु - 15 By archana

एपिसोड – “सच के आँसू”मंदिर के कोने में बैठी चित्रअब भी रो रही थी…उसकी सिसकियाँभोलेनाथ के सामने टूट रही थीं—“मैं गलत नहीं हूँ…”तभी…धीरे-धीरे कदमों की आहट आई।चित्र ने आँसू पोंछे भी न...

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आदर्श महा० राजधनवार के प्राचार्य प्रो० डॉ. विमल मिश्र के व्यक्तित्व पर एक विद्यार्थी की आत्मीय अभिव्यक्तिकबीर दास जी की एक पंक्ति से मैं अपनी बात आरंभ करना चाहता हूँ -“सतगुरु शब्द...

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वोह मुलाकातभावपूर्ण हिंदी कहानीलेखक: विजय शर्मा ऐरीबरसात की हल्की-हल्की बूंदें आसमान से गिर रही थीं। शाम का समय था। शहर के पुराने रेलवे स्टेशन पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी। कोई अपने...

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साज़िश की गूँज By Irfan ayan Khan

गाँव की वह दोपहर और झुलसा देने वाली गर्म हवाएँ गवाह थीं कि आज एक रिश्ता दम तोड़ चुका था। धूल उड़ती उन गलियों में जब अयान के कदम घर से बाहर निकले, तो उसके पीछे सिर्फ उसकी परछाईं नहीं,...

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बुझता दीपक By prem chand hembram

बुझता दीपक (एक मार्मिक कथा)कोयले की धूल और लाल मिट्टी से घिरे छोटे-से गाँव में झींगुर और जगा की दोस्ती मिसाल मानी जाती थी।लोग कहते—“एक लँगड़ा है, दूसरा आलसी…फिर भी दोनों की जोड़ी र...

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मुक्त - भाग 13 By Neeraj Sharma

एक लकीर...... उपन्यास लिखने की कोशिश, इसमें है हम लोग कैसे कैसे काम कर के भी यही कहते है, हाँ परमात्मा, खुदा, अल्लाह को यही मंजूर था.....इसका धारावाहिक नहीं है ये लगातार चलती एक जो...

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जिंदगी एक परीक्षा है By Vijay Erry

---जिंदगी एक परीक्षा है लेखक: विजय शर्मा एरी  ---पहला अध्याय: कस्बे की गलियाँ और बचपनअमित का बचपन पंजाब के एक छोटे कस्बे में बीता। गलियाँ संकरी थीं, लेकिन उनमें जीवन की चहल-पहल थी।...

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मांई के मांई By Anant Dhish Aman

मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिनका महत्व शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं किया जा सकता। वे रिश्ते केवल पारिवारिक संबंध नहीं होते, बल्कि जीवन की भावनात्मक जड़ों से जुड...

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कागज़ के सामने हारता इंसान गाँव की पगडंडी पर धूल वैसे ही उड़ती है जैसे वर्षों से उड़ती आई है। फर्क इतना भर आया है कि अब आदमी के हाथ में हल कम और कागज़ ज़्यादा दिखते हैं। कागज़-जिन प...

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डबल स्टैंडर्ड By Shree Kriti

शाम का गहरा मगर सुहाना वक्त था। सत्तर वर्ष की मीरा देवी ड्राइंग रूम के आरामदेह सोफे पर बैठीं अपनी ब्याहता बेटी, चित्रा, से फोन पर बात कर रही थीं। किचन से मसालों की बड़ी ही अच्छी खु...

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कलम की स्याही और समाज का सच By Vijay Erry

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जीवन के मौसम By PRINCE PREMKUMAR

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जीवंत देवता By prem chand hembram

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Chapter 1: डर की शुरुआतरतनपुर…एक छोटा सा गाँव… गुजरात के किनारे बसा हुआ।दिन में ये गाँव बिल्कुल साधारण लगता था —मिट्टी के घर, कच्ची सड़कें, खेतों में काम करते लोग,और बच्चों की हँसी...

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कैद बा-मशक्कत By कमल चोपड़ा

​कैद बा-मशक्कतकमल चोपड़ा​प्रहार से बचने के लिए पीछे हटी थी, मुक्का उसे न लगकर दीवार में जा लगा था। दर्द से बिलबिलाता और गुस्से में फनफनाता हुआ पति लगभग पागल-सा हो आया था। पत्नी का...

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पुरस्कार By कमल चोपड़ा

पुरस्कारकमल चोपड़ा​सदानंद एक सीधा-सादा आदमी था। वह मेहनत-मजदूरी कर अपना और अपने बच्चों का पेट पालता। रोजाना की तरह आज भी वह काम पर जा रहा था कि किसी ने पीछे से आवाज देकर उसे रोका,...

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झूठ-सच By कमल चोपड़ा

झूठ-सच कमल चोपड़ा​   राजकुमार श्वेतांक की उम्र पंद्रह वर्ष थी। एक दिन घूमते-घूमते वह वन की ओर निकल गया। अचानक उस पर एक शेर ने हमला कर दिया। राजकुमार के हाथों से हथियार छूट गए। वह ल...

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स्वाभिमान By कमल चोपड़ा

स्वाभिमान​  कमल चोपड़ास्कूल से आते ही विशू ने मां से कहा—'मां! मुझे आज ही नए कपड़े लेकर दो।'​'क्यों?' माँ ने पूछा।​'कल मेरे सबसे अच्छे दोस्त निखिल का जन्मदिन है...

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मानवता की जीत (अंतिम संस्करण)धनबाद जिले की छाती पर बसा रहिमनगर…एक छोटा सा कस्बा—जहाँ जिंदगी सरल थी, पर समाज दीवारों में बँटा हुआ।कुएँ अलग थे…रास्ते अलग थे…और दिल—अपने-अपने डर और दा...

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एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील रामगोपाल वर्मा के हृदय को चीर गए।उन्होंने जीवन में अनेक कठिनाइयाँ देखी थीं,परंतु क...

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हर कदम परीक्षा By कमल चोपड़ा

हर कदम परीक्षा​ कमल चोपड़ाकाम की तलाश में इधर-उधर धक्के खाने के बाद निराश होकर मधुकांत घर लौटने लगा तो पीछे से आवाज आई, 'ऐ भाई, यहाँ कोई मजदूर मिलेगा क्या?'​मधुकांत ने मुड़...

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