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बरसात हो रही थी। अस्पताल के बाहर मैं भीगता हुआ खड़ा था। न छाता था, न किसी का साथ...
(कमरे में हल्की नीली रोशनी। खिड़की के बाहर भोर होने को है।)(सुनीति कौशिक की बाहो...
From the finger of God, a speck of dirt emerges from under the nail. That spec...
इसी तरह हर वर्ष एक सप्ताह व्याख्यान एवं मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाता। बच्च...
किडनी का तोह्फ़ा ...
यह दुनिया बहुत बड़ी है और सबके खयालात भी अलग होते हैं, इसलिए मैंने आज कुछ अलग सो...
“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानविशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर”[दृश्य 1 – महा...
यह कहानी एक चिड़िया की है।एक छोटी-सी, नन्ही-सी और बहुत ही प्यारी चिड़िया।पूरे जं...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था। शहर की यह शाम भी कुछ वैसी ही थी—आधी भागदौड़ में डूबी हुई, आधी थकी हुई। वह कैफ़े के कोने वाली कुर्सी पर ब...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लॉक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जाना माना, प्रसिद्ध और ताकतवर C.E.O—ऑफिस के दरवाज़े से बाहर निकला। उसके हर कदम में उच्चस्तरीय आत्मविश्...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
कहानियां कुछ कह सी जाती है, जो दिल की बात है वो बयां सी कर जाति है ऐसे ही मेरी पहली कहानी की कोशिश का पहला भाग..... 21st...
उस चाँदनी रात की अंधेरी कमरे में जहाँ पर लाइट नहीं थी, पर चाँद की रोशनी उस लड़के पर पड़ रही थी जो बहुत ही खूबसूरती से अपने चेहरे को निहार रहा था। हाला कि वहाँ अंधेरा था , लेकिन उसक...
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