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डोर – रिश्तों का बंधन - 10
by Ankita Bhargava verified
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  • 102

अगले दिन नयना और चिंटू सुबह सुबह ही पूर्वी की मोसी के घर जनकपुरी पहुंच गए। बस चाय के साथ बिस्कुट ही लिए थे दोनों ने, शनिवार को लीलाधर ...

फिर भी शेष - 18
by Raj Kamal verified
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  • 126

तमाम ऊबड़—खाबड़ रास्तों से गुजर कर अब रितुपर्णा की गाड़ी पटरी पर आ गई थी। देश के सबसे उन्नत औद्योगिक मेट्रो शहर के हाइवे पर वह रफ्तार ले रही ...

somewhat लव - 6
by Yayawargi (Divangi Joshi)
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  • 110

Somewhat nothingतीन साल वेसे तो काफी लंबा अरसा है किसी को भुला ने के लिए... कहते है के नई आदते बनने मे 21 दिन लगते है ३६ महीने तो बोहोत ...

डॉमनिक की वापसी - 21
by Vivek Mishra verified
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शिमोर्ग के मंच पर जाते ही विश्वमोहन रूम में आए. बिना कुछ कहे दीपांश के सामने बैठ गए. फिर जैसे अपने से ही बात करते हुए बोले ‘बहुत अच्छा ...

डोर – रिश्तों का बंधन - 9
by Ankita Bhargava verified
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पूर्वी अपने मम्मी पापा के साथ अपने घर चली गई थी, रिन्नी दीदी तो उन लोगों से पहले ही निकल गई थी बोलीं, 'मां और दीपक भैया दोनों की ...

उधड़े ज़ख्म - 7
by Junaid Chaudhary
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      अंदर सुम्मी के पास उसकी और मेरी अम्मी बैठी हुई थी,अम्मी ने मेरे पास आकर कहा इसे बहुत तेज़ प्यास लग रही है,गीली पट्टी इसके होंटो पर ...

प्यार के लमहे
by Vaishali
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शिव और राज बहुत अच्छे दोस्त थे शिव दिखने में बहुत ही हॕडसम था बडी बडी आंखे, गोरा चिट्टा रंग ,फिट बाॕडी ,बातूनी स्वभाव था ...सबसे अच्छे तरीके से ...

नादान मोहब्बत
by Lakshmi Narayan Panna verified
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नादान मोहब्बत( प्रस्तावना-प्यार की परिभाषा )क्या प्यार समझदारों का खेल है या शारीरिक रसायनों का प्रभाव ? जब प्यार की परिभाषा भी स्पष्ट नही होती तब प्यार कैसे हो ...

डॉमनिक की वापसी - 20
by Vivek Mishra verified
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श्रीराम सेंटर में विश्वमोहन के नाटक 'डॉमनिक की वापसी' का पचासवाँ शो। समय से आधा-एक घंटे पहले से ही दिल्ली के तानसेन मार्ग पर अच्छी खासी गहमा-गहमी, हॉल के ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 23 - लास्ट पार्ट
by Rashmi Ravija verified
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

शायरी - 2
by pradeep Tripathi
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1. मेंरे वास्ताए तन्हाई से वास्ता हि कुछ यू हुआ।मैंने मुफलिस ही कुछ ऐसा चुना जिससे रास्ता हि न तय हुआ।।2. ज़िंदगी के हर तजुर्बेकार से पूँछा है मैंने।मौत में सुकून ...

वैश्या वृतांत - 23
by Yashvant Kothari verified
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सूट की राम कहानीयशवंत  कोठारी ज्यों ही सर्दियां शुरू होती हैं, मेरे कलेजे में एक हूक-सी उठती है, काश मेरे पास भी एक अदद सूट होता, मैं भी उसे ...

फरेब - 4
by Raje.
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      वृदा अपने कमरे मे बिस्तर पर लेट कुछ खयालो मे खोई हुई थी की तभी, अचानक उसके कानो मे कुछ आवाज पडी।  कुतुहल वश वृदाने अपने ...

फिर भी शेष - 17
by Raj Kamal verified
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  • 266

परिवार की किसी भी चिंता से बेखबर नरेंद्र एक नई दुनिया में धीरे—धीरे अपनी पैठ बना रहा था। क्या करे, क्या न करे। लाचारी और काहिली के दलदल से ...

डॉमनिक की वापसी - 19
by Vivek Mishra verified
  • (1)
  • 85

बैटरी ख़त्म होने को आई थी पर स्टूल पर रखे फोन की घंटी बजती जा रही थी. खिड़की से आती धूप बिस्तर को छूती हुई फर्श पर फैल गई ...

डायरी वाला लव
by Saroj Prajapati
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  • 117

प्यार का मौसम हर इंसान के जीवन में एक बार जरूर आता है और वह एहसास अपने आप में अनूठा होता है। सारी फिजा प्यार के रंगों से दिलों ...

डोर – रिश्तों का बंधन - 8
by Ankita Bhargava verified
  • (9)
  • 306

सुबह सुबह जैसे बारिश की बूंदों से नयना की नींद खुली। अभी वह पूरी तरह जाग नहीं पाई थी, उसे समझ नहीं आ रहा था कि कमरे में बरसात ...

फिर भी शेष - 16
by Raj Kamal verified
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  • 254

हिमानी से मिलकर लौटी काजल बहुत दिन तक मानसिक उथल—पुथल से उद्विग्न रही। द्वंद ऐसा था, जिसका समाधान नहीं सूझता था। विषय ऐसा विस्फोटक था कि दूर—दूर तक विध्वंस ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 22
by Rashmi Ravija verified
  • (16)
  • 278

(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

डॉमनिक की वापसी - 18
by Vivek Mishra verified
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इति अब सेतिया की उपस्थिति में पहले जैसी सहज नहीं थी. रमाकांत के कहने से उसने दुबारा काम शुरू तो कर दिया था. पर आत्मविश्वास से भरी रहने वाली ...

मायामृग - 18 - Last part
by Pranava Bharti
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सच तो है ‘ज़िंदगी जीने के योग्य नहीं रह गई है’ आपके रिश्ते, आपके संबंध, आपकी किसीके प्रति वफादारी तब तक ही है जब तक आप उसके लिए कुछ ...

डोर – रिश्तों का बंधन - 7
by Ankita Bhargava verified
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दो साल होने आए थे नयना को विवेक का घर छोड़े, अब तो वह कानूनी रूप से भी विवेक से अलग हो चुकी है। कभी कभी वह सोचने लगती ...

उधड़े ज़ख्म - 6
by Junaid Chaudhary
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जब मुझे पता लगा सुम्मी जल गई है, में शौक़ हो गया,मेरे मुँह से फिर अल्फ़ाज़ ही न निकले,फिर अम्मी ने कहना शुरू करा,खुद पर आग लगा के ये ...

प्रेमिका
by Sapna Singh verified
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ये एक सामान्य सी सुबह थी इतवार की । सर्दियों की गुनगुनी धूप बालकनी तक आ रही थी। आनंद वहीं बैठे चाय पी रहे थे। दोनों पैर सामने टेबल ...

डॉमनिक की वापसी - 17
by Vivek Mishra verified
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  • 70

विश्वमोहन ने शो की तैयारियों में कोई कसर नहीं उठा रखी थी. साथ ही फ़िल्म की स्क्रिप्ट और कास्ट भी फाइनल हो चुके थे, पर लोकेशन ढूँढने का काम ...

मायामृग - 17
by Pranava Bharti
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उदय के जाने के बाद शुभ्रा की बड़ी सी मित्र-मंडली उसे इस पीड़ा से दूर रखने के सौ-सौ उपाय करती कभी उसे अपने घर बुला लेना, कभी ...

खट्टी मीठी यादों का मेला - 21
by Rashmi Ravija verified
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(रात में बेटी के फोन की आवाज़ से जग कर वे, अपना पुराना जीवन याद करने लगती हैं. उनकी चार बेटियों और दो बेटों से घर गुलज़ार रहता. पति ...

वैश्या वृतांत - 22
by Yashvant Kothari verified
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बीबी मांग रही वाशिंग मशीन         यशवन्त कोठारी   दीपावली पर नया खरीदना एक परंम्परा बन गयी है और जमाने की रफ्तार बड़ी तेजी से बदल रही है। ...

तीर-ए-नीमकश
by Pritpal Kaur verified
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वह बाथरूम से नहा कर बाहर निकली और बेडरूम में ही रुक गयी. खड़ी हो कर सोचने लगी की यूँ ही सुइट के लिविंग रूम में चली जाए बाथ ...

फिर भी शेष - 15
by Raj Kamal verified
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उस रात के बाद से रितु को घर से निकलने की मनाही हो गई थी। फिर भी वह इधर—उधर से फोन करके आबिद से सम्पर्क बनाए हुई थी। आबिद ...