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Part 7 — वह आवाज़ किसकी थी?दरवाजे पर लगातार दस्तक हो रही थी।“क्योंकि अब मुझे पता...
“यह कैसे हो सकता है? जिस दिन मैंने मैनेजर की शिकायत की थी, उसी दिन से वह मिसिंग...
रात के 9 बज रहे थे। ऑफिस की लाइटें एक-एक करके बंद हो रही थीं। 1 महीने का प्रोजेक...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 43 : चयनमंदिर के भीतर ऐसा सन्नाटा था कि हर किसी की सा...
जिंदगी की दूसरा किनारा 32 और वहीं दूसरी तरफ में मेघना की दुनिया में मेघना कमरे म...
संत बुल्ले शाह जी की यह वाणी किसी भी प्रकार के बाहरी दिखावे और किताबी ज्ञान के घ...
हुक्म और हसरत एपिसोड 25 —#Arsia"अब आगे…”"ये... नहीं हो सकता।"अर्जुन की आँखें उस...
"क्या कमियाँ और तंज आपको रोक रहे हैं? पढ़िए राघव की यह संघर्षपूर्ण कहानी, जो सिख...
हॉल में हुई उस गंभीर चर्चा के बाद अयान ने बिना एक पल गंवाए अपनी सर्द और पैनी नजर...
दिन बीतते जा रहे थे…घर में अब बच्चे की मौजूदगी ने सब कुछ बदल दिया था। वो छोटा सा...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
(नूरगढ़ की चौड़ी पक्की सड़क पर ढलती हुई धूप ने एक अजीब सी चमक बिखेर रखी थी। हवा में हल्की ठंडक और आसपास के खेतों से आती हुई सौंधी खुशबू घुली हुई थी। गाँव के बाहर से गुजरने वाले मुख...
शहर में उस दिन सुबह से ही बारिश हो रही थी। आसमान बादलों से ढका था और कॉलेज की सड़क पर जगह-जगह पानी जमा था। आरव हमेशा की तरह कॉलेज के बस स्टॉप पर अकेला खड़ा था। हाथ में कित...
वैसे तो मै एक साधारण और सादगीभरी जिंदगी पसंद करती हुँ लेकिन जरूरी तो नहीं है कि कोई शांति से जीने दे। ऐसे ही मेरी लाइफ में भी है जो मुझे शांति से जीने नहीं देते। ऐसा ही मेरा छोटा भ...
शैलजा सिंह की एंट्री – नया कमरा, नई शुरुआत… या कुछ और?शाम का धुंधलका धीरे-धीरे शहर पर उतर रहा था। आसमान में हल्की बैंगनी छटा थी और हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी।शैलजा सिंह ऑटो स...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
दिल्ली की तेज, बर्फीली बारिश किसी को भी भिगो सकती थी, लेकिन आकाश के लिए यह सिर्फ पानी नहीं, बल्कि उसकी बेबसी के थपेड़े थे।सड़क किनारे एक टूटी हुई टीन की छत के नीचे खड़े आकाश ने क...
बहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारो...
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