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29 --- भारत आकर शीनोदा ने अनुज की प्रशंसा के पुल बाँ...
सुबह की हल्की धूप शहर की इमारतों पर फैलने लगी थी. रात की बारिश के बाद मौसम ठंडा...
पहाड़ पर चढ़ते समय आपका कम से कम श्रम लगना चाहिए. उसे फ़तह करने जैसी कोई इच्छा भी आ...
महाभारत की कहानी - भाग-२२० मांस भोजन के विषय में भीष्म का उपदेश प्रस्तावना कृष...
यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन करना है इसका किसी भी व्य...
--- सपनों की उड़ान, मजबूरी का पंखलेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाहर इंसान के जी...
काँच की दीवार रामनाथ जी एक सेवानिवृत्त शिक्षक थे। चालीस वर्षों तक उन्होंने बच्...
किसान – केवल शब्द नहीं, एक पहचान किसान केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि यह हर उस इंसा...
सच्ची घटना मैदानी पुर जिला......एक बार की बात है, एक आदमी रोज खेत पर जाता था काम...
दिल्ली की चमकती सड़कों पर रहने वाली अनाया को हमेशा ऊँचाइयों से प्यार था—सपनों की...
महाभारत की कहानी - भाग- १ शिखंडी की कहानी और भीष्म की इच्छामृत्यु प्रस्तावना संपूर्ण महाभारत पढ़ने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। अधिकांश लोगों ने महाभारत की कुछ कहानी पढ़ी, सु...
पौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा का अत्यंत महत्त्व है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं अभिमान पर न्याय, सदाचार और स्वाभिमान की जीत की शिक्षा देती है। यह कथा उस समय की है, ज...
1. प्रारंभिक स्वरूप परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है, मंत्रोच्चार औ...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
मलनाड की सुबह हमेशा खास होती है। जब कोहरे की चादर को चीरकर सूर्य की पहली किरणें धरती पर आती हैं, तो दुनिया किसी जादुई सपने जैसी लगती है। लेकिन अर्जुन के लिए, यह एक अलग ही दुनिया थी...
आधुनिक संकट आज मानव सभ्यता एक बड़े संकट का सामना कर रही है। प्रदूषण बढ़ रहा है। प्राकृतिक संसाधन समाप्त हो रहे हैं। पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। इन समस्याओं का मू...
तंत्र कहता है — जो ऊर्जा जीवन देती है, वही मुक्ति भी दे सकती है। संभोग कोई पाप नहीं, वह ऊर्जा है — जो अगर अचेतनता में बहे, तो बंधन बनती है; और यदि जागरूकता में रूपांतरित हो, तो...
बैंगलोर, एक ऐसा शहर जो कभी पूरी तरह सोता नहीं है। दूर सड़क पर किसी ट्रक के चलने की आवाज़ और बीच-बीच में कुत्तों के भौंकने को छोड़ दें, तो उस मोहल्ले में गहरा सन्नाटा पसरा था। अप...
"जो मिट्टी के लिए जीया, वो इतिहास बना। जो स्वाभिमान के लिए लड़ा, वो प्रताप बना।" अरावली की पहाड़ियों में आज भी जब सूरज उगता है, तो उसकी पहली किरण हल्दीघाटी की...
मन स्वयं आनंद है, स्वयं ब्रह्म है। बस उसे कर्ता से द्रष्टा बना दो—कर्ता नहीं बचता। यही द्रष्टा प्रेम है, आनंद है। तब मन स्थिर होता है, ऊर्जा बहती है—प्रेम, करुणा, दया, सेवा अपने...
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