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अध्याय 22 पांच दिलों का जागरणइस समय राघव जोशी जमीन पर घुटनों के बल बैठ चुका था।...
(जेल के बाहर जमा हुई भीड़ की दहाड़, जो 'आर्यन को रिहा करो' के नारे लगा र...
एपिसोड 4: एक अजीब-सी बेचैनीकॉलेज की छुट्टी हुए लगभग एक घंटा बीत चुका था।शाम की ह...
अध्याय 2 : टकराव की दस्तकशाम अपनी पूरी रौनक पर थी। आलीशान होटल का भव्य हॉल सुनहर...
चुड़ैल गायब हो चुकी है। सिमरन काँपते हुए उस पेड़ के पास खड़ी है जहाँ से पानी की...
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजेशाम की जाती हुई रोशनी के साथ अब स्ट्रीट ल...
शहद की गुड़िया- प्रकरण 68 " दादू के पिताजी ऊस वक़्त 80 प्...
हॉलीवुड की सबसे चर्चित और प्रशंसित रोमांटिक फिल्म-श्रृंखलाओं में 'बिफोर ट्रा...
समय का चक्र: अध्याय 1कुछ प्रेम कहानियाँ खत्म नहीं होतीं. वे समय के साथ दफन हो जा...
रीतिका आज बहुत खुश है क्योंकि उसका सपना जो पूरा हो गया। उसने बचपन से ही एक सपना...
दर्द इमोशनल शायरी और गजल ना फूलों की दुकान होती ना इश्क होता तेरी चाहत में यार मैं यूं ना बर्बाद होता दिया था वह फूल भी किताब में सूख गया तेरी याद आई तो तुझे गजलों में लिख...
Lady Chatterley's Lover – प्रेम, समाज और प्रतिबंध की कहानी लेखक: D. H. Lawrence दुनिया के साहित्य इतिहास में कुछ ऐसी किताबें हैं जिन्होंने समाज की सोच को चुनौती दी और अपन...
निषेधमात्रवाद क्या है? “निषेधमात्रवाद का मतलब है—मानवता के खिलाफ ऐतिहासिक अपराधों को नकारना। यह ज्ञात तथ्यों की पुनर्व्याख्या नहीं है, बल्कि ज्ञात तथ्यों को पूरी तरह से नकारना है।...
हनुमान शतक सवैया कविता और दोहों में रचा गया 100 छंदों का ग्रंथ है। जो महा कवि करुणेश "द्वारका" द्वारा सम्वत 2012 के वैशाख माह की तृतीया तिथि रविवार को रचे गए छंदों का संकलन...
'हनुमत पचासा' मान कवि कृत 50 कवित्त का संग्रह है। जो लगभग 256 वर्ष ( 256 वर्ष इसलिए क्योकि यह संस्करण अप्रैल 71 में छपा था तब उन्होंने उसे 200 वर्ष पूर्व कहा था तो 71 से...
दर्द की सीढ़ियां (ग़ज़ल संग्रह) हरि सिंह हरीश अपनी युवावस्था के समय से ही लिखने के प्रति बड़े समर्पित रहे हैं। वह कहते थे कि जब वह छठवें क्लास में पढ़ रहे थे तो होमवर्क की कॉपिय...
मेरा खत न मिलने पर 1 हरिसिंह 'हरीश' : परिचय : 1 अगस्त, 1935 (दतिया म.प्र.) शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) तक ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से । मानद : विद्या...
पागल खाना पर पाठकीय प्रतिक्रिया याने समय का एक नपुंसक विद्रोह यशवंत कोठारी राजकमल ने ज्ञान चतुर्वेदी का पागलखाना छापा है.२७१ पन्नों का ५९५रु. का उपन्या...
दिव्य प्रकाश दुबे के काफे में मज़ेदार चाय के साथ पराठे वाली फीलिंग कराने वाली कहानी है। क्या हम कभी मिले हैं? हाँ शायद कहाँ? किसी किताब में जो अभी लिखी ही नहीं गई... ऐसी बहुत सारी म...
नारी आंदोलन, स्त्री समानता, नारी विमर्श, स्त्री के अधिकार, इन सबकी विभिन्न कलाओं से अभिव्यक्ति, अपना व्यवसाय के अलावा होता है' स्त्रियों की अपने घर परिवार में उनकी अहम भूमिका&#...
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