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मेरी माँ
द्वारा अनुभूति अनिता पाठक
  • 176

तीज आने वाली है। हर सुहागन का एक ख़ास और ख़ुबसूरत त्यौहार। पहली बार तीज या युँ कहुँ तो पूरा सावन - भादो बहुत कुछ याद दिला गया .....रूला ...

रिमोट न्यूरल मोनिटेरिंग: इंसान को वश में करने की एक भयावह तकनीक
द्वारा Yashraj Bais
  • 174

परिचय: क्या कभी आपने सोचा है, की किंचित ऐसी कितनी बातें होगी तो केवल और केवल आप जानते है। मनुष्य के दिमाग़ में ऐसे सहस्त्रों रहस्य होते हैं, जिन्हें  वह अपने अंतः ...

कोई तो नहीं देख रहा
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 1.2k

५ जून ,'विश्व पर्यावरण दिवस 'पर विशेष लघुकथा कोई तो नहीं देख रहा [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] सेमीनार बहुत अच्छी रही, यूनिवर्सिटी के सीनेट भवन से लौटते हुये वे ...

जीवन में दस्तक देता सिनेमा
द्वारा VIRENDER VEER MEHTA
  • 440

जीवन में दस्तक देता सिनेमा                ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सिनेमा मानव जीवन का, अपने प्रारंभिक (उद्भव) काल से ही एक ...

आज जैसे ही उपयोगी थे पुराने नियम
द्वारा Omprakash Kshatriya
  • 445

आज जैसे ही उपयोगी थे पुराने नियम कोरोना महामारी से दुनिया सिमटी बैठी है. इस महामारी ने दुनिया को नए सिरे से सोचने में मजबूर कर दिया है. अमेरिका, ...

कोरोना
द्वारा Monty Khandelwal
  • 621

Corona एक तरफ जहाँ पूरा पूरा विश्व corona vairus से जुझ रहा है जिस वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई। जहां पूरा बाजार एक मांसाहारी व्यंजन के कारण ...

तस्वीर
द्वारा Satender_tiwari_brokenwordS
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  • 2.3k

ये कहानी एक काल्पनिक रचना हैं और इसके सभी पात्र काल्पनिक हैं। ___________________________________________तस्वीर एक ऐसी कहानी है , जहां एक दोस्त अपनी दोस्ती की दास्ताँ लिखता , दोस्ती होने के ...

पढ़ने का धैर्य
द्वारा kaushlendra prapanna
  • (13)
  • 896

  कौशलेंद्र प्रपन्न शायद दुनिया में यदि कोई कठिन और श्रमसाध्य कार्य है तो वह पढ़ना ही है। कोई भी पढ़ना नहीं चाहता। हर कोई पढ़ाना चाहता है। हर ...

प्रेम - मैंने देखा है
द्वारा Shivani Mishra
  • (12)
  • 788

पता है जब आप प्रेम में होते हो तो बहुत कुछ करते हो एक दूसरे के लिए पर कुछ वक्त बाद जब प्रेम थोड़ा सा पुराना हो जाये तो ...

कब तक ?
द्वारा Ritu Dubey
  • 929

कुछ सवाल ऐसे है जिनके उत्तर हम सब जानते है फिर भी अनजान बने रहते है ...

प्यारी दोस्त - 1
द्वारा Unknown
  • 908

मेरी दोस्त मुझसे नाराज़ थी , हा मेरी दोस्त कंजूस(दोस्त को कंजूस की उपमा) मुझसे नाराज़ थी। उसकी बात करू तो अब तक की मेरी सबसे अच्चीदोस्त ।       ...

थकावट, अकेलापन और तनाव से निपटने के लिए एक सरल विधि।
द्वारा Rakesh Sharma
  • 888

“मुझे पता चला कि जब मैंने अपने विचारों पर विश्वास किया था, तो मुझे पीड़ा हुई, लेकिन जब मैंने उन पर विश्वास नहीं किया, तो मुझे पीड़ा नहीं हुई, ...

लक्ष्य
द्वारा Rudra
  • 742

Book Title - ? Book Author - रूद्र नमस्ते, मेरा नाम रूद्र है । धन्यवाद !! आप सभी का मुझे इतना प्यार देने के लिए, IMRrudra की सोच को ...

उजड़ता आशियाना - अनकही दास्तान - 5
द्वारा Mr Un Logical
  • 574

वह एक थकी हुई सी शाम थी,हर तरफ खामोशी फैली हुई थी।लग रहा था जैसे कोई तूफान गुजरा था।जिसके द्वारा किये गये बर्बादी पर मातम मनाया जा रहा हो।कई ...

मंजिल और रास्ते
द्वारा Rudra
  • 1k

Book Title – एक ख़ूबसूरत सफर By IMRudra Author – Rudra Book Description - मंजिल की ख़ुशी से ज्यादा अधिक ख़ूबसूरत वो सफर होता है जिस पर चलकर आप ...

“इश्क़ होना जरुरी है”
द्वारा Rudra
  • 716

  Title - “इश्क़ होना जरुरी है”   Author – Rudra Presented by – IMRudra – The Life Coach Content Writer – Rudra            About The Author ...

उजड़ता आशियाना - जीवन पथ - 4
द्वारा Mr Un Logical
  • 544

किसी ने क्या खूब कहा है।जन्म हुआ तो मैं रोया और लोग हँसे, मौत आयी तो सब रोये मैं चैन से सोता रहा।ऊँची नीची जीवन पथ पर चलते चलते, ...

फेक न्यूज़ के खतरें हज़ार
द्वारा Yashwant Kothari
  • 827

फेक न्यूज़ याने झूठीं ख़बरों के  बड़े  खतरे                             यशवंत कोठारी फेक न्यूज़ के खतरे सर पर चढ़ कर बोलने लगे हैं. क्या सरकार ,क्या पार्टियाँ और क्या चुनाव ...

उजड़ता आशियाना - पतझड़ - 2
द्वारा Mr Un Logical
  • 611

आज बहुत दिनों के बात एक सुहानी शाम को कुछ फुरसत के पल मिले थे।ऐसा लग रहा था जैसे हम कितने दूर निकल गए,और बहुत कुछ पीछे छूट गया ...

तीसरी उम्र के लिए तैयारी
द्वारा r k lal
  • (26)
  • 709

तीसरी उम्र के लिए तैयारी तीसरी उम्र लगभग 55और 80 की उम्र के बीच की मानी जाती है जो आम तौर पर सेवानिवृत्ति से थोडा पहले से ही शुरू हो ...

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस विश्व महाशक्ति – किसका नेतृत्व, कौन दावेदार
द्वारा Utpal Chakraborty
  • 506

लेखक - उत्पल चक्रबोर्ती हिंदी सह-लेखक - रोहित शर्मा आज सम्पूर्ण विश्व में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) का डंका जोरों शोरों से बज रहा है, कंप्यूटर साइंस की इस विधा ...

जीवन की खीज से निपटने के लिए एक मंत्र।
द्वारा Rakesh Sharma
  • 567

जब में ये लिख रहा हु, मेरी एक बहस हुई है, दिन की सुरुवात में, नींद की कठिनाइय, जीवन में बदलाव, एक कार्यभार जो बहुत अधिक है। जैसा कि ...

उजड़ता आशियाना
द्वारा Mr Un Logical
  • 657

अनहोनी की निशानी होती है कि हमें अंदाजा नहीं होता,और जो हो जाता फिर उस से उबरने के कोई रास्ता नहीं होता।लेकिन अक्सर जिसे हम अनहोनी कहते या समझते है ...

विश्व शांति मेरी दृष्टि मैं(motivational)article - विश्व शांति मैरी दृष्टि मैं
द्वारा Shaimee oza Lafj
  • 719

"विश्व शांति मेरी दृष्टि मैं,शांती शब्द का सीधा तालुक परमात्मा की और हम को ले जाता है, जब हम परमतत्व से सीधे कनेक्ट होते है तो हम को शांति ...

परीक्षा को न बनाए हौव्वा
द्वारा Archana Singh
  • 567

परीक्षा को न बनाएॅं हौव्वा परीक्षा आते देख बच्चे व माता-पिता भी तनावग्रस्त हाने लगते हैं पर आवश्यकता है धैर्य की ताकि विवेक से आने वाले कल के लिए ...

जाने देने का अभ्यास।
द्वारा Rakesh Sharma
  • 524

ऐसा समय होता हैं जब हमारा दिमाग किसी चीज से कसकर चिपक जाता है, और यह शायद ही कभी मददगार होता है: मैं सही हूं, दूसरा व्यक्ति गलत है।वह ...

शक्ति का एक छिपा हुआ स्रोत।
द्वारा Rakesh Sharma
  • 622

लगभग हम में से हर एक हमारी शक्ति को दूर करता है, बिना सोचे समझे। उदाहरण के लिए: कोई व्यक्ति ऐसा कुछ असंगत या उल्लंघन करता है जो आपको ...

जब डर आपको सार्थक काम करने से रोक रहा है
द्वारा Rakesh Sharma
  • 585

मैं हाल ही में एक दोस्त के साथ एक चर्चा कर रहा था जो अपने आप को उस उद्देश्यपूर्ण कार्य को करने से रोक रहा है जो वह सोचता ...

बेचारे पुरुषों का दर्द कौन समझे ?
द्वारा Mangi
  • 770

मैं जैसे ही ऑफिस में लंच के लिए बैठा तो फोन रनकने लगा ! देखा तो, " बॉस का कॉल "। अरे, उसे कॉल क्यो कहु ? आफ़त की पुड़िया ...

मैं...
द्वारा Harshad Molishree
  • 634

इंसानियत की बस्ती जल रही थी, चारों तरफ आग लगी थी... जहा तक नजर जाती थी, सिर्फ खून में सनी लाशें दिख रही थी, लोग जो जिंदा थे वो ...