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अरुण सातले-शब्द गूँज
द्वारा राजनारायण बोहरे

अरुण सातले की कविताओं का सँग्रह"शब्द गूँज" शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित होकर पिछले दिनों सामने आया है ।इसमें कभी की कुल 77 कविताएं शामिल हैं ।लसंग्रह की अधिकांश कविताएं ...

जादूगर जंकाल और सोनपरी - राज बोहरे
द्वारा रामगोपाल तिवारी
  • 222

समीक्षा              कृति- जादूगर जंकाल और सोनपरी             कथाकार राजनारायण बोहरे समीक्षक      रामगोपाल भावुक         कथाकार राजनारायण बोहरे को बचपन से ही किस्से कहानियां सुनने का शौक रहा ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 20 - अंतिम भाग
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 336

सुधाकर शुक्ल और ’’देवदूतम’’ -राधारमण बैद्य             विल्हण और पंडितराज जगन्नाथ के बाद म्लान काव्य के मन को पुनः प्रमुदित करने वाले श्री ’’सुधाकर’’ न केवल प्रदेश की विभूति ...

'दहशत' - Book Review
द्वारा Ritu Bhanot
  • 591

Book Review of 'Dehshat'  शहर के वीभत्स पर्दे के पीछे के अपराध में जीवन का स्पंदन अंग्रेजी साहित्य में जासूसी और नेगेटिव शेड्स वाले थ्रिलर उपन्यास का चलन हिन्दी ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 19
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 264

दतिया अध्यात्म साहित्य और दर्शनीयता के वातायन   अध्यात्म-             दतिया धर्म और अध्यात्म की प्रसिद्ध साधना भूमि रही है। यहां के विभिन्न अंचल सनक सनन्दन की सनातन भूमि ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 18
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 240

एक अद्भुत प्रभावी कृति-गुरदयालसिंह का ‘‘परसा’’ ‘ राधारमण वैद्य                  पंजाब के स्वाभिमान, अक्खड़पन, आत्म गौरव और सधुक्कड़ी स्वभाव को उजागर करता यह ‘‘परसा’’ नामक उपन्यास अपने ढंग ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 17
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 324

अस्तित्व रक्षण की रचनात्मक गूँज-दर्दपुर राधारमण वैद्य                  उपन्यास केवल साहित्यिक रूप नहीं है, वह जीवन-जगत को देखने की एक विशेष दृष्टि है और मानव-जीवन और समाज का ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 16
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 228

आज की कहानी और आलोचक के नोट्स राधारमण वैद्य                  ’’एक शानदार अतीत कुत्ते की मौत मर रहा है, उसी में से फूटता हुआ एक विलक्षण वर्तमान रू-ब-रू ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 15
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 384

  स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य-में ऐतिहासिकता के ब्याज से समसामयिकता का चित्रण राधारमण वैद्य                  श्री जय शंकर प्रसाद (1889-1937 ई0) में धकियाकर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति नहीं है, बल्कि ...

घनश्यामदास पाण्डेय और उनका काव्य
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 222

घनश्यामदास पाण्डेय और उनका काव्य वर्तमान शताब्दी के प्रथमार्द्ध में झांसी जिले और उसके आसपास जो काव्य सक्रियता थी उसके पुरुरस्कर्ताओं में कविवर घनश्याम दास पांडेय का प्रमुख स्थान ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 14
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 384

                 केशव कृत ’विज्ञान-गीता’: परम्परा-पोषण और युग चित्रण                राधारमण वैद्य                                   केशव की काव्य-साधना कई रूपों में प्रकट हुई। केशव के मुक्तक, जहाँ शास्त्रीय रस-रीति और ...

उर्दू रामायण-नवलसिंह प्रधान
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 477

नवलसिंह प्रधान कृत उर्दू रामायण बुंदेलखंड के अनेक देशी राज्यों में रहे प्रसिद्ध कवि नवल सिंह प्रधान अथवा नवल सिंह कायस्थ ने अनेक ग्रंथों की रचना की है उर्दू ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 13
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 432

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का ‘‘आलोक पर्व ’’ राधारमण वैद्य   परम्परा, लोक और शासन समन्वित संस्कृति विवेचन                 आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी बहु प्रतिभा के धनी थे, उनका ...

हजारी प्रसाद द्विवेदी -मूल्यों का पुनर्पाठ
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 375

हजारी प्रसाद द्विवेदी का साहित्यः मूल्यों का पुनर्पाठ डॉ० के.बी.एल.पाण्डेय साहित्य को व्यापक मानवतावाद और मूल्यवत्ता से जोड़ने वाले तथा मनुष्य को सभी सरोकारों के केन्द्र में रखने वाले ...

अवध किशोर सक्सेना - अनुभव के पैगाम
द्वारा राज बोहरे
  • 420

नेतागिरी हो गई, गुंडों की दुकान: बौधगम्य दोहावली समीक्षक-राजनारायण बोहरे अनुभव के पैगाम नामक दोहा संग्रह में 705 दोहे शामिल है। यह संग्रह दतिया के बुजुर्ग कवि अवध किशोर ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 12
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 435

शक्ति के प्रतीक हनुमान: ’हनुमान बाहुक’ पर एक दृष्टि राधारमण वैद्य                मनीषियों का ऐसा मत है कि नाम-रूप से व्यक्त सभी पदार्थो में शक्ति तत्व धर्म, और गुण ...

बुंदेलखंड का सैर साहित्य
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 522

बुंदेलखंड में परिनिष्ठित साहित्य रचना के साथ ही लोक साहित्य की भी समृद्ध परंपरा रही है। साहित्य के यह दोनों रूप यहां समानांतर की स्थिति में ही सहवर्ती नहीं ...

अब सब कुछ - चम्पा वेद
द्वारा राज बोहरे
  • 489

चम्पा वेद का काव्य संग्रह ‘अब सब कुछ‘   पुस्तक समीक्षा- अब सब कुछ: ताजगी भरी कविताऐं। राजनारायण बोहरे चम्पा वेद का नाम कुछ बरस  तक अंजाना सा था, ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 11
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 324

तुलसी के ’’मानस’’ की पृष्ठभूमि राधारमण वैद्य                कलियुग के बाल्मीकि, मुगल काल का सबसे महान् व्यक्ति, बुद्धदेव के बाद सबसे बड़ा लोकनायक, सर्वतोमुखी ’’प्रतिभा’’ तथा निरन्तर विषपान करके ...

गूंगा गांव - रामगोपाल भावुक
द्वारा राज बोहरे
  • 723

  भारत के हर गांव की कथा है गूंगा गांव ।    पुस्तक समीक्षा पुस्तक का नाम उपन्यास गूंगा गांव लेखक रामगोपाल भावुक  प्रकाशक ममता प्रकाशन दिल्ली  मूल्य ₹125 ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 10
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 342

केशव का युग और शाक्त मत राधारमण वैद्य                               भारतीय वाङमय में सम्प्रदाय का पोषण और साम्प्रदायिक परम्पराओं का खण्डन-मण्डन खूब हुआ है पर उसे उच्च साहित्य का लेबिल ...

रत्नावली - भावुक
द्वारा राज बोहरे
  • 798

यह उपन्यास तुलसीदास जी की पतनी रत्नावली के अल्पज्ञात जीवन और व्यक्तित्व पर केद्रित उपन्यास है। लेखक कल्पना सूझ बुझ के धनी है। साहित्य इतिहास में मौजूद कुछ नाम ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 9
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 447

समय और समाज सापेक्ष रीतिकाल राधारमण वैद्य                किसी रचनाकाल के साहित्य-विवेचन में उस काल-खण्ड की दृष्टियों, शैलियों, तत्कालीन-सामाजिक रूचियों, आर्थिक दशा और राजनीतिक घात-प्रतिघात का पता चलता है। ...

कारवां ग़ुलाम रूहों का - अनमोल दुबे
द्वारा राजीव तनेजा
  • 513

आज के टेंशन या अवसाद से भरे समय में भी पुरानी बातों को याद कर चेहरा खिल उठता है। अगर किसी फ़िल्म या किताब में हम आज भी कॉलेज ...

अनिल करमेले - बाकी बचे कुछ लोग
द्वारा राज बोहरे
  • 636

अनिल करमेले बाकी बचे कुछ लोग अनिल कर मेले का दूसरा कविता संग्रह बाकी बचे कुछ लोग लगभग 20 वर्ष के अंतराल बाद सेतु प्रकाशन से आया है। अनिल ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 8
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 495

ऐतिहासिक एवं भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में सनकादि सम्प्रदाय राधारमण वैद्य                                 मध्यप्रदेश, जिसकी सीमा मनुस्मृति के अनुसार विनशन (सरस्वती) के पूर्व प्रयाग से पश्चिम, हिमालय से दक्षिण और विन्ध्याचल ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 7
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 489

सनकादि सम्प्रदाय, सनकुआ और सेंवढ़ा                  स्थान-नाम, भाषा की जीवन्त शब्दावली है, जो घिस-मँजकर रूपान्तरित होते हुए शताब्दियों तक अपना मूल्य स्थिर रखते हैं और जन-आस्थाओं के आधार ...

हरे स्कर्ट वाले पेड़ों के तले- नीलम कुलश्रेष्ठ
द्वारा राजीव तनेजा
  • 555

कहते हैं कि मनुष्य की कल्पना का कोई ओर छोर नहीं है। इसमें अपार संभावनाएं मौजूद होती हैं कुछ भी..कहीं भी..कैसा भी सोचने के लिए। मनुष्य अपनी कल्पना से ...

बारह मास वसन्त - लक्ष्मीनारायण बुंनकर
द्वारा राज बोहरे
  • 420

बारह मास वसन्त-लक्ष्मीनारायण बुंनकरबारह मास वसंत कवि लक्ष्मी नारायण बुनकर का पहला कविता संग्रह है, जो ग्रंथ भारती दिल्ली ने छापा है । संग्रह में कवि की विभिन्न प्रकार ...

राधारमण वैद्य-भारतीय संस्कृति और बुन्देलखण्ड - 6
द्वारा राजनारायण बोहरे
  • 399

‘‘ बुन्देलखण्ड की प्राचीन मूर्ति व वास्तु कला ’’                भारत के केन्द्रीय प्रदेश बुन्देलखण्ड की ‘‘कीरत के विरवा’’ की जडं़ अति प्राचीन है। भौगोलिक दृष्टि से इस क्षेत्र ...