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तेरे शहर के मेरे लोग - 1
द्वारा Prabodh Kumar Govil
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( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा ...

मेरी नजर में प्रकाशक
द्वारा Sandeep Tomar
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मेरे सरोकार(एक अन्यर्यात्रा)   एक अंश---प्रकाशकों से रिश्ते   प्रेमचंद युग में लेखक प्रकाशक के रिश्ते अवश्य ही आज से जुदा रहे होंगे। तब शायद आज जैसी स्थितियां न हों ...

आत्म कथा
द्वारा रनजीत कुमार तिवारी
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प्रिय पाठकों मेरा सादर प्रणाम, मैं रनजीत कुमार तिवारी  अपनी आत्म कथा आप लोगो से साझा कर रहा हूं।जो मेरी जिंदगी के कुछ खट्टे मीठे यादों के झरोखों से ...

किर_दार
द्वारा sk hajee
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एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों ...

पूना पलट
द्वारा Neelam Kulshreshtha
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पूना पलट [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] [ टी वी शो ‘बिग बॉस’ की शूटिंग लोनावाला [महाराष्ट्र] में होती है जिसके होस्ट महानायक हैं। इसी शूटिंग की पृष्ठभूमि पर एक ...

प्रखर राष्ट्रवादी क्रांतिकारी व्यक्तित्व के धनी वीर दामोदर सावरकर
द्वारा SURENDRA ARORA
  • 2.3k

प्रखर राष्ट्रवादी क्रांतिकारी व्यक्तित्व के धनी वीर दामोदर सावरकर सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा सन 1857 के वीर यौद्धाओं के बलिदान को चाटूकार इतिहासकारों द्वारा ग़दर कहने वालों को आइना दिखाने ...

कहानी पुरानी दिल्ली की
द्वारा Amar Gaur
  • 1.3k

सन् 2001, दीवाली जा चुकी है और मीठी मीठी सी ठंड दस्तक दे चुकी थी । रविवार का दिन था तो घर के उस समय के सबसे छोटे युवराज ...

बहीखाता - 47 - अंतिम भाग
द्वारा Subhash Neerav
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बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 47 मलाल बहुत सारी ख्वाहिशें थी ज़िन्दगी में। जैसे कि गालिब कहता है कि हर ख्वाहिश पे दम निकले। बहुत ...

जीवन की सोच
द्वारा Shivraj Anand
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  (बाधाएं और कठिनाइयां हमें कभी रोकती नहीं है अपितु मजबूत बनाती है)  लफ़्ज़ों से कैसे कहूं कि मेरे जीवन की सोच क्या थीं? आखिर  मैने भी सोचा था ...

बहीखाता - 46
द्वारा Subhash Neerav
  • 521

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 46 एक लेखक की मौत चंदन साहब चले गए। कुछ दिन उनके धुंधले-से अक्स दिखते रहे। कभी फोन बजता तो ...

बहीखाता - 45
द्वारा Subhash Neerav
  • 497

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 45 मनहूस ख़बर दिसंबर का महीना था। मैं ज़रा देर से ही उठी। इतनी ठंड में किसका उठने को दिल ...

बहीखाता - 44
द्वारा Subhash Neerav
  • 514

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 44 अविश्वास और तलाश चंदन साहब द्वारा घर बेचने पर तो मैंने रोक लगवा दी थी, पर उसके बाद कुछ ...

बहीखाता - 43
द्वारा Subhash Neerav
  • 490

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 43 हमदर्दी एक दिन दिल्ली से किसी वकील की चिट्ठी आई। यह चिट्ठी चंदन साहब की ओर से भिजवाई गई ...

बहीखाता - 42
द्वारा Subhash Neerav
  • 482

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 42 घर से काउंसिल के फ्लैट तक इस घर का किराया बहुत था। मुझ अकेली के लिए यह बोझ उठाना ...

बहीखाता - 41
द्वारा Subhash Neerav
  • 498

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 41 घर की परिभाषा मैं दो सप्ताह अमेरिका में रही। जसवीर के साथ बातें करके तरोताज़ा हो गई। जितने दिन ...

बहीखाता - 40
द्वारा Subhash Neerav
  • 472

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 40 शैल्टर होम कुछ दिनों से मुझे लग ही रहा था कि अब मुझे इस घर से जाना ही है, ...

बॉलीवुड लीजेंड्स - 5
द्वारा S Sinha
  • 538

  बॉलीवुड लीजेंड्स  बॉलीवुड लीजेंड्स  में उन दिवंगत बीते दिनों के बॉलीवुड कलाकारों के बारे में लिखने का प्रयास किया है जिन्होंने कुछ मुकाम हासिल किया है  . सभी ...

बहीखाता - 39
द्वारा Subhash Neerav
  • 499

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 39 प्लैन जसबीर ने हम दोनों को अमेरिका आने का निमंत्रण दिया हुआ था। वह अपनी सहेली से चंदन साहब ...

बहीखाता - 38
द्वारा Subhash Neerav
  • 481

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 38 रजनी लंदन में एक कवि रहता था - गुरनाम गिल। उसका मुम्बई में आना-जाना था। यह सोचते थे कि ...

बहीखाता - 37
द्वारा Subhash Neerav
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बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 37 जन्मदिन कभी-कभी कुछ दिन खुशी में भी बीत जाते। हम किसी तरफ घूमने निकल जाते। कोई बढ़िया किताब पढ़ते ...

शहीद उधमसिंह
द्वारा Hiren Kathiriya
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मित्रों  मे आप सभी को आज इतिहास  के एक एसे वीर की बात करने वाला  हू जो  शायद इतिहास के  पन्ने मे कही दबे पडे है कई लोगों को ...

बहीखाता - 36
द्वारा Subhash Neerav
  • 526

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 36 कैसे जाओगे ? और वोलकेनो… पंजाब के दौरे पर थी। एक दिन मैं पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला गई। कोई समारोह ...

बहीखाता - 35
द्वारा Subhash Neerav
  • 514

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 35 बाईपास इन्हें सामने देखकर मैं अवाक् रह गई। अंदर प्रवेश करते हुए उनकी तेज़ रुलाई फूट पड़ी। बोले - ...

बहीखाता - 34
द्वारा Subhash Neerav
  • 547

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 34 एंजाइना निरंजन सिंह नूर साहब की मौत मुझे झिंझोड़कर रख गई। इंग्लैंड में एक प्रकार से वह मेरी ताकत ...

बहीखाता - 33
द्वारा Subhash Neerav
  • 601

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 33 एक और हादसा इन दिनों मैंने सख़्त काम भी किया, पर साथ ही ड्राइविंग टेस्ट भी पास कर लिया ...

बहीखाता - 32
द्वारा Subhash Neerav
  • 519

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 32 समझौता उनके एक्सीडेंट ने मुझे बहुत तंग किया। कुछ दिन तक मैं सोचती रही कि उनकी ख़बर लेने जाऊँ ...

बहीखाता - 31
द्वारा Subhash Neerav
  • 540

बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 31 मकसद भाई की मौत के दुख में से मैं धीरे-धीरे उबरने लगी। मित्रों ने इसमें मेरी बहुत मदद की। ...

बदलते हम और जरुरी बदलाव...
द्वारा Pravin Ingle
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     मै लेखक तो नहीं हू पर कुछ अनुभव सांझा करुंगा आप से. हम खुद महसूस नहीं कर पाते पर कभी किसी के बताने पर समझ मे आता ...

बहीखाता - 30
द्वारा Subhash Neerav
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बहीखाता आत्मकथा : देविन्दर कौर अनुवाद : सुभाष नीरव 30 हादसा कभी कभी मैं सोचती कि मेरी शख्सियत में कौन सी ऐसी कमी है कि मैं चंदन साहब को ...

इज्तिरार - 4 (अंतिम भाग)
द्वारा Prabodh Kumar Govil
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( 19 ) अंतिम भागकाम करते हुए एक महीना कब निकल गया ये पता ही नहीं चला। पता चला तब, जब पहला वेतन मिला। ज़िन्दगी की पहली नियमित कमाई। ...