हिंदी किताबें, कहानियाँ व् उपन्यास पढ़ें व् डाऊनलोड करें PDF

अनजान रीश्ता - 16
by Heena katariya
  • (7)
  • 97

पारुल सुबह उठती है तभी उसे किसी के हंसने की आवाज आती है तो वह अपने रूम का दरवाजा खोल के देखती है की सेम और उसके पापा किसी ...

बरसात के दिन - 11 ( अंतिम भाग )
by Abhishek Hada
  • (11)
  • 90

आदित्य दिशा के पास गया। और उससे कहा - ‘‘दिशा। अच्छा हुआ जो तुमने आज मिलने के लिए बुला लिया।’’ ‘‘मुझे तुमसे मिलने में कोई इन्टरेस्ट नही है। वो ...

मन्नू की वह एक रात - 12
by Pradeep Shrivastava
  • (15)
  • 164

मैं वास्तव में उसके कहने से पहले ही चुप हो जाने का निर्णय कर चुकी थी। क्यों कि मेरे दिमाग में यह बात थी कि इन्हें अभी ऑफ़िस जाना ...

कमसिन - 15
by Seema Saxena
  • (13)
  • 135

पीका तुम भी बाग़ में जाती हो न ? हाँ, मैं और चाची घर के काम के निपटा जाते हैं और मम्मी तो बहुत जल्दी सुबह ही चली जाती हैं ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 6
by Rashmi Ravija
  • (6)
  • 38

(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

माँमस् मैरिज - प्यार की उमंग - 10
by Jitendra Shivhare
  • (8)
  • 80

मां का रौद्र रूप मैंने उस दिन पहली बार ही देखा था। रत्ना ने पलंग पर सोई हुई मां का गला दबाने की जैसे ही कोशीश की, मां ने ...

मायामृग - 2
by Pranava Bharti
  • (1)
  • 33

सुधरना इतना आसान होता तो बात ही क्या है ? ” यह फुसफुसाहट उसके मन की भीतरी दीवारों पर सदा से टकराती रही है और वह सोचती रही है ...

अंजामे मुहब्बत - 4
by Angelgirlaaliya
  • (11)
  • 70

                अगली सुबह काफ़ी हलचल थी। शाहमीर  के अक्सर रिश्तेदार आ चुके थे।मर्दान खाना अलग होने के बावजूद रिश्तेदार लड़के ज़नान खाने ...

छज्जे छज्जे का प्यार
by Junaid Chaudhary
  • (6)
  • 69

मोहल्ला चौधरियान में हमारा चार मंजिला मकान बड़ी शान से खड़ा था,अभी तक इस मोहल्ले के हम ही सबसे रईस थे,लेकिन पिछले साल किसी सैफी साहब ने मकान से ...

मन्नू की वह एक रात - 11
by Pradeep Shrivastava
  • (15)
  • 152

‘अब यह तो मैं बहुत साफ-साफ समझा नहीं पाऊंगी। शायद वह छात्र रहते हुए यह सब कर रहा था। और रुबाना वाली घटना भी मेरे छात्र जीवन की थी। ...

कमसिन - 14
by Seema Saxena
  • (15)
  • 153

ओह्ह ! तो क्या सर्दियों में इससे भी भारी होती हैं ! वो तो हिल भी नहीं पायेगी अगर उसने ओढ़ लिया तो ! हाँ भाई, यहाँ पर हमेशा ...

दीप शिखा - 2
by S Bhagyam Sharma
  • (0)
  • 42

बहुत साल पहले कहीं पढ़ी एक कविता उसके मरने के बाद उनको याद आई। वह उनके अन्दर आत्मध्वनि बन गूंजने लगी नीले आकाश की रात मन की याद फूल जैसे खिली है ...

हा यही प्यार है... - 2
by Alpa
  • (8)
  • 55

भाग  2.... प्रिया एक मिड्ल क्लॉस लड़की है, उसे पैसो की अहेमियत, रहेंन सहन, सबका अनुभव था.. आजकल की गिर्ल्स जैसी बिलकुल नहीं थी,, राहुल को उसकी यही बात ...

बरसात के दिन - 10
by Abhishek Hada
  • (9)
  • 88

बरसात बहुत तेज हो चुकी थी। आदित्य कुछ ही सेकिंड में पूरा गीला हो गया। पर उसे इस सब की कोई फिक्र नही थी। उसका ध्यान केवल दिशा को ...

माँमस् मैरिज - प्यार की उमंग - 9
by Jitendra Shivhare
  • (4)
  • 70

रूको रघु। गणेशराम चतुर्वेदी ने रघु के कन्धे पर हाथ रखकर कहा। ये मेरी पेंशन के रूपये है। अपनी चालिस वर्ष की सेवा में मुझे एक भी दिन ...

मायामृग - 1
by Pranava Bharti
  • (0)
  • 44

यूँ तो सब ज़िंदगी की असलियत से परिचित हैं, सब जानते हैं मनुष्य के जन्म के साथ ही उसके जाने का समय भी विधाता ने जन्म के साथ ही ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 5
by Rashmi Ravija
  • (4)
  • 41

(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

वैश्या वृतांत - 14
by Yashvant Kothari
  • (6)
  • 192

दामाद: एक खोज             यशवन्त कोठारी   अपनी साली की शादी में  जाने का मेरा कोई विचार ही नहीं था। सोचता था कि पत्नी अपनी दोनों  बच्चियों  को ...

मन्नू की वह एक रात - 10
by Pradeep Shrivastava
  • (11)
  • 190

‘पहली तो यही कि जब कपड़े चेंज करने का वक़्त आया तो कमरे में कोई सेपरेट जगह नहीं देख कर मैं और नंदिता अपने कपड़े लेकर बाथरूम की तरफ ...

कमसिन - 13
by Seema Saxena
  • (13)
  • 171

उफ़ अब इस कार को क्या हो गया ? क्या हुआ ? पता नहीं यार, समझ ही नहीं आ रहा शायद कार में पंचर हो गया है ! आसपास कोई दुकान ...

दीप शिखा - 1
by S Bhagyam Sharma
  • (3)
  • 104

जो अपने ख्यालों को ही जीवन समझ लेता है उसका जीवन भी एकविचार ही बन कर रह जाता है उसमें कोई स्वाद या पूर्णता कहाँ से आएगी? संसार में ...

अनजान रीश्ता - 15
by Heena katariya
  • (16)
  • 244

सेम घर पे जाता है तभी वह मुस्कुरा रहा होता हैं तो जैसे ही वह अपने रुम का दरवाजा खोलता है दोस्तों ओर मोम डेड को देखकर चोक जाता ...

अव्यक्त प्रेम
by Dr. Vandana Gupta
  • (7)
  • 143

    कम्प्यूटर युग में मेल के बजाय पत्र का लिफाफा मिलने पर आश्चर्य हुआ.. किसका होगा? उत्सुकता इतनी कि तुरन्त ही पढ़ने बैठ गयी.".................." आपको अजीब लग रहा होगा ...

बरसात के दिन - 9
by Abhishek Hada
  • (8)
  • 122

आदित्य इसी कश्मकश में था कि तभी दिशा ने उसके कंधे पर हाथ रखा। उसने पलट कर देखा। "क्या हुआ तुम टेंशन में दिखाई दे रहे हो ? सब ...

मन्नू की वह एक रात - 9
by Pradeep Shrivastava
  • (12)
  • 169

‘मगर वो ऐसा क्या कर रहा था?’ ‘बताती हूं , वह कुर्सी पर बैठा था। मेज पर कोर्स की किताब खुली पड़ी थी। और ठीक उसी के ऊपर एक पतली ...

कमसिन - 12
by Seema Saxena
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  • 148

दोनों के बीच मौन पसरा हुआ था ! राशि जल्दी से चाय पियो फिर चलना है ! रवि ने उस मौन को भंग करते हुए कहा ! रूम भी ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 4
by Rashmi Ravija
  • (7)
  • 59

(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से वे जग जाती हैं, और पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. ...

माँमस् मैरिज - प्यार की उमंग - 8
by Jitendra Shivhare
  • (7)
  • 93

ऐ चुप! ऐसा नहीं कहते। नवीन ने सुन लिया तो? शालिनी ने सौम्या को डांटते हुये कहा। नवीन ने सौम्या की कहीं बात सुन ली थी। उसने गैस सिलेंडर ...

मन्नू की वह एक रात - 8
by Pradeep Shrivastava
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  • 179

‘सही कह रही हो तुम। घर-परिवार लड़कों-बच्चों में अपना सब कुछ बिसर जाता है। मगर ये मानती हूं तुम्हारी याददाश्त पर कोई ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ा है। इसलिए छत ...

कमसिन - 11
by Seema Saxena
  • (13)
  • 144

जाने कैसे वे उसके मन की बात समझ गए और देव से फोन पर कह दिया, देख भाई आज तो बहुत थका हुआ हूँ और रात भी हो रही ...