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हवेली की दीवारों के पीछे छिपा सन्नाटा अब और भी गहरा और डरावना हो गया था। जब मुन्...
रोशनी से IAS के पद तक: अंसार शेख की कहानीजब इरादे बुलंद हों और संकल्प मजबूत, तो...
लेखक: सचिन यादव सह-लेखक / अतिथि लेखिका: स्नेहा साहू परिचय रावण विश्व पौराणिक कथा...
दान यानी औरों को अपना खुद का कुछ भी देकर उन्हें सुख देना वह।किसी भी दूसरे जीव को...
तभी—कोने में रखा एक दीपक अचानक तेजी से भडक उठा. आग की लपटें इतनी तेज फैलीं कि झो...
Scarry Doll 1 Horror Game एक पिता अपनी बच्ची को एक दुष्ट तांत्रिक क...
सुबह का समय...राजघाट से कुछ दूरी पर स्थित पुरानी हवेलियों का इलाका वर्षों से वीर...
(रात का सन्नाटा फैला हुआ है। बाहर ठंडी हवा बह रही है।कमरे में हल्की पीली रौशनी ज...
" शहद की गुड़िया - प्रकरण 81 " कृष्णा दादू...
अध्याय 1 : बारह बजने से पहलेसर्दियों की उस रात शहर रंग-बिरंगी रोशनियों में नहा र...
The Kingdom That Put a Fiction on Trial एक डार्क फैंटेसी महाकाव्य है, जहाँ राजनीति तलवारों से नहीं, विचारों से लड़ी जाती है; जहाँ दर्शन अपराध बन जाता है; और जहाँ एक अकेली लेखिका की...
यह कहानी किसी एक नाम, किसी एक चेहरे या किसी एक ज़िंदगी की नहीं है…यह कहानी उन सभी एहसासों की है, जो हम अक्सर दुनिया से छुपा लेते हैं।यह कहानी मेरी है…और शायद… तुम्हारी भी।कभी-कभी ज...
एक माँ आज रो रही है। उसका दम घुट रहा है, वह धीरे-धीरे मर रही है। क्या कोई उसकी पीड़ा को समझ पाएगा, या यह दर्द उसे उसके अंत की ओर ले जाएगा? मैं उसे देख रही हूँ… क्योंकि मैं उसी...
यह ग्रंथ किसी विश्वास का प्रतिपादन नहीं करता — यह केवल जीवन को देखने की दृष्टि है। जो भीतर घटता है, वही बाहर फैलता है; जो शरीर में है, वही ब्रह्मांड में। यहाँ विज्ञान और अध्य...
अध्याय १ — शत्रु : जन्म का विज्ञान शत्रु केवल विरोध नहीं, जन्म का द्वार है। भीतर के अंधकार से टकराव ही जागृति है। ऊर्जा-दृष्टि: शत्रु — विस्फोट, जो चेतना को जगाता है।...
जीवनोपनिषद (प्रथम पुस्तक) प्रस्तावना सदियों से मनुष्य सत्य की खोज में है।कभी उसने वेदों का सहारा लिया,कभी उपनिषदों की गहराई में उतरने की कोशिश की,कभी गीता सुनी, कभी शास्त्र पढ़...
तेरी पगार कितनी है? - तीन हज़ार! - महीने के? - और नहीं तो क्या, रोज़ के तीन हज़ार कौन देगा रे मुझको? - ऐसा मत बोल, दे भी देगा! उसने कनखियों से लड़की की ओर देखते हुए कहा। लड़की...
माया, अपने बीस के दशक के अंत में एक युवा पेशेवर, हमेशा एक जिज्ञासु और आत्मविश्लेषी व्यक्ति रही है। उसने खुद को लगातार जीवन के गहरे अर्थ और अपने अस्तित्व के उद्देश्य पर विचार करते ह...
देखा ही है की, हर लड़का कितना भी ज्ञान प्राप्त करके सफलता को प्राप्त नहीं हो पाता। कितनी भी सावधानी बरतने के बाद भी वह सफल नहीं हो पाता। यहां तक की अत्यंत दुष्कर कार्य को अच्छे से...
** हे प्रभो ! (पुरुषः ) ज्ञानम् कथम् अवाप्नोति । (पुंसः) मुक्तिः कथम् भविष्यति । ( पुंसः) वैराग्यम् च कथम् प्राप्तम् ( भवति ) एतत् मम ब्रूहि ॥१॥ Old king Janak asks the young As...
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