सर्वश्रेष्ठ लघुकथा कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

क्षम (लघुकथा)
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • 188

"मै तहेदिल से आपसे माफी मॉगता हूं।ऐसा करते समय मैंने नही सोचा था।आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा को आघात लगेगा।आपके दिल पर कया गुजरेगी?""लेकिन तुमने ऐसी बेहूदी घिनौनी  हरकत की ही ...

मानव धर्म
द्वारा Seema Jain Verified icon
  • 90

अचानक इंसान महसूस करता है जीवन कितना छोटा है और हमेशा जैसा कुछ नहीं है ।सब कुछ मन मुताबिक घट रहा था, कोई कमी नहीं थी तो नीतू को ...

एक और किस्सा निर्भया नहीं और दिखता
द्वारा Deepti Khanna
  • 306

भाभी 10:00 बज रहे हैं होली के दिन है क्या मुझे कोई घर छोड़ देगा l दीप्ति " भैया को आने दे"काजल " भाभी आप छोड़ आओ ""होली का महोत्सव ...

कौआ मुँडेर पर
द्वारा श्रुत कीर्ति अग्रवाल
  • 158

कौआ मुँडेर पर लेखिका : श्रुत कीर्ति अग्रवाल मुँडेर पर कौआ काँए-काँए किये जा रहा था। मन अनसा गया उनका... चुप हो जा नासपीटे, अब नहीं अच्छा लगता किसी का आना-जाना। ...

भूख
द्वारा praveen singh
  • 356

अमित चाय की दुकान पर बैठा हुआ था| उसकी नजर चाय की दुकान पर चाय की दुकान पर चाय बनाने वाली लड़की रेनू पर था| साहब,चाय लाऊ क्या? रेनू ...

बड़ा स्कूल
द्वारा Chandresh Kumar Chhatlani
  • 170

चतुर्वेदी जी का बेटा साढ़े तीन वर्ष का हो गया था, उसका अच्छे स्कूल में एडमिशन कराना था। चतुर्वेदी जी अपने बेटे को सुसंस्कारित, बड़ों का सम्मान करने वाला, ...

पछतावा - (लघु कहानी)
द्वारा Manoj kumar shukla
  • 250

पछतावा (लघु कथा) मनोज कुमार शुक्ल  " मनोज "          किचन के हर बर्तनों की अपनी एक प्रकृति होती है और उनका कठोर व नाजुक स्वभाव होता ...

माँ की चिठ्ठी
द्वारा Shakuntala Sinha
  • 174

                                                          ...

अकेला
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • 376

"कया हुआ---अचानक सरला का हाथ छूटा औऱ वह सीढिियो से लुुुढकते हुए   नीचेे आ गई।रामलाल और सरला की मुलाकात प्लेटफार्म पर हुुुई थी।रामलाल को बहूू ने घर  से बाहर ...

बुलंद हैं मेरे हौंसले
द्वारा Madhuri Vaghasana
  • 138

बुलंद हैं मेरे हौंसले आज क्यूं सबको लड़कियों के लिए लिखना पड़ता है ? लड़कों के लिए कुछ भी क्यूँ जरूरी नहीं समझता ?अगर कोई सीख देनी है तो ...

दिव्य दृष्टि
द्वारा Naval
  • 108

जवानी के तेवर बड़े ही सुहाने होते हैं,यदि इसमें दोस्तों का प्यार और संग मिल जाए तो हमारी खुशियों पर चार चांद लग जाते हैं। मैं भी अपने युवावस्था ...

महलो का राजा
द्वारा Bhavna Jadav
  • 190

varta ke patr ki life tragedy ke bad kis tarah sukun aur chahat ke ful khilte he uska raja sahime nahi ka raja banta he tab. ..janiye Aage

पीपल के पत्तो की बातचीत
द्वारा Monika Verma
  • 174

पतझड़ का मौसम शुरू हो चुका था। एक पीपल के पेड़ से पीले हो चुके पत्ते नीचे जमीन पर गिर रहे थे। कुछ बूढ़े हो रहे पत्तो का रंग बदलना ...

खूबसूरती
द्वारा Seema Jain Verified icon
  • 190

मैं बहुत देर से कसरत कर रही थी और अपने मन को समझा रही थी कि अगर मुझे अगले महीने होने वाले कॉलेज फेस्ट में अच्छा दिखना है तो ...

छ व्यंग्य
द्वारा bhagirath
  • 180

अकबर महान          1                                                            भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण प्रश्न है - अकबर को अकबर महान क्यों कहते हैं? कारण सहित उत्तर लिखो। इधर इतिहास की पुस्तकें पढकर ...

प्रेम पाना नहीं है बल्कि एक जीवन दृष्टि है।।
द्वारा अभी सिंह राजपूत
  • 324

प्रेम पाना नहीं है बल्कि एक जीवन दृष्टि है।ऐसी दृष्टि जो हमें रागात्मक और उदात्त बनाती है ।जहाँ हम अपने आत्मा का विस्तार करते हैं।।जबकोइ आपको इग्नोर करता है ...

बेलन टाइन कार्ड
द्वारा Renuka Chitkara
  • 264

??बेलन टाइन कार्ड??आज तो मैं  घर से तय करके निकला था  या तो आर या पार....अरे... बहुत हुआ जी इन्तजार,इसी तरह अगर देखता सोचता रहा तो कोई उसे ले ...

गिरवी का टेबल फैन
द्वारा Manoj kumar shukla
  • 394

             " गिरवी का टेबल फैन "                        *मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "  ...

परवरिश
द्वारा Sneh Goswami
  • 414

लघुकथापरवरिश “ मैडम जी पलीज मेरे बेटे को बचा लीजिए. वकील साहब को आप कहेंगी तो वे जैसे भी करके उसे छुड़ा देंगे . अभी उसकी उम्र ही क्या है ...

में समय हूँ ! - 3
द्वारा Keval
  • 246

(अबतक : अपरिचित श्रीमान के भड़काऊ शब्दो से महाराज क्रोधित हो कर उसे बंदी बनाने का आदेश देते है। फिरसे सभा आगे बढ़ती है राज दरबारी अपनी अपनी राय ...

थप्पड़
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • (18)
  • 1.2k

औऱ अब रिपोर्ट लिखाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।उसकी बेटी चारु कल कॉलेज गई थी औऱ फिर घर नहीं लौटी थी।पहले वह समझता रहा किसी सहेली के ...

राजनीतिक होली
द्वारा Arifa Avis
  • 134

राजनीतिक होली हर साल की तरह इस बार भी माघ के बाद फाल्गुन लग चुका था. मौसम का मिज़ाज क्या बदला राजनीतिक मिजाज भी बदल गया पर अपना मिज़ाज ...

जाना - पहचाना रंग
द्वारा Tasnim Bharmal
  • 228

ये पेहचान जिंदगी का सबसे अच्छा और शायद सबसे ज्यादा दिलचस्प अजूबा है। पारंगत वर्माने कभी नहीं सोचा था कि वो निखिल पुंज को ऐसे मिलेगा, १२ साल बाद ...

वीजा बालाजी
द्वारा Shakuntala Sinha
  • 216

                                                          ...

लिव इन - एक दुस्वप्न लिव इन
द्वारा अमिता वात्य
  • 324

आज उससे जुदा हुये पाँच साल हो गये पर जाने क्यो ऐसा लगता है कभी कभी की सदियां गुजर गई ,और कभी तो लगता है कि वो साथ मे ...

कर्फ्यू
द्वारा dilip kumar Verified icon
  • 212

                                                          ...

खुशनसीब
द्वारा Sandhya Goel Sugamya
  • 306

"खुशनसीब"                                  तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उस लेडी डॉक्टर ने अपना   भाषण समाप्त किया। ...

मोरपंख
द्वारा Sanket Vyas Sk, ઈશારો
  • 266

     रींकु हंमेशा गार्डन में पढने के आती। रींकु को पढने का बहुत शोख साथमे यू कुदरत के सानिध्य में बैठकर पढना, लिखना, खेलना वो भी उसे पसंद ...

में समय हूँ ! - 2
द्वारा Keval
  • 256

 गुप्तचर : "महाराज हमे लगता है ये कोई चाल है दुश्मन राज्य के राजाओं की। आपका जीव बचाकर आपका विश्वास जीता ओर महल में घुस गया जो किसी गुप्तचर ...

इंतज़ार
द्वारा Vandana Bajpai
  • (13)
  • 1.1k

इंतज़ार देखो, " मैं टाइम पर आ गयी" कहते हुए दिपाली ने जोर से हाथ लहराया | "क्या हुआ?" "चुप क्यों हो?" “क्या बिलकुल बात नहीं करोगे?” "क्या, अभी ...