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जादुई मन By Captain Dharnidhar

शरीर की ताकत, मनकी ताकत, बुद्धि की ताकत, आत्मा की ताकत, ये चार प्रमुख ताकते (बल) है । इसके अलावा भी शक्तियां है । जैसे धन बल, अधिकार बल, छल
बल, संख्या बल, ये सारी ताकते आत्मा की त...

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महिला पुरूषों मे टकराव क्यों ? By Captain Dharnidhar

आपने एक खेल कभी अपने बचपन मे खेला होगा दो दल बच्चो के बनाये जाते है एक दल घोड़ी बन जाता है दूसरे दल वाले उनकी पीठ पर बैठ जाते हैं फिर एक बच्चा पूछता है "धींगा ऊपर कौन चढ़ा ? चढ...

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समता मूलक समाज की शिक्षा प्रणाली By संदीप सिंह (ईशू)

समतामूलक से तात्पर्य है कि जिसमें शोषण ना हो। भारत दुनिया का सबसे बड़ा जनतन्त्र है जनसंख्या की दृष्टि से भी विश्व में दूसरे स्थान पर है ।अरबों की आबादी को एक सूत्र में बाँधने का दृ...

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हिंदी सतसई परंपरा By शैलेंद्र् बुधौलिया

रबंध और मुक्तक का स्वरूप

और विशेषताएं

काव्य में एक विशेष बन्ध- एक विशिष्ट पूर्वाक्रम - की दृष्टि से उसके दो भेद स्वीकार किए गए हैं -प्रबंध और मुक्तक!

प्रबंध काव्य की रचन...

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संग विज्ञान का - रंग अध्यात्म का By Jitendra Patwari

इस लेख श्रृंखला में , हम एक ऐसे विषय से परिचित होने की कोशिश करेंगे जो बहोत ही मौलिक एवं सहज होने के साथ साथ प्रत्येक मनुष्य के जीवन से जुड़ा हुआ होने के बावजूद समाज में इसके बारे म...

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विश्वास - कहानी दो दोस्तों की By सीमा बी.

मेरी ये कहानी आप सब के समक्ष प्रस्तुत है।ये कहानी दो दोस्तों की अटूट दोस्ती की कहानी है। हमारा समाज आज भी एक लड़के और एक लड़की की दोस्ती को खुले दिल से स्वीकार नहीं कर पाता। ये कहा...

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एक रूह की आत्मकथा By Ranjana Jaiswal

मैं कामिनी हूँ,मिस कामिनी ।हाँ,इसी नाम से दुनिया मुझे जानती है।दुनिया...विशेषकर ग्लैमर की दुनिया।जगमगाती ....चकाचौंध से भरी ग्लैमर की दुनिया।
जानती है ....नहीं.. नहीं .…जानती थी।अ...

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प्राचीन भारतीय इतिहास By Rajveer Kotadiya । रावण ।

प्राचीन भारत के इतिहास की जानकारी के साधनों को दो भागों में बाँटा जा सकता है- साहित्यिक साधन और पुरातात्विक साधन, जो देशी और विदेशी दोनों हैं। साहित्यिक साधन दो प्रकार के हैं- धार्...

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नौकरानी की बेटी By RACHNA ROY

ये किताब मैं मेरी मां स्वर्गीय श्रीमती अनिमा भट्टाचार्या को समर्पित करती हुं।
राजू दसवीं में पढ़ता था और सबका बहुत ही दुलारा था।राजू को किसी तरह की कोई कमी नहीं थी। उसके घर में दो...

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परिवार, सुख का आकार By Kamal Bhansali

रिश्तों की दुनिया की अनेक विविधताएं है, रिश्तों के बिना न परिवार, न समाज, न देश की कल्पना की जा सकती है, कहने को तो यहां तक भी कहा जा सकता कि रिश्तों बिना जीवन कैसे जिया जा सकता है...

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