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कामिनी कथा नगेंद्र साहित्य पुरस्कार 2020 के नामांकित एवं द्वितीय पुरस्कार विजेता...
बुझता दीपक (एक मार्मिक कथा)कोयले की धूल और लाल मिट्टी से घिरे छोटे-से गाँव में झ...
मुंबई। सपनों और संघर्षों का यह शहर हर रोज़ हजारों कहानियाँ रचता और मिटाता रहता ह...
भाग 1: अटूट प्रेम और विश्वासघातबनारस की तंग गलियों और गंगा के घाटों पर गूंजती आर...
मंगलवार का दिन था, सूरज सिर पर चमक रहा था और दोपहर के ठीक 12 बज रहे थे। मैं हॉस्...
जिंदगी की दूसरे किनारा पार्ट 13और वहीदीप्ति उस गलियों से गुजरते हुए आगे चली जाती...
। । वीर को प्रकाश अंकल की कल की कही हुई बात याद आ जाती है , कि दुनिया तुम्हें तभ...
(एक लकीर का धारावाहिक) परसुत करने को हूँ, मगर ये बात कहने को याद आ गयी बिलकुल ट...
Episode -15 (धड़कने कुछ कहती हैं) रिया ने अपनी आँखें धीरे - धीरे से खोलनी शुरू क...
एपिसोड 22: नई शाखाएं, लड़कियों की शिक्षा और कहानी का समापन रिया और आरव का सपना अ...
गाजा पट्टी और अन्य सीमाओं पर इजराइल का तनाव जारी था, रूस और यूक्रेन के बीच तनाव कभी खत्म नहीं हो रहा था। चीन, जापान, ताइवान और फिलीपींस जब भी मौका मिलता था एक-दूसरे को चॉपस्टिक चु...
अजगर करे ना चाकरी,पंछी करे न काम,दास मलूका कह गए,सबके दाता राम..... सेठ मतकू राम अंदर आते हुए अपने पेट पर हाथ फेरते हुए यह कहता है.. तभी अंदर से आवाज आती है कोई नई ताजी खबर...
??घंटी ?? छबिली लैला से, " ये बात बात में तू घंटी क्यों बजाती रहती है ?" लैला, "क्या करूँ यार तुझे तो पता ही है तेरे जीजाजी स्कूल मास्टर हैं , चिल्ला चिल्ला के मर...
ये मेरी पहली कहानी है! मातृभारती पर! अगर कोई भी गलती हुई हो तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ ! गुटखा चबाते हुये बड़े ही स्टाईल से जब चरणनन्दन ने घर में प्रवेश लिया तभी अचानक से उसके सिर पर...
आप सभी प्रेरक पाठक गणों को मेरा (संदीप सिंह का) राम-राम, गुरु आप लोग खुशहाल और चकाचक (स्वस्थ) होंगे| ईश्वर का आशीर्वाद आप सभी पर सदैव बना रहे और अना-पेक्षित हालातों की बारिश मे छात...
“अरे अंकल! चल रहे हैं “? राहुल ने पूछा। कहां चलना है, पूछने पर राहुल ने उत्तर दिया, “आपको पता नहीं है, दो दिन पहले राकेश अंकल गिर पड़े थे जिससे उनके कमर की हड्डी टूट गई थी, अस्प...
मेरी मति मारी गयी थी कि पिछले साल मई की एक दुपहरिया में "मर्द उद्धार शिविर" में एक दोस्त के साथ पहुँचा शायद मेरे दोस्त ने मेरी बीवी के सामने मेरी बोलती बन्द जैसी हालत दे...
जूनियर कॉलेज पास करके डिग्री में कदम रखा ही था, ज्यादा कुछ बदलाव नही आया था सिवाय इसके कि, जूनियर कॉलेज में लड़कियों से दोस्ती करने की उम्मीद में नज़रें बिछी रही और यही उम्मीद पास हो...
प्रस्तुत हास्य व्यंग्य के धारावाहिक में एक आम नागरिक मामा मौजी राम और उनके शिष्य सवालीराम के किस्से हैं।अपने पास-पड़ोस में बिखरे हास्य के प्रसंगों को एक दीर्घ कथा सूत्र में पिरो कर...
विनोद को फ़िल्में देखने का बहुत शौक़ था । उसका बस चलता, तो रोज़ एक फ़िल्म देख लेता । लेकिन तब, यानी १९७० के दशक में तो कई फ़िल्में छोटे शहरों और कस्बों तक में भी चार-छः हफ्ते चल ही जाती...
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