सर्वश्रेष्ठ पुस्तक समीक्षाएं कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

अमेरिका में 45 दिन - सोनरूपा विशाल
द्वारा राजीव तनेजा
  • 68

किसी भी देश, उसकी सभ्यता, उसके रहन सहन..वहाँ के जनजीवन के बारे में जब आप जानना चाहते हैं तो आपके सामने दो ऑप्शन होते हैं। पहला ऑप्शन यह कि ...

प्रेमचंद शैली में राज बोहरे - रूपेंद्र राज
द्वारा राज बोहरे
  • 82

                        गद्य साहित्य में कहानियों का इतिहास लगभग सौ वर्ष पुराना है.हिंदी साहित्य में जो स्थान मुंशी प्रेमचंद को मिला वहां तक का सफर अभी तक किसी कहानीकार ...

रत्नावली-रामगोपाल भावुक
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 176

रत्नावली-रामगोपाल भावुक आदरणीय सडैया जी, सादर प्रणाम।  आपके आदेशानुसार मैंने रत्नावली उपन्यास का अध्ययन किया । इसे मैने पूरी गंभीरता से पढा यद्वपि इस मेंरेप ास पढने क लिए ...

अक्कड़ बक्कड़- सुभाष चन्दर
द्वारा राजीव तनेजा
  • 80

आम तौर पर हमारे तथाकथित सभ्य समाज दो तरह की प्रजातियाँ पाई जाती हैं। एक कामकाजी लोगों की और दूसरी निठल्लों की। हमारे यहाँ कामकाजी होने से ये तात्पर्य ...

अंधेरे कोने@फेसबुक डॉट कॉम
द्वारा राजीव तनेजा
  • 80

जिस तरह एक सामाजिक प्राणी होने के नाते हम लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए आपस में बातचीत का सहारा लेते हैं। उसी तरह अपनी भावनाओं को ...

डॉर्क हॉर्स
द्वारा Amit Singh
  • 232

"नौजवानी के  इंच-इंच जूझ की कहानी है डार्क हॉर्स"************************            पूर्वी उत्तर प्रदेश और लगभग पूरा बिहार का क्षेत्र अपनी विविध प्रकार की समस्याओं के कारण अक्सर सुर्ख़ियों में रहता है| ...

पुस्तक समीक्षा- दमयन्ती: रामगोपाल भावुक
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 144

पुस्तक समीक्षा- दमयन्ती: रामगोपाल भावुक                         पंचमहल इलाके की ग्रामीण नायिका दमयन्ती नामक उपन्यास आज हम सबके सामने है, जिससे एक बार तो हम सबको यह भ्रम पैदा होता ...

थोड़ा हँस ले यार- सुभाष चन्दर
द्वारा राजीव तनेजा
  • 154

आमतौर पर किसी व्यंग्य को पढ़ते वक्त हमारे ज़हन में उस व्यंग्य से जुड़े पात्रों को लेकर  मन में कभी त्रासद परिस्थितियों की वजह से करुणा तो कभी क्षोभ ...

खिड़कियों से झाँकती आँखें- सुधा ओम ढींगरा
द्वारा राजीव तनेजा
  • 166

आमतौर पर जब हम किसी फ़िल्म को देखते हैं तो पाते हैं कि उसमें कुछ सीन तो हर तरह से बढ़िया लिखे एवं शूट किए गए हैं लेकिन कुछ ...

अंजू शर्मा का महत्वाकांक्षी कहानी संग्रह-पुस्तक समीक्षा
द्वारा राज बोहरे
  • 290

                                               अंजू शर्मा का दूसरा कहानी संग्रह सुबह ऐसे आती है पुस्तक मेला 2020 में दिल्ली में विमोचन हुआ। भावना प्रकाशन से प्रकाशित इस कहानी संग्रह में लेखिका की ...

बहुत दूर गुलमोहर- शोभा रस्तोगी
द्वारा राजीव तनेजा
  • 172

जब कभी भी हम अपने समकालीन कथाकारों के बारे में सोचते हैं तो हमारे ज़हन में बिना किसी दुविधा के एक नाम शोभा रस्तोगी जी का भी आता है ...

स्वप्नपाश- मनीषा कुलश्रेष्ठ
द्वारा राजीव तनेजा
  • 1.1k

कई बार हमें पढ़ने के लिए कुछ ऐसा मिल जाता है कि तमाम तरह की आड़ी तिरछी चिंताओं से मुक्त हो, हमारा मन प्रफुल्लित हो कर हल्का सा महसूस ...

सृजन के असली क्षण-पुस्तक समीक्षा
द्वारा राज बोहरे
  • 2k

                          सृजन के असली क्षण है यह जब वह श्रमिक  कला के आनंद में भी डूबा है।                                                                                                          राजनारायण बोहरे पुस्तक-ऐसे दिन का इंतज़ार (कविता संग्रह) कव

स्वाभिमान
द्वारा राजीव तनेजा
  • 2.2k

कई बार हम लेखकों के आगे कुछ ऐसा घटता है या फिर कोई खबर अथवा कोई विचार हमारे मन मस्तिष्क को इस प्रकार उद्वेलित कर देता है  कि हम ...

निशां चुनते चुनते - विवेक मिश्र
द्वारा राजीव तनेजा
  • 525

कई बार कुछ कहानियाँ आपको इस कदर भीतर तक हिला जाती हैं कि आप अपने लाख चाहने के बाद भी उनकी याद को अपने स्मृतिपटल से ओझल नहीं कर ...

पुस्तक समीक्षा - 11
द्वारा Yashvant Kothari
  • 461

पुस्तक समीक्षा काल योर मदर अमेरिकी फ़िल्मकार  बेरीसोनेनफ़ेल्ड की आत्मकथा काल युओर मदर के नाम से हार्पर कोलिन सेइसी मार्च में अमेरिका में छप कर आइ है यह पुस्तक ...

खट्टर काका - हरिमोहन झा
द्वारा राजीव तनेजा
  • 456

कहते हैं कि समय से पहले और किस्मत से ज़्यादा कभी कुछ नहीं मिलता। हम कितना भी प्रयास...कितना भी उद्यम कर लें लेकिन होनी...हो कर ही रहती है। ऐसा ...

लक्ष्मी प्रसाद की अमर दास्तान - ट्विंकल खन्ना
द्वारा राजीव तनेजा
  • 465

कई बार कुछ किताबें हम खरीद तो लेते हैं मगर हर बार पढ़ने की बारी आने पर उनका वरीयता क्रम बाद में खरीदी गयी पुस्तकों के मामले पिछड़ता जाता ...

मुकम्मल अधूरेपन की एक अतृप्त सच्ची झूठी गाथा।
द्वारा Keshav Patel
  • 385

कहने को तो समय के साथ कई कहानियां कही जाती हैं, लेकिन कई कहानियों का अधूरापन समय की तमाम कोशिशों के बाद भी खाली ही रह जाता है। प्रमित ...

संस्थानोपनिषद
द्वारा Yashvant Kothari
  • 776

देश का हर नागरिक दिल्लीमुखी है,और दुखी है दुखी आत्माएं सशरीर दिल्ली की ओर कूंच करती रहती हैं राजधानी के सबसे महत्व पूर्ण इलाके में स्थित इस भवन से देश की महत्व ...

शान्तिपुरा - अंजू शर्मा
द्वारा राजीव तनेजा
  • 384

अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए हम सब अपनी रुचिनुसार कोई ना कोई माध्यम चुनते हैं जैसे कोई चित्रकारी के माध्यम से अपनी बात कहता है तो अपनी ...

कुछ तो बाकी है - रजनी मोरवाल
द्वारा राजीव तनेजा
  • 399

कई बार जब कभी हम लिखने बैठते हैं तो अमूमन ये सोच के लिखने बैठते हैं कि हमें आरंभ कहाँ से करना है और किस मोड़ पर ले जा ...

कश्मीरियत के सौ सालों की दास्तां “रिफ्यूजी कैंप”
द्वारा Keshav Patel
  • 448

आशीष कौल व्हाइट शर्ट में ब्लैक टाई लगाए कोई मार्केटिंग या पीआर एजेंसी का हिस्सा नहीं हैं, जो दावा करें कि हमने नई किस्म की खुशबूदार बोतल या फिर ...

अकाल में उत्सव - पंकज सुबीर
द्वारा राजीव तनेजा
  • 364

कई बार कुछ ऐसा मिल जाता है पढ़ने को जो आपके अंतर्मन तक को अपने पाश में जकड़ लेता है। आप चाह कर भी उसके सम्मोहन से मुक्त नहीं ...

डार्क मैन स बैड - गीता पंडित
द्वारा राजीव तनेजा
  • 397

कवि मन जब कभी भी कुछ रचता है बेशक वो गद्य या फिर पद्य में हो, उस पर किसी ना किसी रूप में कविता का प्रभाव होना लगभग अवश्यंभावी ...

वक़्त के होंठों पर प्रेमगीत
द्वारा Neelima Sharrma Nivia
  • 422

 कवि दीपक अरोरा जी का कविता संग्रह " वक़्त के होंठो पर एक प्रेम गीत " मेरे हाथो मैं हैं इसको पढना अपने  आप में सुखद अनुभूति हैं प्रेम के ...

लिट्टी चोखा - गीताश्री
द्वारा राजीव तनेजा
  • 452

कुछ का लिखा कभी आपको चकित तो कभी आपको विस्मृत करता है। कभी किसी की लेखनशैली तो कभी किसी की धाराप्रवाह भाषा आपको अपनी तरफ खींचती है। किसी की ...

नया भारत
द्वारा JYOTI PRAKASH RAI
  • 408

आज की दुनिया एक नये युग का संचार कर रही है, आज का मानव प्रतिदिन एक नई खोज के साथ आगे बढ़ रहा है। और आगे के आने वाले ...

जो रंग दे वो रंगरेज़ - रोचिका अरुण शर्मा
द्वारा राजीव तनेजा
  • 399

ये बात 1978-80 के आसपास की है। तब हमारे घर में सरिता, मुक्ता जैसी पत्रिकाऐं आया करती थी। बाद में इनमें गृहशोभा और गृहलक्ष्मी जैसी पत्रिकाओं का नाम भी ...

जल
द्वारा JYOTI PRAKASH RAI
  • 484

जल की जीवन है इस बात में कोई शक नहीं है। क्योंकी धरती पर सभी जीवित प्राणियों को बिना जल के जीवित रह पाना यहां संभव नहीं है। सभी ...