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जब भी कोई भावनाओं की बात करता, वह उसे बीच में ही टोक देता। उसके लिए अब औरतें सिर...
जब 18 साल की अनाया ने शहर के बड़े कॉलेज जाने के लिए अपने पिता से कार की चाबी माँ...
जन्म एक बार, अवतार अनेक बारवेदान्त 2.0 — 0 से 0 तक की यात्रालेखक: अज्ञात अज्ञानी...
रात का गहरा सन्नाटा छाया हुआ था।जुशेंग अभी भी अपने कमरे की बालकनी में खड़ा काले...
चार सहेलियाँ, एक से बढ़कर एक खुराफ़ातें और कांड ऐसे कि हँसते-हँसते पेट दुख जाए!...
भाग 3 — जीवन के अनसुलझे प्रश्नसमय अपनी गति से आगे बढ़ रहा था। देखते ही देखते विभ...
Mr. & Ms. FakeEpisode 41 – The Secret Behind Three Marks“मैंने ही Project S-21 श...
(सन्नाटा… बाहर बारिश धीरे-धीरे गिर रही है। कमरे में हल्की पीली लाइट जल रही है। स...
सुबह से ही ऑफिस में कुछ अलग माहौल था.हर कर्मचारी के चेहरे पर उत्सुकता दिखाई दे र...
Writingगहरे अंधेरे कमरे में ऊँची खिड़की से आती हल्की-सी चाँद की रोशनी एकमात्र उज...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
आधी रात का रिस्क... एक खिड़की का दीदार और छूटा हुआ जूता! शिव, दिनेश और शैलेंद्र का मास्टरप्लान: कुत्तों से ध्यान भटकाना, तीन की शेड पर पत्थर मारना और बिना आवाज बाइक खींच ले जाना। प...
बहुत पुराने ज़माने की बात है। एक छोटा-सा गाँव था। उसी गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। उसका पति कब का मर-खप चुका था। घर में बस वही बूढ़ी औरत और उसका एक इकलौता बेटा बचा था। अब बेटा...
बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी हवा के बीच जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं, तो पूरा शहर...
"Sahitya Ka Circus" ek kalpanik, vyangyatmak rachna hai. Sabhi patra, ghatna kalpanik hain. Iska kisi vastavik vyakti, lekhak (Premchand/Manto/Ghalib), sanstha se koi samb...
मियां-बीवी की खट्टी-मीठी नोकझोंक से भरपूर कहानी -(प्यार भी तुमसे और टकरार भी ) ( डॉक्टर बीवी और बेचारा मरीज पति ) ️भाग–1 रात के ठीक ग्यारह बजे...पूरा मैरिज हॉल तालियों से गूंज...
बारिश की हल्की-हल्की बूंदें शहर को किसी फिल्म जैसा बना रही थीं।लेकिन उस खूबसूरत मौसम से बिल्कुल उलट थी अनन्या मिश्रा की हालत।"हे भगवान... आज ही लेट होना था!"वह एक हाथ में क...
कामदेव के वाण और प्रजातंत्र के खतरे यशवन्त कोठारी होली का प्राचीन संदर्भ ढूंढने निकला तो लगा कि बसंत के आगमन के साथ ही चारों तरफ कामदेव अपने वाण छोड़ने को आतुर हो जाते हैं मा...
मैं, सतोशी नाकामोतो, और एक लकड़ी का फलसफ़ा चारों तरफ घना अँधेरा। मैं एक अजीब सी जगह पर था। मैंने अपने हाथों को देखने की कोशिश की, पर वहाँ कुछ था ही नहीं, सिर्फ घुप्प अँधेरा। "...
किस्मत का ‘विसर्जन’ और वह अनोखा मेहमान मकान का हाल: बरेली की सबसे तंग गली बरेली के एक पुराने इलाके में, जहाँ गलियाँ इतनी तंग हैं कि दो साइकिलें साथ निकल जाएँ तो जगह कम पड़ जा...
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