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दो मिनट बाद बहुत संयमीत लहजे मे बोले देव "आलोक ने मुझें तुम्हारा लिखा पत्र दिया...
ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ -...
बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय म...
चेतना का कत्लेआमभाग एक: शून्यता का गर्भाशयजैसे ही वह' ठक' की आखिरी आवाज...
(एक काली चमचमाती कार कॉफी शॉप पर रूकती है। कार में से वीर प्रताप बहुत एटीट्यूड...
गाँव की बारिश ने अचानक रौद्र रूप धारण कर लिया था। शाम के साढ़े छह बजे सूर्यास्त...
संस्कृति अभी भी सोफे पर बैठी थी। पारो उसके सामने कुर्सी खींचकर बैठ गई। उसके चेहर...
रागिनी :- तुम सही कह रही हो , पर जानवी वो सब भूल चुकी थी , वो भूल चुकी थी के वो...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 39 " लंदन एयर पो...
अयन धीरे-धीरे सोनाई की तरफ बढ़ा। उसकी आँखें अब भी गुस्से से जल रही थीं, लेकिन हो...
Lady Chatterley's Lover – प्रेम, समाज और प्रतिबंध की कहानी लेखक: D. H. Lawrence दुनिया के साहित्य इतिहास में कुछ ऐसी किताबें हैं जिन्होंने समाज की सोच को चुनौती दी और अपन...
दर्द इमोशनल शायरी और गजल ना फूलों की दुकान होती ना इश्क होता तेरी चाहत में यार मैं यूं ना बर्बाद होता दिया था वह फूल भी किताब में सूख गया तेरी याद आई तो तुझे गजलों में लिख...
निषेधमात्रवाद क्या है? “निषेधमात्रवाद का मतलब है—मानवता के खिलाफ ऐतिहासिक अपराधों को नकारना। यह ज्ञात तथ्यों की पुनर्व्याख्या नहीं है, बल्कि ज्ञात तथ्यों को पूरी तरह से नकारना है।...
हनुमान शतक सवैया कविता और दोहों में रचा गया 100 छंदों का ग्रंथ है। जो महा कवि करुणेश "द्वारका" द्वारा सम्वत 2012 के वैशाख माह की तृतीया तिथि रविवार को रचे गए छंदों का संकलन...
'हनुमत पचासा' मान कवि कृत 50 कवित्त का संग्रह है। जो लगभग 256 वर्ष ( 256 वर्ष इसलिए क्योकि यह संस्करण अप्रैल 71 में छपा था तब उन्होंने उसे 200 वर्ष पूर्व कहा था तो 71 से...
दर्द की सीढ़ियां (ग़ज़ल संग्रह) हरि सिंह हरीश अपनी युवावस्था के समय से ही लिखने के प्रति बड़े समर्पित रहे हैं। वह कहते थे कि जब वह छठवें क्लास में पढ़ रहे थे तो होमवर्क की कॉपिय...
मेरा खत न मिलने पर 1 हरिसिंह 'हरीश' : परिचय : 1 अगस्त, 1935 (दतिया म.प्र.) शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) तक ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से । मानद : विद्या...
पागल खाना पर पाठकीय प्रतिक्रिया याने समय का एक नपुंसक विद्रोह यशवंत कोठारी राजकमल ने ज्ञान चतुर्वेदी का पागलखाना छापा है.२७१ पन्नों का ५९५रु. का उपन्या...
दिव्य प्रकाश दुबे के काफे में मज़ेदार चाय के साथ पराठे वाली फीलिंग कराने वाली कहानी है। क्या हम कभी मिले हैं? हाँ शायद कहाँ? किसी किताब में जो अभी लिखी ही नहीं गई... ऐसी बहुत सारी म...
नारी आंदोलन, स्त्री समानता, नारी विमर्श, स्त्री के अधिकार, इन सबकी विभिन्न कलाओं से अभिव्यक्ति, अपना व्यवसाय के अलावा होता है' स्त्रियों की अपने घर परिवार में उनकी अहम भूमिका&#...
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