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रेगिस्तान की उस रात में हवा कुछ अलग थी। रेत के टीले ऐसे हिल रहे थे जैसे उनके नीच...
“वो दरवाज़ा जो कभी बंद नहीं हुआ…”रात के करीब 12 बज रहे थे।पूरे गाँव में सन्नाटा...
मुद्दाकमल चोपड़ा इससे गिरी हुई हरकत और क्या होगी? बेटी की उम्र की बच्ची के साथ...
AI से प्यारआरव की ज़िंदगी अब पहले जैसी नहीं रही थी। रूही की जुदाई ने उसके भीतर ए...
Chapter 1: एक सगाई... प्रस्तावनाहर गांव की अपनी एक पहचान होती है…कोई अपनी सादगी...
अधूरी मोहब्बत — अध्याय 8: एक अनकहा सच अर्जुन के हाथ काँप रहे थे। उसने धीरे से सम...
सर्पदंश का प्रहारजब प्रह्लाद नदी की विकराल लहरों के पाश से भी बच गया तो मंत्रियो...
इवेंट होराइजन ऑफ इटरनिटी' — समय का अंतिम किनारा'आर्यन की गूँज' अब के...
मैंने हल्के अंदाज़ में, लेकिन मन में उठती जिज्ञासा के साथ कहा,“लेकिन खैर… छोड़ो,...
अब तक ...ट्रेन की दूसरी तरफ एक कोने में एक औरत किसी से फोन पर लगातार बात कर रही...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
कई सालों से मैं एक सपना देख रहा हूं, जहां सामने नीला पानी और किनारे पर फैली सुनहरी रेत... फिर एक पांव दिखता था सपने में ,जो हमेशा आधा पानी में होता और आधा किनारे पर । उस पांव की वह...
खुली खिड़की से आती ठंडी हवा प्रीतम के कुछ कुछ सफेद हुए बालों को धीरे धीरे सहेला रही थी। 56 साल का प्रीतम अपनी कुर्सी पर बैठा बैठा कुछ सोच रहा था ।बाहर से आता शोर मानो उसके कानो तक...
वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो। शह...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
(सही और गलत प्यार में फर्क हैं!!) हर प्यार हमें साथ रहना नहीं सीखाता कुछ प्यार ऐसे भी होते हैं जो हमें सीखाते हैं की कब साथ छोड़न जरूरी हैं,ये सुनने में अजीब लगता हैं लेकिन ये...
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती...
शाम की हल्की सुनहरी रोशनी उस छोटी-सी बस्ती की गलियों में बिखरी हुई थी, जहाँ हर घर अपनी अलग कहानी कहता था—संघर्ष, उम्मीद और अधूरे सपनों की। उसी बस्ती के एक कोने में था काव्या का घर...
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