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  • Hero - 7

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  • सत्य पथ पर चलो

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    ऑफिस का मेन गेट। रात के 11:15 बज चुके हैं। बाहर तेज़ हवा चल रही है, बिजली चमक रह...

सजा.....बिना कसूर की By Soni shakya

प्रिया पाठको,,

यह एक सामाजिक कहानी है ।

जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है ।

अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ??

....... .......

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बारह बरश का इंतज़ार By kusum kumari

कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी ज...

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कालू की पहाड़ी By RAAHULL SHARMA

अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार बनाने के लिए रचा था, लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया।...

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इश्क. By om prakash Jain

वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...

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मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं By Std Maurya

हमारा समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ रूढ़िवादिता और अंधविश्वास का खौफ इस कदर फैल गया है कि लोग इससे बाहर निकलना ही नहीं चाहते। मैं देखता हूँ कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी...

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पिता और अन्य कहानियाँ By Anil Kundal

सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था उनका। सब कुछ घर मे था, नौकर चाकर घर जायदाद घोड़े गाड़ियों के अंबार! और प्रभु महादेव जी की अपार कृपा थी कि किस...

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यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी.

उन्हें कांदिव...

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सत्य इतिहास By Ritin Pundir

कई वर्षों से देश मे एक नैरेटिव सेट कर दिया गया कि, की राणा पूंजा एक भील थे. जो सभी ने आसानी से मान लिया .

जबकिं राणा पूंजा ,भीलों की सेना प्रतिनिधित्व करते थे, भीलों के राणा थे,...

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हथकड़ी By Ashish Bagerwal

जिंदगी किस मोड़ पर कैसे और कब बदल जाए ये कह नही सकते, ऐसा ही कुछ राजपुरोहित जी के साथ हुआ। हीरालाल जी बहुत ही संपन्न और प्रतिष्ठित कारोबारी थे। हर ओर उनकी प्रतिष्ठा, वैभवता की ख्या...

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ऐसे ही क्यों होता हैं? By Std Maurya

एक दिन मैं लिख रहा था कि 'मोहब्बत सभी को मिलती है', तभी अचानक मेरी कलम की नोक (निब) टूट गई। वह मुझसे कहने लगी— "तुम अभी नादान हो। जितनी मोहब्बत सुनने में अच्छी लगती है,...

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यह एक सामाजिक कहानी है ।

जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है ।

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....... .......

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