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स्थायित्व
द्वारा Ramnarayan Sungariya

कहानी--                                स्थायित्व                          आर। एन। सुनगरया                   '' हॉं कमलेश मैं इतना टूट चुका हूँ ..... इसलिए ....... बस अब पथराई औखों और अक्रशील बैठे ...

पागल-ए-इश्क़ - (पार्ट -4)
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 105

कंटीन्यू पार्ट -4महक की कार तेज गती से घर की तरफ दौड़े जा रही थी.. महक पीछे की सीट पर बैठी बैठी सोच रही थी.. कि रेनू को जरूर ...

हरी चूड़ियाँ
द्वारा राजेश ओझा
  • 507

   शब्बीर चच्चा आज जैसे बाजार से घर आये..बच्चों ने रोज की तरह घेर लिया..'मेरे लिये क्या है-मेरे लिये क्या है' रोज की तरह थैले को खींचने की होड़ ...

दिल की दौलत
द्वारा Ramnarayan Sungariya
  • 336

कहानी       दिल की दौलत                      आर. एन. सुनगरया,                         मैं बहुत खुश दिख रही हूँ, इसलिये नहीं कि आज मेरी ...

बचपन की यादें - 3
द्वारा Bhupendra Dongriyal
  • 249

               (3)        हर दिन की तरह स्कूल की छुट्टी होने पर हर एक गाँव के बच्चे अपनी-अपनी टोलियाँ बना कर ...

नो झगड़ा नो लाइफ
द्वारा r k lal
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नो झगड़ा नो लाइफ आर ० के ० लाल              रात के दस बज रहे थे। सचिन अभी अभी काम से लौटा था। सचिन की पत्नी वर्षा बड़े ...

बचपन की यादें - 2
द्वारा Bhupendra Dongriyal
  • 264

                             (२)       राजेश और मैं एक ही कक्षा में पढ़ते थे । अब राजेश ने अपने ...

गंधैला
द्वारा राजेश ओझा
  • 558

रमेसर तिवारी जमींदार खानदान से थे..जमींदारी उन्मूलन भले हो गयी हो पर 'मुई हाथी तौ सवाव लाख' वाली बात उनपर फिट बैठ रही थी..बड़ा सा दो मंजिला मकान था..क्षेत्र ...

बचपन की यादें - 1
द्वारा Bhupendra Dongriyal
  • 552

                             (१)         जब मैं छोटा बच्चा था,मैं भी स्कूल जाता था। तब ...

अंत भला तो सब भला
द्वारा Rama Sharma Manavi
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   राधिका के मोबाइल की घण्टी बजती है, देखा तो कोई नया नम्बर था।पुनः बजने पर फोन उठा लिया, हैलो करने पर उधर से चहकती हुई आवाज आई,राधिका कैसी ...

हर बार वो
द्वारा Afzal Malla
  • 519

हर बार वो (कहानी नही है ये है सच्चाई)हर बार वो पल्लू क्यों संभालेतुम कभी अपनी नजरे संभाल लोहर बार वोही घर क्यों संभालेकभी तुम हाथ बटा लिया कारोहर ...

बच्चों की कहानियाँ कैसी हों
द्वारा r k lal
  • 548

बच्चों की कहानियाँ कैसी हों आर 0 के0 लाल                                       मुझे अगर कोई कठिन काम लगता था  तो वह बच्चों को  कहानी सुनाना था। मैं बड़ा ...

कोरा कागज
द्वारा Sunita Agarwal
  • 1k

बारिश थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी।आकाश में बिजली चमक रही थी,बादल गरज रहे थे।शाहीन ने घड़ी पर नजर डाली तो देखा रात के बारह बज ...

नैसर्गिक सुख
द्वारा ramnarayan sungaria
  • 290

लघु कथा--                                                        ...

चार बीघा खेत
द्वारा राजेश ओझा
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दल थम्हन शुकुल ने जैसे ही जलेबी को दही में लपेटा था कि मोबाइल बज उठी..अनमने होकर जलेबी को दोने में रखा और मोबाइल निकाला..अन्दाजा सही निकला..फोन बड़े बेटे ...

कन्यादान
द्वारा Sunita Agarwal
  • 1.1k

सहेलियों से घिरी हुई अवनी दुल्हन के लाल जोड़े में बेहद  खूबसूरत लग रही है।उसकी सखियाँ हँसी ठिठोली कर रही हैं। "देखो अवनी के हाथों में मेंहदी कितनी गहरी ...

बेहया के फूल
द्वारा राजेश ओझा
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  • 1k

 'सुनिए, आप जहां भी हैं, वहां से जल्दी आ जाइए!' फोन पर पत्नी वैदेही की अकुलाहट भरी आवाज़ सुनकर मनोहर चौंक गए। पूछने पर पता चला कि मंजू का ...

अग्नि परीक्षा
द्वारा Rekha Pancholi
  • 751

जय श्री राम !जय श्री राम !का उद्घोष, सिंधु की उत्तंग लहरों से टकराकर स्वर्ण नगरी में फैल गया । यह संदेश था, जो सांझ  के धुंधलके में इस सन्नाटे ...

सलोनी का फोन
द्वारा राजेश ओझा
  • (12)
  • 1.2k

आज होली के त्योहार में जहां सब मगन थे वहीं महंगू का चित्त खोया खोया था..महंगू की दुलहिन अंदाजा लगा तो रहीं थीं पर एक अन्जाने भय से कांप ...

First - एक अनोखा रक्षाबंधन
द्वारा Vishal
  • 389

कहानी शुरू होता है छोटे से बच्चे से जिसकी उम्र लगभग 7-8 साल का है,और वो घर में अकेले टीवी पर कार्टून देख रहा है और वो अपनी दुनिया ...

इच्छापूर्ति
द्वारा Monty Khandelwal
  • 561

एक शहर था जहां पर बहुत ही अमीर  व्यक्ति रहता था जिसके पास खूब सारी गाड़ियां बंगले और कई फैक्ट्रिया थी हर तरह से वह धनवान था ना किसी ...

एक लड़की भीगी भागी सी...
द्वारा Swati Solanki Shahiba
  • 583

मुंबई की बारिश। यार इस बारिश में तो यहां मुंबई में रहना मुश्किल कर दिया। ओह नो !!तुझे भी अभी टूटना था अपनी चप्पल की ओर देखते हुए ,अफसोस ...

ममता की छाँव - 3
द्वारा Sarita Sharma
  • (18)
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मौली अपनी माँ को खो चुकी थी। हालांकि उसका इसपर विस्वास कर पाना मुश्किल था, क्योंकि अभी कल की ही तो बात थी, जब वह मां के मना करने ...

उस एक सुबह के बाद
द्वारा राजेश ओझा
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  • 1.3k

रमा सारे काम निपटा कर बैठी ही थी कि मोबाइल बज उठा..स्क्रीन पर विटिया दीपाली का नम्बर चमक रहा था..हौले से फोन उठाया"हां बेटा..! हलो..""मम्मी अखिलेश अंकल को कल ...

ऑनलाइन क्लास की टेंशन
द्वारा r k lal
  • (17)
  • 941

ऑनलाइन क्लास की टेंशन आर ० के ० लाल                       अनु और मौली दो सगी बहने लखनऊ के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ती हैं। अनु कक्षा तीन ...

वह सब जो मैंने कहा
द्वारा VIRENDER VEER MEHTA
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                     आज 'लोकल' में भीड़ नहीं थी। ऐसा कम ही होता है, मेरे आस पास भी केवल तीन लोग ही ...

मबोहरा
द्वारा राजेश ओझा
  • (14)
  • 1.4k

मनोहरा ----------------"दादी..! दादी..!  मनोहरा बुआ आयी हैं और वह भी कार से..करिया बाबा के नीम के छांह में बैठी हैं "ज्योति दौड़ते हुये अपनी दादी सुखवन्ती को बताने आयी थी.."कौन ...

एडल्ट के लिए सीख
द्वारा r k lal
  • (15)
  • 1.1k

एडल्ट के लिए सीख आर 0 के 0 लाल                     चारों  दोस्त रमन, सुंदर, भूपत और रामबाबू एक बड़े होटल में डिनर पर बहुत दिनों के बाद आज ...

वेशभूषा
द्वारा राज कुमार कांदु
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किशन बेहद गरीब युवक था । धन संपत्ति के नाम पर उसके पास थोड़ी सी उपजाऊ जमीन और एक गाय थी ।  खेती किसानी में मन नहीं लगता था ...

गुमनाम रचनाकार-भूपेन्द्र डोंगरियाल की कहानियाँ - 4
द्वारा Bhupendra Dongriyal
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        कोरोना वायरस रोग जो अब कोविड-19 के नाम से जाना जाता है को अस्तित्व में आए हुए छः माह से भी अधिक समय बीत गया ...