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गुमशुदा क्रेडिट कार्ड्स - ये कहानियां मेरी नज़र में - 1 By Neelam Kulshreshtha

[ नीलम कुलश्रेष्ठ ] एपीसोड ---1 नारी आंदोलन, स्त्री समानता, नारी विमर्श, स्त्री के अधिकार, इन सबकी विभिन्न कलाओं से अभिव्यक्ति, अपना व्यवसाय के अलावा होता है' स्त्रियों की अपने...

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बेहटा कलां - इंदु सिंह By राजीव तनेजा

आज़ादी बाद के इन 76 सालों में तमाम तरह की उन्नति करने के बाद आज हम बेशक अपने सतत प्रयासों से चाँद की सतह को छू पाने तक के मुकाम पर पहुँच गए हैं मगर बुनियादी तौर पर हम आज भी वही पुरा...

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किसान पुराण आड़ा वक्त -प्रतिभा पाण्डेय By राज बोहरे

समीक्षा लेखकिसान पुराण :आड़ा वक़्तप्रो0 प्रतिभा पाण्डेय प्रेमचंद के पहले किसान से जुड़े उपन्यास बहुत कम संख्या में पाए जाते हैं। स्वयं प्रेमचंद ने भी शुरू में किसानों पर ध्यान केंद्रि...

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क्योटो टू काशी- सौरभ शर्मा By राजीव तनेजा

धार्मिक नज़रिए से भारत में बनारस की काशी नगरी और जापान में वहाँ का क्योटो शहर काफ़ी महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। जैसे काशी में मंदिरों की भरमार है ठीक वैसे ही क्योटो भी बौद्ध मंदिरों...

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मधुशाला के बारे में कुछ चिंतन By Pranava Bharti

----------------------- भावुकता अंगूर लता से खींच कल्पना की हाला,कवि साकी बनकर आया है भरकर कविता का प्याला,कभी न कण-भर खाली होगा लाख पिएँ, दो लाख पिएँ!पाठकगण हैं पीनेवाले, पुस्तक म...

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Mirror Image Man of India By Piyush Goel

Piyush Goel - Mirror Image Man of IndiaPiyush Goel is popularly known as “Mirror Image Man” by the media and the Writer of “World First Handwrite Needle Book ‘Madhushala’.Piyush Go...

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माफ़ कीजिए श्रीमान- सुभाष चन्दर By राजीव तनेजा

व्यंग्य..साहित्य की एक ऐसी विधा है जिसमें आमतौर पर सरकार या समाज के उन ग़लत कृत्यों को इस प्रकार से इंगित किया जाता है की वह उस कृत्य के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति के मस्तिष्क से ले कर अ...

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गुजरात में सबसे सफ़ल नारी अदालत : महिला सामाख्या योजना - 1 By Neelam Kulshreshtha

नीलम कुलश्रेष्ठ एपिसोड -1 जैसे चाँद, सूरज, ज़मीन, और समुद्र एक बड़ा सच है ऐसे ही स्त्री प्रताड़ना भी एक बड़ा सच है., कुछ अपवादों को छोड़कर. सन ११९९ में मैं डभोई तलुका की महिला सामाख...

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औपनिवेशिक मानसिकता - भारत के विकास में चुनौती - 1 By KHEMENDRA SINGH

उपनिवेशवाद उपनिवेश (कालोनी) किसी राज्य के निवासियों द्वारा अलग (अपने देश के बाहर) किसी दूरस्थ स्थान पर बसाई गई बस्ती को कहते हैं । किसी पूर्ण प्रभुसत्ता संपन्न राज्य (सावरेन स्टेट)...

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वह जो नहीं कहा - समीक्षा By Sneh Goswami

बहुत कुछ कहता 'वह जो नहीं कहा' (लघुकथा संग्रह : स्नेह गोस्वामी )==========================================000 ॥ पूर्वकथन : नई किताबें डाक में मेरे पास बहुत आती हैं। नये और उदयी...

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राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 1 By राजनारायण बोहरे

भारतीय संस्कृति और भक्तिराधारमण वैद्य आचारमूलाः जातिः स्यादाचारः शास्त्रमूलकः। वेदवाक्यं शास्त्रमूलं वेदः साधकमूलकः।। क्रियामूलं साधकश्च क्रियापि फलमूलिका। फलमूलं सुखं चैव सुखमाननन...

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स्वतन्त्र सक्सेना के विचार - 3 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

समीक्षा उपन्‍यास एक और दमयन्ती लेखक श्री राम गोपाल भावुक समीक्षक स्‍वतंत्र कुमार सक्‍सेना श्री राम गोपाल जी भावुक का यह आठव...

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स्वतंत्र सक्सैना -सरल नहीं था यह काम By ramgopal bhavuk

सरल नहीं था यह काम जो डॉ. स्वतंत्र ने कर दिखया। समीक्षक-रामगोपाल भावुक सरल नहीं था यह काम जो डॉ. स्वतंत्र सक्सैना ने इस काव्य संकलन के माध्यम से कर दिखया है। वे अपनी बात में कहते ह...

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प्रेम नाम है मेरा..प्रेम चोपड़ा- रकिता नंदा By राजीव तनेजा

"प्रेम नाम है मेरा..प्रेम चोपड़ा।"इस संवाद के ज़हन में आते ही जिस अभिनेता का नाम हमारे दिलोदिमाग में आता है..वह एक घने बालों वाला..हीरो माफ़िक सुन्दर कदकाठी लिए हुए व्यक्ति का चेहरा ह...

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बावली बूच - सुनील कुमार By राजीव तनेजा

आमतौर पर किसी व्यंग्य कहानी या उपन्यास में समाज..सरकार..व्यक्ति अथवा व्यवस्था की ग़लतियों एवं कमियों को इस प्रकार से चुटीले अंदाज़ में उजागर किया जाता है कि सामने वाले तक बात भी पहुँ...

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ग्वालियर संभाग के कहानीकारों के लेखन में सांस्कृतिक मूल्य - 1 By padma sharma

ग्वालियर संभाग के कहानीकारों के लेखन में सांस्कृतिक मूल्य 1डॉ. पदमा शर्मासहायक प्राध्यापक, हिन्दीशा. श्रीमंत माधवराव सिंधिया स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिवपुरी (म0 प्र0) पुरोवाक् कहान...

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अभ्युदय - 1 - नरेंद्र कोहली By राजीव तनेजा

मिथकीय चरित्रों की जब भी कभी बात आती है तो सनातन धर्म में आस्था रखने वालों के बीच भगवान श्री राम, पहली पंक्ति में प्रमुखता से खड़े दिखाई देते हैं। बदलते समय के साथ अनेक लेखकों ने इस...

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प्रेम की उम्र के चार पढ़ाव - काव्यसंग्रह मनीषा कुलश्रेष्ठ By Neelima Sharrma Nivia

"प्रेम की उम्र के चार पढाव"मनीषा कुलश्रेष्ठ प्यार ढाई अक्षर का शब्द हैं लेकिन इसकी अनुभूति सबको भिन्न भिन्न होती हैं | सुबह की ओस का चुम्बन करती किशोर उम्र जब इस छुवन को महसूस...

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पुस्तक समीक्षा - 1 By Yashvant Kothari

पागल खाना पर पाठकीय प्रतिक्रिया याने समय का एक नपुंसक विद्रोह यशवंत कोठारी राजकमल ने ज्ञान चतुर्वेदी का पागलखाना छापा है.२७१ पन्नों का ५९५रु. का उपन्या...

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Musafir Cafe Book Review - मुसाफिर काफे पुस्तक परिचय By Mahendra Sharma

मुसाफिर कैफे, दिव्य प्रकाश दुबे के काफे में मज़ेदार चाय के साथ पराठे वाली फीलिंग कराने वाली कहानी है। क्या हम कभी मिले हैं? हाँ शायद कहाँ? किसी किताब में जो अभी लिखी ही नहीं गई... ऐ...

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गुमशुदा क्रेडिट कार्ड्स - ये कहानियां मेरी नज़र में - 1 By Neelam Kulshreshtha

[ नीलम कुलश्रेष्ठ ] एपीसोड ---1 नारी आंदोलन, स्त्री समानता, नारी विमर्श, स्त्री के अधिकार, इन सबकी विभिन्न कलाओं से अभिव्यक्ति, अपना व्यवसाय के अलावा होता है' स्त्रियों की अपने...

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बेहटा कलां - इंदु सिंह By राजीव तनेजा

आज़ादी बाद के इन 76 सालों में तमाम तरह की उन्नति करने के बाद आज हम बेशक अपने सतत प्रयासों से चाँद की सतह को छू पाने तक के मुकाम पर पहुँच गए हैं मगर बुनियादी तौर पर हम आज भी वही पुरा...

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किसान पुराण आड़ा वक्त -प्रतिभा पाण्डेय By राज बोहरे

समीक्षा लेखकिसान पुराण :आड़ा वक़्तप्रो0 प्रतिभा पाण्डेय प्रेमचंद के पहले किसान से जुड़े उपन्यास बहुत कम संख्या में पाए जाते हैं। स्वयं प्रेमचंद ने भी शुरू में किसानों पर ध्यान केंद्रि...

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क्योटो टू काशी- सौरभ शर्मा By राजीव तनेजा

धार्मिक नज़रिए से भारत में बनारस की काशी नगरी और जापान में वहाँ का क्योटो शहर काफ़ी महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। जैसे काशी में मंदिरों की भरमार है ठीक वैसे ही क्योटो भी बौद्ध मंदिरों...

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मधुशाला के बारे में कुछ चिंतन By Pranava Bharti

----------------------- भावुकता अंगूर लता से खींच कल्पना की हाला,कवि साकी बनकर आया है भरकर कविता का प्याला,कभी न कण-भर खाली होगा लाख पिएँ, दो लाख पिएँ!पाठकगण हैं पीनेवाले, पुस्तक म...

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Mirror Image Man of India By Piyush Goel

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स्वतंत्र सक्सैना -सरल नहीं था यह काम By ramgopal bhavuk

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पागल खाना पर पाठकीय प्रतिक्रिया याने समय का एक नपुंसक विद्रोह यशवंत कोठारी राजकमल ने ज्ञान चतुर्वेदी का पागलखाना छापा है.२७१ पन्नों का ५९५रु. का उपन्या...

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मुसाफिर कैफे, दिव्य प्रकाश दुबे के काफे में मज़ेदार चाय के साथ पराठे वाली फीलिंग कराने वाली कहानी है। क्या हम कभी मिले हैं? हाँ शायद कहाँ? किसी किताब में जो अभी लिखी ही नहीं गई... ऐ...

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