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दो थे बैल-इक हीरा इक मोती
द्वारा ramgopal bhavuk
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‘भैया मोती, मुझे मुंशी प्रेमचन्द्र के समय की बातें याद आ रही हैं। उन्हें हमारी कितनी चिन्ता रही होगी, उनके कारण लोग हमें भूले नहीं हैं, लेकिन वह जमाना ...

जानवर और चरवाहा
द्वारा Shubham Rawat
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गाँव से हट कर नदी के किनारे बसा एक छोटा सा घर। उस घर में 'मेर' परिवार रहता है; जिनकी आजीविका खेती-बाड़ी से होती है। खेती-बाड़ी से कमाई उतनी ...

मलंगी ने
द्वारा राजनारायण बोहरे
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राजनारायण बोहरे की कहानी मलंगी   मैंने एक नजर चारों ओर देखा, तो पाया कि वहाँ केवल बच्चे ही नहीं थे, बल्कि मोहल्ले-भर की औरतें भी जुट आई थी। ...