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तीनों एकदम वहीं ठिठक गए।वह कोई गाना नहीं था… बस एक धुन थी।कोई शब्द नहीं, फिर भी...
हॉल के उस तनावपूर्ण माहौल के बाद रात धीरे-धीरे सुल्तान मेंशन पर हावी हो रही थी।...
------------------------------ अध्याय 8: मृत्यु और जीवन का उद्देश्य (अंतिम सच: श...
"प्रिया, हाँ माँ..." कमरे में बैठी प्रिया ने किचन से आ रही आवाज़ की तरफ मुँह करक...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 29: चेहरों का जंगलकालवन की हवा अचानक भारी ह...
मारकेश कहता है, " तुम्हें पता भी है तुम किस तलवार का नाम ले रहे हो, और वह तुम्हा...
कविताओं का संग्रह-भाग:1 लेखिका ...
एपिसोड 30: अंधेरे की अंतिम परछाईशहर की बेचैनीशहर में शांति लौटती दिख रही थी, लेक...
"पिछले अध्यायों से हम यह समझ रहे हैं कि परमात्मा अपने वास्तविक स्वरूप में निराका...
अध्याय 16 उच्च लड़ाकू योद्धा का उदयदिव्य नीलामी कला केंद्र से निकलने के बाद, विर...
धनबाद शहर , जहां के सड़को पर अशोक और राजबीर एक building से बाहर भागते हूए दिखता है । दोनो बाप बेटा शहर मे लड़कियों की smuggling और ड्रग्स का धंधा करता है , पर रुद्रा और एंथोनी जो अ...
रात का गहरा अंधेरा चारों तरफ फैला हुआ था। सड़क लगभग सुनसान थी। दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था। एक काली कार तेज़ रफ्तार से सड़क पर दौड़ी चली जा रही थी। उसकी हेडलाइट...
शिवपुर। एक ऐसा शहर… जहाँ रातें गोलियों की आवाज़ से शुरू होती थीं और लाशों पर खत्म। यहाँ लोग नाम से नहीं, गिरोह से पहचाने जाते थे। कानून सिर्फ दीवारों पर टंगे पोस्टरों में जिंदा...
राणा जैसे ही कमरे में प्रविष्ट हुआ तो चौंक उठा राज के सिर पर पट्टी बंधी हुई थी।उसके पास बैठते हुए राणा बोला, क्या रात में दीवार के साथ सिर टकराया था ?हां।अगर यह सच है तो तुम्हें पा...
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
खिड़की खुली जरा, जरा परदा सरक गया बहोत ही खबसूरत सा गाना सोनू नीगम का गाया हुआ रेडिओ पर बज रहा था और तभी रोडपर हंगामा हो गया. कोई राह चलता हुआ युवक एक महिला से टकरा गया जो सब्जीमंड...
रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
"प्यार, दोस्ती और अंतहीन सस्पेंस से बुनी एक ऐसी दास्तान, जहाँ हर कदम पर एक नया राज़ छिपा है। तीन दोस्त—अमन, कबीर और ज़ोया, जिनकी ज़िंदगी एक आलीशान कॉटेज में हमेशा के लिए बदल जा...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
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