लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • स्मृतियों की खाट

    दरवाज़े के बगल में रखी पुरानी सी खाट पर बैठकर हरिप्रसाद जी हर सुबह चाय की चुस्कि...

  • पहला अनकहा प्यार

    पहला प्यार लव एट फर्स्टसाइट ये बहुत लोगों को हुआ है, बहुतों ने इसे फिल किया है क...

  • एक अनकही प्यार की शुरुआत

    जबलपुर की शांत गलियों में पली-बढ़ी आराध्या त्रिपाठी के सपनों में एक ही तस्वीर थी...

ऊपर उठी हुई नाक By Deepak sharma

कहानी: दीपक शर्मा                  “मेरी ट्विट अपनी पूरी उड़ान नहीं भर रही। आवाज़ भी इस की बीच ही में रुक रही है….”...

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कुंती का खेल By Deepak sharma

                  कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था।                   टंडन मेम साहब उस स...

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स्मृतियों की खाट By Rinki Singh

दरवाज़े के बगल में रखी पुरानी सी खाट पर बैठकर हरिप्रसाद जी हर सुबह चाय की चुस्कियों के साथ सूरज को निकलते देखते, और शाम को उसी सूरज के पीछे छिपती उम्मीदें |कभी यही खाट आँगन में होत...

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टप्पे के बाद By Deepak sharma

                      स्टेशन पर बहन ने मुझे अकेले पाया तो एकाएक उस का चेहरा बदल- बदल गया। भेद- भरे स्वर में बोली, “तुम...

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कोई फर्क नहीं पडता By InkImagination

कोई फर्क नहीं पड़तावो कॉलेज की पुरानी, घिसी-पिटी सीढ़ियों पर बैठी रहती, घुटनों को सीने से चिपकाए। नीचे, ग्राउंड में हंसी का शोर था – वो लोग, जो कभी उसके साथ घंटों गप्पें मारते थे।...

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पहला अनकहा प्यार By ch Devendra

पहला प्यार लव एट फर्स्टसाइट ये बहुत लोगों को हुआ है, बहुतों ने इसे फिल किया है कुछ का आगे बढ़ा और कुछ का नहीं एसा फिल मुझे भी हुआ जब मैं तुम्हें पहली बार देखा पार्टी में वही मिश्रा...

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खामोशी के बाद By Deepak Bundela Arymoulik

“खामोशी के बाद”हाय…मैं रीना हूँ।आज जब मैं यह सब लिख रही हूँ, मेरी उम्र चालीस के पार है। बाहर से देखने वाला कहेगा—एक पढ़ी-लिखी, सभ्य, आत्मनिर्भर औरत।लेकिन भीतर… भीतर मैं एक ऐसे कमरे...

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एक अनकही प्यार की शुरुआत By Bharti 007

जबलपुर की शांत गलियों में पली-बढ़ी आराध्या त्रिपाठी के सपनों में एक ही तस्वीर थी—सफेद एप्रन, स्टेथोस्कोप और एक डॉक्टर बनने का आत्मविश्वास।बारहवीं के बाद उसने पूरे मन से NEET दिया,...

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तुम हो साथ जो मेरे By Juhi Upadhyay

नमस्कार मेरा नाम जूही उपाध्याय है मैं मनोविज्ञान व्याख्याता हूंँ।अपनी कुछ बातों को आप सबके सामने रखना आई हूंँ।मेरे हमसफ़र जब तुम मेरे साथ होते हो, नज़ारा कुछ अलग होता है जब मेरे क़...

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प्रमाणपत्र By Rinki Singh

ऑनलाइन कवि सम्मेलन की तैयारी में नीलिमा पुरानी अलमारी खंगाल रही थी |विषय था- "अपनी पहली रचना"|सोच रही थी, उस पुरानी डायरी को ढूंढ ले, जिसमें अपने शुरुआती दिनों की कविताएँ लिखी थीं...

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दोस्त By Rajeev kumar

  दर-बदर भटकते हुए मंगरू अब हिम्मत हार चुका था ,उसके हाथ में कई बार मुड़ा और फटा कागज इस बात की गवाही दे रहा था कि वह कागज उसके पास कई दिनों से पड़ा हुआ था, उसमें किसी का नाम-पता लिख...

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उड़ान (6) By Asfal Ashok

चार साल बीत गए।परिवीक्षा-अवधि पूर्ण हुई और एडिशनल कलेक्टर के रूप में एक साल का कार्यानुभव भी, तब जाकर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (DM/DC) का पहला चार्ज मिला– कलेक्टर, सिवनी जिला।श्वेत साड़...

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मन का विरोधाभाष By Rajeev kumar

   विरोधापभाष कम होता प्रतीत नहीं हो रहा था, बल्कि बढ़ता ही जा रहा था। बाहर का विरोधाभाष होता तो स्नेहा उन बातों पर बिल्कूल भी ध्यान नहीं देती और खुद को एक कमरे में बंद करके अपने का...

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मालिक By Rajeev kumar

कोड़ा बरसाने के बाद भी बैलों का जोड़ा टस से मस नहीं हुआ तो हरमू ने आकाश की ओर देखा। पसीने से लथपथ हरमू को तब जाकर सुर्यदेव की उग्रता का भान हुआ और उसने बैलों को हल से आजाद कर दिया और...

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और एक बार की सनक By Rajeev kumar

   अपनी असफलता के लिए सिर्फ भाग्य को कोसते-कोसते, वह अपने आप को हीन और तुच्छ समझने लगा था। इच्छा शक्ति की बात अब उसके मन-मस्तिष्क पर किसी कारक का काम नहीं कर रही थी। वो उठा और टेली...

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मालपुरा की श्रापित हवेली By Rinku

भाग 1: गाँव की दास्तानमालपुरा गाँव के किनारे पर एक पुरानी हवेली खड़ी थी। उसकी दीवारों पर गहरी दरारें थीं, जर्जर झरोखे हवा में चरमराते थे और लोहे के पुराने ताले जंग खाकर लटक रहे थे।...

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A Loyal Soul of the Streets By Dr. Ashmi Chaudhari

       मेरी वफादारी आप ने कभी देखी हैं??में डॉगईस्ट भाई आपका , में भी आपकी तरह एक जीव हु , हा फरक इतना है, आप सब बोल सकते हैं, समझ सकते हैं, पर हम क्या करे, हम  जब कुछ बोल देते है,...

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मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 6 By Soni shakya

चिड़िया दोबारा आती है और आसु के करीब से पंख फड़फड़ाते हुए निकल जाती है और सामने डाल पर अपने बच्चों के साथ जाकर बैठ जाती है। चिड़िया के दोनों बच्चे भी आते है,पर वह इतनी लंबी दूरी तय...

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डायरी By Anshu

आज फिर एक बाऱ हाथों में पेन और और डायरी है, ऐसा नहीं की पहली बार लिख रही हूं पर जो शगल था डायरी लिखने का वह कहीं पीछे छूट गया. अपनी भावनाओं को शब्दों मे  उतारना कभी मुझे आया ही नही...

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संगिनी By Bharti 007

“संगिनी”आस्था के कमरे में आज अजीब-सी हलचल थी। दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक उसे बार-बार याद दिला रही थी कि शाम होने वाली है। माँ ने हल्के गुलाबी रंग की साड़ी निकालकर बिस्तर पर रख द...

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मुर्दा दिल By Deepak sharma

कहानी : दीपक शर्मा                   इंदिरा की बीमारी का नाम हमें बाद में पता चला था।              ...

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एक खाली पन्ने की कहानी By Nandini Sadvipra

कहते हैं दुनिया की हर चीज कोई ना कोई कहानी होती है कुछ ऊंची आवाज में कही जाती है और कुछ चुपचाप जी जाती है ।लेकिन एक ऐसी कहानी भी है, जिसे किसी ने कभी पूरा सुना ही नहीं ...एक खाली प...

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कितनी राहें  By Dr Sandip Awasthi

      ------------------------------   "अरे यह बिल तो पिछले माह भी पास होने को आया था। तब जो दिक्कतें बताई बताई थीं ,वह दूर हुई या नहीं?" अतिरिक्त अधिशाषी अभियं...

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आ अब लौट चलें By Rakesh Kaul

आ अब लौट चलें आज सुबह से मेरी तबियत कुछ अनमनी सी हो रही है | सिर में भी कुछ भारीपन सा बना हुआ है | किसी काम में मन नहीं लग रहा है | इसीलिए आज काम पर नहीं गई | वहाँ पर फ़ोन कर के न आ...

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राघवी से रागिनी (भाग 5) By Asfal Ashok

 बाहर लगे सार्वजनिक हेण्डपम्प से पानी भरकर लौटने के बाद मंजीत ने घर का दरवाजा बंद कर लिया। बाल्टी उसने रसोई के पास कच्ची मोरी पर रख दी और राघवी के साथ बर्तन धुलवाने लगा।चाँद की हल्...

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शामत By Deepak sharma

                      नंदू मुझे कस्बापुर में मिला था। अपने तेरहवें और मेरे ग्यारहवें वर्ष में।सन उन्नीस सौ बासठ में।   &...

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बचपन की आखरी चिट्ठी By InkImagination

बचपन की आख़िरी चिट्ठी(एक हिस्सा, पर पूरी कहानी)हमारा पहला दिन था प्लेस्कूल का।मैं नीली फ्रॉक में थी, नैना पीले में।मैं रो रही थी क्योंकि मम्मी चली गई थीं, और नैना ने बिना कुछ कहे अ...

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ऊटक नाटक By Deepak sharma

ऊटक नाटक                       सोमा हाथ बांध कर फिर हमारे  सामने खड़ी थी, “सर जी, मेम साहब जी, बिट्टो शादी करना चा...

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चाबुक सवार By Deepak sharma

                    साहित्य के क्षेत्र में मेरी अनभिज्ञता अजेय- अज्ञान के निकट थी और सुमंत्रित उन लोगों की भलाई चाहने के अतिरिक्त...

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शेरू और दया का जादू By Manorama gupta

एक बार की बात है, एक हरे–भरे जंगल में एक छोटा-सा खरगोश रहता था। उसका नाम था शेरू। शेरू पूरा दिन उछल-कूद करता, पेड़ों के पीछे छुपता, तितलियों का पीछा करता और अपने दोस्तों को हँसाता-...

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नौकरी By S Sinha

                                              नौकरी    यह कहानी एक बदनसीब महिला की है जो अपने पति की मौत के बाद जीवन में संघर्ष करती है   ….    “  जरा  ऑफिस में जा कर पूछो  न कि पे...

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‎धुंध में खोई साँसें By vikram kori

‎‎ "यह कहानी भोपाल गैस त्रासदी( भोपाल गैस कांड ) की सच्ची घटना से प्रेरित है।"‎‎  शहर जो कभी सोता नहीं था‎भोपाल कभी एक शांत झीलों का शहर था, पर 1984 की सर्दियों में यहाँ के आसमान म...

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एक रात :एक किशोर की खामोश चीख By RAMESH SOLANKI

# वो रात: एक किशोर की खामोश चीख**एक साहित्यिक संस्मरण**## प्रथम अध्याय: रात्रि का कोलाहलरात के साढ़े तीन बजे थे।गाँव की काली मिट्टी से उठती ओस की ठंडक धीरे-धीरे हवा में घुल रही थी।...

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अभिनेता मुन्नन By Devendra Kumar

अपने छोटे नगर के छोटे मुहल्ले मेंजब मैं छोटा था तब की याद अभी तक सपने में आकर कभी भी झकझोर जाती ही नहीं बल्किपुराने समय में बिताया समय भी बहुत बार सुन्दर सपना लगता है. आज के नजरये...

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शशिमुखी By pink lotus

रानी शशिमुखी… सोलह वर्ष की कोमल कली, जिसकी आँखों में सागर-सी गहराई थी और मन में भक्ति की ज्योति।राजा रयशिह — अठारह का, रणभूमि में विजयी, कठोर अनुशासन वाला पर भीतर से नर्म।जब शशिमुख...

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Silent Bounds By pink lotus

जापान के एक छोटे और शांत गाँव में, एक पुराने बौद्ध मंदिर के पास, हानी कामाडो अपनी साधारण और आध्यात्मिक जीवन जी रही थी। 40 साल की हानी दिखने में मात्र 21 साल की लगती थी। भारत से आने...

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मां की आख़िरी चिट्ठी : एक अधूरा सपना By vikram kori

‎‍ एक साधारण औरत, असाधारण सपने‎गांव की गलियों में हर सुबह मंदिर की घंटी और परिंदों की चहचहाहट ️ गूंजती थी।‎उसी गांव के एक छोटे से कच्चे घर ️ में रहती थी आशा, एक साधारण सी औरत लेकि...

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Band Darwaze Ka Raaz By Vivek Singh

Purane Khandala Junction ke kone par ek laal lohe ka darwaza tha. Log kehte the ki is darwaze ke peeche ek aisa shehar hai jo hamare shehar ki hi nakal hai—bas andhera, khamosh aur...

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तृप्ति देसाई - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

तृप्ति देसाई - लघु कथा       " बचाओ.. बचाओ!! "      फ्लेट के भीतर से किसी स्त्री की चीख सुनाई दी. सुनकर मेरे अंतर मन में खलबली सी मच गई.      आवाज परिचित होने का आभास हुआ. ...

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यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) By Ramesh Desai

             यादों की सहेलगाह   - प्रकरण  1       उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश  पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य...

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तृप्ति देसाई - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

तृप्ति देसाई - लघु कथा       " बचाओ.. बचाओ!! "      फ्लेट के भीतर से किसी स्त्री की चीख सुनाई दी. सुनकर मेरे अंतर मन में खलबली सी मच गई.      आवाज परिचित होने का आभास हुआ. ...

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ऊपर उठी हुई नाक By Deepak sharma

कहानी: दीपक शर्मा                  “मेरी ट्विट अपनी पूरी उड़ान नहीं भर रही। आवाज़ भी इस की बीच ही में रुक रही है….”...

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कुंती का खेल By Deepak sharma

                  कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था।                   टंडन मेम साहब उस स...

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स्मृतियों की खाट By Rinki Singh

दरवाज़े के बगल में रखी पुरानी सी खाट पर बैठकर हरिप्रसाद जी हर सुबह चाय की चुस्कियों के साथ सूरज को निकलते देखते, और शाम को उसी सूरज के पीछे छिपती उम्मीदें |कभी यही खाट आँगन में होत...

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टप्पे के बाद By Deepak sharma

                      स्टेशन पर बहन ने मुझे अकेले पाया तो एकाएक उस का चेहरा बदल- बदल गया। भेद- भरे स्वर में बोली, “तुम...

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कोई फर्क नहीं पडता By InkImagination

कोई फर्क नहीं पड़तावो कॉलेज की पुरानी, घिसी-पिटी सीढ़ियों पर बैठी रहती, घुटनों को सीने से चिपकाए। नीचे, ग्राउंड में हंसी का शोर था – वो लोग, जो कभी उसके साथ घंटों गप्पें मारते थे।...

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पहला अनकहा प्यार By ch Devendra

पहला प्यार लव एट फर्स्टसाइट ये बहुत लोगों को हुआ है, बहुतों ने इसे फिल किया है कुछ का आगे बढ़ा और कुछ का नहीं एसा फिल मुझे भी हुआ जब मैं तुम्हें पहली बार देखा पार्टी में वही मिश्रा...

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खामोशी के बाद By Deepak Bundela Arymoulik

“खामोशी के बाद”हाय…मैं रीना हूँ।आज जब मैं यह सब लिख रही हूँ, मेरी उम्र चालीस के पार है। बाहर से देखने वाला कहेगा—एक पढ़ी-लिखी, सभ्य, आत्मनिर्भर औरत।लेकिन भीतर… भीतर मैं एक ऐसे कमरे...

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एक अनकही प्यार की शुरुआत By Bharti 007

जबलपुर की शांत गलियों में पली-बढ़ी आराध्या त्रिपाठी के सपनों में एक ही तस्वीर थी—सफेद एप्रन, स्टेथोस्कोप और एक डॉक्टर बनने का आत्मविश्वास।बारहवीं के बाद उसने पूरे मन से NEET दिया,...

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तुम हो साथ जो मेरे By Juhi Upadhyay

नमस्कार मेरा नाम जूही उपाध्याय है मैं मनोविज्ञान व्याख्याता हूंँ।अपनी कुछ बातों को आप सबके सामने रखना आई हूंँ।मेरे हमसफ़र जब तुम मेरे साथ होते हो, नज़ारा कुछ अलग होता है जब मेरे क़...

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प्रमाणपत्र By Rinki Singh

ऑनलाइन कवि सम्मेलन की तैयारी में नीलिमा पुरानी अलमारी खंगाल रही थी |विषय था- "अपनी पहली रचना"|सोच रही थी, उस पुरानी डायरी को ढूंढ ले, जिसमें अपने शुरुआती दिनों की कविताएँ लिखी थीं...

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दोस्त By Rajeev kumar

  दर-बदर भटकते हुए मंगरू अब हिम्मत हार चुका था ,उसके हाथ में कई बार मुड़ा और फटा कागज इस बात की गवाही दे रहा था कि वह कागज उसके पास कई दिनों से पड़ा हुआ था, उसमें किसी का नाम-पता लिख...

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उड़ान (6) By Asfal Ashok

चार साल बीत गए।परिवीक्षा-अवधि पूर्ण हुई और एडिशनल कलेक्टर के रूप में एक साल का कार्यानुभव भी, तब जाकर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (DM/DC) का पहला चार्ज मिला– कलेक्टर, सिवनी जिला।श्वेत साड़...

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मन का विरोधाभाष By Rajeev kumar

   विरोधापभाष कम होता प्रतीत नहीं हो रहा था, बल्कि बढ़ता ही जा रहा था। बाहर का विरोधाभाष होता तो स्नेहा उन बातों पर बिल्कूल भी ध्यान नहीं देती और खुद को एक कमरे में बंद करके अपने का...

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मालिक By Rajeev kumar

कोड़ा बरसाने के बाद भी बैलों का जोड़ा टस से मस नहीं हुआ तो हरमू ने आकाश की ओर देखा। पसीने से लथपथ हरमू को तब जाकर सुर्यदेव की उग्रता का भान हुआ और उसने बैलों को हल से आजाद कर दिया और...

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और एक बार की सनक By Rajeev kumar

   अपनी असफलता के लिए सिर्फ भाग्य को कोसते-कोसते, वह अपने आप को हीन और तुच्छ समझने लगा था। इच्छा शक्ति की बात अब उसके मन-मस्तिष्क पर किसी कारक का काम नहीं कर रही थी। वो उठा और टेली...

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मालपुरा की श्रापित हवेली By Rinku

भाग 1: गाँव की दास्तानमालपुरा गाँव के किनारे पर एक पुरानी हवेली खड़ी थी। उसकी दीवारों पर गहरी दरारें थीं, जर्जर झरोखे हवा में चरमराते थे और लोहे के पुराने ताले जंग खाकर लटक रहे थे।...

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मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 6 By Soni shakya

चिड़िया दोबारा आती है और आसु के करीब से पंख फड़फड़ाते हुए निकल जाती है और सामने डाल पर अपने बच्चों के साथ जाकर बैठ जाती है। चिड़िया के दोनों बच्चे भी आते है,पर वह इतनी लंबी दूरी तय...

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डायरी By Anshu

आज फिर एक बाऱ हाथों में पेन और और डायरी है, ऐसा नहीं की पहली बार लिख रही हूं पर जो शगल था डायरी लिखने का वह कहीं पीछे छूट गया. अपनी भावनाओं को शब्दों मे  उतारना कभी मुझे आया ही नही...

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संगिनी By Bharti 007

“संगिनी”आस्था के कमरे में आज अजीब-सी हलचल थी। दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक उसे बार-बार याद दिला रही थी कि शाम होने वाली है। माँ ने हल्के गुलाबी रंग की साड़ी निकालकर बिस्तर पर रख द...

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मुर्दा दिल By Deepak sharma

कहानी : दीपक शर्मा                   इंदिरा की बीमारी का नाम हमें बाद में पता चला था।              ...

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एक खाली पन्ने की कहानी By Nandini Sadvipra

कहते हैं दुनिया की हर चीज कोई ना कोई कहानी होती है कुछ ऊंची आवाज में कही जाती है और कुछ चुपचाप जी जाती है ।लेकिन एक ऐसी कहानी भी है, जिसे किसी ने कभी पूरा सुना ही नहीं ...एक खाली प...

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कितनी राहें  By Dr Sandip Awasthi

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आ अब लौट चलें By Rakesh Kaul

आ अब लौट चलें आज सुबह से मेरी तबियत कुछ अनमनी सी हो रही है | सिर में भी कुछ भारीपन सा बना हुआ है | किसी काम में मन नहीं लग रहा है | इसीलिए आज काम पर नहीं गई | वहाँ पर फ़ोन कर के न आ...

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राघवी से रागिनी (भाग 5) By Asfal Ashok

 बाहर लगे सार्वजनिक हेण्डपम्प से पानी भरकर लौटने के बाद मंजीत ने घर का दरवाजा बंद कर लिया। बाल्टी उसने रसोई के पास कच्ची मोरी पर रख दी और राघवी के साथ बर्तन धुलवाने लगा।चाँद की हल्...

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शामत By Deepak sharma

                      नंदू मुझे कस्बापुर में मिला था। अपने तेरहवें और मेरे ग्यारहवें वर्ष में।सन उन्नीस सौ बासठ में।   &...

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बचपन की आखरी चिट्ठी By InkImagination

बचपन की आख़िरी चिट्ठी(एक हिस्सा, पर पूरी कहानी)हमारा पहला दिन था प्लेस्कूल का।मैं नीली फ्रॉक में थी, नैना पीले में।मैं रो रही थी क्योंकि मम्मी चली गई थीं, और नैना ने बिना कुछ कहे अ...

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ऊटक नाटक By Deepak sharma

ऊटक नाटक                       सोमा हाथ बांध कर फिर हमारे  सामने खड़ी थी, “सर जी, मेम साहब जी, बिट्टो शादी करना चा...

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चाबुक सवार By Deepak sharma

                    साहित्य के क्षेत्र में मेरी अनभिज्ञता अजेय- अज्ञान के निकट थी और सुमंत्रित उन लोगों की भलाई चाहने के अतिरिक्त...

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शेरू और दया का जादू By Manorama gupta

एक बार की बात है, एक हरे–भरे जंगल में एक छोटा-सा खरगोश रहता था। उसका नाम था शेरू। शेरू पूरा दिन उछल-कूद करता, पेड़ों के पीछे छुपता, तितलियों का पीछा करता और अपने दोस्तों को हँसाता-...

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नौकरी By S Sinha

                                              नौकरी    यह कहानी एक बदनसीब महिला की है जो अपने पति की मौत के बाद जीवन में संघर्ष करती है   ….    “  जरा  ऑफिस में जा कर पूछो  न कि पे...

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‎धुंध में खोई साँसें By vikram kori

‎‎ "यह कहानी भोपाल गैस त्रासदी( भोपाल गैस कांड ) की सच्ची घटना से प्रेरित है।"‎‎  शहर जो कभी सोता नहीं था‎भोपाल कभी एक शांत झीलों का शहर था, पर 1984 की सर्दियों में यहाँ के आसमान म...

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एक रात :एक किशोर की खामोश चीख By RAMESH SOLANKI

# वो रात: एक किशोर की खामोश चीख**एक साहित्यिक संस्मरण**## प्रथम अध्याय: रात्रि का कोलाहलरात के साढ़े तीन बजे थे।गाँव की काली मिट्टी से उठती ओस की ठंडक धीरे-धीरे हवा में घुल रही थी।...

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अभिनेता मुन्नन By Devendra Kumar

अपने छोटे नगर के छोटे मुहल्ले मेंजब मैं छोटा था तब की याद अभी तक सपने में आकर कभी भी झकझोर जाती ही नहीं बल्किपुराने समय में बिताया समय भी बहुत बार सुन्दर सपना लगता है. आज के नजरये...

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शशिमुखी By pink lotus

रानी शशिमुखी… सोलह वर्ष की कोमल कली, जिसकी आँखों में सागर-सी गहराई थी और मन में भक्ति की ज्योति।राजा रयशिह — अठारह का, रणभूमि में विजयी, कठोर अनुशासन वाला पर भीतर से नर्म।जब शशिमुख...

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Silent Bounds By pink lotus

जापान के एक छोटे और शांत गाँव में, एक पुराने बौद्ध मंदिर के पास, हानी कामाडो अपनी साधारण और आध्यात्मिक जीवन जी रही थी। 40 साल की हानी दिखने में मात्र 21 साल की लगती थी। भारत से आने...

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मां की आख़िरी चिट्ठी : एक अधूरा सपना By vikram kori

‎‍ एक साधारण औरत, असाधारण सपने‎गांव की गलियों में हर सुबह मंदिर की घंटी और परिंदों की चहचहाहट ️ गूंजती थी।‎उसी गांव के एक छोटे से कच्चे घर ️ में रहती थी आशा, एक साधारण सी औरत लेकि...

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Band Darwaze Ka Raaz By Vivek Singh

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तृप्ति देसाई - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

तृप्ति देसाई - लघु कथा       " बचाओ.. बचाओ!! "      फ्लेट के भीतर से किसी स्त्री की चीख सुनाई दी. सुनकर मेरे अंतर मन में खलबली सी मच गई.      आवाज परिचित होने का आभास हुआ. ...

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यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई (1) By Ramesh Desai

             यादों की सहेलगाह   - प्रकरण  1       उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश  पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य...

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तृप्ति देसाई - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

तृप्ति देसाई - लघु कथा       " बचाओ.. बचाओ!! "      फ्लेट के भीतर से किसी स्त्री की चीख सुनाई दी. सुनकर मेरे अंतर मन में खलबली सी मच गई.      आवाज परिचित होने का आभास हुआ. ...

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