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दोहा: ५कबीर माया पापिणी, हरि सूँ करे हराम।मुखि कस्तूरी महमही, कुबधि कुहाड़ा काम॥क...
भाग 10: परीक्षा चार, सच्चाई का बोझचौथे दिन की सुबह चंद्रनगर में एक अजीब सी नमी ल...
हम सपरिवार खेत पर काम कर रहे थे। मन के भीतर एक दबी हुई खुशी थी कि मैंने 'नवी...
ऋगुवेद सूक्ति--(३६) की व्याख्या "मा नः प्रजा रीरिषः” ऋगुवेद--१०/१८/१अर्थ-- हे प्...
Present time....कबीर सोफे पर अकेले बैठा था। चेहरा ठंडा, आँखें गंभीर। पर हाथ… हाथ...
धड़ाम!जैसे ही वह बैंक के अंदर भागा, एक भारी आग बुझाने वाला सिलेंडर (Fire Extingui...
डाइनिंग टेबल पर हल्की रोशनी थी… लेकिन बातचीत का माहौल धीरे-धीरे गंभीर होता जा रह...
Title: दुश्मनी के दरमियान इश्कPart 15: खामोशियों के बीच साजिशकबीर और Myra के बीच...
"उस बंद कमरे में सन्नाटा इतना भारी था कि अयान के सीने में धड़कता हुआ गुस्सा साफ...
---किरण और मधुकर एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे। वो अब इस रिश्ते में बहुत आगे ब...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
जिंदगी किस मोड़ पर कैसे और कब बदल जाए ये कह नही सकते, ऐसा ही कुछ राजपुरोहित जी के साथ हुआ। हीरालाल जी बहुत ही संपन्न और प्रतिष्ठित कारोबारी थे। हर ओर उनकी प्रतिष्ठा, वैभवता की ख्या...
एक दिन मैं लिख रहा था कि 'मोहब्बत सभी को मिलती है', तभी अचानक मेरी कलम की नोक (निब) टूट गई। वह मुझसे कहने लगी— "तुम अभी नादान हो। जितनी मोहब्बत सुनने में अच्छी लगती है,...
नैना और आरव की शादी को पाँच साल हो चुके थे। बाहर से देखने पर उनका रिश्ता बिल्कुल परफेक्ट लगता था — बड़ा घर, अच्छी नौकरी, मुस्कुराते चेहरे… लेकिन उस घर की दीवारें जानती थीं कि वहा...
वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...
अब मान भी जाओ राधे ...!! राधा और देव कभी पड़ोसी हुआ करते थे। दोनों के पारिवारिक सबंध भी बहुत अच्छे थे। दोनों के पापा बिजनेसमैन थे।. दोनों साथ में खेलते ,कभी लड़ाई करते तो कभी...
(1) लाइक एंड कॉमेंट्स रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दूर एक शहर में अफसर था। छोटे बेटे भोल...
तीस साल की दिव्या, श्वेत साड़ी में लिपटी एक ऐसी लड़की, जिसके कदमों में घुंघरू थे, पर कंधों पर सालों से एक अदृश्य बोझ। घर में उसका नाम अब एक गाली की तरह बोला जाता। सुबह सात बजे...
आश्रम में प्रातःकालीन ध्यान-धारणा के बाद जब सूर्य की पहली किरणें जिनालय के श्वेत संगमरमर पर पड़तीं, तब पंच-परमेष्ठी की पूजा आरंभ होती। घंटियों की मधुर ध्वनि, दीपों जा प्रज्ज्वलन, फ...
बरसों पहले की बात है। गंगा किनारे बसे छोटे से गाँव नवग्राम में एक लड़का रहता था – नाम था अर्जुन। उम्र मुश्किल से पंद्रह–सोलह वर्ष, लेकिन चेहरे पर मासूमियत और आँखों में अजीब-सी गहरा...
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