Beginning of My Love - 1 My imaginary world द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Beginning of My Love - 1

बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है…
वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था।
छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे में किसी राक्षस को भी पीछे छोड़ दे, इतना क्रूर दिखाई दे रहा था…
एक हाथ कुर्सी के आर्म पर था, और दूसरे हाथ में लिमिटेड स्टॉक की बेहद महंगी सिगार थी… उसकी उँगली में पहनी हीरे की अंगूठी उस अंधेरे में अपना अलग ही अस्तित्व दिखा रही थी… मानो उस अंधेरे पर उसी का राज हो…
“Where???”
उसने बस एक ही शब्द कहा…
“बॉस… बेसमेंट…!”
अपने हाथ की सिगार को पैर के नीचे कुचलते हुए वह उठ खड़ा हुआ और आगे बढ़ने लगा…
उसके पीछे-पीछे यह खबर देने वाला रॉनी भी चलने लगा…
और मन ही मन उस शिकार के लिए प्रार्थना करने लगा… कि आज उसे वह भयानक मौत का खेल देखने को न मिले…
आज अगर रॉनी कुछ और भी मांगता, तो उसे मिल जाता…
लेकिन जो होने वाला था, उसकी कल्पना भी रॉनी ने कभी सपने में नहीं की थी…
क्योंकि वह जानता था… उनके बॉस के बारे में सपने देखना मतलब नरक को छूकर आना…
“जब से वह उनके बॉस के साथ काम करने लगा था, तब से उसने सपने देखना ही छोड़ दिया था…”
“बॉस… This way!” कहते हुए रॉनी अब उसके आगे चलने लगा…
बेसमेंट की ओर जाते समय, दोनों तरफ खड़े सभी बॉडीगार्ड्स के सिर झुके हुए थे…
वे लंबे-चौड़े, ताकतवर शरीर वाले और हाई-टेक राइफल्स लिए गार्ड्स भी सिर उठाकर उसे देखने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे…
वह दृश्य ऐसा लग रहा था जैसे…
राक्षसों का राजा वहाँ से गुजर रहा हो और उसके गुलाम सिर झुकाकर उसे सलामी दे रहे हों…
रॉनी ने कुछ कोड दबाकर एक कमरे का दरवाजा खोला और पहले अंदर जाकर उसके सामने बैठने के लिए एक कुर्सी रख दी…
उस काले अंधेरे कमरे से यहाँ तक आते-आते उसने गिनकर बस कुछ ही शब्द बोले थे…
लेकिन रॉनी ऐसा एकमात्र गार्ड था जो सिर्फ उसके चेहरे के भाव देखकर ही समझ जाता था कि बॉस के मन में क्या चल रहा है…
और इसलिए उसे उसका खास राइट-हैंड कहा जाता था…
रॉनी ने जैसे ही कुर्सी रखी, वह तुरंत उस पर बैठ गया और बोला—
“ओपन।”
उसने कुर्सी से बंधी लड़की के चेहरे से काला कपड़ा हटाया, तो उसके बालों का जूड़ा खुल गया और सारे बाल उसके चेहरे पर बिखर गए…
“What the???”
“रॉनी…!!!” उसने सख्त आवाज में कहा।
“Yes, बॉस…”
“मैं अभी उन्हें होश में लाता हूँ…”
“हम्म… उन्हें??? Is she your guest???”
“नहीं, बॉस… सॉरी बॉस…”
इतना कहकर उसने एक गार्ड को इशारा किया…
गार्ड बर्फ से भरी बाल्टी लेकर आया… ठंडे पानी से भरी वह बाल्टी रॉनी को दी गई…
इशारा मिलते ही रॉनी ने वह पूरा पानी लड़की पर उंडेल दिया…
जैसे ही ठंडा पानी उसके ऊपर गिरा, उसे होश आ गया…
अब तक बेहोश रही वह पूरी तरह जाग गई… लेकिन खुद को कहाँ पाकर बैठी है, यह समझने में उसे कुछ समय लगा…
ठंड के कारण वह काँपने लगी…
डर उसके मन में घर कर गया… वह जैसे साँस लेना भी भूल गई थी… आँसू पानी के साथ बह रहे थे…
और वह आदमी बस उसे ध्यान से देख रहा था…
भीगे बालों के कारण उसे उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था… और उसे भी सामने कौन है, यह नहीं दिख रहा था…
वह समझ चुकी थी कि वह बहुत बड़े खतरे में फँस चुकी है…
लेकिन उसका तो किसी से कोई बैर नहीं था… फिर यह सब उसके साथ क्यों???
यही सवाल उसके मासूम मन को परेशान कर रहा था…
वह सोचने लगी—क्या कभी उसने किसी का नुकसान किया है? या किसी को दुख पहुँचाया है?
लेकिन उसे ऐसा कुछ याद नहीं आया…
आखिरकार उसने सिर उठाकर देखने की कोशिश की… पर बालों के कारण कुछ साफ नहीं दिखा…
फिर भी आसपास की हलचल से उसे महसूस हो रहा था कि उसके पास लोग मौजूद हैं…
कुछ देर बाद उसने हिम्मत जुटाकर पूछा—
“मुझे यहाँ कौन लाया है? और क्यों? मैंने आपका क्या बिगाड़ा है?
शायद आप गलत लड़की को उठा लाए हैं…
आप जिसे ढूँढ रहे हैं, वो मैं नहीं हूँ…
प्लीज़ मुझे जाने दीजिए…”
वह गिड़गिड़ाने लगी…
उसके हर शब्द कानों को मधुर लग रहे थे…
“मेरे माँ-पापा मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे…
मेरी माँ की तबीयत ठीक नहीं है… मुझे उनकी दवा लेकर जाना है…
पापा भी घर पर नहीं हैं…
प्लीज़ मुझे जाने दीजिए… मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगी…”
रॉनी को अपनी टीम पर पूरा भरोसा था… लेकिन उसकी बातों से एक पल के लिए उसका विश्वास डगमगा गया…
“क्या यह लड़की सच कह रही है?” एक पल को उसके मन में आया…
उसने मोबाइल में उसकी फोटो देखी… फिर उसका चेहरा देखने के लिए एक महिला गार्ड को बुलाया…
“लेडी गार्ड…”
“Yes, सर।”
उसने पहले बॉस को सलाम किया, फिर रॉनी की ओर मुड़ी…
“माया… इसके बाल हटाओ और चेहरा ऊपर करो…”
माया को अंदाज़ा हो गया था कि यह लड़की शायद कुछ ही पलों की मेहमान है…
वह उसके पास गई, उसके लंबे भीगे बालों को एक हाथ से संभाला और दूसरे हाथ से उसका चेहरा ऊपर किया…
एक पल के लिए माया भी चौंक गई—
“यह कोहिनूर जैसा चेहरा यहाँ बेसमेंट में क्या कर रहा है?”
उसके घने, लंबे, रेशमी बाल संभालना मुश्किल हो रहा था…
चाँद से भी सुंदर चेहरा… तराशी हुई भौंहें… लंबी पलकें… बंद आँखें और भी खूबसूरत लग रही थीं… ऊँचा माथा, बीच में छोटी सी बिंदी… सीधी नाक… तराशी हुई ठोड़ी… और स्वाभाविक लाल होंठ…
एक तरफ माया उसे देखती रह गई… और दूसरी तरफ बॉस भी कुछ पल के लिए उसके मासूम चेहरे में खो गया…
“Beautiful…” उसके होंठों से बहुत धीमी आवाज निकली…
शायद उसे खुद भी सुनाई न दी हो…
वह उसे ऊपर से नीचे तक देख रहा था…
भीगने के कारण उसका सफेद अनारकली ड्रेस उसके शरीर से चिपक गया था… जिससे उसका सौंदर्य और निखर आया था…
उसकी नज़र उसकी छाती पर गई… और भीगे कपड़ों के कारण अंदर के काले वस्त्र साफ दिखाई दे रहे थे…
गले का कट थोड़ा गहरा था, जिससे उसकी क्लीवेज भी स्पष्ट दिख रही थी…
शायद लाते समय उसकी ओढ़नी गिर गई होगी—उसने सोचा…
तभी उसे महसूस हुआ कि और लोग भी उसे देख रहे हैं…
उसने तुरंत आदेश दिया—
“Turn back…!!!”
यह सुनते ही माया ने उसका चेहरा छोड़ दिया, बाल पीछे किए और बाहर निकल गई…
रॉनी भी सिर झुकाकर बाहर चला गया…
लेकिन जाते-जाते वह सोचने लगा—
जिस लड़की की जानकारी उन्होंने जुटाई थी, उसमें और इस लड़की में कोई समानता क्यों नहीं थी?
चेहरा मिलता था… नाम, पता सब एक जैसा था…
फिर गलती कहाँ हुई?
उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही लड़की है…
क्योंकि वह इतना समझदार था कि सामने वाले की नीयत पहचान सके…
तो फिर चूक कहाँ हुई?
उसने तय किया कि वह पूरी जाँच करेगा… जब तक उसे संतोष न मिल जाए…
क्योंकि किसी बेगुनाह को सज़ा देना उनके उसूलों में नहीं था…
और यकीनन… उनके बॉस को भी यह पसंद नहीं आता....


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