सर्वश्रेष्ठ महिला विशेष कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

The girl's life is abandoned without dreams - 5
द्वारा navita
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दुनिया मे हवस की दरिंदगी है छाई एक माँ की कोख मे पलते बच्चे को ना यो, देख पाई lऐसा क्या है हवस का रूप अनोखा ,यो घर की इज़्ज़त भी ...

प्रेम की भावना (भाग-4)
द्वारा Jyoti Prajapati
  • 126

मैं भावना की रिपोर्ट्स हाथ मे लेकर स्तब्ध सा बैठा हुआ था..! मुझे अब भी डॉक्टर की कही बातों पर विश्वास नही हो पा रहा था..!! थोड़ी देर बाद ...

प्राची-प्रतीची - (भाग-7)
द्वारा Jyoti Prajapati
  • 240

क्लास खत्म होने के बाद जैसे ही सब लोग जाने लगे, प्रतीची फुर्ती से क्लास में घुसी और सब लोगो से रिक्वेस्ट कर फिर से बैठ जाने को कहा। ...

प्रेम की भावना (भाग-2)
द्वारा Jyoti Prajapati
  • 423

अपना लैटर पोस्ट कर मैं आफिस पहुंचा।जैसे-तैसे दिन बिताया रात निकाली।अगले दिन बड़े उत्साह के साथ मैं आफिस पहुंचा।अरे अपनी..!!!...... नही, नही अपनी क्या..?मेरी भावना का लैटर जो आया ...

ममता
द्वारा Sudha Adesh
  • 456

ममताबचपन से ही मातापिता के स्नेह से वंचित माधुरी जब ससुराल गई तो वहां भी पल्लव के प्यार के सिवा सास ससुर दोनों को ही बाहर की जिंदगी जीते ...

माँ तो माँ होती है
द्वारा Annada patni
  • 918

पिछले कुछ समय से संध्या की खाँसी रुकने का नाम नहीं ले रही । फिर भी काम से उसे छुटकारा नहीं । दिन भर घर खाँसते खांसते गृहस्थी के ...

मृगतृष्णा के पीछे 
द्वारा Sudha Adesh
  • 435

                    मृगतृष्णा के पीछे                  परिमल की कार ने जब आलीशान बंगले के आहते ...

प्रेम की भावना (भाग-1)
द्वारा Jyoti Prajapati
  • 597

मैं सुबह ऑफिस पहुंचा ही था कि पवन बाबू हाथों में एक लिफाफा लिए चले आ रहे थे।मैंने पूछा उनसे की, "किसका प्रेम पत्र लिए घूम रहे हो जनाब..??" ...

गुलाबो - भाग 3
द्वारा Neerja Pandey
  • 603

गर्मियों में जय और विजय के साथ-साथ उनके पिता विश्वनाथ भी घर आए थे। इस बार अच्छी बचत हो गई थी, इसलिए सोचा गया कि पक्का दालान बनवा लिया ...

सजा किसे मिली
द्वारा Sudha Adesh
  • 453

 सजा किसे मिली ..अल्पना की आँखें खुलीं तो खुद को अस्पताल के बेड पर पाया । माँ फौरन उस के पास आ कर बोलीं, ‘‘कैसी है, बेटी ? इतनी ...

मां ! पराई हुई देहरी तेरी
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 906

नीलम कुलश्रेष्ठ कमरे में पैर रखते ही पता नहीं क्यों दिल धक से रह जाता है । मम्मी के घर के मेरे कमरे में इतनी जल्दी सब कुछ बदल ...

दिल से दिल तक... - 34
द्वारा Komal Talati
  • 678

                                           ( ३४ )              आज महेंदी की रश्म होनी थी, शादी की वजह से घर में काफी रौनक थी... सुबह से ही बाकी बचे मेहमान ...

प्राची-प्रतीची - (भाग-6)
द्वारा Jyoti Prajapati
  • 591

संचिता के जाने के कई दिनों तक प्रतीची और समीक्षा ना तो अपने कॉलेज गयी और ना ही कहीं और..! इस वजह से उनके कॉलेज से नोटिस जारी किया ...

जीवनदान
द्वारा Sudha Adesh
  • 444

         जीवनदान    विवाह की रस्में अभी चल ही रही थीं कि विपिन के पिताजी  सुमेश को एक बार फिर दिल का दौरा पड़ गया । ...

चुटकी भर लाल रंग
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 1.2k

नीलम कुलश्रेष्ठ यह दृश्य देखकर मेरा कलेजा मुँह को आ गया या कहिये कि कलेजा मुँह को आना क्या होता है- मैंने पहली बार जाना, वर्ना जोशी जी लेटे ...

हाशिया
द्वारा Sudha Adesh
  • 510

हाशिया                 घंटी की आवाज सुनकर मनीषा ने दरवाजा खोला…                ‘ अरे, तुम लोग...कब आये, कहाँ ...

निकाह
द्वारा Sunita Agarwal
  • 1.2k

निकाहवह आठ साल की थी जब उसकी सलमा बाजी का निकाह हुआ था।महीनों पहले से घर में निकाह की तैयारियाँ चल रही थीं।'आयशा' बाजी के नए नए कपड़े,गहने देखकर ...

निर्णय
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 861

नीलम कुलश्रेष्ठ “हाऊ स्वीट, मैडम !” “मैडम! आज आप बहुत स्मार्ट लग रही हैं ।” “मैडम! आपकी साड़ी का कलर आप पर बहुत ‘सूट’ कर रहा है।” “अरे! बाबा ...

वर्तिका - हर नारी
द्वारा Sunita Bishnolia
  • 438

वर्तिका...नारी रूप छिछली नदी का ना ठहरा हूँ पानी,  बहती नदी सी है, मुझमें रवानीथाह अंतर का मेरे ना तुम पा सकोगे  बतला दूँ तुमको, मैं अपनी  कहानी अंबर सी विस्तृत हूँ उजली ...

केतकी,... सुहानी सी एक लड़की
द्वारा ArUu
  • 762

ये कहानी है एक औरत की। शायद उस औरत की जो इस समाज के बने नियमो से बुरी तरह जुझ रही है। अपनो से मिले धोखे और समाज़ में ...

प्राची-प्रतीची - (भाग-5)
द्वारा Jyoti Prajapati
  • 831

अगले दिन संचिता प्रतीची के जगाने से पहले ही उठ गई। उसने अपना बैग जमाया, खुद तैयार हुई....फिर अपने लिए और सारे घर के लोगों के लिए चाय बनाई..!! ...

पुरूषों का छल
द्वारा Shreya
  • 804

Marfa, जनरल की विधवा, जो दस साल से होमियोपैथिक की प्रैक्टिस कर रही है, अपने वार्ड में मरीजों को देख रही है। वह पहले ही दस मरीजों को देख ...

अनंत की ओर
द्वारा Sunita Agarwal
  • 1.7k

भाभी अनन्या की कही गई कड़वी बातें उसे चुभ गईं और वह अपने कमरे में जाकर देर तक रोती रही।अपने माँ और अपने पिता को याद करते करते, सुलभा ...

गुनाह
द्वारा Durga
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अवनि ने ज़िन्दगी और मौत से लड़ते हुए अपनी सूनी आँखों से माँ की ओर देखा और बोली - " क्यों आई हो यहाँ? चली जाओ कही ऐसा ना ...

आकाश बूँद
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 1.3k

[ नीलम कुलश्रेष्ठ ] मैं क्या बदल गई हूँ ? ऊँह, अभी तो नहीं । अभी तो सिर्फ़ पहले जैसे आदर्श विचार ही धसकती हुई मिट्टी की तरह फिसल ...

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 489

मैंने प्रथम श्रेणी से कक्षा पाँच पास कर लिया था। मैं कक्षा छह की किताबं स्कूल बैग में पीठ पर लादकर स्कूल जाने लगी। कक्षा तीन पास करके मेरी ...

कुंठित
द्वारा Sunita Agarwal
  • 1.1k

बसुधा का आज सुबह से ही मन बहुत खिन्न था।उसकातनिक भी मन नहीं लग रहा था।ऐसा लग रहा था कि यहाँ से कहीं भाग जाए ,ऐसी जगह,जहाँ अपनेपन का ...

परम्परावादी समाज में मैहर
द्वारा ramgopal bhavuk
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मेरे मित्र कहते हैं,-‘यार शब्बीर खान, तेरी किस्मत बहुत बुलन्द है, हमें तो मैहर घास ही नहीं डालती।’ सच तो यह है मेरी कौम की एक मात्र लड़की कॉलेज ...

प्राची-प्रतीची - (भाग-4)
द्वारा Jyoti Prajapati
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डॉ अनिरुद्ध और प्राची के लिए विशेष रूम था। वो रूम था ही अधिकारियों के ठहरने के लिए। प्रतीची, हर्ष और स्टाफ का एक अन्य सदस्य वीरेन ने अनिरुद्ध ...

प्रेम के नवरात्रि
द्वारा नाथूराम जाट
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आज फिर साल का दूसरा महीना आया है सब के मन में अनेको समन्दर के बराबर उफान  है, विशेष कर  लड़कियो के मन में. पर कुछ समझ नहीं आता ...