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Short Stories Stories free PDF Download | Matrubharti

नयी सहर
by Ankita Bhargava
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निधी के सोने जाने के बाद पीछे पीछे मोहित भी अपने कमरे में चला आया वह मुंह दूसरी ओर किये लेटी थी मोहित समझ रहा था वह ...

निवि
by Anjali Raghuvanshi
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आठ साल हुए, काफी अरसे बाद मैं उनसे मिलने वाला था, वो अपना शान्त सा पहाड़ी शहर छोड़ के दिल्ली में एक कॉलेज की प्रोफेसर थी, कभी सोचता हूँ ...

अयं नृलोके
by Bhargav Patel
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आजकल ग्लोबल वार्मिंग के कारण गर्मियाँ असह्य होती जा रही हैं। कई स्थानों पर तो तापमान ४६-५० डिग्री तक पहुँच जाता है। ऐसे में सर्वाधिक कष्टदायी ग्रीष्म लगता है। ...

एक नींद हज़ार सपने
by Anju Sharma
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उस नामुराद रात का दूसरा पहर भी बीत चुका था! दिन भर की चहलकदमी और तमाशे से ऊबी गली अब चाँद के साए में झपकियां ले रही थी और ...

मुक्ति और भय
by Shraddha Thawait
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वह पिछले पैतीस वर्षों से रोज अपने ऑफिस में कलम घिसते आ रहे थे, इस आशा में कि यह घिसाई शायद किसी के हित का हेतु बन जाये, पर ...

कांट्रैक्टर - 1
by Arpan Kumar
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सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी करने आए थे। सब अपने-अपने हिसाब से नौकरी किए जा रहे थे। अगर देखा जाए तो आख़िरकार कोई ऑफिस भला क्या होता है! राजनीति ...

मातमी जलसा
by Saadat Hasan Manto
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रात रात में ये ख़बर शहर के इस कोने से उस कोने तक फैल गई कि अतातुर्क कमाल मर गया है। रेडियो की थरथराती हुई ज़बान से ये सनसनी ...

चम्पा चुड़ैल
by Swatigrover
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बड़ी देर से खुद को शीशे मैं निहारते हुए बोली, "कि अब  पहले  से  ज्यादा  डरावनी  लग  रही हूँ । त्वचा  बिलकुल  काली  हो  गई  हैं । और  धीरे-धीरे  कुत्ते  के  ...

भव्यता में भयावहता भी होती है
by Sushma Munindra
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कॉंल बेल की घ्वनि सुन माधुरी बाहरी बरामदे में आई। शुक्ला प्रणामी मुद्रा में तैनात मिले — ‘‘मैडम, मैं शुक्ला। टी.सी. । आप और डॉंक्टर साहब जबलपुर जा रहे थे। ...