आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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अमृत वाणी - संत वाणी - 6 By Nitya Oswal

“विद्येविना मती गेली, मतीविना नीती गेली।नीतीविना गती गेली, गतीविना वित्त गेले।वित्ताविना शूद्र खचले, इतके अनर्थ एका अविद्याने केले।।”ज्योतिबा फुले जी कहते हैं कि शिक्षा (ज्ञान) के...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 9 By Janshi Saroha

हरि ने कहा —जानता हु श्री तुम क्यूं रो रही हो क्योंकि तुम्हे लगता है कि तुम्हे skin problem है तो कोई भी तुमसे प्यार कैसे कर सकता है ?लेकिन श्री मेरा यकीन मानो मुझे तुम्हारे शरीर स...

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अविचारित जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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स्वर्ग का दरवाजा - 7 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 7 तंत्र, मंत्र और यंत्र का ज्ञान “किसी भी देवता को मारने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस पर विश्वास करना बंद कर दो” ये लाइन मैं क्यों कह रहा हूँ? क्योंकि आज मैं उस ज्ञान के प...

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आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 5 - सनातन में 33 कोटि देवी देखता का उल्लेख क्यो है ? By Janshi Saroha

पिछले अध्याय में हमने डायनासोर के विषय में समझा ... अब यह समझते है कि सनातन में 33 कोटि देवी देवता का उल्लेख क्यो है? अब यहां कुछ लोग कोटि शब्द के दो अर्थ निकाल सकते है और दोनों ही...

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नव्यो नव्य: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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गीता आज के इंसान के लिए – (अध्याय -7) By Shivraj Bhokare

------------------------------ अध्याय 7: सोशल मीडिया और गीता (डिजिटल मायाजाल: वर्चुअल चकाचौंध या आत्मा की नीलामी?)------------------------------ भाग 1: तुम अपनी हकीकत को किसी दूसरे...

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नवीन भवति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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कामवासना By Kapil Tiwari

जन्म से ही हमारे भीतर कामवासना नाम की एक वृत्ति या प्रवृत्ति मौजूद रहती है। यह प्रकृति की अपनी व्यवस्था है कि जैसे-जैसे मनुष्य उम्र में आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे यह प्रवृत्ति भी सक्र...

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वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

: वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोजआधुनिक युग ने मनुष्य को वह सब दिया है जिसकी कभी कल्पना भी कठिन थी। आकाश में उड़ने वाले विमान, हाथ में समाई हुई पूरी दुनिया, क्षणों में होने वाला...

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कालू की पहाड़ी - 9 By RAAHULL SHARMA

लेखक राहुल शर्मा की तरफ से आप सभी के लिए..."नमस्कार दोस्तों, मैं आपका अपना राहुल शर्मा।आज 'कालू की पहाड़ी (सीज़न 1)' का 9वां भाग लाइव हो चुका है। सच कहूँ तो आज मैं जो कुछ भ...

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सत्य पथी By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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शून्य से नौ तक:अस्तित्ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदांत 2.0 का 0–9 मॉडल एक ऐसा संरचनात्मक ढाँचा प्रस्तुत करता है जो साधारण दशमलव संख्या‑पद्धति को अस्तित्व की दस मूल अवस्थाओं के रूप में पुनर्पाठित करता है। इस दृष्टि में 0 से 9 तक...

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मॉडर्न साधु - 2 By nirala ji

अमन को अपने दोस्तों के साथ खेलना और उनके साथ स्कूल जाना अच्छा लगता था। अमन,विक्रम,अब्दुल और मीरा चारों में अच्छी मित्रता थी। उस जगह के लोग भी एकता और भाईचारे के साथ रहना पसंद करते...

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अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच By Kapil Tiwari

अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच: एक आध्यात्मिक व पर्यावरणवादी दृष्टिकोण ~जब हम जीवन के सत्यों को गहराई से समझने का प्रयास करते हैं, तो सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि हमारी...

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गुरु महिमा नहीं- गुरु मैत्री By Vedanta Life Agyat Agyani

  "स्त्री का प्रेम और गुरु-भक्ति की मूर्खता"वेदांत 2.0 के लिए एक नया दृष्टिकोणप्रस्तावना: दो तरह का प्रेमदुनिया में प्रेम के दो रूप सबसे ज़्यादा दिखाई देते हैं। एक पत्नी का प्रेम औ...

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कर्मशील मनुष्य By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (73) की व्याख्या न देवास: कवत्नवे।ऋगवेद--7/32/9भावार्थ--ईश्वर अकर्मण्य का साथ नहीं देता।ऋग्वेद 7.32.9मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे ।तरणिरिज्जयति क्...

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प्राप्ति नहीं, प्रसाद By Vedanta Life Agyat Agyani

प्राप्ति नहीं, प्रसादजीवन का मूल सूत्रमनुष्य सोचता है कि उसे सब कुछ पाना है। धन पाना, सफलता पाना, सम्मान पाना, ईश्वर पाना, मोक्ष पाना। परंतु सत्य इससे भिन्न है।जो वास्तव में तुम्हा...

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सफलता का आधार पुरुषार्थ By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति--(74) की व्याख्या "तरणि:इत‌ जयति"ऋग्वेद -7/32/9भावार्थ --परिश्रमी ही सफल होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहित--ऋग्वेद मण्डल 7, सूक्त 32, मंत्र 9 का मूल पाठ इस प्रकार है—मा स...

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मा हृणीथा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (72) की व्याख्यामा हृणीथा:ऋग्वेद---8/2/19से ईश्वर ! हमसै रुष्ट मत हों। पूरा श्लोकहाँ, ऋग्वेद 8.2.19 का पूरा मंत्र इस प्रकार है—ओ षु प्र याहि वाजेभिर्मा हृणीथा अभ्यस्म...

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कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातें By Jai Krishan

कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातेंआज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता, तनाव, प्रतियोगिता, असुरक्षा या मानसिक अशांति से जूझ रहा है। यही कार...

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शैतानी घाटी का सफर - 7 By RAAHULL SHARMA

उसके शरीर से सड़ी हुई मांस की गंध आ रही थी। उसके हज़ारों हाथ मकड़ी के जाले की तरह फैले हुए थे, और उन हज़ारों हाथों के बिल्कुल बीच में फंसी हुई थी—मोनिका!मोनिका: (घुटती हुई आवाज़ में) "र...

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यूनानी दर्शन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (71) की व्याख्याबृहस्पते अति यदर्यो अराति:ऋगुवेद--2/23/1भावार्थ--हे ईश्वर ! हमें श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करें।आपने जो मंत्र उद्धृत किया है—बृहस्पते अति यदर्यो अरातिर्द्...

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मैं नहीं, अस्तित्व By Vedanta Life Agyat Agyani

 मैं नहीं, अस्तित्वइच्छा, प्रश्न और समर्पण के मध्य पूर्णता की खोज  भूमिका↓१. प्रश्नकर्ता कौन है? (अस्तित्व की जिज्ञासा)↓२. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और प्रश्न का संकट↓३. अस्तित्व का...

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महाजनो येन गत:सपन्थ: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (70) की व्याख्या "प्रेहि प्रेहि पथिभि: पूर्व्येभि:"ऋग्वेद --10/14/7भावार्थ --श्रेष्ठ मार्ग  पर आगे बढ़ो।इसका पूरा मंत्र --प्रेहि प्रेहि पथिभिः पूर्व्येभिर्यत्रा नः पू...

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शुभ सुनें By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

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बलं धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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आश्रम की रामकथा By Kapil Tiwari

मैं ऋषिकेश की सड़कों पर भटक ही रहा था कि अचानक मेरी नज़र एक पोस्टर पर पड़ी और उसे देखकर मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ गई। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि उस पोस्टर पर बड़े-बड़े अक्षरों में ल...

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ब्रह्म ज्ञान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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मार्ग दर्शक By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 6 By Nitya Oswal

“विद्येविना मती गेली, मतीविना नीती गेली।नीतीविना गती गेली, गतीविना वित्त गेले।वित्ताविना शूद्र खचले, इतके अनर्थ एका अविद्याने केले।।”ज्योतिबा फुले जी कहते हैं कि शिक्षा (ज्ञान) के...

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श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 9 By Janshi Saroha

हरि ने कहा —जानता हु श्री तुम क्यूं रो रही हो क्योंकि तुम्हे लगता है कि तुम्हे skin problem है तो कोई भी तुमसे प्यार कैसे कर सकता है ?लेकिन श्री मेरा यकीन मानो मुझे तुम्हारे शरीर स...

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अविचारित जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह परमात्मा हमें सब कष्टों से पार करे।पदच्छेद--सः । नः । पर्षत् । अति । द्विषः शब्दार्थसः – वह (परमात्...

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स्वर्ग का दरवाजा - 7 By Author Pawan Singh

एपिसोड - 7 तंत्र, मंत्र और यंत्र का ज्ञान “किसी भी देवता को मारने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस पर विश्वास करना बंद कर दो” ये लाइन मैं क्यों कह रहा हूँ? क्योंकि आज मैं उस ज्ञान के प...

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आध्यात्मिक दर्शन - प्रश्न 5 - सनातन में 33 कोटि देवी देखता का उल्लेख क्यो है ? By Janshi Saroha

पिछले अध्याय में हमने डायनासोर के विषय में समझा ... अब यह समझते है कि सनातन में 33 कोटि देवी देवता का उल्लेख क्यो है? अब यहां कुछ लोग कोटि शब्द के दो अर्थ निकाल सकते है और दोनों ही...

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नव्यो नव्य: By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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गीता आज के इंसान के लिए – (अध्याय -7) By Shivraj Bhokare

------------------------------ अध्याय 7: सोशल मीडिया और गीता (डिजिटल मायाजाल: वर्चुअल चकाचौंध या आत्मा की नीलामी?)------------------------------ भाग 1: तुम अपनी हकीकत को किसी दूसरे...

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नवीन भवति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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कामवासना By Kapil Tiwari

जन्म से ही हमारे भीतर कामवासना नाम की एक वृत्ति या प्रवृत्ति मौजूद रहती है। यह प्रकृति की अपनी व्यवस्था है कि जैसे-जैसे मनुष्य उम्र में आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे यह प्रवृत्ति भी सक्र...

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वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

: वेदांत और आधुनिकता — संतुलन की खोजआधुनिक युग ने मनुष्य को वह सब दिया है जिसकी कभी कल्पना भी कठिन थी। आकाश में उड़ने वाले विमान, हाथ में समाई हुई पूरी दुनिया, क्षणों में होने वाला...

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कालू की पहाड़ी - 9 By RAAHULL SHARMA

लेखक राहुल शर्मा की तरफ से आप सभी के लिए..."नमस्कार दोस्तों, मैं आपका अपना राहुल शर्मा।आज 'कालू की पहाड़ी (सीज़न 1)' का 9वां भाग लाइव हो चुका है। सच कहूँ तो आज मैं जो कुछ भ...

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सत्य पथी By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

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शून्य से नौ तक:अस्तित्ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

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मॉडर्न साधु - 2 By nirala ji

अमन को अपने दोस्तों के साथ खेलना और उनके साथ स्कूल जाना अच्छा लगता था। अमन,विक्रम,अब्दुल और मीरा चारों में अच्छी मित्रता थी। उस जगह के लोग भी एकता और भाईचारे के साथ रहना पसंद करते...

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अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच By Kapil Tiwari

अंतर्जगत का रूपांतरण और मांसाहार का सच: एक आध्यात्मिक व पर्यावरणवादी दृष्टिकोण ~जब हम जीवन के सत्यों को गहराई से समझने का प्रयास करते हैं, तो सबसे पहला प्रश्न यही उठता है कि हमारी...

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गुरु महिमा नहीं- गुरु मैत्री By Vedanta Life Agyat Agyani

  "स्त्री का प्रेम और गुरु-भक्ति की मूर्खता"वेदांत 2.0 के लिए एक नया दृष्टिकोणप्रस्तावना: दो तरह का प्रेमदुनिया में प्रेम के दो रूप सबसे ज़्यादा दिखाई देते हैं। एक पत्नी का प्रेम औ...

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कर्मशील मनुष्य By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति-- (73) की व्याख्या न देवास: कवत्नवे।ऋगवेद--7/32/9भावार्थ--ईश्वर अकर्मण्य का साथ नहीं देता।ऋग्वेद 7.32.9मा स्रेधत सोमिनो दक्षता महे कृणुध्वं राय आतुजे ।तरणिरिज्जयति क्...

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प्राप्ति नहीं, प्रसाद By Vedanta Life Agyat Agyani

प्राप्ति नहीं, प्रसादजीवन का मूल सूत्रमनुष्य सोचता है कि उसे सब कुछ पाना है। धन पाना, सफलता पाना, सम्मान पाना, ईश्वर पाना, मोक्ष पाना। परंतु सत्य इससे भिन्न है।जो वास्तव में तुम्हा...

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सफलता का आधार पुरुषार्थ By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति--(74) की व्याख्या "तरणि:इत‌ जयति"ऋग्वेद -7/32/9भावार्थ --परिश्रमी ही सफल होता है। पूरा श्लोक अर्थ सहित--ऋग्वेद मण्डल 7, सूक्त 32, मंत्र 9 का मूल पाठ इस प्रकार है—मा स...

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मा हृणीथा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति (72) की व्याख्यामा हृणीथा:ऋग्वेद---8/2/19से ईश्वर ! हमसै रुष्ट मत हों। पूरा श्लोकहाँ, ऋग्वेद 8.2.19 का पूरा मंत्र इस प्रकार है—ओ षु प्र याहि वाजेभिर्मा हृणीथा अभ्यस्म...

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कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातें By Jai Krishan

कलयुग में कैसे जिएँ? शास्त्रों के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण 5 बातेंआज के समय में लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता, तनाव, प्रतियोगिता, असुरक्षा या मानसिक अशांति से जूझ रहा है। यही कार...

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मैं नहीं, अस्तित्व By Vedanta Life Agyat Agyani

 मैं नहीं, अस्तित्वइच्छा, प्रश्न और समर्पण के मध्य पूर्णता की खोज  भूमिका↓१. प्रश्नकर्ता कौन है? (अस्तित्व की जिज्ञासा)↓२. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और प्रश्न का संकट↓३. अस्तित्व का...

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शुभ सुनें By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (56) की व्याख्या " भद्रं कर्णेभि: श्रृणुयाम देव:"ऋगुवेद --1/89/8अर्थ--  हे ईश्वर ! हम अपने कानों से शुभ सुनें।यह ऋग्वेद का अत्यंत प्रसिद्ध शांति मंत्र है:मंत्र (ऋग्...

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बलं धेहि By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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ब्रह्म ज्ञान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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ऋग्वेद सूक्ति(69) की व्याख्या "यद्भद्रं तन्न आसुव"ऋगुवेद--5/82/5भावार्थ --हे ईश्वर ! जो हमारे लिए शुभ है, वह हमें प्रदान करें।पूरा मंत्र अर्थ सहित --उद्धृत पंक्ति "यद्भद्रं तन्न आ...

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