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ऑफिस में आज फिर सन्नाटा था…सिर्फ दो लोग थे कृष्णा… और सिद्धिका।सिद्धिका टेबल के...
--------------चारू सांसे रोके खडी थी। उसे समझ नही आ रहा था कि नव्या ने उसे सच बत...
पेड़ की दरार एक झटके में पूरी तरह फट गई और उसके भीतर कैद वह विकृत आकृति भारी आवा...
अध्याय 6: अधूरेपन की पूर्णतारूपा का डिजिटल दुनिया से अचानक गायब हो जाना भार्गव क...
एपिसोड 5: एक सच्चा मददगार और वफ़ादारी का साया"दुश्मन जब चारों तरफ मौत का जाल बिछ...
एपिसोड 16: अंधेरे की जड़शहर का डरकब्रगाह से लौटने के बाद रोहन को लगा कि सब शांत...
महक हाल से बाहर आ गई थी। भीतर की भीड़, शोर और हवा में फैली हुई परफ्यूम की मिली-ज...
कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँग...
नाटक ? तकनीकी दृष्टि से नाटकों से अधिक सक्षम माध्यम आज उपलब्ध हैं। महान वृत्तान्...
एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते। ये लाइन तो आपने सुनी ही होगी लेकिन ऐस...
इंसान की किस्मत मे जो लिखा वो उसे मिलकर ही रहेता है, चाहे मौहब्बत हो या हो अश्क.ये कहानी है अरुण और रूपाली की जो कॉलेज मे मिले फिर अच्छे दोस्त बने , रूपाली जो अरुण से प्यार कर बैठी...
शाम का समय था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और हल्की-हल्की बारिश पूरे शहर को भिगो रही थी। रेलवे स्टेशन की पुरानी छत से पानी की बूंदें लगातार टपक रही थीं। प्लेटफॉर्म पर लोगों की भ...
कभी कभी ज़िंदगी हमें ऐसी चीज़ें दे देती है, जो हमने कभी माँगी भी नहीं होती… पर वही चीज़ें हमारी सोच और दिल दोनों बदल देती हैं। मैं राधा रानी, एक सीधी-सादी लड़की। मेरी ज़िंदगी बि...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर। इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...
शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था। आज कुछ अलग सा लग रहा था। दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...
कहावत है कि जोड़ियां आसमान में बनती हैं, लेकिन कबीर और अवनि की जोड़ी दिल्ली मेट्रो के राजीव चौक स्टेशन पर एक ज़ोरदार दुर्घटना के साथ ज़मीन पर उतरी थी। शाम के छह बजे थे। मेट्रो स्ट...
पहली बारिश, पहला प्यार शाम धीरे-धीरे शहर पर उतर रही थी। आसमान बादलों से भरा था और बारिश की छोटी बूंदें खिड़कियों पर ऐसे गिर रही थीं जैसे कोई पुराना गीत चुपचाप बज रहा हो। र...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
अध्याय १: मुंबई की मिट्टी और बचपन की महक मुंबई। सपनों का शहर, जहां हर कोई कुछ बनने की जद्दोजहद में लगा रहता है। सी-लिंक की चमक के पास, एक साधारण से इलाके में रहती थी **निधि...
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