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Part 18: अतीत का दरवाज़ादरवाज़े के बाहर कदमों की आहट…धीरे-धीरे तेज़ हो रही थी।अं...
आर्यन ने इशारा किया, और वे सातों गुंडे एक साथ अयान पर टूट पड़े। गोदाम की घुटन भर...
पुस्तक समीक्षा उत्तर दो समय पुस्तक _उत्तर दो समय, कविता संग्रह लेखिका सविता मिश्...
नई सुबहपटना से उठी "विश्वास विश्वविद्यालय" और "विश्वास दल" की रोशनी अब पूरी दुनि...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 35 " दादू! ऊस के...
शहर की साफ और चौडी सडक पर कबीर मेहरा की नई' मेबैक' किसी काले चीते की तरह...
44— ========== गाडियाँ (ट्रे...
अशोक उसे कहना तो बहुत कुछ चाहता था , अशोक अपनी बेटी की हालत कहना चाहता था पर आदि...
शाम का गहरा मगर सुहाना वक्त था। सत्तर वर्ष की मीरा देवी ड्राइंग रूम के आरामदेह स...
डिफरेंट लव मैरिज राइटर राजेश मालती दुबारा लिखी गई एक न्यू सीरीज है भाग 1: अजनबिय...
आश्रम में प्रातःकालीन ध्यान-धारणा के बाद जब सूर्य की पहली किरणें जिनालय के श्वेत संगमरमर पर पड़तीं, तब पंच-परमेष्ठी की पूजा आरंभ होती। घंटियों की मधुर ध्वनि, दीपों जा प्रज्ज्वलन, फ...
बरसों पहले की बात है। गंगा किनारे बसे छोटे से गाँव नवग्राम में एक लड़का रहता था – नाम था अर्जुन। उम्र मुश्किल से पंद्रह–सोलह वर्ष, लेकिन चेहरे पर मासूमियत और आँखों में अजीब-सी गहरा...
घु मेरा गहरा मित्र था, वह एक सॉफ़्ट बेयर इन्जीनियर था ।हम दोनो ने मुरादाबाद जैसे महानगर के प्रसिध्द महा विद्यालय" हिन्दू कालिज" में एक साथ ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त ली थी।...
काव्या प्यार में विश्वास नहीं करती। उसका अपना परिवार है - उसके पिता और दोस्त और वह उनके साथ खुश है। एक दुर्घटना ने उसके जीवन में सब कुछ बदल दिया। उसे अपने सबसे अच्छे दोस्त के अतीत...
रहस्यमयी दस्तावेज़ जयपुर की एक पुरानी लाइब्रेरी में, किताबों की धूल भरी अलमारियों के बीच, इतिहास के शोधकर्ता आरव मल्होत्रा को एक फटी-पुरानी डायरी मिली। वह रोज़ाना किसी नए राज की...
एक रात के बाद खिड़की से ठंडी हवा और बारिश की बूंदें अंदर आ रही थीं। बूंदों की नमी जब आरोही के चेहरे को छूकर गुजरती, तो जैसे उसके मन की उलझनों को और गहरा कर देतीं। वह गुमसुम खड़ी थ...
पहाड़ों से घिरा हुआ एक खूबसूरत सा कस्बा.....आज पूरे एक महीने की कड़ाके की सर्दी के बाद सूरज ने अपनी आभा का प्रकाश यहां बिखेरा था ...मसलन आज कस्बे के इस हिस्से में भीड़ ज्यादा थी......
दिल्ली, शाम के 6:20। ऑफिस बस से उतरकर माया पैदल अपने घर की ओर चलने लगी। हाथ में भारी लैपटॉप बैग था और मन में राहुल की खामोशी। सड़क पर चाय की दुकान से उठती भाप और धीमी-धीमी बूंदों...
रात का समय था। एक लड़का अंधेरे में किसी से छिपकर तेज़ी से भाग रहा था। वह थक चुका था, साँसे फूल रही थीं, लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रहा था। डर और घबराहट उसके चेहरे पर साफ़ झलक रही थ...
बात 1920 के दशक की है । उस समय जहां देखो वहीं गरीबी का आलम था। बहुत ही ऐसे कम परिवार थे जहां पर दो समय की रोटी आराम से मिलती हो । अधिकतर गरीबी से जूझ रहे थे। मैं ऐसी ही परिस्थितियो...
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