सर्वश्रेष्ठ महिला विशेष कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

खनकती चूड़ियाँ
द्वारा NISHA SHARMA ‘YATHARTH’
  • 134

अपने कपड़े उतारकर बिस्तर पर लेट जाओ और हाँ अपनी ये चूड़ियाँ उतार दो। बगल के कमरे में मेरी पत्नी सोयी है उसे बस पैरालाइसिस हुआ है,अभी मरी नहीं ...

नूरीन - 5
द्वारा Pradeep Shrivastava
  • 196

नूरीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 5 अम्मी के दबाव में मैंने जो गुनाह किया है उसकी सजा अल्लाह जो देगा वो तो देगा ही। पुलिस उससे पहले ही हड्डी-पसली ...

फैसला - 1
द्वारा Sunita Agarwal
  • 198

आज अनन्या की फुफेरी बहिन शालिनी की शादी है।दुल्हन की पोशाक में सजी सँवरी शालिनी बेहद खूबसूरत लग रही है।अनन्या भी दौड़ दौड़कर घर के काम काज में अपनी ...

औरतें रोती नहीं - 15
द्वारा Jayanti Ranganathan
  • 212

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 15 भटकती नींदों के सहारे पद्मजा: फरवरी 2007 पहली आर ऑनी से मिली, तो लगा एकदम अनजाना चेहरा नहीं है। तीसेक साल का ...

नूरीन - 4
द्वारा Pradeep Shrivastava
  • 276

नूरीन - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 4 अंततः मुन्ने खां को हवालात में डाल दिया गया। अगले तीन दिन उनके हवालात में ही कटने वाले थे। क्योंकि अगले दिन किसी ...

अनाम रिश्ते
द्वारा Sudha Adesh
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अनाम रिश्ते कार्तिकेय को घर लौटने में निरंतर आवश्यकता से अधिक देरी होने पर न जाने क्यों, कुछ दिनों से करीना को अत्यंत क्रोध आने लगा था । उसके टोकने ...

औरतें रोती नहीं - 14
द्वारा Jayanti Ranganathan
  • 238

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 14 तुम्हारे आसमान से मेरी दुनिया दूर है सितम्बर 2004: मन्नू की बदलती दुनिया सब कुछ अचानक हुआ। मन्नू यूं अकेली घर से ...

और कुहासा छँट गया.....
द्वारा Varsha
  • 158

            .... ...... पापा....अब मैं वहाँ कभी नहीं जाऊँगी....!!!!पापा वो इंसान नहीं जल्लाद है....उसका परिवार भी उसके साथ है हर कदम.....उन्हें बहू नहीं सिर्फ ...

लखनऊ की तवायफ
द्वारा Sudhir Kamal
  • 258

लखनऊ की तवायफ --“आदाब बजा लाता हूं बेगम साहिबा!” --“हूं……..साथ कौन जायेगा इस बार?” अमीना बेगम ने गहरी नजरों से मुआयना करते हुये पूछा। --“जी साबिर और मुख़्तार, ख़ालाजाद ...

नूरीन - 3
द्वारा Pradeep Shrivastava
  • (11)
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नूरीन प्रदीप श्रीवास्तव भाग 3 दादा बेड पर लेटे-लेटे उस बिल्डर का इंतजार कर रहे थे। जिसे वह बात करने के लिए फ़ोन कर बुला चुके थे। क्योंकि माफिया ...

औरतें रोती नहीं - 13
द्वारा Jayanti Ranganathan
  • (11)
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औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 13 अधूरे ख्वाबों की सिसकियां उज्ज्वला की नजर से: मई 2006 इस तरह जिंदगी ने ली करवट। वो भी सिर्फ चंद महीनों में। ...

वो पता
द्वारा Medha Jha
  • 174

वो पतासाल २००० , जिंदगी का वह पहला सफ़र जब वो और सृष्टि पहुंचे थे मुंबई करीब ८ बजे संध्या। हां , मुंबई के लिए वो संध्या ही था, ...

रिश्ते.. - 2
द्वारा Sunita Agarwal
  • 386

उसका प्रसब का समय करीब आने लगा उसका भाई उसे लेने आया ताकि आभा का पहला प्रसब मायके में हो सके।आभा की सास ने उससे सारे अच्छे कपड़े जेवर ...

नूरीन - 2
द्वारा Pradeep Shrivastava
  • 400

नूरीन प्रदीप श्रीवास्तव भाग 2 हार कर वह अम्मी से बोली थी कि एक बार वह भी चाचाओं से बोले। लेकिन वह तो जैसे अंजाम का इंतजार कर रही ...

लव योर सेल्फ मम्मा
द्वारा Dr Vinita Rahurikar
  • 202

लव योर सेल्फ मम्मा ...किचन में मीनू के लिए मठरियाँ तलती अनुभा की आँखें बार-बार भर आ रही थीं. मन जाने कैसा तो हो रहा था। इसीलिए अपने मनोभावों ...

काश तुमने कह दिया होता
द्वारा Megha Rathi
  • 142

काश तुमने कह दिया होता कभी- कभी कुछ यादें ऐसी होती हैं जो इंसानियत और रिश्तों से विश्वाश तार-तार कर देती हैं। (पहचान छिपाने के लिए मैंने नाम व ...

औरतें रोती नहीं - 12
द्वारा Jayanti Ranganathan
  • 380

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 12 मेरी जिंदगी के सौदागर हैदराबाद एयरपोर्ट पर लैंडिंग से पहले उज्ज्वला एक तरह से होश में आ गई। अंदर का तापमान बीस ...

ये कैसा प्यार
द्वारा Shivani Verma
  • 248

सोशल साइट फेसबुक पर उंगलियां चलाते-चलाते अचानक शैली की नजर एक पोस्ट पर रुक गई.... "कुछ जाना पहचाना सा चेहरा है.. पर याद नहीं आ रहा कौन." अपने दिमाग ...

नूरीन - 1
द्वारा Pradeep Shrivastava
  • 602

नूरीन प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 नुरीन होश संभालने के साथ ही अपनी अम्मी की आदतों, कामों से असहमत होने लगी थी। जब कुछ बड़ी हुई तो आहत होने पर ...

पराग-कण
द्वारा Rajesh Mewade
  • 160

आज बहुत दिनों के बाद कुसुम से मुलाकात हुई। मैं उसी से मिलने उसके घर जा रहा था, लेकिन वो रास्ते में ही मिल गई। अचानक आज मुझे अपने ...

औरतें रोती नहीं - 11
द्वारा Jayanti Ranganathan
  • 312

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 11 अनजाने द्वीप यह भी एक दुनिया है! दुनिया जहान से बेखबर लोग। कहां आ रहे हैं, कहां जा रहे हैं? इनके चेहरे ...

ना जाने किस वेश में .......
द्वारा Medha Jha
  • 164

खाना - पीना हो गया और फिर हमारी बैठकी जमी मम्मी के घर उस रात। सब अपनी - अपनी बातें बता रहे थे । कुछ ही दिनों पहले मम्मी ...

यहां सबकी सोच नंगी है
द्वारा Dhiraj Jha
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 बाज़ार सजा हुआ है. साथ में खड़ी लीला, चंपा, जूली, रेखा, हेमा, ऐश, माधूरी एक-एक कर ग्राहक को लुभा कर ले जा रही हैं. सबको पता है कि यहां ...

लड़कियों का पढ़ना जरूरी है  क्या ?
द्वारा H M Writter0
  • 152

 सुबह के 7  बजे थे  । मोबाइल फोन की तेज  आवाज़ से विद्या  नींद से जागकर  फोन में कहती है । कि  हेलो ,  रुचि क्या हुआ ? इतनी ...

औरतें रोती नहीं - 10
द्वारा Jayanti Ranganathan
  • 340

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 10 जिंदगी दरिया नहीं उज्ज्वला, मन्नू और पद्मजा: 2006 ‘‘क्या तुम्हारे पिता ने यह पता लगाने की कोशिश नहीं की कि तुम अब ...

जिंदगी का सफरनामा
द्वारा Saroj Verma
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जिंदगी का सफरनामा.....!! छियासठ साल की शाहिदा दिल्ली के अस्पताल एम्स में बहुत दिनों से भरती हैं, जिन्दगी का आखिरी पड़ाव तय कर रहीं हैं सोचा नहीं था कि ...

शक्ति
द्वारा Poonam Singh
  • 318

     कहानी -   " शक्ति" शरद ऋतु की गुनगुनी धूप और रंग बिरंगे फूलों की खुशबू ने  पूरे वातावरण को अपने खुशनुमा आगोश में भर रखा था। आज ...

योग के पथ पर
द्वारा Neelam Kulshreshtha
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योग दिवस, २१ जून पर विशेष कहानी योग के पथ पर [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] "ओ---म, ---ओ---म, ----ओ---म, "आत्मा की अतल गहराइयों का उच्चारण हृदय से निकल कर गले ...

रिश्ते.. - 1
द्वारा Sunita Agarwal
  • 762

आभा आज बहुत उदास थी।उसका किसी काम में मन नहीं लग रहा था ।उसका दिल चाह रहा था कि वह फूट फूट कर रोये।उसने दुनिया से क्या चाहा था ...

औरतें रोती नहीं - 9
द्वारा Jayanti Ranganathan
  • 336

औरतें रोती नहीं जयंती रंगनाथन Chapter 9 नदी कब रुकी है उस रात मोधुमिता को लगा था कि अब वह बहती नदी को नहीं रोक पाएगी। पद्मजा को अपने ...