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बनारस टॉकीज-सत्य व्यास
द्वारा राज बोहरे
  • 294

बनारस टॉकीज उपन्यास सत्य व्यास का उपन्यास है, जिसके मुख पृष्ठ पर लखप्रति लेखक ; यानी ऐसा लेखक जिसकी कई क़िताबों की एक लाख प्रतियां बिक चुकी हों, और ...

नैना- संजीव पालीवाल
द्वारा राजीव तनेजा
  • 219

अगर बस चले तो अमूमन हर इनसान अपराध से जितना दूर हो सके, उतना दूर रहना चाहता है बेशक इसके पीछे की वजह को सज़ा का डर कह लें ...

डिसीजन- फ़ैयाज़ हुसैन
द्वारा राजीव तनेजा
  • 210

हर बात को सोचने ..समझने का नज़रिया सबका अपना अपना एवं अलग अलग होता है। ये ज़रूरी नहीं कि आप किसी की बात से या कोई आपकी बात से ...

अपनी सी रंग दीन्ही रे- सपना सिंह
द्वारा राजीव तनेजा
  • 255

देशज भाषा..स्थानीयता और गांव कस्बे के हमारे आसपास दिखते चरित्रों से सुसज्जित स्त्रीविमर्श की कहानियों की अगर बात हो तो इस क्षेत्र में सपना सिंह एक उल्लेखनीय दखल रखती ...

स्वयँ प्रकाश-ईंधन
द्वारा राज बोहरे
  • 207

पुस्तक समीक्षा उपन्यास। ईंधन स्वयँ प्रकाश जिनका अपने संचालन में कोई हाथ ना हो जन्म जन्म रहे जाएं अकेले कोई साथ ना हो मुकुट बिहारी सरोज आज की हिंदी ...

जो लरे दीन के हेत- सुरेंद्र मोहन पाठक
द्वारा राजीव तनेजा
  • 426

अगर आप थिर्लर/रोमांचक उपन्यासों को हिंदी में कभी भी पढ़ा है तो यकीनन आप सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के नाम से बिल्कुल भी अपरिचित नहीं होंगे। अब तक वे ...

कोई खुशबू उदास करती है-नीलिमा शर्मा
द्वारा राजीव तनेजा
  • 357

आमतौर पर मानवीय स्वभाव एवं सम्बन्धों को ले कर बुनी गयी अधिकतर कहानियों को हम कहीं ना कहीं..किसी ना किसी मोड़ पर..खुद से किसी ना किसी बहाने कनैक्ट कर ...

मेघना- कुसुम गोस्वामी
द्वारा राजीव तनेजा
  • 516

मीडिया और मनोरंजन के तमाम जनसुलभ साधनों की सहज उपलब्धता से पहले एक समय ऐसा था जब हमारे यहाँ लुगदी साहित्य की तूती बोलती थी। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों ...

डॉमनिक की वापसी - विवेक मिश्र
द्वारा राजीव तनेजा
  • 297

आमतौर पर किताबों के बारे में लिखते हुए मुझे कुछ ज़्यादा या खास सोचना..समझना नहीं पड़ता। बस किताब को थोड़ा सा ध्यान से पढ़ने के बाद उसके मूल तत्व ...

राजनटनी- गीताश्री
द्वारा राजीव तनेजा
  • 360

बचपन से ही आमतौर पर ऐसे किस्से या कहानियाँ हमारे आकर्षण, उत्सुकता एवं जिज्ञासा का सदा से ही केंद्र बनते रहे हैं जिनमें किसी राजा की अद्वितीय प्रेम कहानी ...

जुहू चौपाटी- साधना जैन
द्वारा राजीव तनेजा
  • 561

मायानगरी बॉलीवुड और उससे जुड़ी कहानियाँ सदा से ही हमारे चेतन/अवचेतन में आकर्षण का केंद्र रही हैं। फिल्मी सितारों का लक्ज़रियस जीवन, लैविश रहनसहन, लंबी चौड़ी गाड़ियाँ, उनकी मस्ती, ...

एकलव्य - पुस्तक समीक्षा
द्वारा Kumar Ajit
  • 684

पुस्तक का नाम: एकलव्य लेखक: रामगोपाल भावुक ASIN B077BYR6Y3   कुल पृष्ठ: 88   भाषा: हिंदी   श्रेणी: उपन्यास   समीक्षक: कुमार अजित   लेखक के बारे में: रामगोपाल ...

लाइफ आजकल- आलोक कुमार
द्वारा राजीव तनेजा
  • 393

कहते हैं कि किसी भी चीज़ के होने ना होने का पहले से तय एक मुक़र्रर वक्त होता है। किताबों के संदर्भ में भी यही बात लागू होती है। ...

हिंदी कथा साहित्य में पाश्चात्य प्रभाव
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 246

कथा साहित्य में पाश्चात्य प्रभावभारतीय समाज पश्चिम के संपर्क में यूं तो पहले ही आ गया था पर उसकी जीवन शैली, उसकी विचारधारा, उसकी कला और उसके साहित्य पर ...

काली धूप- सुभाष नीरव (अनुवाद)
द्वारा राजीव तनेजा
  • 324

जब किसी दुख भरी कहानी को पढ़ कर आप उस दुःख.. उस दर्द..उस वेदना को स्वयं महसूस करने लगें। पढ़ते वक्त चल रहे हालातों को ना बदल पाने की ...

साँझी छत- छाया सिंह
द्वारा राजीव तनेजा
  • 441

आमतौर पर किसी का शुरुआती लेखन अगर पढ़ने को मिले तो उसमें से उसकी अनगढ़ता या सोंधी महक लिए कच्चापन स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। मगर सुखद आश्चर्य ...

यह सड़क मेरे गांव को नही जाती
द्वारा डॉ0 व्योमेश चित्रवंश, एडवोकेट
  • 498

यह सड़क मेरे गांव को नही जाती : बदलते ग्रामीण परिवेश पर व्योमेश चित्रवंश की एक बेहतरीन किताब          एक लंबे अंतराल के बाद एक किताब पढ़ने को मिली जिसने ...

ठरकी- मुकेश गाते
द्वारा राजीव तनेजा
  • 405

ज़्यादातर कहानियों के प्लॉट..किस्से  या किरदार हमारे ही आसपास के माहौल में..हमारे ही इर्दगिर्द जाने कब से बिखरे पड़े होते हैं मगर हमें उनका पता तक नहीं चलता। उन्हें ...

3020 ई.- राकेश शंकर भारती
द्वारा राजीव तनेजा
  • 771

खगोल विज्ञान शुरू से ही हमारी उत्सुकता, जिज्ञासा, दिलचस्पी एवं उत्कंठा का विषय रहा है। बचपन में खुले आसमान में चाँद तारों को देख उन दिनों हम कई तरह ...

राजनारायण बोहरे - आलोचना की अदालत
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 375

राजनारायण बोहरे की कहानियां यानी हमारी आत्म कथाएं केबीएल पांडे विगत दशकों में कहानी ने जितने रूप गढे हैं वे रचना शीलता का आह्लाद उत्पन्न करते हैं पर इसके ...

अवध बिहारी पाठक-समीक्षा-आलोचना एक और पाठ
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 429

आलोचना की जड़ता को तोड़ता विमर्श -अवध बिहारी पाठक प्रसिद्ध आलोचक शंभुनाथ ने एक जगह कहा है कि "आलोचना का पहला काम पीछे लौटती सभ्यताओं के छली बिम्बों पर ...

कविता की ओर कुछ कदम-रमाशंकर राय
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 432

कविता की ओर कुछ कदम के आइने में          रमाशंकर राय जी का व्यक्तित्व                                                                 रामगोपाल भावुक                                                               मो0 9425715707        समर्पण में ही साहित्य

भवभूति का साक्षात्कार -प्रभुदयाल मिश्र
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 621

पुस्तक – महाकवि भवभूति’   लेखक- रामगोपाल भावुक प्रकाशक- कालिदास संस्कृत अकादमी, उज्जैन मूल्य – रुपये – 250/             भवभूति का साक्षात्कार             -प्रभुदयाल मिश्र रत्नावली, एकलव्य,शम्बूक ,भवभूति आदि ...

कहानियों में कथ्य और कलात्मक संतुलन
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 711

   कहानियों में कथ्य और कलात्मक संतुलन   प्रश्नोत्तर- महावीर अग्रवाल कीं रामगोपाल भावुक  से वार्ता-   1 महावीर अग्रवाल- अब तक छपी कहानियों में कौन सी कहानी आपको अधिक ...

बुन्देलखण्ड के लोकाख्यानों के सामाजिक अभिप्राय
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 564

बुन्देलखण्ड के लोकाख्यानों के सामाजिक अभिप्राय -के.बी.एल. पाण्डेय संस्कृति जीवन के परिष्कार के उद्देश्य से मानवीय रचनाशीलता की वह निष्पत्ति है जिसमें जीवन के व्यापक आयतन में निर्मित मूल्यबोध ...

पंचमहल के साहित्यकारों का रचना संसार
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 1k

        पंचमहल के साहित्यकारों का रचना संसार                                                                                                                      रामगोपाल भावुक                                                  मो0 09425715707        वर्तमा

मेरी लघुकथाएँ- उमेश मोहन धवन
द्वारा राजीव तनेजा
  • 819

यूँ तो परिचय के नाम पर उमेश मोहन धवन जी से मेरा बस इतना परिचय है कि हम दोनों कई सालों से फेसबुक पर एक दूसरे की चुहलबाज़ीयों का ...

राजा मीरेन्द्र सिंह जू देव‘ प्रेमानन्द’
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 387

    राजा मीरेन्द्र सिंह जू देव‘ प्रेमानन्द’ चर्चित कवि के साथ कथाकार                      रामगोपाल भावुक          राजा मीरेन्द्रसिंह जू देव ‘प्रेमानन्द’- वे इस क्षेत्र की मगरौरा गढ़ी के ...

रामधारीसिंह 'दिनकर' की सांस्कृतिक चेतना
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 444

संस्कृति के चार अध्यायः रामधारीसिंह 'दिनकर' की सांस्कृतिक चेतना डॉ. के0वी०एल० पाण्डेय ओज, राष्ट्रीयता और निर्भीक वैचारिकता के कवि दिनकर अपनी कविता में भावपरकरता के आधार पर जिस सांस्कृतिक ...

स्वतंत्र सक्सैना -सरल नहीं था यह काम
द्वारा ramgopal bhavuk
  • 540

सरल नहीं था यह काम जो डॉ. स्वतंत्र ने कर दिखया। समीक्षक-रामगोपाल भावुक सरल नहीं था यह काम जो डॉ. स्वतंत्र सक्सैना ने इस काव्य संकलन के माध्यम से ...