आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथा - भाग 1 By Banwari Lal

श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथाभाग 1 — कंस की भविष्यवाणी और श्रीकृष्ण के जन्म की शुरुआतजय श्रीकृष्ण मथुरा नगरी में उस समय चारों ओर खुशियाँ थीं। राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह यदु...

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ज्ञान का बोझ और शून्य By Vedanta Life Agyat Agyani

वही शून्य है।   ज्ञान का बोझ और शून्यमनुष्य बड़ा विचित्र प्राणी है।वह जीवन को जीने से ज्यादा,जीवन को समझने की कोशिश करता रहता है।   इसी आधार पर धार्मिक मोटिवेशन टिप्स सफलता के सूत्...

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कालू की पहाड़ी - 18 By RAAHULL SHARMA

त्रिशूल और गंगाजल के स्पर्श ने कालूत्रिशूल और गंगाजल के स्पर्श ने कालू के भीतर के राक्षस को मार दिया था। अब ज़मीन पर तड़प रहा वह जीव 'कालू' नहीं, बल्कि वही मासूम कल्याण सिं...

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मनोयज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(16) की व्याख्या '"मनोयज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद --11/84हे ईश्वर! हमारे मन को शुद्ध करें।हाँ, यह भावार्थ सुंदर है, पर एक छोटी सावधानी आवश्यक है।मूल मंत्रांश:मनो यज...

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Janmastami : Science By Ashish

बिल्कुल। जन्माष्टमी को केवल धार्मिक उत्सव मानने के बजाय अगर हम परंपरा + मनोविज्ञान + सामाजिक विज्ञान + स्वास्थ्य + प्रकृति के दृष्टिकोण से देखें, तो इसके पीछे कई रोचक बातें दिखाई द...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 39 By Shiv putri

प्रिया सार्थक की बात सुन के ...—देखिए हमे सीधी तरीके से बता दीजिए आप श्री से आज भी प्रेम करते है या नहीं मुझे बार बार पूछना अच्छा नहीं लग रहासार्थक— मुझे तुम्हे कोई बात नहीं बतानी...

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विरोध नहीं, जागरण By Vedanta Life Agyat Agyani

 विरोध नहीं, जागरणकेवल बात करने से यदि सब कुछ संभव होता, तो यह संसार कब का स्वर्ग बन गया होता। समाज में सदियों से प्रवचन हैं, नियम हैं, कानून हैं, संस्थाएँ हैं, आंदोलन हैं, विरोध ह...

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वाग्यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(15) की व्याख्याति"वाग्यज्ञेन कल्पताम्"अयजुर्वेद --11/84भावार्थ --हे ईश्वर! हमारी वाणी शुद्ध हो। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहित-- यहाँ एक महत्वपूर्ण बात पहले स्पष्ट कर दू...

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कृष्ण और सुदामा की मित्रता By palak baisla

बहुत समय पहले की बात है। उज्जैन में गुरु सांदीपनि का आश्रम था। वहाँ दो बालक शिक्षा ग्रहण करते थे। एक था नंद का लाला कृष्ण और दूसरा था एक गरीब ब्राह्मण का पुत्र सुदामा। दोनों में गह...

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धर्म का स्वप्न और सत्य का जागरण By Vedanta Life Agyat Agyani

  धर्म का स्वप्न और सत्य का जागरणवेदांत 2.0 के परिप्रेक्ष्य में मन, अहंकार और विश्वास का अध्ययन अज्ञात अज्ञानीIndependent Researcher & PhilosopherVedanta 2.0 ©(इंटरनेशनल विज्ञान और...

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संकट मोचन हनुमान जी का चमत्कार By palak baisla

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव रामपुर में मोहन नाम का एक गरीब लड़का रहता था। मोहन बचपन से ही हनुमान जी का बहुत बड़ा भक्त था। उसके घर में कुछ नहीं था, लेकिन उसके दिल में हनुमान जी...

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मूल ग्रंथ पहले, कथावाचन बाद में By Shivam Kumar Pandey

धार्मिक जीवन में कथा सुनने की परंपरा बहुत पुरानी है। किसी धार्मिक ग्रंथ की कथा सुनना केवल शब्दों को सुनना नहीं होता, बल्कि उसमें भाव, भक्ति, श्रद्धा, श्रवण और धार्मिक वातावरण भी जु...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 29 By Nitya Oswal

भारत के महाराष्ट्र के चौदहवीं शताब्दी के परम सिद्ध, विद्रोही और वारकरी संप्रदाय के महान संत चोखामेला जी की एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रसिद्ध अमृत वाणी (अभंग) यहाँ दी गई है। यह वाणी...

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राधा रानी की कृपा By palak baisla

बरसाना में यमुना किनारे सावित्री नाम की एक बूढ़ी मैया रहती थी। उसका इस संसार में कोई नहीं था। पति बहुत साल पहले गुजर गए थे, बच्चे नहीं थे। उसका बस एक ही सहारा था, एक ही परिवार था -...

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जब राधा रानी ने किया चमत्कार By palak baisla

वृंदावन में यमुना किनारे मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। मीरा को बचपन से ही राधा रानी से बहुत प्रेम था। वह हर दिन सुबह उठकर यमुना में स्नान करती और फिर राधा-कृष्ण के मंदिर में फूलों...

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नुआखाई (पर्व नहीं एक एहसास) By Anamika

स्मृतियों की थाली में नुआखाई का नवान्न :​भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष पंचमी (गणेश चतुर्थी के अगले दिन) जब भी करीब आती है, हवा में एक सोंधी सी खुशबू घुलने लगती है। पश्चिमी ओडिशा का यह...

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जब भोले बाबा ने दिया वरदान By palak baisla

प्राचीन समय की बात है। हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था जिसका नाम शिवपुर था। उस गाँव में आरती नाम की एक गरीब लड़की अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहती थी। आरती के पिता का देहांत बचप...

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प्रतीकोपासना - भाग 4 By kalpesh

प्रतीकोपासना :- संपूर्ण साधना का क्रमभाग ४ : स्वप्रतीक से चिदाकाश तकअब तक हमने प्रतीकोपासना के तीन प्रमुख चरणों को समझा है। पहले चरण में साधक अपने ही प्रतिबिंब को स्वप्रतीक बनाकर उ...

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समकालीन अद्वैत का सच: संस्था नहीं, साक्षी। By Vedanta Life Agyat Agyani

 समकालीन अद्वैत वेदान्त का दार्शनिक विश्लेषण: संस्थागत ढाँचे, तार्किक व्याख्याएँ और 'वेदान्त 2.0' का शून्य-बिंदु चेतना सिद्धांतअद्वैत वेदान्त की शास्त्रीय उपनिषदीय परंपरा म...

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फल से कारण तक - रूप के पार निराकार सत्य By Vedanta Life Agyat Agyani

        अध्याय : फल से कारण तक — रूप के पार निराकार सत्यबीज-वाक्य  “फल को मत पकड़ो, कारण तक जाओ।रूप को देखो, पर रूप को अंतिम सत्य मत मानो।”               1. धर्म की पहली भूल — फल क...

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Zinagi 2.0 By Swarnima Varshney

काश कुछ ऐसा हो जाए… जो दिल को चाहिए, वही मिल जाए। कितनी खुशी होगी ना, कुछ पलों के लिए… पर ये दिल कहाँ ठहरता है एक पल के लिए। ऐसा लगता है कि जो है उसमें कुछ अधूरा है। जो मिल जाए, तो...

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जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है कर्म से दृष्टा तक By Vedanta Life Agyat Agyani

जो हो रहा है, अच्छा हो रहा हैकर्म से दृष्टा तक लेखक : Agyat Agyani प्रस्तावना — पहला सारयह पुस्तक किसी मत को स्थापित करने के लिए नहीं है। यह घटना को घटना की तरह देखना सिखाने के लिए...

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एकनिष्ठ भक्ति By Shivam Kumar Pandey

 ।। धर्म कभी भी वंशानुगत नहीं होता ।। आस्था में स्पष्टता, आराध्य के प्रति निष्ठा और धार्मिक पहचान का प्रश्नएक मौलिक वैचारिक पुस्तकलेखक: Shivam Kumar Pandey इस पुस्तक का उद्देश्य अप...

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सत्य की पहली धड़कन By Vedanta Life Agyat Agyani

  1. पुस्तक विवरण - Description   Vedanta 2.0 : सत्य की पहली धड़कन   सत्य कहाँ है - बाहर दिखाई देने वाले जगत में, या उस चेतना में जिसके कारण यह जगत दिखाई देता है?   मनुष्य ने इस प्...

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प्रथमाष्टमी By Anamika

​मार्गशीर्ष का महीना जब भी आता है, मेरी स्मृतियों के आँगन में हल्दी के पत्तों की वह सोंधी खुशबू तैरने लगती है। बचपन से लेकर शादी से पहले तक, यह महीना मेरे लिए किसी उत्सव से कम नहीं...

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क्या भाग्य सच में होता है? By Nitya Oswal

हाँ, भाग्य है; वह सच में है! भाग्य कैसे सच है यह जानने के लिए, आइए वास्तविक जीवन के कुछ उदाहरण देखते हैं, शुरुआत आपके 'खुद' के जीवन से करते हैं। भाग्य के वास्तविक जीवन के उ...

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जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है? By yeash shah

_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_ उत्तर : श्रीकृष्ण गीता में यह कहते है कि मंत्रों में जप मंत्र मेरा ही स्वरूप है। जप का अर्थ है नित्य अपने अंतर में किसी एक विशेष संकल्प को दोहर...

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रामायण हमें क्या सिखाती है? By Skp divine

रामायण हमें क्या सिखाती है?एक महान ग्रंथ, जो मनुष्य को प्रेम, मर्यादा और धर्म का मार्ग दिखाता हैरामायण केवल एक प्राचीन कथा नहीं है।यह भारतीय संस्कृति की उन महान आध्यात्मिक और साहित...

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सत्य की ज्ञान-यात्रा - अध्याय 1 By Chandni choudhary

सत्य की ज्ञान-यात्राअभ्यनव और गुरुदेव वाजदेव ऋषि की दार्शनिक कथावन की शांत गोद में गुरुदेव वाजदेव ऋषि अपनी कुटिया के बाहर ध्यानमग्न बैठे थे। संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे अस्ता...

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विष्णु परिवार: जीवन शैली - 4 By Shivam Kumar Pandey

हम सभी विष्णु सरनेम के लोग, सनातन धर्म के अनुयायी हैं, और और हम हिंदुओं से अलग नहीं बल्कि हम भी हिंदू हैं । किसी भी प्रकार से हम हिंदुओं से अलग नहीं हैं ।परिचयभारत एक प्राचीन और मह...

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तीन समस्याएं, पीड़ा का कारण और निवारण। By yeash shah

समाज की तीन समस्याएं और पीड़ा का कारण।(अ) घर में लगातार बीमारी रहना और मेडिकल का खर्च।(ब) प्रगतिशील व्यवसाय या नौकरी का अचानक कम या बंद हो जाना।(क) रिश्तों में मनभेद और अलग हो जाने...

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गरीब किसान की मेहनत और राम की लगन By Tejpal Singh Meena

मोहन एक गरीब परिवार का सीधा वक्ति हैं वह उत्तर प्रदेश मुरादाबाद के एक छोटे से गांव अमरपुर में रहता है मोहन के परिवार में चार सदस्य रहते हैं उसकी पत्नी सरोज जो घर का सारा काम करती ह...

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श्रोत्रं यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(14) की व्याख्या "श्रोत्रंयज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद--11/81भावार्थ--हमारे कान शुभ वचनों को ग्रहण करने वालेबनें।वेदों में प्रमाण--“हमारे कान शुभ/कल्याणकारी वचन सुनें और...

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शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है। By Vedanta Life Agyat Agyani

  शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है।जब मन कहता है—“कृष्ण ऐसे थे।”“बुद्ध ऐसे थे।”“राम ऐसे थे।”तो वह प्रायः इतिहास, स्मृति और किसी दूसरे के अनुभव को दोहरा रहा होता है...

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मेरा काम हो गया - एक जागृति कथा By prem chand hembram

पुरुलिया जिले के रूकनी गाँव के समीप हारु कमार का घर था। मिट्टी की दीवारें, फूस की छत और बाँस का दरवाजा—बस यही उसकी गृहस्थी की पहचान थी।बात सन 1976 की है।हारु ने जब से होश सँभाला, त...

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श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथा - भाग 1 By Banwari Lal

श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथाभाग 1 — कंस की भविष्यवाणी और श्रीकृष्ण के जन्म की शुरुआतजय श्रीकृष्ण मथुरा नगरी में उस समय चारों ओर खुशियाँ थीं। राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह यदु...

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ज्ञान का बोझ और शून्य By Vedanta Life Agyat Agyani

वही शून्य है।   ज्ञान का बोझ और शून्यमनुष्य बड़ा विचित्र प्राणी है।वह जीवन को जीने से ज्यादा,जीवन को समझने की कोशिश करता रहता है।   इसी आधार पर धार्मिक मोटिवेशन टिप्स सफलता के सूत्...

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कालू की पहाड़ी - 18 By RAAHULL SHARMA

त्रिशूल और गंगाजल के स्पर्श ने कालूत्रिशूल और गंगाजल के स्पर्श ने कालू के भीतर के राक्षस को मार दिया था। अब ज़मीन पर तड़प रहा वह जीव 'कालू' नहीं, बल्कि वही मासूम कल्याण सिं...

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मनोयज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(16) की व्याख्या '"मनोयज्ञेन कल्पताम्"यजुर्वेद --11/84हे ईश्वर! हमारे मन को शुद्ध करें।हाँ, यह भावार्थ सुंदर है, पर एक छोटी सावधानी आवश्यक है।मूल मंत्रांश:मनो यज...

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Janmastami : Science By Ashish

बिल्कुल। जन्माष्टमी को केवल धार्मिक उत्सव मानने के बजाय अगर हम परंपरा + मनोविज्ञान + सामाजिक विज्ञान + स्वास्थ्य + प्रकृति के दृष्टिकोण से देखें, तो इसके पीछे कई रोचक बातें दिखाई द...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 39 By Shiv putri

प्रिया सार्थक की बात सुन के ...—देखिए हमे सीधी तरीके से बता दीजिए आप श्री से आज भी प्रेम करते है या नहीं मुझे बार बार पूछना अच्छा नहीं लग रहासार्थक— मुझे तुम्हे कोई बात नहीं बतानी...

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विरोध नहीं, जागरण By Vedanta Life Agyat Agyani

 विरोध नहीं, जागरणकेवल बात करने से यदि सब कुछ संभव होता, तो यह संसार कब का स्वर्ग बन गया होता। समाज में सदियों से प्रवचन हैं, नियम हैं, कानून हैं, संस्थाएँ हैं, आंदोलन हैं, विरोध ह...

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वाग्यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

यजुर्वेद सूक्ति(15) की व्याख्याति"वाग्यज्ञेन कल्पताम्"अयजुर्वेद --11/84भावार्थ --हे ईश्वर! हमारी वाणी शुद्ध हो। इसका पूरा मंत्र अर्थ सहित-- यहाँ एक महत्वपूर्ण बात पहले स्पष्ट कर दू...

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कृष्ण और सुदामा की मित्रता By palak baisla

बहुत समय पहले की बात है। उज्जैन में गुरु सांदीपनि का आश्रम था। वहाँ दो बालक शिक्षा ग्रहण करते थे। एक था नंद का लाला कृष्ण और दूसरा था एक गरीब ब्राह्मण का पुत्र सुदामा। दोनों में गह...

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धर्म का स्वप्न और सत्य का जागरण By Vedanta Life Agyat Agyani

  धर्म का स्वप्न और सत्य का जागरणवेदांत 2.0 के परिप्रेक्ष्य में मन, अहंकार और विश्वास का अध्ययन अज्ञात अज्ञानीIndependent Researcher & PhilosopherVedanta 2.0 ©(इंटरनेशनल विज्ञान और...

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संकट मोचन हनुमान जी का चमत्कार By palak baisla

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव रामपुर में मोहन नाम का एक गरीब लड़का रहता था। मोहन बचपन से ही हनुमान जी का बहुत बड़ा भक्त था। उसके घर में कुछ नहीं था, लेकिन उसके दिल में हनुमान जी...

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मूल ग्रंथ पहले, कथावाचन बाद में By Shivam Kumar Pandey

धार्मिक जीवन में कथा सुनने की परंपरा बहुत पुरानी है। किसी धार्मिक ग्रंथ की कथा सुनना केवल शब्दों को सुनना नहीं होता, बल्कि उसमें भाव, भक्ति, श्रद्धा, श्रवण और धार्मिक वातावरण भी जु...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 29 By Nitya Oswal

भारत के महाराष्ट्र के चौदहवीं शताब्दी के परम सिद्ध, विद्रोही और वारकरी संप्रदाय के महान संत चोखामेला जी की एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और प्रसिद्ध अमृत वाणी (अभंग) यहाँ दी गई है। यह वाणी...

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राधा रानी की कृपा By palak baisla

बरसाना में यमुना किनारे सावित्री नाम की एक बूढ़ी मैया रहती थी। उसका इस संसार में कोई नहीं था। पति बहुत साल पहले गुजर गए थे, बच्चे नहीं थे। उसका बस एक ही सहारा था, एक ही परिवार था -...

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जब राधा रानी ने किया चमत्कार By palak baisla

वृंदावन में यमुना किनारे मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। मीरा को बचपन से ही राधा रानी से बहुत प्रेम था। वह हर दिन सुबह उठकर यमुना में स्नान करती और फिर राधा-कृष्ण के मंदिर में फूलों...

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नुआखाई (पर्व नहीं एक एहसास) By Anamika

स्मृतियों की थाली में नुआखाई का नवान्न :​भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष पंचमी (गणेश चतुर्थी के अगले दिन) जब भी करीब आती है, हवा में एक सोंधी सी खुशबू घुलने लगती है। पश्चिमी ओडिशा का यह...

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जब भोले बाबा ने दिया वरदान By palak baisla

प्राचीन समय की बात है। हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था जिसका नाम शिवपुर था। उस गाँव में आरती नाम की एक गरीब लड़की अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहती थी। आरती के पिता का देहांत बचप...

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प्रतीकोपासना - भाग 4 By kalpesh

प्रतीकोपासना :- संपूर्ण साधना का क्रमभाग ४ : स्वप्रतीक से चिदाकाश तकअब तक हमने प्रतीकोपासना के तीन प्रमुख चरणों को समझा है। पहले चरण में साधक अपने ही प्रतिबिंब को स्वप्रतीक बनाकर उ...

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समकालीन अद्वैत का सच: संस्था नहीं, साक्षी। By Vedanta Life Agyat Agyani

 समकालीन अद्वैत वेदान्त का दार्शनिक विश्लेषण: संस्थागत ढाँचे, तार्किक व्याख्याएँ और 'वेदान्त 2.0' का शून्य-बिंदु चेतना सिद्धांतअद्वैत वेदान्त की शास्त्रीय उपनिषदीय परंपरा म...

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फल से कारण तक - रूप के पार निराकार सत्य By Vedanta Life Agyat Agyani

        अध्याय : फल से कारण तक — रूप के पार निराकार सत्यबीज-वाक्य  “फल को मत पकड़ो, कारण तक जाओ।रूप को देखो, पर रूप को अंतिम सत्य मत मानो।”               1. धर्म की पहली भूल — फल क...

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Zinagi 2.0 By Swarnima Varshney

काश कुछ ऐसा हो जाए… जो दिल को चाहिए, वही मिल जाए। कितनी खुशी होगी ना, कुछ पलों के लिए… पर ये दिल कहाँ ठहरता है एक पल के लिए। ऐसा लगता है कि जो है उसमें कुछ अधूरा है। जो मिल जाए, तो...

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जो हो रहा है, अच्छा हो रहा हैकर्म से दृष्टा तक लेखक : Agyat Agyani प्रस्तावना — पहला सारयह पुस्तक किसी मत को स्थापित करने के लिए नहीं है। यह घटना को घटना की तरह देखना सिखाने के लिए...

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एकनिष्ठ भक्ति By Shivam Kumar Pandey

 ।। धर्म कभी भी वंशानुगत नहीं होता ।। आस्था में स्पष्टता, आराध्य के प्रति निष्ठा और धार्मिक पहचान का प्रश्नएक मौलिक वैचारिक पुस्तकलेखक: Shivam Kumar Pandey इस पुस्तक का उद्देश्य अप...

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सत्य की पहली धड़कन By Vedanta Life Agyat Agyani

  1. पुस्तक विवरण - Description   Vedanta 2.0 : सत्य की पहली धड़कन   सत्य कहाँ है - बाहर दिखाई देने वाले जगत में, या उस चेतना में जिसके कारण यह जगत दिखाई देता है?   मनुष्य ने इस प्...

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प्रथमाष्टमी By Anamika

​मार्गशीर्ष का महीना जब भी आता है, मेरी स्मृतियों के आँगन में हल्दी के पत्तों की वह सोंधी खुशबू तैरने लगती है। बचपन से लेकर शादी से पहले तक, यह महीना मेरे लिए किसी उत्सव से कम नहीं...

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क्या भाग्य सच में होता है? By Nitya Oswal

हाँ, भाग्य है; वह सच में है! भाग्य कैसे सच है यह जानने के लिए, आइए वास्तविक जीवन के कुछ उदाहरण देखते हैं, शुरुआत आपके 'खुद' के जीवन से करते हैं। भाग्य के वास्तविक जीवन के उ...

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जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है? By yeash shah

_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_ उत्तर : श्रीकृष्ण गीता में यह कहते है कि मंत्रों में जप मंत्र मेरा ही स्वरूप है। जप का अर्थ है नित्य अपने अंतर में किसी एक विशेष संकल्प को दोहर...

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रामायण हमें क्या सिखाती है? By Skp divine

रामायण हमें क्या सिखाती है?एक महान ग्रंथ, जो मनुष्य को प्रेम, मर्यादा और धर्म का मार्ग दिखाता हैरामायण केवल एक प्राचीन कथा नहीं है।यह भारतीय संस्कृति की उन महान आध्यात्मिक और साहित...

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सत्य की ज्ञान-यात्रा - अध्याय 1 By Chandni choudhary

सत्य की ज्ञान-यात्राअभ्यनव और गुरुदेव वाजदेव ऋषि की दार्शनिक कथावन की शांत गोद में गुरुदेव वाजदेव ऋषि अपनी कुटिया के बाहर ध्यानमग्न बैठे थे। संध्या का समय था। सूर्य धीरे-धीरे अस्ता...

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विष्णु परिवार: जीवन शैली - 4 By Shivam Kumar Pandey

हम सभी विष्णु सरनेम के लोग, सनातन धर्म के अनुयायी हैं, और और हम हिंदुओं से अलग नहीं बल्कि हम भी हिंदू हैं । किसी भी प्रकार से हम हिंदुओं से अलग नहीं हैं ।परिचयभारत एक प्राचीन और मह...

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तीन समस्याएं, पीड़ा का कारण और निवारण। By yeash shah

समाज की तीन समस्याएं और पीड़ा का कारण।(अ) घर में लगातार बीमारी रहना और मेडिकल का खर्च।(ब) प्रगतिशील व्यवसाय या नौकरी का अचानक कम या बंद हो जाना।(क) रिश्तों में मनभेद और अलग हो जाने...

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गरीब किसान की मेहनत और राम की लगन By Tejpal Singh Meena

मोहन एक गरीब परिवार का सीधा वक्ति हैं वह उत्तर प्रदेश मुरादाबाद के एक छोटे से गांव अमरपुर में रहता है मोहन के परिवार में चार सदस्य रहते हैं उसकी पत्नी सरोज जो घर का सारा काम करती ह...

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श्रोत्रं यज्ञेन कल्पताम् By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

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शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है। By Vedanta Life Agyat Agyani

  शिक्षा स्मृति है, शास्त्र संकेत है, दृष्टि बोध है।जब मन कहता है—“कृष्ण ऐसे थे।”“बुद्ध ऐसे थे।”“राम ऐसे थे।”तो वह प्रायः इतिहास, स्मृति और किसी दूसरे के अनुभव को दोहरा रहा होता है...

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मेरा काम हो गया - एक जागृति कथा By prem chand hembram

पुरुलिया जिले के रूकनी गाँव के समीप हारु कमार का घर था। मिट्टी की दीवारें, फूस की छत और बाँस का दरवाजा—बस यही उसकी गृहस्थी की पहचान थी।बात सन 1976 की है।हारु ने जब से होश सँभाला, त...

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