सर्वश्रेष्ठ क्लासिक कहानियां कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

विष कन्या - 12
द्वारा Bhumika
  • (25)
  • 423

        आगे हमने देखा की मृत्युंजय और भुजंगा आपस में बात कर रहे हे। मृत्युंजय भुजंगा को सारिका के नाम से छेड रहा है। प्रातः लावण्या ...

विष कन्या - 11
द्वारा Bhumika
  • (34)
  • 912

       आगे हमने देखा की, महाराज इंद्ववर्मा से राजगुरु प्रधान सेनापति की कुशलता के विषय में पूछते है तभी वहां उप सेनापति तेजपाल आते है। महाराज उन्हे ...

सोन पिंजरा
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 738

रघु ने बाबू को साफ़ साफ़ कह दिया था कि चाहे मूंगफली के पैसे की उगाही धनीराम के यहां से आए या न आए, वो काकाजी के पास ज़रूर ...

वचन--(अन्तिम भाग)
द्वारा Saroj Verma
  • (19)
  • 813

वचन--(अन्तिम भाग) हाँ,भइया मुझे पक्का यकीन है कि सारंगी दीदी आपको बचा लेंगीं, दिवाकर बोला।।      नहीं, दिवाकर! जब सबको पता है कि आफ़रीन का ख़ून मैने किया है ...

आर्यन
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 501

और दिनों के विपरीत आर्यन छुट्टी होते ही बैग लेकर स्कूल बस की ओर नहीं दौड़ा बल्कि धीरे-धीरे चलता हुआ, क्लास रूम के सामने वाले पोर्च में रुक गया। ...

चाहत दिलकी - 2
द्वारा SWARNIM SAHAYATRI
  • 288

पहुंचने की जगह की जिज्ञासा से अधिक, मन उसके साथ चलने के लिए उत्साहित था। उसके साथ चलते समय, मैं अक्सर सोचती थी कि जैसे-जैसे मैं चलूँ, सड़क और ...

वचन--भाग(१४)
द्वारा Saroj Verma
  • (16)
  • 708

वचन--भाग(१४) भीतर अनुसुइया जी,सुभद्रा और हीरालाल जी बातें कर रहे थें और बाहर चारपाई पर सारंगी और दिवाकर बातें कर रहें थें और इधर हैंडपंप के पास बिन्दू बरतन ...

प्रोटोकॉल
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 531

जाड़े के दिनों में पेड़-पौधों को पानी की बहुत ज़्यादा ज़रूरत नहीं रहती। तापमान कम रहने से वातावरण की नमी जल्दी नहीं सूखती। बल्कि इस मौसम में खिलते फूलों ...

वचन--भाग(१३)
द्वारा Saroj Verma
  • (13)
  • 741

वचन--भाग(१३) प्रभाकर को ये सुनकर बहुत खुशी हुई कि उससे मिलने देवा आया था,आखिर उसे अपने भाई की याद आ ही गई और कैसे ना मेरी याद आती?सगा भाई ...

एक फैसला
द्वारा राज कुमार कांदु
  • 429

रहमान आज सुबह से ही परेशान था । नशे की सनक में उसने अपनी प्यारी सी बेगम सलमा को रात में ‘ न आव देखा न ताव ‘ तलाक ...

वचन--भाग(१२)
द्वारा Saroj Verma
  • (13)
  • 720

जुम्मन चाचा ऐसे ही अपने तजुर्बों को दिवाकर से बताते चले जा रहे थे और दिवाकर उनकी बातों को चटकारे लेकर के सुन रहा था,ताँगा भी अपनी रफ्त़ार से ...

चल बताऊं तोय
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 666

- वाह, क्या बात है ! बप्पी लाहिड़ी सुन ले तो अभी एडवांस चैक दे जाए। तुम तो ऐसा करो अम्मा, कि ए आर रहमान को चिट्ठी लिख दो, ...

वचन--भाग(११)
द्वारा Saroj Verma
  • (11)
  • 816

रात हो चली थीं लेकिन अनुसुइया जी और दिवाकर की बातें खत्म ही नहीं हो रहीं थीं और उधर सारंगी अपने कमरें में रखी टेबल कुर्सी पर बैठकर अपने ...

पूत पांव और पालना
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 603

रात के तीन बजे थे। सुकरात थरमस लेकर सीढ़ियों पर चढ़ रहा था। उसे थरमस की कॉफी बड़ी नर्स दीदी को देकर शिफ़्ट बदलने का अलार्म बजाना था। अकस्मात ...

वचन--भाग (१०)
द्वारा Saroj Verma
  • 792

वचन--भाग(१०) अनुसुइया जी,सारंगी को भीतर ले गईं,साथ में दिवाकर भी सब्जियों का थैला लेकर भीतर घुसा और उसने दरवाज़े की कुंडी लगा दी,उसे अन्दर आता हुआ देखकर सारंगी बोली____ ...

विष कन्या - 9
द्वारा Bhumika
  • (36)
  • 1.4k

        आगे हमने देखा कि मृत्युंजय लावण्या से व्यंग करता है और लावण्या क्रोधित होकर वहां सेचली जाती है। वहीं महाराज को आशंका है की मृत्युंजय ...

वचन--भाग (९)
द्वारा Saroj Verma
  • (11)
  • 732

वचन--भाग(९) दरवाज़े की घंटी बजते ही समशाद ने दरवाज़ा खोला तो सामने दिवाकर खड़ा था,दिवाकर भीतर आ गया, उसने समशाद से पूछा कि आफ़रीन कहाँ है? समशाद बोली कि ...

शराफ़त
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 519

मेरी और शराफ़त की पहली मुलाकात बेहद नाटकीय तरीक़े से हुई थी। भोपाल तक सोलह घंटे का सफ़र था, बस का। सारी रात बस में निकाल लेने के बावजूद ...

चाणक्य की चतुराई
द्वारा राज बोहरे
  • 432

चाणक्य ऐतिहासिक कहानी चाणक्य की चतुराई मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र उस दिन दुलहिन की तरह सजाई गई थी। साम्राज्य के नये राजा चन्द्रगुप्त को राजसिंहासन पर बैठाया जा ...

वचन--भाग (८)
द्वारा Saroj Verma
  • 759

वचन--भाग(८) प्रभाकर का अब कहीं भी मन नहीं लग रहा था,ना ही दुकानदारी में और ना ही घर में उसे तो दिवाकर की चिंता थी कि कहीं वो ऐसे ...

आज़ादी
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 465

सारा गांव स्कूल की ओर बढ़ रहा है। आज पंद्रह अगस्त है, स्कूल में झण्डा फहराया जाएगा। शहीदों से प्रेम नहीं है गांव को, पर क्योंकि कुछ भी हो ...

वचन--भाग ( ७)
द्वारा Saroj Verma
  • 804

वचन--भाग(७) दिवाकर ने शिशिर से झगड़ा तो कर लिया था लेकिन उसके  बहुत सारे राज शिशिर के पास थे और उसने जो धमकी दिवाकर को दी थीं, वो पूरी ...

वचन--भाग (६)
द्वारा Saroj Verma
  • (14)
  • 963

वचन--भाग(६) दिवाकर बहुत बड़ी उलझन में था,कमरें से बाहर निकलता तो उसे अपने पहनावें और चाल ढ़ाल पर शरम महसूस होती,कैन्टीन खाना खाने जाता तो सब काँटे छुरी से ...

इतिहास भक्षी
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 528

इतिहास-भक्षी नब्बे साल की बूढ़ी आँखों में चमक आ गई।  लाठी थामे चल रहे हाथों का कंपकपाना कुछ कम हो गया। … वो उधर , वो  वो भी, वो वाला ...

वचन--भाग ५)
द्वारा Saroj Verma
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  • 1.1k

वचन--भाग (५) प्रभाकर ने कौशल्या से पूछा__ मां! मैं हीरालाल काका से कैसे कहूं कि वें बिन्दवासिनी का अभी ब्याह ना करें क्योंकि उसे मैं अपने घर की बहु ...

विष कन्या - 8
द्वारा Bhumika
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        आगे हमने देखा कि राजवैद्य सुमंत मृत्युंजय को अपनी उपचार पद्धति के विषय में बताते हे ओर मृत्युंजय अपनी पद्धति के विषय में। फिर सब ...

वचन--भाग (४)
द्वारा Saroj Verma
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  • 1.1k

वचन--भाग(४) प्रभाकर को देखते ही कौशल्या बोली___ तू आ गया बेटा!तूने तो कहा था कि तुझे कुछ ज्यादा दिन लग जाएंगे, सबसे मिलकर आएगा लेकिन तू इतनी जल्दी आ ...

रत्नावली-19 अन्त संस्कृतानुवादकः पं. गुलामदस्तगीरः - अंतिम भाग
द्वारा रामगोपाल तिवारी
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रत्नावली-19  अन्त संस्कृतानुवादकः   पं. गुलामदस्तगीरः लेखकः  रामगोपाल ‘भावुकः’ संस्कृतानुवादकः   पं. गुलामदस्तगीरः मुंबई   सम्पादकः डा. विष्णुनारायण तिवारी रत्नावली - 19                वृद्धावस्थाम् प्राप्त्यनन्तरं ज्ञानिजनाः विचारं कुर्वन्ति यत् ते ...

वचन--भाग (३)
द्वारा Saroj Verma
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वचन--भाग(३) प्रभाकर का मन बहुत ब्यथित था,वो गाड़ी में बैठा और लेट गया,जब मन अशांत हो और हृदय को चोट लगी हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता,बस मन ...

खिचड़ी
द्वारा r k lal
  • (20)
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खिचड़ीआर 0 के 0 लालमम्मी ! तुम्हारे पापा के घर से इस बार खिचड़ी नहीं आई? सुमित ने अपनी मां पूनम से पूछा। पूनम आज सुबह से ही उदास ...