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सबरीना - 8
by Dr. Shushil Upadhyay
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सुशांत ने अपनी बात शुरू करने के लिए स्वामी विवेकानंद से शब्द उधार लिए जो उन्होंने शिकागो धर्म सम्मेलन में अमेरिकियों को संबोधित करने के लिए इस्तेमाल किए गए ...

न्यूड ग़ज़ल
by Junaid Chaudhary verified
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मेने 10th अच्छे नo से पास कर लिया है पापा। अब आप अपना वादा पूरा करें जो आपने मुझसे किया था।पापा ने मार्कशीट हाथ मे ली और कहा कोनसा ...

कुछ टूटा था...उसका दिल
by Shilpi Saxena..Barkha
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क्या हुआ .... आज कहाँ गया तुम्हारा प्यार तुम्हारा विश्वास ? बहुत प्यार करते थे ना तुम मुझसे .... ?? इसी प्यार के लिये तुमने सबसे लड़कर ज़िन्दगी भर ...

सबरीना - 7
by Dr. Shushil Upadhyay
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डाॅ. साकिब मिर्जाएव बेहद उत्साहित और जोशीले आदमी लग रहे थे। उन्हें देखकर ऐसा लगा कि मां-बाप ने काफी ध्यान से उनकी परवरिश की थी। चलते हुए उनके पांवों ...

आधा मुद्दा (सबसे बड़ा मुद्दा)
by DILIP UTTAM
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----- अध्याय १."अर्धांगिनी"-----   कहने को अर्धांगिनी कहा जाता है परंतु आधा हिस्सा दिया किसने, आधा हक दिया किसने, और आधा अधिकार/मान-सम्मान दिया किसने, आधा तो क्या उसे हर ...

सबरीना - 6
by Dr. Shushil Upadhyay
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सबरीना से सुशांत की आंखें मिली तो उसने मुंह घुमा लिया। जिस आदमी को वो सुबह से बख्तामीर पुलिस स्टेशन ले जाने का डर दिखा रही है, अब आंसुओं ...

सबरीना - 5
by Dr. Shushil Upadhyay
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सुशांत को लग रहा था कि ड्राइवर जरूरत से ज्यादा तेज गाड़ी चला रहा है। ताशंकद की सड़कें काफी चैड़ी और शांत लग रही थीं। सड़क के किनारों पर ...

सबरीना - 4
by Dr. Shushil Upadhyay
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मुसीबतों के हिचकोले खा रहे सुशांत को समझ नहीं आया कि वो अपनी हालत पर रो दे या रेशमी लबादा पहनकर बेहद खुशी का इहजार करे। कुछ घंटों में ...

सबरीना - 3
by Dr. Shushil Upadhyay
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सुशांत हांफता हुआ रिसेप्शन पहुंचा। उसने दूतावास फोन मिलाने को कहा, लेकिन रिसेप्शनिस्ट ने मना कर दिया। सुशांत ने चीख-चीखकर बात करने की पुरानी ट्रिक का इस्तेमाल किया और ...

सबरीना - 2
by Dr. Shushil Upadhyay
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पुलिस अंदर आ गई और सीधे सबरीना से मुखातिब हुई। सबरीना घुटनों के बल बैठ गई और हाथ ऊपर कर लिए। सुशांत कुछ भी समझने की स्थिति में नहीं ...

मैं हूँ ना
by Renu Gupta
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मैं हूँ ना बसंत ने कालिंदी की आंखों में झांकते हुए बेहद भाव विह्वल स्वरों में उससे कहा, ‘‘कालिंदी, मैं तुम्हें अपनी पत्नी बनाना चाहता हूं, तुमसे विवाह करना ...

सबरीना - 1
by Dr. Shushil Upadhyay
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होटल टाशकेंट के बाहर चारों तरफ बर्फ फैली हुई थी। सामने के पार्क में मरियल धूप का एक टुकड़ा बर्फ से लड़ने की कोशिश कर रहा था। सुशांत अभी ...

मर्दानी आँख
by Pritpal Kaur verified
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हलके गुलाबी रंग के कुरते में गहरे रंग की प्रिन्ट दार पाइपिंग से सजी किनारी वाली कुर्ती उसकी गोरी रंगत पर फब रही थी. उसके चेहरे पर मासूमियत की ...

तपस्या
by Renu Gupta
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इस कहानी का संक्षिप्त रूप राजस्थान पत्रिका में 2019 में प्रकाशित हो चुका है।   तपस्या ‘मौली.... पकौड़े थोड़े और करारे सिकवाओ और थोड़ी चटनी भी और दो इधर।’ ...

सीता
by Shikha Kaushik
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''आपने सीता के विवाह हेतु स्वयंवर का मार्ग क्यूँ चुना ? क्या यह उचित न होता कि आप स्वयं सीता के लिए सर्वश्रेष्ठ वर का चयन करते ?मैं इस ...

तारा की बलि
by Dinesh Tripathi
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          कहानी- "तारा की बलि"   यह कहानी सत्य घटना पर आधारित है, हलाकि पात्र, स्थान व समय काल्पनिक है परन्तु कथावस्तु सही है|यह कहानी ऐसे ...

जीत
by Upasna Siag
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(जमाना कोई भी हो, जब - जब किसी स्त्री ने अपने ऊपर हुए जुल्मों के विरुद्ध आवाज उठाई है। उसे न्याय अवश्य ही मिला है। ये घटना अंग्रजों के ज़माने ...

पुनर्जन्म
by Dinesh Tripathi
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                 कहानी- "पुनर्जन्म"        देव एक चबूतरे के बीचों बीच चारपाई में लेटे थे,एक तो गर्मी का महीना, और सुबह लगभग  दस ...

एक औरत
by Pritpal Kaur verified
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कमरे में बंद दरवाज़ों के भीतरी पल्लों पर जड़े शीशों से छन कर आती रोशनी बाहर धकलते बादामी रंग के परदे, नीम अँधेरे में सुगबुगाती सी लगती आराम कुर्सी, ...

बीबी पचासा
by Ajay Amitabh Suman verified
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इस किताब में मैं पत्नी पे इस हास्य कविता को प्रस्तुत कर रहा हूँ  गृहस्वामिनी के चरण पकड़ , कवि मनु डरहूँ पुकारी , धड़क ह्रदय प्रणाम करहूँ ,स्वीकारो ...

खोया हुआ प्यार
by r k lal verified
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खोया हुआ प्यारआर 0 के 0 लालआज सुहानी के पति विराट पांच बजे ही अपनी कंपनी काम पर चले गए। सात बजे उनका बेटा भी स्कूल चला गया। तभी ...

बेवजह... भाग-७
by Harshad Molishree
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इस कहानी का हेतु किसी भी भाषा, प्रजाति या प्रान्त को ठेस पोहचने के लिए नही है... यह पूरी तरह से एक कालपनित कथा है, इस कहानी का किसी ...

नम्बर वन
by Rajesh Bhatnagar
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शाम गहराने लगी है । स्टेशन के बाहर अहाते में खड़े नीम के पेड़ शांत हैं । हवा जैसे मेरे दिमाग की भांति सुन्न होकर कहीं जा दुबकी है ...

हाउस वाइफ नहीं बनूंगी
by r k lal verified
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“हाउस वाइफ नहीं बनूंगी” आर 0 के 0 लाल               पूनम सुबह उठी तो उसके बुखार चढ़ा हुआ था। पूरा बदन तप रहा था, सर भी फटा ...

जनवरी की वो रात
by Saroj Prajapati
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जनवरी माह की हो सर्द रात! म्यूनिसिपल हास्पिटल का जच्चा-बच्चा वार्ड भी मानो ठंड की चादर ओढ़े शांत पड़ा था । यह एक छोटा सा अस्पताल था , जहां ...

रिसता हुआ अतीत
by Rajesh Bhatnagar
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लाजो बेजान कदमों से चलती हुई अपना थका बोझिल शरीर लिए धम्म से कुर्सी पर बैठ गई । उसके ज़हन मं छटपटाती एक ज़ख्मी औरत चीख-चीखकर जैसे उसे धिक्कार ...

बर्फ में दबी आग
by Dr. Vandana Gupta
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       बारिश थम चुकी थी.. बालकनी में झूले की गति के समान दोलायमान विचारों को विराम देने की कोशिश में कृति की नजर गमले में लगे पौधे ...

मेरे उसूल, मेरी पहचान
by Saroj Prajapati
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रोशनी सरकारी विभाग में यूडीसी पद पर कार्यरत थी। सरल ,मृदुभाषी ,हंसमुख रोशनी के दो उसूल पक्के थे समय की पाबंदी और कार्य के प्रति ईमानदारी। चाहे मौसम की ...

मज़बूरी
by Nirpendra Kumar Sharma
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  "मज़बूरी"नन्ही रौनक गुब्बारे को देख कर मचल उठी, अम्मा अम्मा हमें भी गुब्बारा दिलाओ ना दिलाओ ना हम तो लेंगे वो लाल बाला, दिलाओ ना अम्मा।भइया कितने का ...

शुभसंकल्प
by Amita Joshi
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"दीदी मैं दो दिन के लिए आपके पास रहने के लिए आना चाहती हूं",मीतू ने मुझसे फोन पर कहा ।उन दिनों मैं महाविद्यालय के कार्यों में कुछ अधिक व्यस्त ...