महिला विशेष कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Women Focused in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • अतृप्त देह

    शहर के एक पॉश अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी सुनैना जब रात के सन्नाटे को देखती, त...

  • Her Silent Secret - 13

    संयोगिता अपने cabin में अकेली बैठी थी। सामने laptop खुला था…लेकिन उसकी नजरें scr...

  • ख़ाकी बिंदिया - भाग 2

    नया शहर… नया घर… नई दिनचर्या…ज़रूरत का सामान जुटाना, नए लोगों से परिचय और छुट्टि...

पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 - 20 By Sonam Brijwasi

आज अग्निहोत्री हाउस पूरी तरह रोशनी से जगमगा रहा था।रितांशी का जन्मदिन था। पूरा घर फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजा हुआ था। रितांशी गुलाबी ड्रेस में बेहद प्यारी लग रही थी। उसके कॉल...

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Shakti ke Shiv - 24 By sheetal

वह सबसे नाराज़ थी—अपने भाइयों से भी और उस पूरे हालात से भी, जिसने उसे अंदर तक हिला दिया था।उस रात घर में किसी ने खाना नहीं खाया।शिवाय इसी उधेड़बुन में घर से पैदल निकल पड़ा था। उसके...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 67 By Sonam Brijwasi

दिन बीतते जा रहे थे…घर में अब बच्चे की मौजूदगी ने सब कुछ बदल दिया था। वो छोटा सा बच्चा सबके बीच एक अलग ही खुशी लेकर आया था। लेकिन एक बात सबने नोटिस की थी…बच्चा अक्सर करण के साथ ज्य...

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बेटी का भाग्य By Vandna Sharma

अगस्त माह का अंतिम दिन था। तापमान भले ही कम था, पर उमस बहुत थी। चौरे से लगे आंगन में एक तखत पड़ा था और तीन-चार बेंत की कुर्सियां। एक कोने में बच्चों के बैठने के लिए मूढ़े रखे थे। स...

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 7 By Jyoti Prajapati

बावरा मन राह ताके तरसे रेनैना भी मल्हार बनके बरसे रेबावरा मन राह ताके तरसे रेनैना भी मल्हार बनके बरसे रेआधे से अधूरे से बिन तेरे हम हुएफीका लगे है मुझको सारा जहाँबावरा मन राह ताके...

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अतृप्त देह By Mayur Chaudhary

शहर के एक पॉश अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी सुनैना जब रात के सन्नाटे को देखती, तो उसकी अपनी सांसों की गर्माहट उसे बेचैन कर देती। बत्तीस साल की उम्र में पति को खोने के बाद दुनिया ने...

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Her Silent Secret - 13 By Sonam Brijwasi

संयोगिता अपने cabin में अकेली बैठी थी। सामने laptop खुला था…लेकिन उसकी नजरें screen पर नहीं थीं। वो कहीं और खोई हुई थी। उसके दिमाग में बार-बार वही रात घूम रही थी संपूर्णा…उसकी बाँह...

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ख़ाकी बिंदिया - भाग 2 By Shilpy Aggarwal

नया शहर… नया घर… नई दिनचर्या…ज़रूरत का सामान जुटाना, नए लोगों से परिचय और छुट्टियों में आसपास की पहाड़ियों पर घूमना—इन्हीं सबके बीच शुरुआती कुछ महीने कब बीत गए, उन्हें पता ही नहीं...

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नारी चेतना By Shivraj Bhokare

नारी चेतना: झूठे सम्मान के भ्रम से वास्तविक स्वतंत्रता की क्रांति..सदियों से मानव सभ्यता ने आधी आबादी को पूजने, उसकी वंदना करने और उसे ‘देवी’, ‘गृहलक्ष्मी’ जैसे बड़े-बड़े विशेषणों...

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लास्ट चैप्टर By Jyoti Prajapati

महानगर की फिज़ा में जो अजीब सी घुटन थी, वह राघवन के लिए अब उतनी अनजानी नहीं रही थी। अपनी पहाड़ों की यात्रा के बाद जब वह वापस लौटा, तो शहर उसे पहले जैसा नहीं लगा। या शायद, यह शहर वै...

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चांदनी - 2 By Vandna Sharma

---*चांदनी*  _लेखिका: वंदना शर्मा_इस आजादी का फायदा उठा चांदनी घर में सबका अपमान करती। कहती - "जब मेरे पति को कोई दिक्कत नहीं, तो तुम कौन होते हो मुझे कुछ कहने वाले।"घर में सब चांद...

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Devil की दास्तान - 28 By Sonam Brijwasi

(शाम का वक्त है। हल्की बारिश हो रही है। सड़क किनारे एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर सिमरन बैठी है।उसका चेहरा भीगा हुआ है — बारिश से भी, और आँसुओं से भी।)(उसके बाल बिखरे हुए हैं, होंठ का...

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भीड़ में अकेली - 4 By Alok Mishra

अध्याय–4 : अधूरी इच्छाएँ     रविवार की सुबह थी। आज महेश घर पर था। उमा ने सोचा, शायद आज कुछ अलग होगा। उसने नाश्ते में महेश की पसंद के आलू के पराठे बनाए, दही रखा, अचार निकाला और चाय...

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फरामोश इश्क़ - 1 By Sakshi Rai

राधे राधे! ​"मैं नहीं आई थी तुम्हारी ज़िंदगी में... वो तुम थे जो मेरे पास आए थे! वो तुम थे जिसने मुझे एहसास दिलाया था कि प्यार क्या होता है, और अब... अब मुझसे यूँ मुँह मोड़ रहे हो?...

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अनामिका - 2 By Vandna Sharma

पिछले अंक में आपने पढ़ा था कि विनीता की शादी तय हो गई थी। अनामिका बहुत खुश हुई थी और उसने अपनी दोस्त के लिए खूब शॉपिंग कराई थी।विनीता की शादी दिल्ली में धूमधाम से हो गई। शादी के बा...

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अन्या :एक अधूरी मुस्कान By rawat

बारिश उस दिन कुछ ज़्यादा ही तेज़ हो रही थी। आसमान जैसे खुद भी किसी गहरे दुख में डूबा हुआ था। घर के आँगन में लोगों की भीड़ थी, लेकिन उस भीड़ के बीच एक छोटी-सी लड़की बिल्कुल अकेली खड...

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रिश्ते By Vandna Sharma

लघु कथा रिश्ते दोपहर के 2 बजे थे। सुमन ने रसोई का काम खत्म किया और थक कर बेडरूम में आ गई। आंखों में नींद नहीं थी, पर मन में बहुत कुछ भरा था। कल रात फोन पर हुई बात बार-बार याद आ रही...

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जिंदगी खूबसूरत है By Vandna Sharma

रीना ब्लड टेस्ट कराकर घर आई तो घर की हालत देखकर उसका मन और बैठ गया। रसोई में बर्तन जूठे पड़े थे, कपड़े इधर-उधर बिखरे थे। उसे देखकर रोना आ गया। कोविड के समय उसने बचाव के लिए जो इंजे...

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पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 - 20 By Sonam Brijwasi

आज अग्निहोत्री हाउस पूरी तरह रोशनी से जगमगा रहा था।रितांशी का जन्मदिन था। पूरा घर फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजा हुआ था। रितांशी गुलाबी ड्रेस में बेहद प्यारी लग रही थी। उसके कॉल...

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Shakti ke Shiv - 24 By sheetal

वह सबसे नाराज़ थी—अपने भाइयों से भी और उस पूरे हालात से भी, जिसने उसे अंदर तक हिला दिया था।उस रात घर में किसी ने खाना नहीं खाया।शिवाय इसी उधेड़बुन में घर से पैदल निकल पड़ा था। उसके...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 67 By Sonam Brijwasi

दिन बीतते जा रहे थे…घर में अब बच्चे की मौजूदगी ने सब कुछ बदल दिया था। वो छोटा सा बच्चा सबके बीच एक अलग ही खुशी लेकर आया था। लेकिन एक बात सबने नोटिस की थी…बच्चा अक्सर करण के साथ ज्य...

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बेटी का भाग्य By Vandna Sharma

अगस्त माह का अंतिम दिन था। तापमान भले ही कम था, पर उमस बहुत थी। चौरे से लगे आंगन में एक तखत पड़ा था और तीन-चार बेंत की कुर्सियां। एक कोने में बच्चों के बैठने के लिए मूढ़े रखे थे। स...

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एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर - 7 By Jyoti Prajapati

बावरा मन राह ताके तरसे रेनैना भी मल्हार बनके बरसे रेबावरा मन राह ताके तरसे रेनैना भी मल्हार बनके बरसे रेआधे से अधूरे से बिन तेरे हम हुएफीका लगे है मुझको सारा जहाँबावरा मन राह ताके...

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अतृप्त देह By Mayur Chaudhary

शहर के एक पॉश अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी सुनैना जब रात के सन्नाटे को देखती, तो उसकी अपनी सांसों की गर्माहट उसे बेचैन कर देती। बत्तीस साल की उम्र में पति को खोने के बाद दुनिया ने...

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Her Silent Secret - 13 By Sonam Brijwasi

संयोगिता अपने cabin में अकेली बैठी थी। सामने laptop खुला था…लेकिन उसकी नजरें screen पर नहीं थीं। वो कहीं और खोई हुई थी। उसके दिमाग में बार-बार वही रात घूम रही थी संपूर्णा…उसकी बाँह...

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ख़ाकी बिंदिया - भाग 2 By Shilpy Aggarwal

नया शहर… नया घर… नई दिनचर्या…ज़रूरत का सामान जुटाना, नए लोगों से परिचय और छुट्टियों में आसपास की पहाड़ियों पर घूमना—इन्हीं सबके बीच शुरुआती कुछ महीने कब बीत गए, उन्हें पता ही नहीं...

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नारी चेतना By Shivraj Bhokare

नारी चेतना: झूठे सम्मान के भ्रम से वास्तविक स्वतंत्रता की क्रांति..सदियों से मानव सभ्यता ने आधी आबादी को पूजने, उसकी वंदना करने और उसे ‘देवी’, ‘गृहलक्ष्मी’ जैसे बड़े-बड़े विशेषणों...

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चांदनी - 2 By Vandna Sharma

---*चांदनी*  _लेखिका: वंदना शर्मा_इस आजादी का फायदा उठा चांदनी घर में सबका अपमान करती। कहती - "जब मेरे पति को कोई दिक्कत नहीं, तो तुम कौन होते हो मुझे कुछ कहने वाले।"घर में सब चांद...

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(शाम का वक्त है। हल्की बारिश हो रही है। सड़क किनारे एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर सिमरन बैठी है।उसका चेहरा भीगा हुआ है — बारिश से भी, और आँसुओं से भी।)(उसके बाल बिखरे हुए हैं, होंठ का...

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भीड़ में अकेली - 4 By Alok Mishra

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फरामोश इश्क़ - 1 By Sakshi Rai

राधे राधे! ​"मैं नहीं आई थी तुम्हारी ज़िंदगी में... वो तुम थे जो मेरे पास आए थे! वो तुम थे जिसने मुझे एहसास दिलाया था कि प्यार क्या होता है, और अब... अब मुझसे यूँ मुँह मोड़ रहे हो?...

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अनामिका - 2 By Vandna Sharma

पिछले अंक में आपने पढ़ा था कि विनीता की शादी तय हो गई थी। अनामिका बहुत खुश हुई थी और उसने अपनी दोस्त के लिए खूब शॉपिंग कराई थी।विनीता की शादी दिल्ली में धूमधाम से हो गई। शादी के बा...

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अन्या :एक अधूरी मुस्कान By rawat

बारिश उस दिन कुछ ज़्यादा ही तेज़ हो रही थी। आसमान जैसे खुद भी किसी गहरे दुख में डूबा हुआ था। घर के आँगन में लोगों की भीड़ थी, लेकिन उस भीड़ के बीच एक छोटी-सी लड़की बिल्कुल अकेली खड...

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रिश्ते By Vandna Sharma

लघु कथा रिश्ते दोपहर के 2 बजे थे। सुमन ने रसोई का काम खत्म किया और थक कर बेडरूम में आ गई। आंखों में नींद नहीं थी, पर मन में बहुत कुछ भरा था। कल रात फोन पर हुई बात बार-बार याद आ रही...

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जिंदगी खूबसूरत है By Vandna Sharma

रीना ब्लड टेस्ट कराकर घर आई तो घर की हालत देखकर उसका मन और बैठ गया। रसोई में बर्तन जूठे पड़े थे, कपड़े इधर-उधर बिखरे थे। उसे देखकर रोना आ गया। कोविड के समय उसने बचाव के लिए जो इंजे...

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