महिला विशेष कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Women Focused in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • मौत से भागती दुल्हन - 9

    किशिराज कमरे से बाहर निकल चुका था। होटल के गलियारे में हल्की-हल्की लाइटें जल रही...

  • दो पतियों की लाडली पत्नी - 29

    Shreya का कमरा। पर्दे हल्के-हल्के हिल रहे हैं। सुबह की हल्की धूप कमरे में गिरती...

  • Honted Jobplace - 8

    ऑफिस का कमरा — रात का समय।श्राव्या अपनी डेस्क पर बैठी है, कंप्यूटर स्क्रीन की हल...

परायें हुए अपने - 2 By Ravnika

                  ( ससुराल में आगमन )कुसुम का ससुराल उसके घर से क़रीब 40 किलोमीटर की दूरी पर था जहाँ गाड़ी से पहुँचने में 1 घंटे  से कम वक़्त ही लगता था। कुसुम अपने जेठ से घूँघट कर...

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मौत से भागती दुल्हन - 9 By Sonam Brijwasi

किशिराज कमरे से बाहर निकल चुका था। होटल के गलियारे में हल्की-हल्की लाइटें जल रही थीं… और दूर कहीं शहर की आवाज़ गूँज रही थी।उसने अपने फोन पर एक नंबर डायल किया। कुछ ही रिंग के बाद कॉ...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 29 By Sonam Brijwasi

Shreya का कमरा। पर्दे हल्के-हल्के हिल रहे हैं। सुबह की हल्की धूप कमरे में गिरती है। Shreya अब भी बेहोष-सी नींद में है। चेहरा लाल, सांस हल्की-हल्की चल रही है। Karan बिस्तर के किनारे...

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Honted Jobplace - 8 By Sonam Brijwasi

ऑफिस का कमरा — रात का समय।श्राव्या अपनी डेस्क पर बैठी है, कंप्यूटर स्क्रीन की हल्की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही है। सारी लाइट्स बुझी हैं। बाहर बारिश की हल्की आवाज़ और बिजली की चमक...

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सब्र का फल By Vandna Sharma

_लेखिका: डॉ वंदना शर्मा_---सब्र का फलएक समय की बात है। बिजनौर जिले के एक गाँव कुम्हारपुर में एक जमींदार के घर एक प्यारी सी लड़की शशिबाला का जन्म हुआ। शशी बचपन से ही मेधावी, गृहकार्...

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बीते न रैना भाग - 7 By Neeraj Sharma

वक़्त कभी किसी का नहीं... मत सोचो, इस मीठी बातो से इसे भरमा लोगे... नहीं कड़वा बोल कर देख लो... थोड़ा सा, हक़ीक़त यूँ बाहर आ जाये गी।              ये नाटक रुपात्रिक" समय "के मुताबिक जो...

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मां-बहन-बेटी और बीवी By कमल चोपड़ा

मां - बहन - बेटी और बीवीकमल चोपड़ा​उसके चेहरे पर उतरा हुआ चिंता की मकड़ी का जाला बीवी से छिपा नहीं रह सका था। ऑफिस से टूटा-थका-हारा लौटा देखकर बीवी ने पूछा, "क्या हुआ? इतने डिप्रेस...

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इस घर में प्यार मना है - 36 By Sonam Brijwasi

घर में आज खास दिन था…नन्ही परी के नामकरण का। सब हॉल में बैठे थे…बीच में छोटी सी गुड़िया… सबकी आँखों का तारा सबसे पहले मोहन कूदा —मैं नाम रखूँगा!इसका नाम है — ‘चुलबुली’ सब हँस पड़े।...

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खून By कमल चोपड़ा

खूनकमल चोपड़ा​     फिर वही हुआ था जिसका उसे डर था। उसके दर्द शुरू हो गई थी और टांगों के बीच से खून रिसने लगा था। पति कहीं बाहर गया हुआ था। पड़ोसी की मदद से वह किसी तरह हस्पताल पहुं...

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प्रेम By Alok Mishra

उसने झुककर गुलाब का एक फूल आगे बढ़ाया और अपने दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कहा—"I love you."उमा उसकी इस अदा पर पहले से ही फिदा थी। वह शलभ को मना कर भी नहीं सकती थी, फिर भी बनावटी...

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घरेलू नुस्खे By Sunita Bapna

अस्थमा ·         वेग के समय एक चम्मच हल्दी एक चम्मच शहद सुबह खाली पेट ले। ·         सुबह खाली पेट ली शहद फेफड़ो के कफ के जमाव में राहत देती है | ·         गर्म पानी में लहसुन पेस्ट...

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तुम एक चेतना हो, देह नहीं! By Shivraj Bhokare

तुम एक चेतना हो, देह नहीं! १. देह का पिंजरा और समाज की साज़िशयुगों-युगों से स्त्रियों को एक गहरे भ्रम में जिया जााया गया है। जैसे ही एक बच्ची इस दुनिया में आँखें खोलती है, पूरा समा...

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मछलीवाली By Alok Mishra

मछलीवाली          "मच्छी लेलो मच्छी......... । "  उमा जोर से हांका  लगाती हुई मछली बाज़ार से निकल कर बस्ती की ओर बढ़ने लगी। उमा के सर पर मछली की टोकरी है;जिसे एक हाथ से पकड़ा है।दू...

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ममतामयी माँ By Sunita Bapna

                 ममतामयी माँ शीर्षक लगते हुए मन में आया मेरी मामतमायी  माँ लिखूँ ,तब मेरे अन्तर्मन ने मुझे टोका कि इतनी विराट ममता कि धारिणी  को मेरी कह कर सीमित क्यूँ करूँ| जिसके ...

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ज़ख्मों की शादी - 23 By Sonam Brijwasi

सुबह की हल्की रोशनी कमरे में फैल चुकी थी। सृष्टि अभी भी थोड़ी झिझकी हुई थी। वो उठकर बैठ गई। बाल बिखरे हुए। चेहरे पर हल्की थकान। कबीर भी उठकर बैठ गया, पर उसने दूरी बनाए रखी। कुछ पल...

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दोस्ती By Alok Mishra

     सुभम एक कंपनी में काम करता है। हंसमुख, सरल और कर्तव्यनिष्ठा के कारण जाना जाने वाला सुभम अपने आफिस सब का चहीता  था। वह विवाहित तो था लेकिन जहां भी जाता महिलाओं आकर्षण का केंद्र...

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भंवर - भाग 1 By Anil Kundal

़ं एक ़ं मैंने कब चाहा था कि उससे मिलूँ? और मिल ही गया था वह किसी यायावर की तरह एकाएक एक अनजाने सफ़र पर निकले हुए, तो मैंने कब यह भी कभी चाहा था कि वो मुझसे प्रेम करे? फिर भी प्राय...

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गाठें By Alok Mishra

     उमा को आज अचानक ही अनिल मिल गया। ये उसके साथ कालेज में पढ़ता था। उमा से अक्सर उसकी सहेलियाँ कहती कि अनिल हमेशा ही उमा को देखता रहता है। उसे भी लगता कि अनिल उससे कुछ कहना चाहता...

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आखिर कातिल कौन..?! By softrebel

_"कहल जाला नीमन घर बर खोजत खोजत बाप के एड़ी खिया जाला।बाकि अब से कहल जाई की बाप के एड़ी दू बार खियाला एक बार नीमन घर बर खोजे मे तऽ दोसर नीमन घर बर मे घटियावल बेटी के न्याय दियावे म...

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जंगल - 39 By Neeraj Sharma

39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत लोग ईश्वर को प्रश्न चिन से देखते है --- हे भी कि फिर....ये उपन्यास यही से शुरू हो रहा ह...

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पंछी का पिंजरा - भाग 4 By Anil Kundal

मुझे दो दिन बाद होश आया था। डाक्टर नर्सस और जान पहचान के सभी लोगों ने मेरी बचने की उम्मीद पूरी तरह से खो दी थी। जैसे कि बीच नदी के पहुँचते ही भंवर उठने पर मल्लाहें सभी तरह की आशाओं...

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त्रिशा... - 48 By palvisha

त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई। फिर उसकी नजर वहां खड़े उन सभी लोगों पर गई जो उसे ही घूर के देख रहे है और अचानक ही त्रिशा का उन लोगों की तरफ देखने का सा...

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मुझे क्या बेचेगा रुपैया By Vir jadeja

मुझे क्या बेचेगा रुपैया" सिर्फ एक गाना नहीं है। ये उस हर लड़की की आवाज़ है जिसे दहेज, समझौता और 'बोझ' जैसे शब्दों से बाँधने की कोशिश की गई। इस गाने के बोल सीधे दिल पर वार क...

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जीवन की नई डोर - भाग 1 By prem chand hembram

दीक्षा — भाग १ अंधकार से प्रथम परिचयधनबाद जिले की कोयला नगरी के समीप बंगालियों की एक बड़ी कॉलोनी थी।उसके चारों ओर टीन, प्लास्टिक और खपरैल से बने कई झोपड़ीनुमा घर बिखरे पड़े थे।सुबह...

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Counterfeit Coin By Alok Mishra

        Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling fiercely. Drawn by a craving for a cigarette, Ashok left his room at Ashok Lodge and wandered down to...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 21 By Sonam Brijwasi

तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन तभी—एक तेज़, गूंजती हुई आवाज़ आई—रुक जाओ!सभी की नज़र पीछे मुड़ी। दरवाज़े पर खड़ा था… कार्तिकेय। उसकी...

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खोंटा सिक्का By Alok Mishra

शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा।...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया था। उस समय मेरी ज्यादातर कहानियां फैमिली पर ही होती थी। शहर की चकाचौंध से दूर, उस पुराने...

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परायें हुए अपने - 2 By Ravnika

                  ( ससुराल में आगमन )कुसुम का ससुराल उसके घर से क़रीब 40 किलोमीटर की दूरी पर था जहाँ गाड़ी से पहुँचने में 1 घंटे  से कम वक़्त ही लगता था। कुसुम अपने जेठ से घूँघट कर...

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मौत से भागती दुल्हन - 9 By Sonam Brijwasi

किशिराज कमरे से बाहर निकल चुका था। होटल के गलियारे में हल्की-हल्की लाइटें जल रही थीं… और दूर कहीं शहर की आवाज़ गूँज रही थी।उसने अपने फोन पर एक नंबर डायल किया। कुछ ही रिंग के बाद कॉ...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 29 By Sonam Brijwasi

Shreya का कमरा। पर्दे हल्के-हल्के हिल रहे हैं। सुबह की हल्की धूप कमरे में गिरती है। Shreya अब भी बेहोष-सी नींद में है। चेहरा लाल, सांस हल्की-हल्की चल रही है। Karan बिस्तर के किनारे...

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Honted Jobplace - 8 By Sonam Brijwasi

ऑफिस का कमरा — रात का समय।श्राव्या अपनी डेस्क पर बैठी है, कंप्यूटर स्क्रीन की हल्की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही है। सारी लाइट्स बुझी हैं। बाहर बारिश की हल्की आवाज़ और बिजली की चमक...

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सब्र का फल By Vandna Sharma

_लेखिका: डॉ वंदना शर्मा_---सब्र का फलएक समय की बात है। बिजनौर जिले के एक गाँव कुम्हारपुर में एक जमींदार के घर एक प्यारी सी लड़की शशिबाला का जन्म हुआ। शशी बचपन से ही मेधावी, गृहकार्...

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बीते न रैना भाग - 7 By Neeraj Sharma

वक़्त कभी किसी का नहीं... मत सोचो, इस मीठी बातो से इसे भरमा लोगे... नहीं कड़वा बोल कर देख लो... थोड़ा सा, हक़ीक़त यूँ बाहर आ जाये गी।              ये नाटक रुपात्रिक" समय "के मुताबिक जो...

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मां-बहन-बेटी और बीवी By कमल चोपड़ा

मां - बहन - बेटी और बीवीकमल चोपड़ा​उसके चेहरे पर उतरा हुआ चिंता की मकड़ी का जाला बीवी से छिपा नहीं रह सका था। ऑफिस से टूटा-थका-हारा लौटा देखकर बीवी ने पूछा, "क्या हुआ? इतने डिप्रेस...

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इस घर में प्यार मना है - 36 By Sonam Brijwasi

घर में आज खास दिन था…नन्ही परी के नामकरण का। सब हॉल में बैठे थे…बीच में छोटी सी गुड़िया… सबकी आँखों का तारा सबसे पहले मोहन कूदा —मैं नाम रखूँगा!इसका नाम है — ‘चुलबुली’ सब हँस पड़े।...

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खून By कमल चोपड़ा

खूनकमल चोपड़ा​     फिर वही हुआ था जिसका उसे डर था। उसके दर्द शुरू हो गई थी और टांगों के बीच से खून रिसने लगा था। पति कहीं बाहर गया हुआ था। पड़ोसी की मदद से वह किसी तरह हस्पताल पहुं...

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प्रेम By Alok Mishra

उसने झुककर गुलाब का एक फूल आगे बढ़ाया और अपने दिल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कहा—"I love you."उमा उसकी इस अदा पर पहले से ही फिदा थी। वह शलभ को मना कर भी नहीं सकती थी, फिर भी बनावटी...

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घरेलू नुस्खे By Sunita Bapna

अस्थमा ·         वेग के समय एक चम्मच हल्दी एक चम्मच शहद सुबह खाली पेट ले। ·         सुबह खाली पेट ली शहद फेफड़ो के कफ के जमाव में राहत देती है | ·         गर्म पानी में लहसुन पेस्ट...

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तुम एक चेतना हो, देह नहीं! By Shivraj Bhokare

तुम एक चेतना हो, देह नहीं! १. देह का पिंजरा और समाज की साज़िशयुगों-युगों से स्त्रियों को एक गहरे भ्रम में जिया जााया गया है। जैसे ही एक बच्ची इस दुनिया में आँखें खोलती है, पूरा समा...

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मछलीवाली By Alok Mishra

मछलीवाली          "मच्छी लेलो मच्छी......... । "  उमा जोर से हांका  लगाती हुई मछली बाज़ार से निकल कर बस्ती की ओर बढ़ने लगी। उमा के सर पर मछली की टोकरी है;जिसे एक हाथ से पकड़ा है।दू...

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ममतामयी माँ By Sunita Bapna

                 ममतामयी माँ शीर्षक लगते हुए मन में आया मेरी मामतमायी  माँ लिखूँ ,तब मेरे अन्तर्मन ने मुझे टोका कि इतनी विराट ममता कि धारिणी  को मेरी कह कर सीमित क्यूँ करूँ| जिसके ...

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ज़ख्मों की शादी - 23 By Sonam Brijwasi

सुबह की हल्की रोशनी कमरे में फैल चुकी थी। सृष्टि अभी भी थोड़ी झिझकी हुई थी। वो उठकर बैठ गई। बाल बिखरे हुए। चेहरे पर हल्की थकान। कबीर भी उठकर बैठ गया, पर उसने दूरी बनाए रखी। कुछ पल...

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दोस्ती By Alok Mishra

     सुभम एक कंपनी में काम करता है। हंसमुख, सरल और कर्तव्यनिष्ठा के कारण जाना जाने वाला सुभम अपने आफिस सब का चहीता  था। वह विवाहित तो था लेकिन जहां भी जाता महिलाओं आकर्षण का केंद्र...

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भंवर - भाग 1 By Anil Kundal

़ं एक ़ं मैंने कब चाहा था कि उससे मिलूँ? और मिल ही गया था वह किसी यायावर की तरह एकाएक एक अनजाने सफ़र पर निकले हुए, तो मैंने कब यह भी कभी चाहा था कि वो मुझसे प्रेम करे? फिर भी प्राय...

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आखिर कातिल कौन..?! By softrebel

_"कहल जाला नीमन घर बर खोजत खोजत बाप के एड़ी खिया जाला।बाकि अब से कहल जाई की बाप के एड़ी दू बार खियाला एक बार नीमन घर बर खोजे मे तऽ दोसर नीमन घर बर मे घटियावल बेटी के न्याय दियावे म...

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जंगल - 39 By Neeraj Sharma

39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत लोग ईश्वर को प्रश्न चिन से देखते है --- हे भी कि फिर....ये उपन्यास यही से शुरू हो रहा ह...

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मुझे दो दिन बाद होश आया था। डाक्टर नर्सस और जान पहचान के सभी लोगों ने मेरी बचने की उम्मीद पूरी तरह से खो दी थी। जैसे कि बीच नदी के पहुँचते ही भंवर उठने पर मल्लाहें सभी तरह की आशाओं...

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त्रिशा... - 48 By palvisha

त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई। फिर उसकी नजर वहां खड़े उन सभी लोगों पर गई जो उसे ही घूर के देख रहे है और अचानक ही त्रिशा का उन लोगों की तरफ देखने का सा...

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मुझे क्या बेचेगा रुपैया By Vir jadeja

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जीवन की नई डोर - भाग 1 By prem chand hembram

दीक्षा — भाग १ अंधकार से प्रथम परिचयधनबाद जिले की कोयला नगरी के समीप बंगालियों की एक बड़ी कॉलोनी थी।उसके चारों ओर टीन, प्लास्टिक और खपरैल से बने कई झोपड़ीनुमा घर बिखरे पड़े थे।सुबह...

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Counterfeit Coin By Alok Mishra

        Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling fiercely. Drawn by a craving for a cigarette, Ashok left his room at Ashok Lodge and wandered down to...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 21 By Sonam Brijwasi

तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन तभी—एक तेज़, गूंजती हुई आवाज़ आई—रुक जाओ!सभी की नज़र पीछे मुड़ी। दरवाज़े पर खड़ा था… कार्तिकेय। उसकी...

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खोंटा सिक्का By Alok Mishra

शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा।...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया था। उस समय मेरी ज्यादातर कहानियां फैमिली पर ही होती थी। शहर की चकाचौंध से दूर, उस पुराने...

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