आध्यात्मिक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


Categories
Featured Books

महाभारत की कहानी - भाग 238 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२४२ शाम्ब का मूसल प्रसव और द्वारका में दुर्लक्षण   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार...

Read Free

आत्मबोध By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१४) की व्याख्या ऋग्वेद के मंत्र “यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति""… (१.१६४.३९)  भावार्थ --ब्रह्म-तत्त्व को जाने बिना  वेद-मंत्रों का पाठ व्यर्थ है।ऋग्वेद १.१६४.३९ऋचो अ...

Read Free

महाभारत भीतर का युद्ध ( तत्व मीमांसा) भाग 1 By prem chand hembram

महाभारत भीतर का युद्ध (तत्व मीमांसा) — भाग : ०१ मनुष्य सदियों से भगवान को खोज रहा है।कभी मंदिरों में,कभी तीर्थों में,कभी मूर्तियों में,कभी ग्रंथों में।पर शायद सबसे कठिन खोज अपने भी...

Read Free

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

Read Free

सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

Read Free

उदार जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

Read Free

तेरे मेरे दरमियान - 114 By CHIRANJIT TEWARY

दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है । हमे जल्दी से अघोरी बाबा के पास जाना चाहिए । और उनसे इन देत्यो से हमेशा की छुटकारा पाने का कोई उपाय प...

Read Free

जीवन का रहस्य By Vedanta Life Agyat Agyani

 अध्याय: जीवन का रहस्य जीवन कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान खोजना हो। जीवन स्वयं एक रहस्य है, जिसे जीना है।स्त्री और पुरुष दोनों इस रहस्य के दो अंग हैं। स्त्री प्रकृति है — तरल, प्...

Read Free

दान देने से धन नहीं घटता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्त.(१७) की व्याख्या मन्त्र — ऋग्वेद १०/११७/१उतो रयिः पृणतो नो पदस्यति।भावार्थ -दान करने वाले का धन नहीं घटता। पदच्छेद--उत + उ + रयिः + पृणतः + नः + पदस्यति शब्दार्थउत &#6...

Read Free

जुआ मत खेलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (18) की व्याख्या "अक्षैर्मा दीव्य: कृषिमित् कृषस्व" 10/34/13भावार्थ --जुआ मत‌ खेलो, खेती करो।ऋग्वेद का यह मन्त्र द्यूत (जुआ) के दुष्परिणामों से सावधान करता है और पर...

Read Free

श्रापित एक प्रेम कहानी - 82 By CHIRANJIT TEWARY

अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे मे चेतन को पता नही चलनी चाहिए ।" दक्षराज हैरानी से कहता है:" पर चेतन तो आपका ...! "इतना बोल...

Read Free

जुआरी का पतन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१९) की व्याख्या- “जाया तप्यते कितवस्य हीना” भावार्थ --जुआरी की पत्नी दीन हीन होकर दुख पाती है।ऋग्वेद १०.३४.१० (अक्षसूक्त)यह मंत्र ऋग्वेद १०.३४.१० के “अक्षसूक्त” (जुए...

Read Free

आत्मजागृति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

Read Free

बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें? By Nitya Oswal

बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय में बच्चे विकासशील दुनिया और आधुनिक भोजन से प्रभावित हो रहे हैं। वे करी और रोटी के बजाय कोल्ड ड्रिंक्...

Read Free

आलस्य मत‌ करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

  ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा...

Read Free

सत्य का प्रकाश By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(२२) की व्याख्या त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ--ऋगुवेद,--१/११/२२भावार्थ --हे प्रभु!अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे अज्ञान को नष्ट करो। मंत्र —“त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ…”— ऋग...

Read Free

ईश्वर की कृपा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२३) की व्याख्या मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …”पदच्छेद--पितेव — नः — शृणुहि — हूयमानःशाब्दिक अर्थ--पितेव = पिता के समाननः = हमारीशृणुहि &#...

Read Free

अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 10 By Shivraj Bhokare

दोहा:१९कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।भक्ति करै कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय॥कथा: "शर्तों वाली भक्ति"एक बहुत बड़ा व्यापारी था, जिसका मन हमेशा मुनाफे और वासनाओं में उलझा रहता था।...

Read Free

ईश्वर से मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (२४) की व्याख्या “अघृणे न ते सख्याय पह्युवे” — ऋगुवेद _१/१३८/४भावार्थ --हे प्रभु ! मैं ‌तेरी मित्रता से इन्कार नहीं ‌करता।पदच्छेद-- अघृणे — हे प्रकाशस्वरूप, दयालु (...

Read Free

भय से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

Read Free

स्वर्ग का दरवाजा - 4 By Author Pawan Singh

बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन?   शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिक इज्जत या ईमानदारी के मुखौटो के पीछे छुपा होता है।  ये बात एलिज़ाबेथ बैरेट ने...

Read Free

भक्त को भय नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

Read Free

उपकारहीन कृपण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२६) की व्याख्या मंत्र:अपृणन्तिमभि सं यन्ति शोका:।— ऋग्वेद १.१२५.७भावार्थ --उपकारहीन कृपण को शोक घेर लेता है।पदच्छेद--अपृणन्तिम् + अभि + सं + यन्ति + शोकाःशब्दार्थ--...

Read Free

सत्य पथ पर चलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

Read Free

स्वभाव धर्म ओर आत्मा की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

स्वभाव का तात्विक विवेचन: दर्शन, मनोविज्ञान और आध्यात्मिक धर्म का एक व्यापक अनुसंधानhttps://orcid.org/0009-0000-8083-0685vedanta 2.0 life - pen name -Agyat agyani—𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲“जो स...

Read Free

ज्ञानी भ्रमित नहीं होता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२८) की व्याख्या  मन्त्र--“उत देवा अवहित देवा: उन्नदेवा पुनः:”। --ऋग्वेद १०.१३७.१भावार्थ --गिरे हुओं को पुनः उठाओं।यह मन्त्र ऋग्वेद के दशम मण्डल, १३७वें सूक्त का प्र...

Read Free

दुख का कारण 'अति' By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (२९) की व्याख्या बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।ऋगुवेद --१/१६४/३२भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।मंत्र:“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”— ऋग्वेद १/१६४/३२पदच्छेद--बहु-प...

Read Free

शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर By Vedanta Life Agyat Agyani

  शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर की कोई सत्ता (धर्म, विज्ञान या राजनीति) सुलझा सके। यह एक बहती हुई धारा है, जिसका आनंद केवल 'अभी' और...

Read Free

शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदान्त 2.0: शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान — एक वृहद शोध रिपोर्ट प्रस्तुत शोध रिपोर्ट 'अज्ञात अज्ञानी' (Agyat Agyani) द्वारा प्रतिपादित 'वेदान्त 2.0' के दार्शनिक और वैज...

Read Free

भक्त का रक्षक भगवान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (३०) की व्याख्या यह मन्त्र ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 32, मन्त्र 14) है। यह सूक्त मुख्यतः इन्द्र की स्तुति में है।मन्त्र---कस्तमिन्द्र त्वावसुमा मर्त्यो दधर्षति।(ऋग्वेद...

Read Free

आन्तरिक पुकार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्त...

Read Free

स्त्री - दृश्य नहीं, दर्शन है By Vedanta Life Agyat Agyani

Vedanta 2.0 Life स्त्री — दृश्य नहीं, दर्शन है धर्म, पाखंड और विश्वगुरु का मौन सत्यजब पुरुष स्त्री को समझ नहीं पाया, तभी धर्म पैदा हुआ। जब प्रेम नहीं समझा गया, तभी शास्त्र लिखे गए।...

Read Free

महाभारत की कहानी - भाग 238 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२४२ शाम्ब का मूसल प्रसव और द्वारका में दुर्लक्षण   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार...

Read Free

आत्मबोध By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (१४) की व्याख्या ऋग्वेद के मंत्र “यस्तन्न वेद किमृचा करिष्यति""… (१.१६४.३९)  भावार्थ --ब्रह्म-तत्त्व को जाने बिना  वेद-मंत्रों का पाठ व्यर्थ है।ऋग्वेद १.१६४.३९ऋचो अ...

Read Free

महाभारत भीतर का युद्ध ( तत्व मीमांसा) भाग 1 By prem chand hembram

महाभारत भीतर का युद्ध (तत्व मीमांसा) — भाग : ०१ मनुष्य सदियों से भगवान को खोज रहा है।कभी मंदिरों में,कभी तीर्थों में,कभी मूर्तियों में,कभी ग्रंथों में।पर शायद सबसे कठिन खोज अपने भी...

Read Free

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरण By Vedanta Life Agyat Agyani

ब्रह्मचर्य: दमन का भ्रम और ऊर्जा का सहज रूपांतरणअध्यात्म और जीवन-दर्शन के क्षेत्र में 'ब्रह्मचर्य' शब्द को अक्सर एक कठिन तपस्या, इंद्रिय-दमन और कठोर नियंत्रण के पर्याय के र...

Read Free

सच्ची मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्।   १/१५/५भावार्थ -प्रभो ! आपकी ही मैत्री सच्ची है। पद-विश्लेषण--तव = तेरा / आपकाएव इद्धि (एव इद्धि/एव हि) = निश्चय ही...

Read Free

उदार जीवन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" —  १०/५७/१भावार्थ --हमारे अन्दर कंजूसी न हो।पद विच्छेद --मान्तः — भीतर, अन्तर मेंस्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहींअरा...

Read Free

तेरे मेरे दरमियान - 114 By CHIRANJIT TEWARY

दयाल फिर अपनी बात को जारी रखते हूए कहता है:" मालिक ! ये वक्त सौच मे का नही है । हमे जल्दी से अघोरी बाबा के पास जाना चाहिए । और उनसे इन देत्यो से हमेशा की छुटकारा पाने का कोई उपाय प...

Read Free

जीवन का रहस्य By Vedanta Life Agyat Agyani

 अध्याय: जीवन का रहस्य जीवन कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान खोजना हो। जीवन स्वयं एक रहस्य है, जिसे जीना है।स्त्री और पुरुष दोनों इस रहस्य के दो अंग हैं। स्त्री प्रकृति है — तरल, प्...

Read Free

दान देने से धन नहीं घटता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्त.(१७) की व्याख्या मन्त्र — ऋग्वेद १०/११७/१उतो रयिः पृणतो नो पदस्यति।भावार्थ -दान करने वाले का धन नहीं घटता। पदच्छेद--उत + उ + रयिः + पृणतः + नः + पदस्यति शब्दार्थउत &#6...

Read Free

जुआ मत खेलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (18) की व्याख्या "अक्षैर्मा दीव्य: कृषिमित् कृषस्व" 10/34/13भावार्थ --जुआ मत‌ खेलो, खेती करो।ऋग्वेद का यह मन्त्र द्यूत (जुआ) के दुष्परिणामों से सावधान करता है और पर...

Read Free

श्रापित एक प्रेम कहानी - 82 By CHIRANJIT TEWARY

अघोरी कहता है"" हम्म्..! ठीक है । दक्ष ये बात मेरे और तुम्हारे बिच ही रहनी चाहिए इस बारे मे चेतन को पता नही चलनी चाहिए ।" दक्षराज हैरानी से कहता है:" पर चेतन तो आपका ...! "इतना बोल...

Read Free

जुआरी का पतन By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१९) की व्याख्या- “जाया तप्यते कितवस्य हीना” भावार्थ --जुआरी की पत्नी दीन हीन होकर दुख पाती है।ऋग्वेद १०.३४.१० (अक्षसूक्त)यह मंत्र ऋग्वेद १०.३४.१० के “अक्षसूक्त” (जुए...

Read Free

आत्मजागृति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ --पदच्छेद (संकेतात्मक)कृत्वा । चेतिष्ठः । विश्वम् । अर्मभूत् (अर्म = स्नेह/हित)भावार्थ--प्रात: जा...

Read Free

बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें? By Nitya Oswal

बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय में बच्चे विकासशील दुनिया और आधुनिक भोजन से प्रभावित हो रहे हैं। वे करी और रोटी के बजाय कोल्ड ड्रिंक्...

Read Free

आलस्य मत‌ करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

  ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत‌ करो।ऋग्वेद में प्रयुक्त — “मा स्रेधत” का भावार्थ है:“शिथिल मत पड़ो, आलस्य मत करो, पीछे मत हटो।”यहाँ—मा...

Read Free

सत्य का प्रकाश By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(२२) की व्याख्या त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ--ऋगुवेद,--१/११/२२भावार्थ --हे प्रभु!अपने ज्ञान के प्रकाश से हमारे अज्ञान को नष्ट करो। मंत्र —“त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ…”— ऋग...

Read Free

ईश्वर की कृपा By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२३) की व्याख्या मंत्र — ऋग्वेद १/१०४/९“पितेव नः शृणुहि हूयमानः …”पदच्छेद--पितेव — नः — शृणुहि — हूयमानःशाब्दिक अर्थ--पितेव = पिता के समाननः = हमारीशृणुहि &#...

Read Free

अहंकार का पोस्टमार्टम - भाग 10 By Shivraj Bhokare

दोहा:१९कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।भक्ति करै कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय॥कथा: "शर्तों वाली भक्ति"एक बहुत बड़ा व्यापारी था, जिसका मन हमेशा मुनाफे और वासनाओं में उलझा रहता था।...

Read Free

ईश्वर से मित्रता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (२४) की व्याख्या “अघृणे न ते सख्याय पह्युवे” — ऋगुवेद _१/१३८/४भावार्थ --हे प्रभु ! मैं ‌तेरी मित्रता से इन्कार नहीं ‌करता।पदच्छेद-- अघृणे — हे प्रकाशस्वरूप, दयालु (...

Read Free

भय से मुक्ति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

Read Free

स्वर्ग का दरवाजा - 4 By Author Pawan Singh

बाक़ी धर्म से कैसे अलग है सनातन?   शैतान सबसे ज़्यादा शैतानी तब करता है जब वह सामाजिक प्रतिष्ठा, नैतिक इज्जत या ईमानदारी के मुखौटो के पीछे छुपा होता है।  ये बात एलिज़ाबेथ बैरेट ने...

Read Free

भक्त को भय नहीं By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२५) की व्याख्या मंत्र (ऋग्वेद १/१४७/३)“दिप्सन्त इद्रिपवो नाहदेभुः …”अर्थ-- हे प्रभु ! शत्रु आपके दास को नहीं दबा सकते।यह मंत्र ऋग्वेद के प्रथम मण्डल, १४७वें सूक्त,...

Read Free

उपकारहीन कृपण By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२६) की व्याख्या मंत्र:अपृणन्तिमभि सं यन्ति शोका:।— ऋग्वेद १.१२५.७भावार्थ --उपकारहीन कृपण को शोक घेर लेता है।पदच्छेद--अपृणन्तिम् + अभि + सं + यन्ति + शोकाःशब्दार्थ--...

Read Free

सत्य पथ पर चलो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या  मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्”  ऋग्वेद_ १०.५७.१भावार्थ --हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।पदच्छेदमा — नहींप्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँपथः — मार्ग सेवयम् — हम...

Read Free

स्वभाव धर्म ओर आत्मा की खोज By Vedanta Life Agyat Agyani

स्वभाव का तात्विक विवेचन: दर्शन, मनोविज्ञान और आध्यात्मिक धर्म का एक व्यापक अनुसंधानhttps://orcid.org/0009-0000-8083-0685vedanta 2.0 life - pen name -Agyat agyani—𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲“जो स...

Read Free

ज्ञानी भ्रमित नहीं होता By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(२८) की व्याख्या  मन्त्र--“उत देवा अवहित देवा: उन्नदेवा पुनः:”। --ऋग्वेद १०.१३७.१भावार्थ --गिरे हुओं को पुनः उठाओं।यह मन्त्र ऋग्वेद के दशम मण्डल, १३७वें सूक्त का प्र...

Read Free

दुख का कारण 'अति' By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (२९) की व्याख्या बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।ऋगुवेद --१/१६४/३२भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।मंत्र:“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”— ऋग्वेद १/१६४/३२पदच्छेद--बहु-प...

Read Free

शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर By Vedanta Life Agyat Agyani

  शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर की कोई सत्ता (धर्म, विज्ञान या राजनीति) सुलझा सके। यह एक बहती हुई धारा है, जिसका आनंद केवल 'अभी' और...

Read Free

शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान By Vedanta Life Agyat Agyani

वेदान्त 2.0: शून्य की सत्ता और चेतना का आधुनिक विज्ञान — एक वृहद शोध रिपोर्ट प्रस्तुत शोध रिपोर्ट 'अज्ञात अज्ञानी' (Agyat Agyani) द्वारा प्रतिपादित 'वेदान्त 2.0' के दार्शनिक और वैज...

Read Free

भक्त का रक्षक भगवान By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति- (३०) की व्याख्या यह मन्त्र ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 32, मन्त्र 14) है। यह सूक्त मुख्यतः इन्द्र की स्तुति में है।मन्त्र---कस्तमिन्द्र त्वावसुमा मर्त्यो दधर्षति।(ऋग्वेद...

Read Free

आन्तरिक पुकार By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद (31)की व्याख्या "इमं न: श्रणुहवम्"ऋगुवेद --10/26/9भावार्थ--हे ईश्वर मेरी प्रार्थना को सुनो। ऋग्वेद में प्रयुक्त पद “इमं नः शृणु हवम्” (मेरी/हमारी प्रार्थना को सुनो) कई सूक्त...

Read Free

स्त्री - दृश्य नहीं, दर्शन है By Vedanta Life Agyat Agyani

Vedanta 2.0 Life स्त्री — दृश्य नहीं, दर्शन है धर्म, पाखंड और विश्वगुरु का मौन सत्यजब पुरुष स्त्री को समझ नहीं पाया, तभी धर्म पैदा हुआ। जब प्रेम नहीं समझा गया, तभी शास्त्र लिखे गए।...

Read Free