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सुबह Aashi कॉलेज की लाइब्रेरी में बैठी अपनी नई कहानी के लिए कुछ विचार लिख रही थी...
ऐसे ही दिन बीतते गए। हमारी eye contact अब थोड़ी ज़्यादा होने लगी, जैसे चलते वक्त...
एपिसोड 52: बेसमेंट 21 का दरवाज़ारात काफी गहरी हो चुकी थी।शहर की सड़कें लगभग खाली...
अध्याय:08मुस्कुराहटों का बाजार शहर के सबसे व्यस्त बाज़ार की एक छोटी सी दुकान में...
अधूरी किताबएपिसोड 75 — नैना की असली शक्ति“अब तुम्हारी बारी है।”आर्या की आवाज़ नै...
सुबह से ही कंपनी की बिल्डिंग में एक अलग तरह की हलचल थी।कल तक जिस राहुल को ज्यादा...
कुछ दिनों बाद अग्निहोत्री हाउस फिर से चहक उठा। आज रितांशी पगफेरे के लिए अपने माय...
हवेली चारों तरफ से टूटी-फूटी, बेलों और धूल से ढकी हुई है।बिजली चमकती है — और दीव...
### पहचान### सीज़न 1 — अध्याय 5### एक सैनिक का संकल्पअमृतसर के शरणार्थी शिविर मे...
जब अहंकार ने विवेक को हरा दियाशूर्पणखा का अपमान और रावण के भीतर जागता क्रोधरावण...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
आधी रात का रिस्क... एक खिड़की का दीदार और छूटा हुआ जूता! शिव, दिनेश और शैलेंद्र का मास्टरप्लान: कुत्तों से ध्यान भटकाना, तीन की शेड पर पत्थर मारना और बिना आवाज बाइक खींच ले जाना। प...
बहुत पुराने ज़माने की बात है। एक छोटा-सा गाँव था। उसी गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। उसका पति कब का मर-खप चुका था। घर में बस वही बूढ़ी औरत और उसका एक इकलौता बेटा बचा था। अब बेटा...
बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी हवा के बीच जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं, तो पूरा शहर...
"Sahitya Ka Circus" ek kalpanik, vyangyatmak rachna hai. Sabhi patra, ghatna kalpanik hain. Iska kisi vastavik vyakti, lekhak (Premchand/Manto/Ghalib), sanstha se koi samb...
मियां-बीवी की खट्टी-मीठी नोकझोंक से भरपूर कहानी -(प्यार भी तुमसे और टकरार भी ) ( डॉक्टर बीवी और बेचारा मरीज पति ) ️भाग–1 रात के ठीक ग्यारह बजे...पूरा मैरिज हॉल तालियों से गूंज...
बारिश की हल्की-हल्की बूंदें शहर को किसी फिल्म जैसा बना रही थीं।लेकिन उस खूबसूरत मौसम से बिल्कुल उलट थी अनन्या मिश्रा की हालत।"हे भगवान... आज ही लेट होना था!"वह एक हाथ में क...
कामदेव के वाण और प्रजातंत्र के खतरे यशवन्त कोठारी होली का प्राचीन संदर्भ ढूंढने निकला तो लगा कि बसंत के आगमन के साथ ही चारों तरफ कामदेव अपने वाण छोड़ने को आतुर हो जाते हैं मा...
मैं, सतोशी नाकामोतो, और एक लकड़ी का फलसफ़ा चारों तरफ घना अँधेरा। मैं एक अजीब सी जगह पर था। मैंने अपने हाथों को देखने की कोशिश की, पर वहाँ कुछ था ही नहीं, सिर्फ घुप्प अँधेरा। "...
किस्मत का ‘विसर्जन’ और वह अनोखा मेहमान मकान का हाल: बरेली की सबसे तंग गली बरेली के एक पुराने इलाके में, जहाँ गलियाँ इतनी तंग हैं कि दो साइकिलें साथ निकल जाएँ तो जगह कम पड़ जा...
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