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अगली सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही कृष्ण और रश्मि के बीच एक नई चर्चा शुरू हुई...
"अगर आपको पता चले आप जिन्हें महत्व दे रहे हैं उनके लिए आपका कोई महत्व ही नहीं ह...
**एपिसोड: बदलते रंग**कहा जाता है कि प्रेम विवाह (लव मैरिज) में इंसान जो रोता है,...
---------------चारू जोर से चिखी, " अन्वी दीदी ! "अन्वी जो अभी तक किसी बात पर हँस...
वो रात।कदमों की आहट। दरवाज़े की आवाज़। और फिर...कुछ नहीं।बस इतना ही? इतने dramat...
पापा… मैं उससे शादी नहीं कर सकती… वो उम्र में मुझसे 10 साल बड़ा है…!”21 साल की आ...
,,ये कौनसी जगह है,, ...
ध्रुवीय वक्रों (Polar curves) के नीचे क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए 'सीमाएँ' (limi...
अध्याय 3: साल 1991 और वो आखिरी खत'हत्या' शब्द को देखकर अमित के माथे पर प...
मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु शरीर जड़ है।ऊर्जा चेतन है।इन दोनों के मध्य जो बो...
अध्याय १: मुंबई की मिट्टी और बचपन की महक मुंबई। सपनों का शहर, जहां हर कोई कुछ बनने की जद्दोजहद में लगा रहता है। सी-लिंक की चमक के पास, एक साधारण से इलाके में रहती थी **निधि...
पटना की गलियों में सुबह की पहली किरणें चाय की दुकानों को जगातीं। कचौड़ी-समोसे की खुशबू हवा में घुली हुई थी। इस जीवंत मोहल्ले में रिया का छोटा सा घर था – पुरानी ईंटों की दीवारें, ले...
इन हवाओ मे इन फिजाओ मे तुझ को मेरा प्यार पुकारे.. आजा आजा तुझ को मेंरा प्यार पुक रुक ना पाऊं मैं सजती आऊं मे दिल को ज़ब दिलदार पुकारे इस गीत की पंक्तियों न...
बेरहम सईया यह उनकी तीसरी एनिवर्सरी थी और प्राची खुशी-खुशी अपने पति के लिए एक शानदार डिनर की तैयारी कर रही थी, नितिन काम के सिलसिले में बाहर था लेकिन वह कभी भी घर आ जाता था, जिससे व...
" एक माफिया लव स्टोरी की शुरुआत, एक अनाथ लड़की जिसके बचपन में सब कुछ छीन लिया गया हो, एक ऐसा हादसा जिसने उसकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर दी हो ,एक ऐसा माफिया जिससे हमेशा नफरत करती आ...
सुबह 9:10 बजे, ममता देवी : “सोनाई… अरे सोनाई! देख तो लड़की के कारनामे, कब से आवाज़ लगा रही हूँ फिर भी बिस्तर छोड़ने का नाम नहीं ले रही। अरे उठ, उठ!” ममता देवी की आवाज़ से कमरे की...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
कई सालों से मैं एक सपना देख रहा हूं, जहां सामने नीला पानी और किनारे पर फैली सुनहरी रेत... फिर एक पांव दिखता था सपने में ,जो हमेशा आधा पानी में होता और आधा किनारे पर । उस पांव की वह...
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