सर्वश्रेष्ठ प्रेम कथाएँ कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

छूटा हुआ कुछ - 1
द्वारा Ramakant Sharma
  • 86

छूटा हुआ कुछ डा. रमाकांत शर्मा 1. ‘उफ, क्या कहानी है’ – उमा जी ने उस पेज का कोना मोड़कर किताब बंद की और अपना चश्मा पास की मेज ...

नमकीन चाय एक मार्मिक प्रेम कथा - अध्याय-3
द्वारा Bhupendra Kuldeep
  • 88

अध्याय - 3चंदन वापस घर आया तो प्रसन्न भी था और दुखी भी था। उसे लग रहा था कि उसको प्यार मिला और मिलते ही बिछुड़ गया।भरे मन से ...

तुम ना जाने किस जहां में खो गए..... - 16 - कब आओगे हर्ष
द्वारा Medha Jha
  • 116

कुछ दिन बैठने के बाद एक मित्र के सहयोग से दुबारा नौकरी मिल गई मुझे।मशीनी जिंदगी हो गई थी मेरी यहां। और इतना करके भी कुछ नहीं बचता था। ...

एक बूँद इश्क - 17
द्वारा Chaya Agarwal
  • 253

एक बूँद इश्क (17) "परेश यह बैजू कौन है? रीमा से उसकी मुलाकात कहाँ और कैसे हुई? जल्दी से सारी बात बताओ मुझे?" दिव्या बगैर किसी भूमिका के तड़ातड़ ...

मन के मौसम
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 217

चैतन्यअभी बसंती बयार की आहट थमी नहीं थी, कि पतझर की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। ऋतु परिवर्तन सिर्फ बाहरी वातावरण में नहीं होता, एक मौसम मन के भीतर ...

मिले जब हम तुम - 13
द्वारा Komal Talati
  • 182

                         भाग - १३                           प्रिय पाठकगण !! नमस्ते.... आप सभी का दिल से शुक्रिया अदा करती हु कि आप सबको मेरी कहानी... " मिले जब हम ...

देखना फिर मिलेंगे - 1 - वह पहली मुलाकात
द्वारा Sushma Tiwari
  • 273

पिछले स्टॉप से बस छूटी तो सर पर चढ़ी धूप ठंडी हो चली थी। खिड़की से अब ठंडी हवा आने लगी थी। दिन भर की गर्मी और उमस ने ...

पूर्णता की चाहत रही अधूरी - 12
द्वारा Lajpat Rai Garg
  • 394

पूर्णता की चाहत रही अधूरी लाजपत राय गर्ग बारहवाँ अध्याय नवम्बर के अन्तिम सप्ताह का शुक्रवार। हरीश जब शाम को घर पहुँचा तो सुरभि ने चाय तैयार कर रखी ...

वक़्त
द्वारा दिया
  • 260

" कितनी देर से फोन कर रही मगर आपको फोन उठाने का भी वक़्त नहीं है " डॉक्टर मानस को गुस्से से यह बात बोलते हुए दिया की आंखो ...

ये दिल पगला कहीं का - 15
द्वारा Jitendra Shivhare
  • 131

ये दिल पगला कहीं का अध्याय-15 "कोई बात नहीं दीपक। आपकी असहमती मुझे स्वीकार है। मैंने अपने हृदय की बात आपसे कह दी। मेरे लिए यही बहुत बड़ी बात ...

दोस्ती से परिवार तक - 3
द्वारा Akash Saxena
  • 129

तो पिछले भाग में आपने पढ़ा कि एक अच्छी खासी लड़ाई के बाद या यूँ कहूँ की एक अच्छे खासे मज़ाक के बाद राहुल का मज़ाक उस पर ही ...

मिले जब हम तुम - 12
द्वारा Komal Talati
  • 270

                                 भाग  - 12                      देव आद्रिती को जाता देखता रहा... तभी पीछे से किसीने देव के कंधो पर हाथ रखा... देव ने देखा की सामने ...

राधा
द्वारा Abhinav Singh
  • 207

                                      1.    दिवस और साँझ मिलकर एक हो रहें हैं। ...

नमकीन चाय एक मार्मिक प्रेम कथा - अध्याय-2
द्वारा Bhupendra Kuldeep
  • 237

अध्याय - 2रिया भी एक मार्डन ख्यालों वाली लड़की थी उसे आधुनिकता में अपने संस्कारो को संरक्षित करना आता था। वो अपना सामान लेकर आ गई। दूसरे दिन रिया ने ...

एक बूँद इश्क - 16
द्वारा Chaya Agarwal
  • (14)
  • 1.2k

एक बूँद इश्क (16) चार दिन गुजर गये। रोते-मनाते, सुनते-समझते रीमा बच्ची सी हो गयी है। वह रोती, हँसती रुठती और फिर उदास हो जाती। कभी कोसानी को मचलती, ...

मृगतृष्णा--भाग(५) - अंतिम भाग
द्वारा Saroj Verma
  • 218

शाकंभरी, राजलक्ष्मी के विचार सुनकर घोर चिंता में डूब गई, राजलक्ष्मी की इन गूढ़ बातों का शाकंभरी के पास कोई उत्तर ना था और ये सारी बातें महाराज अमर्त्यसेन ...

दर्द ए इश्क - 2
द्वारा Heena katariya
  • 404

दो साल तक का वक्त बित जाता हैं विकी के फ़ाधर आज एयरपोर्ट पर किसीको पीक अप करने के लिए जा रहे हैं उस हादसे के बाद स्तुति के ...

प्रेम
द्वारा Poonam Singh
  • 360

" प्रेम" "क्या हुआ दीदी तब से देख रही हूँ रसोई घर में इधर से उधर घूम रही हो कुछ  ढूंढ रही हो क्या?" "नहीं तो !"  सुरभि ने ...

कुल्हड़ वाली चाय
द्वारा Pragya Chandna
  • 256

निशा चाय का कप लेकर बालकनी में कुर्सी पर बैठी है और अखबार पढ़ रही है, यही उसका रोज़ का रूटीन है। सुबह जल्दी उठकर पति और बच्चों के ...

पूर्णता की चाहत रही अधूरी - 11
द्वारा Lajpat Rai Garg
  • 537

पूर्णता की चाहत रही अधूरी लाजपत राय गर्ग ग्यारहवाँ अध्याय दीपावली का त्योहार आ रहा था। वरिष्ठ अधिकारियों की कृपादृष्टि बनी रहे, इसलिये कनिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी इस अवसर ...

तुम ना जाने किस जहां में खो गए..... - 15 - पहली नौकरी
द्वारा Medha Jha
  • 227

दिल्लीपढ़ाई पूरी हो चुकी थी मेरी। दिल्ली का चुनाव मैंने किया था क्योंकि मेरी मित्र थी वहां। ढेर सारे अरमान एवम् थोड़े से सामान के साथ दिल्ली पहुंची मैं। ...

नमकीन चाय एक मार्मिक प्रेम कथा - अध्याय-1
द्वारा Bhupendra Kuldeep
  • 3.2k

अध्याय - 1हैलो रमेश हैप्पी बर्थडे। चंदन बोलाहैलो चंदन थैक्ंस यार। कब आया भाई ?बस अभी थोड़ी देर ही हुआ, बड़ी जोरदार पार्टी दी है तुमने। चंदन बोला।हाँ यार, ...

मिले जब हम तुम - 11
द्वारा Komal Talati
  • 322

                                  भाग - 11                       आद्रिती को जाता देख देव भी उसके पीछे जाता है...             यह आरती भी न कभी एक जगह नही टिकटी अब पता ...

मृगतृष्णा--भाग(४)
द्वारा Saroj Verma
  • 262

तभी राजलक्ष्मी को पता चला कि शाकंभरी इसी राज्य की राजकुमारी है,तब राजलक्ष्मी ने अपार शक्ति से निवेदन किया की कि वे उन्हें शाकंभरी से भेंट करने की अनुमति ...

तेरे मेरे सपने अब एक रंग
द्वारा Sushma Tiwari
  • 258

"मान जाओ ज़रा रुक भी जाओ!" अर्जुन ने हिम्मत जुटा कर अंजना को आवाज़ दी।कैफे में टेबल से अपना बैग उठा कर अंजना गेट खोल कर निकल ही रही ...

एक बूँद इश्क - 15
द्वारा Chaya Agarwal
  • 1.1k

एक बूँद इश्क (15) आज सुबह-सुबह परेश के फोन की घण्टी बज उठी। गणेश का फोन है- "शाब, रीमा बिटिया कैशी हैं? जब शे गयीं हैं कोई खबर ही ...

वो भीगी सी लड़की
द्वारा Chandani
  • (13)
  • 429

वो भीगी सी लड़की... बारिश का भी अपना अलग ही मज़ा है ना? और वो भी तब जब आप पुणे जैसे शहर में हो। और उसमें भी रविवार मिल ...

वह जो अजनबी था
द्वारा Angelgirl
  • 375

            वह बेकरारी से बिस्तर पर करवटें बदल रही थी। दिल को किसी पल सुकून न था। सांसे बोझल महसूस हो रही थीं और ...

पूर्णता की चाहत रही अधूरी - 10
द्वारा Lajpat Rai Garg
  • 429

पूर्णता की चाहत रही अधूरी लाजपत राय गर्ग दसवाँ अध्याय रविवार को गृहमंत्री का दौरा था। सूर्य पश्चिमोन्मुखी हो चुका था, किन्तु आकाश में चन्द्रमा अभी प्रकट नहीं हुआ ...

ये दिल पगला कहीं का - 14
द्वारा Jitendra Shivhare
  • 137

ये दिल पगला कहीं का अध्याय-14 किन्तु आशा के व्यवहार में आये आश्चर्यचकित परिवर्तन देखकर सभी हतप्रद थे। सपना के बेटी के उपचार में दिन-रात एक देने वाला आनंद ...