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इश्क़ 92 दा वार (पार्ट -3)
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 48

पार्ट -3 खत में दोनों ने अपनी अपनी दिली दास्तान लिख दी थी.. अनु और मनु की आंखो में चमक और चेहरे पर एक आत्म विश्वास की आभा फैल चुकी ...

रक्त सम्बन्ध
द्वारा Vijay Vibhor
  • 140

‘तीस बरस की हो गई है । इस उम्र में कौन तुझसे ब्याह करेगा ?’ मौसी के इन तानों की बौछार के बीच फोन पर मैसेज़ आया, ‘एक युवक ...

मृत्यु का वरण
द्वारा Chandresh Kumar Chhatlani
  • 106

वो मृत्यु से डरते थे, वैसे तो यह डर सभी के मन में होता है, लेकिन एक वैरागी के मुख से यह बात सुन कर शायद कुछ अजीब लगे। ...

इश्क़ 92 दा वार (पार्ट -2)
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 160

मंजिल की तरफ मनु के कदम तेजी से बढ़ चुके थे... नज़रों की तकरार की तय और मुकम्मल जगह पर मनु पहुंच चुका था मन और दिल बेचैनीं भरा ...

तो नैना हमारे बीच होती...
द्वारा Shikha Kaushik
  • 250

शानदार कोठी के लॉन में कुर्सियों पर आमने-सामने बैठी हुई नैना और पुनीता की जैसे ही आँखें मिली पुनीता गंभीरता की साथ बोली -'' हमेशा अपने ही बारे में ...

इश्क़ 92 दा वार - 1
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 172

वो मोहब्बत की चिंगारी 90 के दशक से सुलगना शुरू हों चुकी थी... मौसम वसंती हो कर अपने शवाब की और बढ़ रहा था.... हर यौवन के दिलों दिमांग ...

धरना - 5
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 154

दो दिन के लम्बे सफर के बाद निखिल, प्रिया और पवन शासकीय स्कूल पहुंचे थे.... आप लोग जिस शख्स की जानकारी लेने आये हैं वो शख्स आज से तीन साल ...

इन्द्रधनुष
द्वारा Prabodh Kumar Govil Verified icon
  • 460

आज वो कुछ अलग सा दिख रहा था। वो लंबा है, ये तो दिखता ही है, मगर उसके बाजू मछलियों से चिकने और गदराए हुए होंगे ये कभी ध्यान ...

दो दोस्तों की सच कहानी
द्वारा Dev Borana
  • 394

एक गाव था जहा दो दोस्त साथ साथ रहते थे मतलब उनका घर पास पास ही था ।वो दोनो साथ साथ मे ही पढते थे । एक दोस्त जिसके ...

बाजूबंद
द्वारा Rita Gupta
  • 300

बाज़ूबंद          संभव, सुहानी और झिलमिल की छोटी सी दुनिया थी। संभव और सुहानी दोनों अच्छी नौकरी में थे और उनकी बेटी झिलमिल स्कूल में ही ...

लेजेण्ड आफ बटालिक
द्वारा Mohd Siknandar
  • 234

रोम जिसे सात पहाड़ियो का देश भी कहा जाता है जिसकी पत्थरो पर आज भी तलवारों के निशान मौजूद है और उस घटना का जिक्र बार बार करते है ...

धरना - 4
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 261

लग भग 8 माह बाद प्रिया... प्रिया... प्रिया दौड़ती हुई सी आती हैं... आ रही हूं बाबा आ रही हूं... निखिल प्रिया को नज़र भर के देखता हैं... कोई कमी रह गयी क्या...? हा वही ...

इसे डॉलर मत पुकारना बे
द्वारा Nirdesh Nidhi
  • 172

“इसे डॉलर कभी मत पुकारना बे” शैंकी ने अलोए ब्लेक का गाना प्ले किया, जबसे डॉलर आया था तबसे उसे यह गाना बेहद पसंद आने लगा था । जैसे ही ...

सांझा
द्वारा Prabodh Kumar Govil Verified icon
  • 302

- सेव क्या भाव हैं? मैंने एक सेव हाथ में उठाकर उसे मसलते हुए लड़के की ओर देखते हुए पूछा। - साठ रुपए किलो! कह कर उसने आंखें झुका ...

जिदंगी कैसी है पहेली
द्वारा Minni Mishra
  • 180

( कहानी )* जिंदगी कैसी है पहेली * न चाहते हुए भी मेरी नजरें बारबार आकाश पर चली जा रही थीं | आज वह अकेले बेड पर पड़ा सामने दीवार ...

धरना - 3
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 206

निखिल कुछ देर वही खड़ा रहता हैं.... कुछ सोचता हैं... जनता चॉल की बस्ती को निहारता हैं... और फिर वहां से निकल पड़ता हैं... ----------------लेकिन अब जो हुआ प्रिया,  उसे भूल ...

मर्डर मिस्ट्री - 10
द्वारा Vismay
  • (11)
  • 386

“ तुम्हें क्या मालूम मुझे कितना मजा आया था उन तीनों की जान लेने में । तड़पा तड़पा कर मारा था । वैसे तो वो मुझे अच्छे से जानते ...

ज्ञान की सरिता
द्वारा BHARGAV HINDI JUDWAAN
  • 551

                ज्ञान की सरिता      हर रोज की तरह आज भी सर्दी भरी रात गुजर गई सुबह के छ: बज चुके थे l अभी भी बाहर दरवाजे पर शीत लहर का प्रकोप ...

नीडी
द्वारा Nirdesh Nidhi
  • 192

                          “ नीडी ““आप, यहाँ ?”नीरू दी को अकस्मात अपने गाँव में देखकर वो विस्मित हो उठे ...

काश वो ऐसी वैसी होती
द्वारा Prabodh Kumar Govil Verified icon
  • 453

समय बदल गया। कोई सबूत, सनद या मिसाल मांगे तो शुभम दे सकता है। चालीस साल पहले एक दिन उसकी नई- नवेली दुल्हन ने उसकी ताज़ा खरीद कर लाई ...

मर्डर मिस्ट्री - 9
द्वारा Vismay
  • 422

मनोहर शर्मा को गिरफ्तार किए हुए हफ्ते से भी ऊपर हो गया था । उससे बहुत बार कड़क पूछताछ की गई पर ना उसने अपना जुर्म कबूला ना उसने ...

धरना - 2
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 285

धरना -2किचिन में आते हुए प्रिया और निखिल को देखते हुए सुपरवाइज़र ने फ़ौरन उनके पास आकर पूछा क्या हुआ सर...? आपके यहां कोई सूरज नाम का आदमी... हा हा... सर हैं ...

असल जिंदगी..
द्वारा Tarun Kumar Saini
  • 341

हैं अपना दिल तो आवारा न जाने किस पे आयेगा..... सुनियेगा एक बार गाना और बोल पर थोड़ा ध्यान दीजियेगा । ज़िंदगी और आवारापन बहुत कम लोग "जी" पाते ...

धरना - 1
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 277

शाम हों चली थी, सूरज वसुंधरा को कल आने का वादा करके जा चूका था.. शहर की सड़कों पर दिन की अपेक्षा शाम कुछ ज्यादा ही रंगीन दिखाई देने ...

मर्डर मिस्ट्री - 8
द्वारा Vismay
  • 347

समीर ने नाश्ता छोड़कर मिश्रा जी को उसके फ़ोन पर आयी आखिरी कॉल की लोकेशन ढूंढने को बोल दिया । सीरियल किलर ने अपना अगला शिकार दबोच लिया था ...

मंज़िलों का दलदल - 2
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 177

गुंजन का रुदन तेज़ होते जा रहा था शायद उसे अपने किये पर पश्चाताप हो रहा था... शायद वो ये सोच रही थी इन आसुओं से उसका किया गया ...

मर्डर मिस्ट्री - 7
द्वारा Vismay
  • 383

मातरे जी कंप्यूटर रूम से भागते हुए समीर के पास आए और कहां की कंप्यूटर कीबोर्ड से इस बार मिसिंग लेटर ‘ S ’ है । समीर को अंदाज़ा हो ...

मंज़िलों का दलदल - 1
द्वारा Deepak Bundela AryMoulik
  • 213

इस क़ामयाबी के दलदल से कैसे निकलोगे जब मंज़िले -ए- ज़माना ही दलदल हो.... !****************************************गुंजन.... गुंजन.... अरे उठोगी या यू ही सारा दिन सोती रहोगी.... देखो ग्यारह बजने को हैं... और ...

मर्डर मिस्ट्री - 6
द्वारा Vismay
  • 513

समीर ने सिगरेट सुलगा लिया और मनोहर से मिलने के लिए निकल पड़ा रेट्रो नाइट क्लब की तरफ़। रेट्रो नाइट क्लब इस शहर का सबसे महंगा नाइट क्लब था ...

ममता की छाँव - 2
द्वारा Sarita Sharma
  • (18)
  • 599

हर रविवार छुट्टी के दिन मौली अपने पड़ोस में रहने वाले बच्चों के साथ जानवरों को जंगल छोड़ने जाते और दिन तक घर आ जाते थे..आज भी जब पड़ोस ...