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  • Extra Material Affair.. - 1

    शालिनी, तुमने अपने घर पर हमारे अफेयर के बारे में बात की?"विकास ने धीमी लेकिन बेच...

यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी.

उन्हें कांदिव...

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ऐसे ही क्यों होता हैं? By Std Maurya

एक दिन मैं लिख रहा था कि 'मोहब्बत सभी को मिलती है', तभी अचानक मेरी कलम की नोक (निब) टूट गई। वह मुझसे कहने लगी— "तुम अभी नादान हो। जितनी मोहब्बत सुनने में अच्छी लगती है,...

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एक डिवोर्स ऐसा भी By Alka Aggarwal

नैना और आरव की शादी को पाँच साल हो चुके थे।
बाहर से देखने पर उनका रिश्ता बिल्कुल परफेक्ट लगता था — बड़ा घर, अच्छी नौकरी, मुस्कुराते चेहरे…
लेकिन उस घर की दीवारें जानती थीं कि वहा...

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इश्क. By om prakash Jain

वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...

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राधे ..... प्रेम की अंगुठी दास्तां By Soni shakya

अब मान भी जाओ राधे ...!!

राधा और देव कभी पड़ोसी हुआ करते थे। दोनों के पारिवारिक सबंध भी बहुत अच्छे थे। दोनों के पापा बिजनेसमैन थे।. दोनों साथ में खेलते ,कभी लड़ाई करते तो कभी...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ By Dr. Pradeep Kumar Sharma

(1) लाइक एंड कॉमेंट्स

रात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दूर एक शहर में अफसर था। छोटे बेटे भोल...

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उड़ान. By Asfal Ashok

तीस साल की दिव्या, श्वेत साड़ी में लिपटी एक ऐसी लड़की, जिसके कदमों में घुंघरू थे, पर कंधों पर सालों से एक अदृश्य बोझ।

घर में उसका नाम अब एक गाली की तरह बोला जाता।

सुबह सात बजे...

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रागिनी से राघवी By Asfal Ashok

आश्रम में प्रातःकालीन ध्यान-धारणा के बाद जब सूर्य की पहली किरणें जिनालय के श्वेत संगमरमर पर पड़तीं, तब पंच-परमेष्ठी की पूजा आरंभ होती। घंटियों की मधुर ध्वनि, दीपों जा प्रज्ज्वलन, फ...

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ब्रह्मचर्य की अग्निपरीक्षा By Bikash parajuli

बरसों पहले की बात है। गंगा किनारे बसे छोटे से गाँव नवग्राम में एक लड़का रहता था – नाम था अर्जुन। उम्र मुश्किल से पंद्रह–सोलह वर्ष, लेकिन चेहरे पर मासूमियत और आँखों में अजीब-सी गहरा...

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वाह ! बेटा वाह ! By H.k Bhardwaj

घु मेरा गहरा मित्र था, वह एक सॉफ़्ट बेयर इन्जीनियर था ।हम दोनो ने मुरादाबाद जैसे महानगर के प्रसिध्द महा विद्यालय" हिन्दू कालिज" में एक साथ ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त ली थी।...

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