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पिताजी चुप रहते हैं: ज्ञानप्रकाश विवेक
द्वारा राज बोहरे
  • 39

  कहानी संग्रह  पिताजी चुप रहते हैं:  ज्ञानप्रकाश विवेक                             कविता का मजा देती कहानियाँ कुछ आलोचक जो कविता और कहानी में  गलत फहमिया पैदा करके दोनों की भाषा ...

गूंगे नहीं हैं शब्द हमारे-संपादन- सुभाष नीरव, डॉ. नीरज सुघांशु
द्वारा राजीव तनेजा
  • 132

पुरुषसत्तात्मक समाज होने के कारण आमतौर पर हमारे देश मे स्त्रियों की बात को..उनके विचारों..उनके जज़्बातों को..कभी अहमियत नहीं दी गयी। एक तरफ पुरुष को जहाँ स्वछंद प्रवृति का ...

लोकाख्यान में जीवन की खोज: कही ईसुरी फाग
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 153

लोकाख्यान में जीवन की खोज: कही ईसुरी फाग                           इतिहास अथवा लोक प्रचलित आख्यान से किसी साहित्यिक कृति को यदि कथानक उपलब्ध हो जाने की सुविधा मिल जाती ...

अर्थ तंत्र तथा अन्य कहानियां - रमेश उपाध्याय
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 273

अर्थ तंत्र तथा अन्य कहानियां श्री रमेश उपाध्याय का कहानी संग्रहराजनारायण बोहरे श्री रमेश उपाध्याय का कहानी संग्रह “अर्थ तंत्र तथा अन्य कहानियां “ उनका ग्यारहवां कहानी संग्रह हैं ...

सूर: वात्सल्य के विविध आयाम
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 192

सूर: वात्सल्य के विविध आयाम                 भक्ति की दार्शनिकता से पुष्ट और अलौकिक अनुग्रह की प्रार्थना के रूप में निर्वदित होते हुए भी सूर की कविता का ...

सन्त कवियों की कविता में लोक एवं लोकोत्तर दर्शन
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 171

सन्त कवियों की कविता में लोक एवं लोकोत्तर दर्शन          सन्त काव्य अथवा व्यापक भक्ति काव्य के सम्बन्ध में यह स्थापना आध्यात्मिक दर्शन के रूप में काफी समय ...

छबीला रंगबाज़ का शहर
द्वारा Amit Singh
  • 453

"छबीला_रंगबाज़_का_शहर" :              "जो है, वो नहीं है...और जो नहीं है, वही है।"*********************************छोटे शहर का एक बड़ा रंगबाज़ और हौव्वा है - छबीला सिंह। लेकिन ...

क्रांति चेतना के कवि कबीर
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 216

क्रांति चेतना के कवि कबीर          कबीर के अप्रतिम व्यक्तित्व और मूल्यप्रेरित काव्य का समग्र और सही विश्लेषण करने वाले विद्वान् हजारी प्रसाद द्विवेदी ने लिखा है कि ...

शहरीकरण के धब्बे
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 468

शहरीकरण के धब्बे मैं कहानी का बहुत अच्छा पाठक नहीं हूं।कारण ये है कि हिन्दी कहाँनियों में संवेदना का समावेश बहुत ज्यादा रहता है विषय भी अक्सर वही वही ...

लिखी हुई इबारतें
द्वारा Vinay Panwar
  • 357

     मेरी नज़र से                                 ज्योत्स्ना कपिल साहित्य के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम ...

जीवन में महाद्वीपीय विस्तार की कविता
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 219

जीवन में महाद्वीपीय विस्तार की कविता                                   समकालीन, वर्तमान अथवा आज जैसे काल विभाजक शब्दों से समय की एक अवधि का बोध तो होता है पर ये शब्द ...

राजनारायण बोहरे के साहित्य में सामाजिक समरसता
द्वारा padma sharma
  • 222

शोध आलेख                                    राजनारायण बोहरे के साहित्य में सामाजिक समरसता                                                                     डॉ पद्मा शर्मा   एको देवः सर्वभूतेशू गूढः सर्वव्यापी सर्वभूतान्रात्मा प् कर्माध्यक्षः सर्वभूताधिव

राजनारायण बोहरे और कहानी की दुनिया
द्वारा padma sharma
  • 216

राजनारायण बोहरे और कहानी की दुनिया -डॉ. पद्मा शर्मा                हिन्दी कहानी के आठवें दशक में अनेक महत्वपूर्ण कहानी कार उभर के आये। यह ऐसा समय था जब कई ...

धर्मपुर लॉज- प्रज्ञा रोहिणी
द्वारा राजीव तनेजा
  • 345

किसी बीत चुकी घटना पर जब तथ्यात्मक ढंग से कुछ लिखा जाता है तो उसके प्रभावी लेखन के लिए यह बेहद ज़रूरी हो जाता है कि पहले उस पर ...

पदमा की कहानियां: महिला लेखन के नजरिए से
द्वारा padma sharma
  • 288

पदमा की कहानियां: महिला लेखन के नजरिए से राजनारायण बोहरे हिन्दी कहानी का यह सबसे अच्छा समय कहा जा सकता है जबकि किसी एक आन्दोलन के बगैर लगभग पांच ...

’’कठघरे’’ इतिहास का प्रतिफलन और जिजीविषा का संकट
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 219

’’कठघरे’’ इतिहास का प्रतिफलन और जिजीविषा का संकट          ’’अगर आप इतिहास और भूख की सापेक्षता में आदमी की नैतिकता का विवेचन करें तो चौंकाने वाले नतीजों पर ...

बन्द दरवाज़ों का शहर - रश्मि रविजा
द्वारा राजीव तनेजा
  • 376

अंतर्जाल पर जब हिंदी में लिखना और पढ़ना संभव हुआ तो सबसे पहले लिखने की सुविधा हमें ब्लॉग के ज़रिए मिली। ब्लॉग के प्लेटफार्म पर ही मेरी और मुझ ...

घर की देहरी लाँघती स्त्री कलम- समीक्षा
द्वारा Archana Anupriya
  • 332

"घर की देहरी लांघती स्त्री कलम"           ( एक समीक्षा)                 - अर्चना अनुप्रिया              ...

पुस्तक समीक्षा-राजेन्द्र लहरिया
द्वारा राज बोहरे
  • 272

पुस्तक समीक्षा-                            आलाप-विलाप: समझदारी और गहराई भरा कथ्य राजनारायण बोहरे                 आलाप-विलाप उपन्यास राजेन्द्र लहरिया का आकार में एक लघु उपन्यास है लेकिन इसके आशय बहुत ...

आस्था का ताप और अपने समय से संवाद
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 300

आस्था का ताप और अपने समय से संवाद ब्लैक आउट-वल्लभ सिद्धार्थ की कहानियाँ              ‘‘महापुरूषों की वापसी’’, ’’नित्य प्रलय’’ ‘‘व्यवस्था’’ ’’ब्लैक आउट’’ जैसी चर्चित कहानियाँ और ‘कठघरे’ जैसे ...

अभ्युदय - 1 - नरेंद्र कोहली
द्वारा राजीव तनेजा
  • 321

मिथकीय चरित्रों की जब भी कभी बात आती है तो सनातन धर्म में आस्था रखने वालों के बीच भगवान श्री राम, पहली पंक्ति में प्रमुखता से खड़े दिखाई देते ...

पुस्तक समीक्षा- आसाम की जनता का सच- लाल नदी
द्वारा राज बोहरे
  • 243

पुस्तक समीक्षा- आसाम की जनता का सच: लाल नदी समीक्षक- राजनारायण बोहरे हमारे देश का पूर्वी भाग सदा से अल्पज्ञात और उपेक्षित सा रहा है। उपेक्षित इस मायने में ...

भवानी प्रसाद मिश्र की काव्य संवेदना
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 296

भवानी प्रसाद मिश्र की काव्य संवेदना ये कोहरे मेरे हैं भवानी प्रसाद मिश्र        ’’गीत फरोश’’ जैसी कालजयी कविता के रचयिता भवानीप्रसाद मिश्र की काव्य संवेदना जीवन के सरोकारों ...

मुक्तिबोध और उनकी साहित्यिक सैद्धान्तिकी
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 678

            मुक्तिबोध और उनकी साहित्यिक सैद्धान्तिकी   ‘साहित्यिक की डायरी’        मुक्तिबोध        मुक्तिबोध का रचना-व्यक्तित्त्व उनके जीवन की ही तरह विरल विशिष्टताओं से निर्मित है। मुक्तिबोध ...

नरेश सक्सेना: समकालीन कवि
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 368

नरेश सक्सेना: पदार्थ ओर संवेदना के विरल संयोग के कवि          विगत कुछ दशकों की हिन्दी कविता ने जीवन के महाद्वीपीय विस्तार की जैसी     विविध यात्रा की है ...

समीक्षा - वह जो नहीं कहा
द्वारा Sneh Goswami
  • 693

    सीख नसीहत और प्रेरणा से भरपूर है – वह जो नहीं कहा लघुकथा संग्रह श्रीमती स्नेह गोस्वामी का लघुकथा संग्रह वह जो नहीं कहा अभी अभी 2018 में ...

समकालीन कहानी का यथार्थ
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 321

   समकालीन कहानी का यथार्थ                साहित्य के संदर्भ में अनेक अन्तों और संकट की चिन्ताजनक घोषणाओं के बाद भी आज रचना-परिमाण की विपुलता ही नहीं विशदता भी ...

चन्द्रकान्त देवताले का काव्यसंग्रह -लकड़बग्घा हँस रहा है
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 476

लकड़बग्घा हँस रहा है - समयगत सच्चाईयों का दस्तावेज-    चन्द्रकान्त देवताले का तीसरा काव्यसंग्रह                                  हड्डियों में छिपा ज्वर और दीवारों पर खून से के बाद चन्द्रकान्त ...

पुस्तक समीक्षा - 12
द्वारा Yashvant Kothari
  • 443

प्राइड एंड प्रिजुडिसयह उपन्यास १८१३ में लिखा गया जो सबसे पहले इंगलेंड में छपा jane Austen उस जमाने कीमशहूर लेखिका थीं उनके लिखे उपन्यास। आज भी क्लासिक माने जा ...

ग़लत पते की चिट्ठियाँ- योगिता यादव
द्वारा राजीव तनेजा
  • 506

आज के इस अंतर्जालीय युग में जब कोई चिट्ठी पत्री की बात करे तो सहज ही मन में उत्सुकता सी जाग उठती  है कि आज के इस व्हाट्सएप, फेसबुक ...