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चौपड़े की चुड़ैलें - 4 - अंतिम भाग
द्वारा PANKAJ SUBEER
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चौपड़े की चुड़ैलें (कहानी : पंकज सुबीर) (4) यह जो रसायनों की उत्पत्ति थी यह आने वाले दिनों में और, और, और का कारण बनने वाली थी और बनी ...

मुझे याद रखना - 4
द्वारा Ayushi Singh
  • 180

वह चुड़ैल हवा में उड़कर मेरी कार के बोनेट पर बैठ गई और बिना देर किए उसने काँच तोड़ दिया और एक झटके में ड्राइवर का सिर धड़ से ...

साइबर घोस्ट
द्वारा Chandresh Kumar Chhatlani
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"नहीं... अंदर मत आना... " दरवाज़ा खोलते ही चीखते हुए स्वर आया। आवाज़ दिया की ही थी। "बेटा, मैं हूँ - मम्मा।" कहते हुए उसकी माँ उस अंधेरे कमरे ...

मधुरिमा - भाग (१)
द्वारा Saroj Verma
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चल राजू,जल्दी से खाना खाकर तैयार हो जा,रात को दस बजे हमारी ट्रेन है, मां ने मुझसे कहा____     मैंने कहा ठीक है मां और मैंने अपने कंचे,चंदा-पवआ खेलने ...

चौपड़े की चुड़ैलें - 3
द्वारा PANKAJ SUBEER
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चौपड़े की चुड़ैलें (कहानी : पंकज सुबीर) (3) उस रात के बाद से सब कुछ बदल गया। सब कुछ बदल गया मतलब यह कि चौपड़े का सारा माहौल ही ...

पहेली - 1
द्वारा Sohail Saifi
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तिथि 31 मार्च 1990एक अज्ञात व्यक्ति एक नवजात शिशु को कुमार फैमिली के घर के बाहर रख कर चला जाता हैँ¡ कुमार फैमिली मे एक अधेड उम्र का जोड़ा ...

चौपड़े की चुड़ैलें - 2
द्वारा PANKAJ SUBEER
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चौपड़े की चुड़ैलें (कहानी : पंकज सुबीर) (2) क़स्बे के जवान होते लड़कों के लिए चौपड़ा मुफीद जगह थी दिन काटने की। चौपाल पर बूढ़ों का कब्ज़ा था और ...

अजनबी
द्वारा Saroj Verma
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मेरा गांव झांसी से साठ किलोमीटर दूर है और मेरी ट्रेन का रिजर्वेशन झांसी से था दिल्ली तक के लिए, मैं अपने मां बाबूजी से मिलने गई थी।। गांव ...

चौपड़े की चुड़ैलें - 1
द्वारा PANKAJ SUBEER
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चौपड़े की चुड़ैलें (कहानी : पंकज सुबीर) (1) हवेली वैसी ही थी जैसी हवेलियाँ होती हैं और घर वैसे ही थे, जैसे कि क़स्बे के घर होते हैं। कुछ ...

दरिंदे की वापसी - A Horror mystery
द्वारा सोनू समाधिया रसिक Verified icon
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?दरिंदे की वापसी ?                  ~~~~~~~~~~~~~~~~~~                       A_horror_mystery ⚔️लेखक :- सोनू समाधिया रसिक ?? रमण ...

मुझे याद रखना - 3
द्वारा Ayushi Singh
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अब मेरी हालत ऐसी थी कि कमरे में मैं रुक नहीं सकता था और बाहर मैं जा नहीं पा रहा था, दरवाजा अभी तक नहीं खुल रहा था। कल ...

वो कौन था ?
द्वारा Mohd Siknandar
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इस कहानी की शुरुआत बर्लिन (जर्मनी ) से लगभग 60 किलोमीटर दूर पौलेंड के छोटे से गाँव ओसिनोवा डोलनी मे होती है । जिनमे से करीब 150 लोग बाल-काटने ...

खोफ - 24
द्वारा SABIRKHAN Verified icon
  • (16)
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“सोच लो फिर मै तुम सब की बेबसी पर दुबारा रहम नही खाऊंगी। हमें भी औलाद नहीं रहना है अपने बच्चों को जिंदा देखने के लिए हम कुछ भी ...

मुझे याद रखना - 2
द्वारा Ayushi Singh
  • (17)
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" मुझे याद रखना " इतना कहकर वह गायब हो गई और यह सुनते ही मैं बुरी तरह से काँपने लगा और उस घने अंधेरे में भी मेरी आँखों ...

उस रात की बात
द्वारा Ajay Kumar Awasthi Verified icon
  • (32)
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      रुक रुक बादल भयंकर गर्जना कर रहे थे । थोड़ी थोड़ी देर में बिजली चमकती और फिर तेज गड़गड़ाहट की आवाज़, फिर लगता कि आसमान फट ...

प्रेम मोक्ष - 9
द्वारा अ, का, पुत्र
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सर्दियों का खिला हुआ समां था, जोरदार ठण्ड मे अमृत समान धुप अपने चरम ताप पर थी। खेती मे किसान जी तोड़ मेहनत कर रहे थे।  उनकी औरते भी ...

अतृप्त आत्मा - 3 - अंतिम भाग
द्वारा pratibha singh
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  • 690

वो चुड़ैल अपनी भयानक शक्ल लिए मेरे सामने खड़ी थी , और डर के मारे मेरी घिग्घी बंधी हुई थी न तो मैं आगे बढ़ पा रही थी न ...

खौफ - 23
द्वारा SABIRKHAN Verified icon
  • (11)
  • 790

 अब ऐसा रोतल मुंह बनाकर कब तक बैठोगे..? समीर ने उतरे हुए चेहरे को देखकर प्रिया ने उसको टोका।तुम जानते हो वह तुम्हारा प्रेम लेकर गई है ! तुम ...

अधूरी हवस - 24 - अंतिम भाग
द्वारा Balak lakhani Verified icon
  • (72)
  • 3.1k

  मिताली बहोत ही उत्सुक होती है, डायरी को लेकर पढ़ने ही तलब लगी थी उसे वोह अपने आप को रोक नहीं पाई पल भर के लिए भी और ...

मुझे याद रखना - 1
द्वारा Ayushi Singh
  • (14)
  • 918

आज ही हरिद्वार से देहरादून आया हूँ। सच में देहरादून की खूबसूरती के बारे में जितना सुना है उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत जगह है यह। रास्ते भर प्रकृति की ...

प्रेम मोक्ष - 8
द्वारा अ, का, पुत्र
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अजाब सिंह ने दिलबाग से जिस दिन आने का वादा किया था। उस दिन अजाब दिलबाग के पास ना जा कर नेहा के माता पिता की छान बिन में ...

खौफ - 22
द्वारा SABIRKHAN Verified icon
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  • 1.1k

बारिश की बौछार के कारण भीगे हुए समीर और प्रिया मजर के परिसर में खड़े थेल। वहां पानी तो नहीं गिर रहा था पर चारों तरफ धोधमार बरस रही ...

अधूरी हवस - 23
द्वारा Balak lakhani Verified icon
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अचानक से दो साल गुजर जाने के बाद मिताली का कोल आता है राज के ऊपर. मिताली :हैलो, केसे हो? (आवाज सुन कर चौक जाता है, वोह तुरंत पहचान ...

भूत बंगला.... - भाग ७
द्वारा Sanket Vyas Sk, ઈશારો
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          आगे भाग ६ में हमने आत्मा का वो रूप देखा जैसा हमने कभी भी सोचा नहीं, आत्मा को आजतक हम बूरी बला ही मानते ...

माघ की काली रात - 7 - अंतिम भाग
द्वारा Bhupendra Dongriyal
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                            (7) चैतराम की बात सुनकर वहाँ उपस्थित सभी मजदूरों एवं दानसिंह के मन में चैतराम ...

ख़ौफ़ - 21
द्वारा SABIRKHAN Verified icon
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खटपटिया मीटिंग मे से जैसे ही वापस लौटा जगदीश ने समीर के नंबर से फोन  रिकॉर्ड होने की बात कही। तत्काल खटपटियाने उस कॉल को बार-बार सुनी। आवाज समीर ...

भूत बंगला.... - भाग ६
द्वारा Sanket Vyas Sk, ઈશારો
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    आगे के भाग ५ में हमने देखा की प्राची अचानक ही कोई दूसरे अंदाज़ में चेतन से कहने लगती है की "तुम लोग अगर जो निकल गए ...

प्रेत के साथ ईश्क - भाग-१७
द्वारा Jaydip bharoliya Verified icon
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"जब हम घड़ी के बारे में पूछताछ करने के लिए प्रिंसिपल ऑफिस में गए थे तभी मुझे प्रिंसिपल पर शक हुआ था। इसीलिए तभी प्रिंसिपल के टेबल के नीचे ...

अधूरी हवस - 22
द्वारा Balak lakhani Verified icon
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राज  का नशे मे रहने का अब रोज का हो जाता है, ना अपने दोस्त को भी कुछ बताता है, अपने अंदर ही अंदर सब बाते दबा के रखता ...

माघ की काली रात - 6
द्वारा Bhupendra Dongriyal
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                  (6)           बुजुर्ग मन बहादुर ने चैतराम के सिर पर भभूति लगाई और उसे पूछा,"बता कौन ...