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आदिनिधन
by Bhargav Patel
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आदिनिधननेत्र अनिमेष, देख रहे एक वृक्ष। और जो सोया है उसकी छाँव में। जानते हैं नेत्र उसे... सहज पहचानते हैं। और वृक्ष बन वहीं खड़ी वह रह गयी। ज्यों ...

शिवानी का टुनटुनवा
by Upasna Siag
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शिवानी आज सुबह से मन ही मन बहुत खुश थी। रात को अच्छे से नींद भी नहीं आयी फिर भी एक दम तरो-ताज़ा लग रही थी। पूजा पाठ में भी ...

बिग बैंग
by Pritpal Kaur verified
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फाइल पर आख़िरी टिप्पणी कर के अपने हस्ताक्षर चिपकाये, झटके से फाइल बंद की और अपनी झुकी हुयी गर्दन सीधी की. सामने दीवार पर लगी घड़ी पर नज़र डाली ...

एक जंगल एक भाषा
by Siraj Ansari
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एक बार जंगल की सत्ता सियारों के हाथ लग गयी। उन्होंने "हुआ-हुआ" की आवाज़ को ही जंगल की राष्ट्रभाषा घोषित करने का निश्चय किया और अंदर ही अंदर जंगल ...

हुस्न कि तख़लीक़
by Saadat Hasan Manto verified
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कॉलिज में शाहिदा हसीन-तरीन लड़की थी। उस को अपने हुस्न का एहसास था। इसी लिए वो किसी से सीधे मुँह बात न करती और ख़ुद को मुग़्लिया ख़ानदान की ...

ख़्वाब....जो बता न सके
by Satender_tiwari_brokenwords
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नैना की नौकरी विदेश में लग गयी थी। घर वाले खुश तो थे लेकिन वही बात है ना कि लड़की है कैसे रह पाएगी ? वही समाज के चार ...

हारता चला गया
by Saadat Hasan Manto verified
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लोगों को सिर्फ़ जीतने में मज़ा आता है। लेकिन उसे जीत कर हार देने में लुत्फ़ आता है। जीतने में उसे कभी इतनी दिक़्क़त महसूस नहीं हुई। लेकिन हारने में ...

बाबा मेरे बच्चे कैसे हैं ?
by Upasna Siag
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बाबा, मेरे बच्चे कैसे हैं ? ............. बोलो बाबा ! हर बार मेरी कही अनसुनी कर देते हो ...., अब तो बोलो ! ...

सबूत
by Dr Narendra Shukl
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सबूत सुच्चा सिंह , ये तू किन्हें उठा लाया है ?  सामने खड़े , दुबले-पतले से दिखने वाले ग्रामीण युवक तथा पास खड़ी , सांवले - मंझोले कद - ...

हामिद का बच्चा
by Saadat Hasan Manto verified
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लाहौर से बाबू हरगोपाल आए तो हामिद घर का रहा ना घाट का। उन्हों ने आते ही हामिद से कहा। “लो भई फ़ौरन एक टैक्सी का बंद-ओ-बस्त करो।” हामिद ने ...

ऐक लड़की की कहानी
by Savu Baleviya
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मे ऐक छोटे से गांव में रहती हूं .  मेरे गांव का नाम विरपुर है मुझे बसपन से कुछ बड़ा बनने का सपना है मेरे गांव के लिए कुछ ...

हाफ़िज़ हुसैन दीन
by Saadat Hasan Manto verified
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हाफ़िज़ हुसैन दीन जो दोनों आँखों से अंधा था, ज़फ़र शाह के घर में आया। पटियाले का एक दोस्त रमज़ान अली था, जिस ने ज़फ़र शाह से उस का ...

इंतक़ाम
by Shakuntala Sinha
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      कहानी  - इंतक़ाम    गर्मी की एक दोपहर में अर्चना के फ्लैट का कॉल बेल बजा  . वह अपनी विधवा बूढी माँ के साथ उस छोटे से ...

मुश्किल घड़ी न देखन दई
by Swatigrover
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पंचायत  का  फ़ैसला  आ  चुका  था। स्कूल  की  ज़मीन को पंचायत ने ख़रीद  लिया। और इस ज़मीन पर मंदिर, मस्ज़िद और  गुरुद्वारा  बनेगा ईसाई की संख्या गॉंव में न ...

हरनाम कौर
by Saadat Hasan Manto verified
  • (10)
  • 173

निहाल सिंह को बहुत ही उलझन हो रही थी। स्याह-व-सफ़ैद और पत्ली मूंछों का एक गुच्छा अपने मुँह में चूसते हुए वो बराबर दो ढाई घंटे से अपने जवान ...

चाट
by Pritpal Kaur verified
  • (19)
  • 348

बात सीधी सी थी, लेकिन उसकी गंध बेहद तीखी थी. तभी तो जया की ही नहीं पूरे मोहल्ले की नाकें अपने अपने ढंग से सुगबुगा गयी थी. नयी-नयी अकाउन्ट्स अफसर ...

हतक
by Saadat Hasan Manto verified
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दिन भर की थकी माँदी वो अभी अभी अपने बिस्तर पर लेटी थी और लेटते ही सो गई। म्युनिसिपल कमेटी का दारोगा सफ़ाई, जिसे वो सेठ जी के नाम ...

एक था लकड़बग्घा
by Siraj Ansari
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एक जंगल में सभी पशु-पक्षी बड़े प्रेम से रहते थे। सभी खुश थे और एक दूसरे के दुःख दर्द में भी काम आते थे। कभी कभी हल्की आंधी तूफान ...

अमृतसर रेल दुर्घटना विभीषिका 2018 पर 5 लघुकथाएं
by Chandresh Kumar Chhatlani
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19 अक्टूबर 2018 का दशहरा, भुलाये नहीं भुलता, जब अमृतसर में दशहरा मेला चल रहा था और रेल की पटरी पर खड़े होकर रावण दहन देखने वालों के ऊपर ...

ड्राईवर की दवाई
by Ajay Amitabh Suman
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भुवन का मेरठ में दवाई की दुकान चलाता था। रात को दुकान से आते आते काफी देर हो जाती थी।लिहाजा सुबह दुकान देर से जाता था। आज भी लगभग ...

हज्ज-ए-अकबर
by Saadat Hasan Manto verified
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इम्तियाज़ और सग़ीर की शादी हुई तो शहर भर में धूम मच गई। आतिश बाज़ियों का रिवाज बाक़ी नहीं रहा था मगर दूल्हे के बाप ने इस पुरानी अय्याशी ...

पल जो यूँ गुज़रे - 16
by Lajpat Rai Garg verified
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जाह्नवी के इन्टरव्यू की तिथि से चार दिन पूर्व की बात है। मुँह—अँधेरे निर्मल की नींद खुल गयी। कारण जाह्नवी को लगातार तीन—चार बहुत जोर की छींकें आर्इं। निर्मल ...

पहला प्यार
by Swatigrover
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पहली बार ईशा को कॉलेज के  फ्रेशर्स पर गाते हुए देखकर उसके चेहरे  को   तो  कम  ही  देखा पर  उसके  गाने  को  सुनकर लगा कि इस आवाज़ को हमेशा ...

हजामत
by Saadat Hasan Manto verified
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  • 160

“मेरी तो आप ने ज़िंदगी हराम कर रखी है…. ख़ुदा करे मैं मर जाऊं।” “अपने मरने की दुआएं क्यों मांगती हो। मैं मर जाऊं तो सारा क़िस्सा पाक हो जाएगा...... ...

क्यूंकि वह आतंकी की माँ थी !
by Upasna Siag
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अँधेरा गहरा होता जा रहा था। वह अब भी डरती -कांपती सी झाड़ियों के पीछे छुपी बैठी थी। तूफान तो आना ही था। चला गया आकर ! वह अभी भी ...

कोलाहल
by Pritpal Kaur verified
  • (3)
  • 167

एक अनजान सी चुप्पी मेरी जुबान पर रखी दिन रात मुझे उलाहने देती रहती है. अक्सर सोचता हूँ कि इस चुप्पी को ढहा कर एक इमारत खडी कर दूँ, ...

अवलंब
by Dr Narendra Shukl
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‘तू आने दे ललूआ को  . . . सारी बात बताउंगी । एक टेढ़ी सी लकड़ी के सहारे चलती हुई बुढ़िया ने बहू से कहा । ‘ ‘ हां ...

प्रेरणा
by Rajesh Bhatnagar
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पूरा टाउन हॉल लोगों की भीड़ से खचाखच भरा था । हॉल के मुख्य द्वार से स्टेज तक आने वाले रास्ते को छोड़कर दोनों ओर करीने से कुर्सियां लगीं ...

स्वराज के लिए
by Saadat Hasan Manto verified
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मुझे सन याद नहीं रहा। लेकिन वही दिन थे। जब अमृतसर में हर तरफ़ “इन्क़िलाब ज़िंदाबाद के नारे गूंजते थे। इन नारों में, मुझे अच्छी तरह याद है, एक ...

उजरिया
by Alok Sharma
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शहर  से दूर एक जंगल के बीच मे कुछ अनुसूचित जनजाती के लोगो का एक छोटा सा कस्बा होता है उसी कस्बे में नारो नाम का व्यक्ति  अपने परिवार के साथ रहता है, साथ मे उसकी एक 15 वर्षीय बेटी उजरी तथा एक छोटा बेटा और उसकी पत्नी होती है। उजरी को सभी प्यार से उजरिया बुल