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आर्यमन के पिता ने गहरी सांस ली। उन्हें भी लगने लगा था कि शायद शादी ही एक रास्ता...
रात के 10:00 , शेखावत हवेली को खूबसूरती से सजाया गया था। वह इस वक्त किसी सोने के...
आरव की जिंदगी में पिछले कुछ हफ्तों में बहुत कुछ बदल चुका था।नई नौकरी, नई जिम्मेद...
कहानी-संग्रह ‘नई शुरुआत’ प्रकाशक लोकमत प्रकाशन, दिल्ली राज बोहरे एक स्थापित कहा...
एपिसोड 51— रुद्रा का चेहरा“नहीं... अर्जुन। मैं उसे नहीं जानती।”आयत की आवाज कांप...
शहर का वह सुनसान, वीरान इलाका जहाँ कभी संयोगिता की जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी श...
बाबा ने गंभीर स्वर में कहा— “हाँ। वही शादी जो सदियों पहले अधूरी रह गई थी।” उन्हो...
प्रकृति एक प्राकृति...
समय अपनी गति से आगे बढ़ रहा था।कलियुग अपनी सीमाएँ पार कर चुका था।विज्ञान, तकनीक,...
अध्याय 9मीरा और दिया सो गईं। अगली सुबह दोनों तैयार थीं। दिया ने ब्लैक जींस और पि...
ઓટલો ગામની એ સવાર આજે પણ મારી આંખો સામે એવી જ ઊભી થાય છે સૂરજ હજી પૂરો ઉગ્યો ન હતો આકાશમાં હળવો લાલ રંગ પથરાયો હતો ઘરના આંગણામાં પડેલી ઠંડી માટી પર મારા નાના પગલા પડતા અને હું દોડત...
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) छात्रों की स्वाभाविक इंटेलिजेंस ख़त्म कर रही है |तकनीक को इंसान की मदद के लिए बनाया गया है, उसकी सोच की ज...
गरमी की छुट्टी लगते ही बनैला गांव के स्कूली बच्चे बोर होने लगे थे। उन्हें किसी काम में मजा नहीं आ रहा था। न बाटी-भौंरा, पिट्ठूल, लुका-छाई, पतंग उड़ाई में और न ही दादा-दादी के किस्से...
एक समय की बात है, एक बहुत ही विशाल और सुंदर जंगल था। उस जंगल में हर तरफ हरे-भरे पेड़, मीठे पानी के झरने और तरह-तरह के जानवर रहते थे। उस पूरे जंगल पर शेरसिंह नाम के एक शेर का राज...
'नक्षत्र यात्री: हिमालय की कलाकृति' (सम्पूर्ण कहानी)अध्याय 1: एक साहसी पुरातत्ववेत्ता Pl l एक प्राचीन, भूरे पत्थर का मुहाना था—भगवान शिव से जुड़ी एक रहस्यमय कलाकृति को...
घने जंगल के हृदय में, जहाँ सूरज की रोशनी भी डरते-डरते ज़मीन तक पहुँचती थी, वहाँ एक ऐसा प्राणी रहता था जिसकी कहानी पीढ़ियों से सुनी जाती थी। उसे किसी ने नाम नहीं दिया था, फिर भी हर...
जब कोई चीज़ को बार-बार बोलना पड़े, फिर इन सब का मतलब शून्य हो जाता है। कई बार लगता है कि मैं शब्दों का गुलाम हूँ। हर भावना को, हर चोट को, हर उम्मीद को शब्दों में पिरोना पड़ता है...
ग्रीनवुड पब्लिक स्कूल की छुट्टी का समय हो रहा था। स्कूल के बाहर आइसक्रीम बेचने वाले आकर खड़े हो गए थे। एक काले रंग की वैन दो बार स्कूल के सामने से गुज़र चुकी थी। छुट्टी की घंटी...
'और मास्टर जी, आजकल फिर यहीं...?' चंदन ने अपनी लहराती साइकल की तेज़ रफ़्तार को जान- बूझकर ब्रेक लगाया और घंटी बजाकर मास्टर जी को जगाते हुए पूछा। जून की तपती दुपहर...
विवान महज दो महीने का लड़का था जो बालपन में ही बड़ा खुश मिजाज था। उसके चेहरे पर हर पल हल्की सी मुस्कुराहट रहती थी। विवान के होने से पहले उसके माता-पिता ने उसके पालन पोषण, उसको किस...
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