सर्वश्रेष्ठ लघुकथा कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

मिडिल बर्थ - 4
द्वारा Ajay Kumar Awasthi
  • 297

मिडिल बर्थ पार्ट 4 आज मैं उसके घर पर था । उनका घर बहुत सुंदर था । सामने आंगन में हरियाली थी आम का पेड़ था और बहुत से ...

कभी ना भूल पाने वाला सफर !
द्वारा Swty Sharma
  • 300

मैं अंकल को देख रही थी , अंकल काफी परेशान थे ,, देख कर लग रहा था अंकल को कुछ परेशानी हो रही है । मुझसे रहा नहीं गया और ...

भला मानस - Virtue Of Help
द्वारा Ashok Kalra
  • 258

“पापा, आपके लिए क्या लाएं हम?” बेटी ने पूछा। “कुछ नहीं, बस आप दोनों ज़रा जल्दी आ जाएं,” मैंने एक कॉल रिसीव करने से पहले कहा। त्यौहार का दिन ...

यादों के साये में....
द्वारा Jyoti Prajapati
  • 294

अपनी शादी की एल्बम में फ़ोटो देखते हुए दिव्या ने अपने पति की फोटोफ्रेम को हाथ मे उठाया और बोली, "सूनो..!याद है तुम्हे अपनी वो पहली मुलाकात जब तुम ...

लेडीज़ टेलर - The Customer
द्वारा Ashok Kalra
  • 240

“आपने ‘स्त्री’ देखी है, न-न गलत न समझें, मेरा मतलब नई पिक्चर से है, अभी अभी लगी है न,” उस नये ग्राहक ने मेरे नाप लेने के तरीके पर ...

5 Gifts
द्वारा Anil Patel_Bunny
  • (30)
  • 651

          सारे स्टूडेंट्स जिनका इंतज़ार कर रहे थे आखिर वो आ ही गए। सभी ने तालियाँ बजा कर उनका स्वागत किया। आप सब उन्हें जानते ...

तूफान के बाद
द्वारा Rama Sharma Manavi
  • 435

  इंसान की फितरत होती है जब तक चोट नहीं खाता, तब तक वह न समझना चाहता है, न सम्भलना।और जब समझ आता है तो सब कुछ बर्बाद हो ...

केले वाली अलमारी
द्वारा Suvidha Gupta
  • 348

                   नींद अभी पूरी तरह खुली नहीं थी। फिर खेस से ज़रा सा झांककर देखा तो कमरे में कोई नहीं था। ...

कुर्सी
द्वारा Rekha k
  • 477

बरामदे  में एक पुरानी कुर्सी पर एक बुढ़ी अम्मा बैठती थी ,कुछ दिन बाद उस बुढ़ी अम्मा की मृत्यु  हो जाती है।                  ...

कार्निवाल
द्वारा Akshata Tirodkar
  • 339

फरवरी महीना शुरू हो गया था गोवा में कार्निवाल की तयारी जोरो से चल रही थी इस बार संतान ने भी अपने दोस्तों के साथ मिलकर कार्निवाल में भाग ...

अंजाना इश्क़ (प्रकरण-२)
द्वारा Suresh Pawar
  • 432

पहले प्रकरण में आपने पढ़ा कि कैसे एक अंजाना शख़्स रिधिमा के कमरे घुस जाता है। जिस कारण रिधिमा को अपने मकान मालिक से बहुत डाट खानी पड़ती है। ...

प्रेमम पिंजरम - 3
द्वारा Srishtichouhan
  • 519

12 जनवरी 1946,पॉलंपल्लाईं मद्रास, 9:00 बजे, रात का समयप्रिय डायरी, क्या मेरे कान सुन्न हो गए है? या मेरा भ्रम है कि तुम सच मूूच में आ रहे हो? सच में! ...

अमर शहीद
द्वारा Parnita Dwivedi
  • 810

सुबह 5:00 बजे रेलवे स्टेशन पर - "मैं जानता हूँ बरखा इस बार बहुत रिस्क है , लेकिन ये रास्ता मैंने खुद ही चुना है । मैं एक सोल्जर ...

अबोध
द्वारा प्रीति कर्ण
  • 801

उसकी आँखो में अजीब सी उदासी थी, मानों सब कुछ खो चुकी हो। उसकी उम्र मुश्किल से सोलह या सतरह साल की होगी। मेरी बुढ़ी आँखे उसकी मासूम-सलोने मुखड़े ...

दोस्ती इंसानियत की
द्वारा Ambika Jha
  • 573

अपने परिवार में खुल कर बात करते हैं जैसे:- अपने मम्मी-पापा से, भाई अपनी बहन से... एक दोस्त की तरह होते हैं ।जो बचपन से साथ खेलते हैं पढ़ते ...

मेरा वित्तीय कैरियर
द्वारा Tanu Kadri
  • 405

स्टीफन बटलर लेकोक (दिसंबर 1869 - मार्च 1944) का जन्म इंग्लैंड में हुआ था और जब वे छह साल के थे तब कनाडा चले गए। वह एक कनाडाई शिक्षक, ...

दूर नीड के पक्षी
द्वारा Jai Prakash Pandey
  • 2.9k

 एयरपोर्ट के लांज में अखबार के पलटने के साथ आनन्द प्रकाश की आँखे सामने लगी स्क्रीन पर थी | जिस पर दिल्ली एयरपोर्ट पर आने और जाने वाली फ्लाइट्स ...

जरा सी बेवफ़ाई
द्वारा S Sinha
  • 924

                                     कहानी  - जरा सी बेवफ़ाई    अनिता पुलिस अफसर निखिल की इकलौती  संतान थी .जब वह आठ साल की थी उसकी माँ का देहांत हो गया था . उस ...

नागिन का आखरी इंतकाम - भाग -४ - अंतिम भाग
द्वारा Appa Jaunjat
  • 465

हमणे पिछले अध्याय मैं देखा कि शिवकन्या की काहाणी खतम हो जाती है खतम मतलब शिवकन्या मर जाती हे ओर उसके साथ शिव और शुभांगी भी लेकिन कैसे चलो ...

दोस्ती के उसूल
द्वारा Ambika Jha
  • 654

एक आम का पेड़ था उस पर एक मैना रहती थी, उसी पेड़ के नीचे एक नाग-नागिन का जोड़ा था ।नागिन गर्भवती थी। जंगल के पास एक गाँव था उस ...

अंतिम संबोधन
द्वारा आदित्य अभिनव
  • 585

अंतिम संबोधन                     सी. सी. ए.  इंचार्ज डॉ. सुमन परिहार ने  विद्यालय के अंग्रेजी अध्यापक श्री पुष्पेंद्र सिंह का नाम बच्चों की ...

मां का प्यार जिंदगी
द्वारा Ambika Jha
  • 621

यह कहानी है मुस्कान की। मुस्कान  दस  साल  की  उसकी छोटी बहन सात साल की। भरा पूरा परिवार है। दादा-दादी, माता-पिता, चाचा चाची । हंसता खेलता बहुत ही प्यारा परिवार। ...

अंजाना इश्क़ (प्रकरण-१)
द्वारा Suresh Pawar
  • 900

    कुछ लोगो का मानना है कि जबतक किस्मत ना चाहे तबतक कुछ हासिल नही कर सकते। ऐसी ही एक कहानी रिधिमा और राहुल की।     रात का ...

एक और मदर इंडिया
द्वारा S Sinha
  • 708

                                                          ...

अलल – अबब
द्वारा Ramesh Yadav
  • 705

पाटिल नगर में एक व्यापारी रहता था। उसकी किराना माल और मिठाई की दुकान थी। स्वभाव से वह बड़ा ही धूर्त और शातिर था। उसके पास कोई नौकर अधिक ...

चंचल ( एक विषकन्या ) - 4
द्वारा Kirtipalsinh Gohil
  • (14)
  • 1.1k

रात के तकरीबन १ बज रहे है। गांव के खेतों में से जीव जंतुओं की आवाजे आ रही है। घर के बाहर कुछ लोग सोए हुए है। घर के ...

बहुरानी
द्वारा Ambika Jha
  • 915

वैंपायर एक बहुरानी अजय बहुत दिनों बाद शहर से पढ़ाई करके वापस अपने गाँव आ रहा था। उसे रास्ते में ही तेज तूफान और बारिश ने घेर लिया... वह ...

नागिन का आखरी इंतकाम - भाग -३
द्वारा Appa Jaunjat
  • 441

हमणे पिछले अध्याय मैं देखा कि शुभांगी ओर नक्ष  गायब हो जाते हैं लेकिन शिवकन्या शुभांगी के बेहन मीनाक्षी के घर रहेती थी शिवकन्या  का  पुणा मै शो था ...

लाल चप्पल
द्वारा Archana Anupriya
  • 690

              "लाल चप्पल"दूर दूर तक कोई भी नहीं था। पूरी सड़क सुनसान थी।दोपहर का वक्त था और गर्मी के दिन थे। चिलचिलाती धूप में रधिया नंगे पाँव जलती हुई सड़क ...

चंचल ( एक विषकन्या ) - 3
द्वारा Kirtipalsinh Gohil
  • (12)
  • 768

-कई सालों पहले यहां एक राजा हुआ करता था। यह राजा बहुत ही कामी, क्रूर, अधमी और दुष्ट था। लेकिन वह बहुत बड़ा शातिर भी था। अपनी चतुराई से ...