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हीरामन कारसदेव - 1
द्वारा राजनारायण बोहरे

हीरामन कारसदेव    राजनारायण बोहरे  लेखक के उपन्यास  "मुखबिर " का अंश                                  मैने अनुभव किया था कि बीहड़ में हम जिस  भी गाँव के पास से निकलते हरेक  ...

इश्क़ 92 दा वार - (पार्ट-11)
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 75

इश्क़ 92 दा वार (पार्ट-11)(7 दिसंबर 1992)सुबह होते हीं पूरे देश में आग जल चुकी थी.. दोनो  समुदाय की आना पर जो ठन चुकी थी आज की सुबह एक ...

इश्क़ 92 दा वार (पार्ट10)
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 117

इश्क़ 92 दा वार (पार्ट10)जावेद और उसका दोस्त नदीम शहर के एक व्यस्ततम इलाके की गलियों कूचों में से होते हुए लतीफ भाई के मुकाम पर पहुँचे थे.. किसी ...

इश्क़ 92 दा वार (भाग-9)
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 201

इश्क़ 92 दा वार (भाग-9)कंटिन्यू - पार्ट -9सुबह का वक़्त हो चला था लंबे समय के बाद मनु और अनु इश्क़ के दूसरे पायदान पर सफर कर रहे थे ...

टूट गई अंधविश्वास की छड़ी...
द्वारा Smita
  • 288

उसका क्या नाम था, कोई नहीं जानता। उसकी बेटी का नाम निर्मला था, यह बात पूरे गांव को पता थी। तभी तो पूरा फर्दपुर उसे निर्मलिया माय कहकर पुकारता ...

इश्क़ 92 दा वार (भाग-8)
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 330

इश्क़ 92 दा वार (भाग-8)अनु और मनु की नज़रे इश्क़ के एहसास को मज़बूर कर रही थी अनु के चेहरे का रंग सुर्ख गुलाबी हो चुका था वही मनु ...

गधों का संरक्षण
द्वारा Alok Mishra
  • 237

                     वैधानिक चेतावनी          " इस आलेख का मानव जाति के किसी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं ...

मिट्टी के दीये
द्वारा Smita
  • 288

सुनयना नोएडा के किसी प्राइवेट कंपनी में प्रबंधन से जुड़ी है। वह बेटी सुकन्या को प्यार से सुकू बुलाती है। उसने जब सुकू को गेहूं के आटे से दीया ...

पंचमहली गंध
द्वारा रामगोपाल तिवारी
  • 240

कहानी                    पंचमहली गंध                                          रामगोपाल  भावुक   मोहल्ले के बच्चे उसे काफी कहते हैं। वह कभी निराश नहीं दिखती थी। जब से पन्ना बीमार पड़ा है, वह खोई-खोई ...

रसूल
द्वारा Alok Mishra
  • 315

वो बच्चा गोल चेहरा, सुनहरे से बाल लाल टी-शर्ट और नीली नेकर पहने अपनी अम्मी और अब्बा के साथ घर से निकल पड़ा। ये परिवार पूरी खामोशी के साथ ...

खुशबुएं पकड़ में कहां आती हैं
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 591

उसे पक्का यकीन हो गया कि भावनाएं कहीं नहीं पहुंचतीं। वह कोई अन्तर्यामी तो है नहीं, पहुंचती भी होंगी, पर इतना वह ज़रूर कह सकता है कि भावनाओं की ...

धुस - कुटुस
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 444

"धुस- कुटुस" तहलका मच गया। ये तो सोने पर सुहागा ही था कि एक ओर जहां विश्व नीड़म विद्यानिकेतन का स्वर्ण जयंती समारोह मनाए जाने की घोषणा ज़ोर- शोर ...

विभीषिका
द्वारा rajendra shrivastava
  • 624

लघु-कथा-- विभीषिका                                                       ...

मातृत्व
द्वारा Sangeeta Gupta
  • (11)
  • 1.2k

 "आंती,हमाली बोल दे दो " गुलाब की क्यारी गोड़ते हुए सुरभि ने पीछे पलटकर देखा। मेहंदी की बाढ़ के टूटे हुए पैबंद से एक गोरा चिट्टा बच्चा लाल स्वेटर पहने, ...

स्थायित्व
द्वारा Ramnarayan Sungariya
  • 636

कहानी--                                स्थायित्व                          आर। एन। सुनगरया                   '' हॉं कमलेश मैं इतना टूट चुका हूँ ..... इसलिए ....... बस अब पथराई औखों और अक्रशील बैठे ...

पागल-ए-इश्क़ - (पार्ट -4)
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 666

कंटीन्यू पार्ट -4महक की कार तेज गती से घर की तरफ दौड़े जा रही थी.. महक पीछे की सीट पर बैठी बैठी सोच रही थी.. कि रेनू को जरूर ...

हरी चूड़ियाँ
द्वारा राजेश ओझा
  • (13)
  • 1.2k

   शब्बीर चच्चा आज जैसे बाजार से घर आये..बच्चों ने रोज की तरह घेर लिया..'मेरे लिये क्या है-मेरे लिये क्या है' रोज की तरह थैले को खींचने की होड़ ...

दिल की दौलत
द्वारा Ramnarayan Sungariya
  • 1k

कहानी       दिल की दौलत                      आर. एन. सुनगरया,                         मैं बहुत खुश दिख रही हूँ, इसलिये नहीं कि आज मेरी ...

बचपन की यादें - 3
द्वारा Bhupendra Dongriyal
  • 1.1k

               (3)        हर दिन की तरह स्कूल की छुट्टी होने पर हर एक गाँव के बच्चे अपनी-अपनी टोलियाँ बना कर ...

नो झगड़ा नो लाइफ
द्वारा r k lal
  • (15)
  • 1.6k

नो झगड़ा नो लाइफ आर ० के ० लाल              रात के दस बज रहे थे। सचिन अभी अभी काम से लौटा था। सचिन की पत्नी वर्षा बड़े ...

बचपन की यादें - 2
द्वारा Bhupendra Dongriyal
  • 975

                             (२)       राजेश और मैं एक ही कक्षा में पढ़ते थे । अब राजेश ने अपने ...

गंधैला
द्वारा राजेश ओझा
  • 936

रमेसर तिवारी जमींदार खानदान से थे..जमींदारी उन्मूलन भले हो गयी हो पर 'मुई हाथी तौ सवाव लाख' वाली बात उनपर फिट बैठ रही थी..बड़ा सा दो मंजिला मकान था..क्षेत्र ...

बचपन की यादें - 1
द्वारा Bhupendra Dongriyal
  • 1k

                             (१)         जब मैं छोटा बच्चा था,मैं भी स्कूल जाता था। तब ...

अंत भला तो सब भला
द्वारा Rama Sharma Manavi
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   राधिका के मोबाइल की घण्टी बजती है, देखा तो कोई नया नम्बर था।पुनः बजने पर फोन उठा लिया, हैलो करने पर उधर से चहकती हुई आवाज आई,राधिका कैसी ...

हर बार वो
द्वारा Afzal Malla
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हर बार वो (कहानी नही है ये है सच्चाई)हर बार वो पल्लू क्यों संभालेतुम कभी अपनी नजरे संभाल लोहर बार वोही घर क्यों संभालेकभी तुम हाथ बटा लिया कारोहर ...

बच्चों की कहानियाँ कैसी हों
द्वारा r k lal
  • 791

बच्चों की कहानियाँ कैसी हों आर 0 के0 लाल                                       मुझे अगर कोई कठिन काम लगता था  तो वह बच्चों को  कहानी सुनाना था। मैं बड़ा ...

कोरा कागज
द्वारा Sunita Agarwal
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बारिश थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी।आकाश में बिजली चमक रही थी,बादल गरज रहे थे।शाहीन ने घड़ी पर नजर डाली तो देखा रात के बारह बज ...

नैसर्गिक सुख
द्वारा ramnarayan sungaria
  • 626

लघु कथा--                                                        ...

चार बीघा खेत
द्वारा राजेश ओझा
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  • 1.8k

दल थम्हन शुकुल ने जैसे ही जलेबी को दही में लपेटा था कि मोबाइल बज उठी..अनमने होकर जलेबी को दोने में रखा और मोबाइल निकाला..अन्दाजा सही निकला..फोन बड़े बेटे ...

कन्यादान
द्वारा Sunita Agarwal
  • 1.5k

सहेलियों से घिरी हुई अवनी दुल्हन के लाल जोड़े में बेहद  खूबसूरत लग रही है।उसकी सखियाँ हँसी ठिठोली कर रही हैं। "देखो अवनी के हाथों में मेंहदी कितनी गहरी ...