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वहीं दूसरी ओर, अली एक पीली साड़ी पहने लड़की का पीछा कर रहे थे। उन्होंने उस लड़की...
भाग ३ — पापा की अपेक्षाएँमिहिर ने सोचा था कि घर का माहौल अब थोड़ा हल्का हो जाएगा...
Mr. & Ms. FakeEpisode 20 – One Day, One Heartअगली सुबह...सान्वी ने जैसे ही आँखें...
रिया की ज़िंदगी में उलझनों और वादों के लिए कभी कोई जगह नहीं थी। पच्चीस साल की उम...
विरोध नहीं, जागरणकेवल बात करने से यदि सब कुछ संभव होता, तो यह संसार कब का स्वर्...
कमरे में एक बार फिर सन्नाटा छा गया।मैंने धीरे-धीरे अपनी हथेलियों की ओर देखा।ये ह...
नींव के पत्थरहमारे आसपास कुछ ऐसे व्यक्ति होते हैं, जो अपने अच्छेस्वभाव, संस्कारो...
SCENE 2. "........ तुम बाग़ीचे में उसके साथ क्या कर रही थी?............क्या तुमन...
Part 7 — वह आवाज़ किसकी थी?दरवाजे पर लगातार दस्तक हो रही थी।“क्योंकि अब मुझे पता...
“यह कैसे हो सकता है? जिस दिन मैंने मैनेजर की शिकायत की थी, उसी दिन से वह मिसिंग...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
बनारस की सुबह हो और चौराहे पर चाय-पान की दुकान पर पंचायत न हो, ऐसा तो बनारस के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं है। सुबह की ताजी ठंडी हवा के बीच जब घाटों पर घंटियाँ बजती हैं, तो पूरा शहर...
मियां-बीवी की खट्टी-मीठी नोकझोंक से भरपूर कहानी -(प्यार भी तुमसे और टकरार भी ) ( डॉक्टर बीवी और बेचारा मरीज पति ) ️भाग–1 रात के ठीक ग्यारह बजे...पूरा मैरिज हॉल तालियों से गूंज...
बारिश की हल्की-हल्की बूंदें शहर को किसी फिल्म जैसा बना रही थीं।लेकिन उस खूबसूरत मौसम से बिल्कुल उलट थी अनन्या मिश्रा की हालत।"हे भगवान... आज ही लेट होना था!"वह एक हाथ में क...
कामदेव के वाण और प्रजातंत्र के खतरे यशवन्त कोठारी होली का प्राचीन संदर्भ ढूंढने निकला तो लगा कि बसंत के आगमन के साथ ही चारों तरफ कामदेव अपने वाण छोड़ने को आतुर हो जाते हैं मा...
मैं, सतोशी नाकामोतो, और एक लकड़ी का फलसफ़ा चारों तरफ घना अँधेरा। मैं एक अजीब सी जगह पर था। मैंने अपने हाथों को देखने की कोशिश की, पर वहाँ कुछ था ही नहीं, सिर्फ घुप्प अँधेरा। "...
किस्मत का ‘विसर्जन’ और वह अनोखा मेहमान मकान का हाल: बरेली की सबसे तंग गली बरेली के एक पुराने इलाके में, जहाँ गलियाँ इतनी तंग हैं कि दो साइकिलें साथ निकल जाएँ तो जगह कम पड़ जा...
मंगलाचरण: एक रहस्यमयी आकृति गर्मी की दोपहर हो या सर्दियों की गुनगुनी धूप, मोहल्ले की उस २० फुट चौड़ी सड़क के बाएं कोने पर एक 'अजूबा' हमेशा मौजूद रहता है। दूर से देखने वा...
रामू: जो खुद को बहुत समझदार मानता है। श्यामू: रामू का पड़ोसी, जो थोड़ा सीधा है लेकिन मौके पर चौका मारता है। बसंती चाची: मोहल्ले की "न्यूज़ चैनल"। इन्हें सबके घर की खबर होती...
"अबे यार आराम से चल ना,,, मैराथन में नही ट्रिप पर जा रहे हम रुक जा मेरी मांआआ,,," एक लड़की जींस शर्ट पहने,लंबे खुले बाल, हल्का मेकअप, भूरी गहरी आखें जिस पर मॉर्डन गोल स...
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