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शौर्य गाथाएँ - 8
by Shashi Padha
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शौर्य गाथाएँ शशि पाधा (8) अपना – अपना युद्ध मेरे पति अपने सैनिकों के साथ किसी कठिन अभियान के लिए गए हैं, यह बात मैं जानती थी । कहाँ गए ...

शौर्य गाथाएँ - 7
by Shashi Padha
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शौर्य गाथाएँ शशि पाधा (7) प्रथा–कुप्रथा किसी भी समाज में सामिजिक प्रथाओं का अपना विशेष महत्व तथा तात्पर्य होता है | किसी न किसी विशेष कारणों से समाज के ...

शौर्य गाथाएँ - 6
by Shashi Padha
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शौर्य गाथाएँ शशि पाधा (6) शाश्वत गाथा (मेजर सुधीर वालिया – अशोक चक्र, सेना मेडल *) रिश्ते ! ये साहचर्य और स्नेह के रिश्ते कभी-कभी खून के रिश्ते से ...

शौर्य गाथाएँ - 5
by Shashi Padha
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शौर्य गाथाएँ शशि पाधा (5) अखंड ज्योत ( नायक सूरज भान) भारतीय दर्शन में दैनिक प्रार्थना-आराधना, जप-पाठ का विशेष महत्व है| हम जीवन में जब भी बहुत प्रसन्न होते ...

ममता का सफर
by Deepti Khanna
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एक सफर जो शुरू हुआ इस कदर ,अब सोचती हूँ मैं आज ,तो मुस्कुराती हूँ फिर से होकर मगन l एक सफर मां से सहेली बनने का l हाँ ...

शौर्य गाथाएँ - 4
by Shashi Padha
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शौर्य गाथाएँ शशि पाधा (4) एक और अभिमन्यु ( लेफ्टिनेंट सुशील खजुरिया, कीर्ति चक्र ) उन दिनों मैं अमेरिका में रह रही थी | देश में रहो या विदेश ...

शौर्य गाथाएँ - 3
by Shashi Padha
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शौर्य गाथाएँ शशि पाधा (3) परम्परा ( नायक जगपाल सिंह, कीर्ति चक्र ) इतिहास साक्षी है कि युद्ध कितना भयानक होता है | आग, अँगार, बन्दूक, तोप, चीत्कार और ...

मृत्युंजय सिंह की सफलता की कहानी, जिसने VGMSecurity की स्थापना की !
by Mrityunjay Singh
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यह कहानी 20 साल के एक ऐसे नौजवान के बारे में है जो बेहद कर्मठ, तेज-तर्रार और हर मुश्किल का डटकर सामना करने वाले लोगों के रूप में जाने ...

शौर्य गाथाएँ - 2
by Shashi Padha
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( लांस नायक रमेश खजुरिया – शौर्य चक्र ) रमेश से मेरी पहचान उस सैनिक छावनी में जाने के एक दो दिन बाद ही हो गयी थी मेरे पति ...

जीवन गाथा - मेरे आज मे है बीते कल का हाथ
by Anjali Dasuni
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अंधेरे से दूर भागते भागते आज अंधेरा ही मेरा साथी बन गया।।यू  तो रंगो से कोई  शिकायत नहीं मुझको ,पर वर्तमान में चल रहे रंंगो के इस भेदभाव से ...

मरु भूमि का वह मेघ, डा. अब्दुल जलील फरीदी (एक स्मृति)
by Khan Ishrat Parvez
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मरूभूमि का वह मेघ ;      डाक्टर अब्दुल जलील फरीदी (एक स्मृति)                                     ...

शौर्य गाथाएँ - 1
by Shashi Padha
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(कैप्टन अरुण जसरोटिया, अशोक चक्र, सेना मेडल, निशाने पंजाब ) 'संत सिपाही', विरोधाभास लगता है न आप सब को, कि हिंसक - अस्त्र-शस्त्रों के साथ शत्रु संहार की शिक्षा-दीक्षा लेने ...

मेरी पढ़ाई - 1
by Neha
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 माफ़ कीजियेगा दोस्तों बड़े दिनों बाद फिर से एक कहानी आपको सुनाने जा रही हूं। उम्मीद है आप सबको पसंद आएगी और नहीं भी आए तो पढ़ तो लेना ...

प्रकृति मैम - आई हवा
by Prabodh Kumar Govil
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10. आई हवागर्मी की छुट्टियां आई ही थीं कि घर से वो खबर भी आई कि मेरी मां, छोटा भाई और बहन कुछ दिन के लिए घूमने मुंबई आ ...

गुजरात की प्रथम हिन्दी कवयित्री - कुमारी मधुमालती चौकसी
by Neelam Kulshreshtha Verified icon
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वड़ोदरा में सन् 1980 से मेरा मधु बेन से निरंतर संपर्क रहा. विलक्षण थी वे -सन् 1947 से शैयाग्रस्त लेकिन चेतनशील कवयित्री. उत्तर प्रदेश के एक महंत पंडित ललित ...

प्रकृति मैम - हरा भरा वन
by Prabodh Kumar Govil
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9. हरा भरा वनमुंबई में अलग - अलग कारणों से हमने कई मकान बदले। नई मुंबई या अणुशक्ति नगर एरिया में बड़े अफ़सर लोग घर खरीद तो लेते थे ...

तानाजी मालुसरे - मराठा शेर
by MB (Official) Verified icon
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मराठा सेना का शेर जिसने मराठा साम्राज्य के लिए कई युद्ध लड़े और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। यह कहानी वीर तानाजी मालुसरे की है जिनकी ...

प्रकृति मैम- उगा नहीं चंद्रमा
by Prabodh Kumar Govil
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8. उगा नहीं चंद्रमाजो हुआ, उसका कसूरवार मैं ही रहा।प्रसव के दौरान रक्तचाप बेतहाशा बढ़ गया। आनन- फानन में सिजेरियन डिलीवरी का निर्णय लिया गया। किन्तु कुदरत अपना क्रोध ...

कच्ची उम्र का मायाजाल...
by सिमरन जयेश्वरी
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हिमांशी अपने परिवार में सबसे छोटी थी। उसके अलावा परिवार में उसके बाबा, बड़ा भाई और बड़ी बहन थी। जब 5 साल की तब टी.बी. होने और इलाज न ...

प्रकृति मैम- बढ़ रही थी उम्र
by Prabodh Kumar Govil
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7. बढ़ रही थी उम्र, छोटा हो रहा था मैंैैंैंैैमैं मुंबई आ गया।पहले भी आता रहा था, मगर अब इस तरह आया कि मुंबई को अपना शहर कह सकूं।मेरा ...

प्रकृति मैम- उजड़ा घोंसला
by Prabodh Kumar Govil
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 उजड़ा घोंसलाघर में किसी के बीमार होने की सूचना इतनी खतरनाक नहीं होती कि हौसला खो दिया जाए। पर ये बात चिंताजनक थी कि उदयपुर से रोज़ सुबह बस में ...

प्रकृति मैम - इसी दरख़्त की एक और डाली
by Prabodh Kumar Govil
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5.इसी दरख़्त की एक और डालीबचपन से ही चित्रकला से लगाव होने के चलते मैं विख्यात चित्रकार देवकीनंदन शर्मा के आवास पर कभी - कभी जाता था। मुझे उनको ...

प्रकृति मैम - एक लड़की को देखा तो कैसा लगा
by Prabodh Kumar Govil
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4.एक लड़की को देखा तो कैसा लगामैं जब भी छुट्टी में घर जाता तो उस लड़की से मिलना होता। अपने स्कूल के दिनों में, कॉलेज के दिनों में भी ...

पिता से 1,800 रुपये उधार लेकर शुरू की कंपनी, लाखों का टर्नओवर
by Mrityunjay Singh
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मृत्युंजय सिंह ने 21 साल की उम्र में ही एडवर्टाइजमेंट टेक्नोलॉजी से रिलेटेड स्टार्टअप Adjuction.com की स्थापना की और उन्हें 20 दिन में ही मिल गयी 10 लाख की ...

भूख की आग
by Dinesh Tripathi
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मै तब बारह वर्ष का था |मेरा रोज का नियम था सुबह नास्ते में एक लोटा गाय का ताजा दूध पीना |उस दिन गॉव के पश्चिम दिशा के हनुमान ...

माँ की गोंद - 2
by pradeep Tripathi
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माँ ज़िन्दगी का हर हिस्सा है, माँ से सुरू इस सृष्टि का हर किस्सा है।माँ के बिना तो शृष्टि का निर्माण अधूरा है, माँ से ही ईश्वर का हर ...

बचपन का दोस्त और मेरा जुर्म
by Akshay Choudhary
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मेरी दोस्त मुझसे नाराज़ थी क्योंकि मेंने उसे कंजूस कि उपाधी  दी थी उसकी बात करु तो अब तक के मेरे  सबसे अच्छी दोस्त।       उसकी बात करु ...

मुझे सजा ना दो
by Surjeet Singh Bindra
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जीत :1  ये उन दिनों की बात है जब मैं घुटने के बल पर चलता था. मेरे पिताजी गरीबी से तंग आकर मां से लड़ते हुए घर से बाहर ...

मेरा जीवन - रोहिडा
by Mahipal
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आज गया था वहां जहाँ कभी मैंने अपने नन्हे पाव रखें थे जमी पर ,जहां कभी लहरातें खेत-खलीयान मे छोटी सी चार पाई पर सोया था कभी ,अपने आँखों ...

माँ की गोद
by pradeep Tripathi
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मेरे इस कहानी के दो पात्र  हैं मै और मेरी माँ. वैसे तो मेरे घर में पांच लोग हैं मै माँ छोटा भाई संदीप छोटी बहन सुधा मेरे पिता ...