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रामू एक छोटे से गांव महासमुंद में रहता था वह शहर में जाके एक नौकरी करता था जिसमे...
लबूबू डॉल रात के अंधेरे में भी उस बहुत बड़े निर्माण का काम जोरों शोरों से शुर...
STAR SENTINELS 5: समय का न्यायसीन 1 – टाइम एजेंसी का सर्वोच्च कारागारनीले प्रकाश...
मंडी में रामदीन कमल चोपड़ा ...
शुरुआत जो किस्मत बन गईभोपाल की सुबहों में एक अलग सुकून होता है। हल्की ठंडी हवा,...
अशोक फिर कहता है --अशोक :- बेटा मैं तुम्हें बाद मे कॉल करता हूँ ।आदित्य :- ठिक ह...
Kabir अकेला लिविंग हॉल में बैठा था। उसकी आंखों में थकान और मन में बेचैनी थी। बाह...
अध्याय 8: स्मृतियों का पाताल और महागुरु का मौन भंगगुरुकुल के उस विशाल कक्ष में...
मेरे निर्जीव शरीर को श्मशान में अग्नि स्थल पर रख दिया गया और मेरे निर्जीव शरीर क...
शहर की रफ़्तार थम चुकी थी, लेकिन आसमान अपनी पूरी ताकत से गरज रहा था। रात के 11 ब...
'नक्षत्र यात्री: हिमालय की कलाकृति' (सम्पूर्ण कहानी)अध्याय 1: एक साहसी पुरातत्ववेत्ता Pl l एक प्राचीन, भूरे पत्थर का मुहाना था—भगवान शिव से जुड़ी एक रहस्यमय कलाकृति को...
घने जंगल के हृदय में, जहाँ सूरज की रोशनी भी डरते-डरते ज़मीन तक पहुँचती थी, वहाँ एक ऐसा प्राणी रहता था जिसकी कहानी पीढ़ियों से सुनी जाती थी। उसे किसी ने नाम नहीं दिया था, फिर भी हर...
जब कोई चीज़ को बार-बार बोलना पड़े, फिर इन सब का मतलब शून्य हो जाता है। कई बार लगता है कि मैं शब्दों का गुलाम हूँ। हर भावना को, हर चोट को, हर उम्मीद को शब्दों में पिरोना पड़ता है...
ग्रीनवुड पब्लिक स्कूल की छुट्टी का समय हो रहा था। स्कूल के बाहर आइसक्रीम बेचने वाले आकर खड़े हो गए थे। एक काले रंग की वैन दो बार स्कूल के सामने से गुज़र चुकी थी। छुट्टी की घंटी...
'और मास्टर जी, आजकल फिर यहीं...?' चंदन ने अपनी लहराती साइकल की तेज़ रफ़्तार को जान- बूझकर ब्रेक लगाया और घंटी बजाकर मास्टर जी को जगाते हुए पूछा। जून की तपती दुपहर...
विवान महज दो महीने का लड़का था जो बालपन में ही बड़ा खुश मिजाज था। उसके चेहरे पर हर पल हल्की सी मुस्कुराहट रहती थी। विवान के होने से पहले उसके माता-पिता ने उसके पालन पोषण, उसको किस...
एक छोटा सा गाँव था जहाँ सुंदर बगीचे, ऊँचे-ऊँचे पेड़ और रंग-बिरंगे फूल खिले रहते थे। इसी गाँव में एक छोटा सा घर था जिसमें एक प्यारी सी बिल्ली मिन्नी और एक नन्हा सा चूहा चीकी रहते थे...
बालक के माता और पिता, दो पंख ही तो होते हैं उसके, जिनकी सहायता से बालक अपनी बुलन्दियों की ऊँचे से ऊँची उड़ान भर पाता है। एक बुलन्द हौसला होतें हैं, अदम्य-शक्ति होते हैं और होते हैं...
दानी अक्सर अपनी तीसरी पीढ़ी के बच्चों को अपने ज़माने की कहानियाँ सुनाती हैं | बच्चों को भी बड़ा मज़ा आता है क्योंकि उनके लिए आज का माहौल ही सब कुछ है | वो कहाँ जानते हैं दानी के ज़माने...
आखिर जिस बात की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी, वही हुई। गोलू घर से भाग गया। गोलू के मम्मी-पापा, बड़ा भाई आशीष और दोनों दीदियाँ ढूँढ़-ढूँढ़कर हैरान हो गईं। रोते-रोते उसकी मम्मी का बुरा...
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