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भूल-86 नेहरू और समान नागरिक संहिता (यू.सी.सी.) भारत में राज्य के नीति-निर्देशक त...
एक साल बाद.गांव नरकटिया अब शांत था। पीपल का पेड सूख गया था, और उसकी जडें जमीन मे...
PART — 4 : उस रात सूरज जब घर पहुँचा…उसकी चाल शांत थी, पर दिल में एक नई आग ज...
चार सहेलियाँशहर के एक साधारण से मोहल्ले में चार सहेलियाँ रहती थीं — आशा, पायल, न...
एपिसोड 1: खामोश पेंटिंग की पहली साँसपुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस श...
अध्याय 4 – सिंहासनसमय: रात्रि 07:17 PMअविन मुख्य द्वार के सामने खड़ा था। उसके ठी...
विशाल, अथाह समुद्र के बीचों-बीच एक आलीशान-सी क्रूज़ लहरों से जूझ रही थी। चारों ओ...
आशना उसके पास जाकर आखें ततेर कर घुरी "क्या कहा? फिर से कहो?" "हे हे हे,,,क्या ही...
भाग 1: गाँव की दास्तानमालपुरा गाँव के किनारे पर एक पुरानी हवेली खड़ी थी। उसकी दी...
मेरी वफादारी आप ने कभी देखी हैं??में डॉगईस्ट भाई आपका , में भी आपकी तरह ए...
मेरे Dad मेरा जुठ जानते है... वैसे तो बहुत सारे रिस्तो के बारे मैं मुझे बताना है लेकिन क्या है कि जाने पहचाने रिश्ते तो रोज मुझे मेरे होने का अहसास दिलाते है लेकिन एक ऐसा रिस्ता...
मां _मां_ ओ __मां !! देखो मेरा रिजल्ट पुरे 95 पर्सेंट मिले से मुझे। मां मैं बहुत खुश हूं आज कहते हुए झुमने लगी पुर्णिमा । उसकी बातों में खनक और आंखों मे चमक थी। आज वो स...
चलते चलते एक मंदिर के सामने अचानक मेरे पैर रुक गए। अंदर से ओंकार धुन का नाद सुनाई दे रहा था। एक लय, ताल में छोटे से बडे बुढों तक, तन्मयता से ओंकार धुन का उच्चारण कर रहे थे। सबके चे...
लखनऊ की गलियों में, जहाँ शाम की चाय की खुशबू हवा में घुली होती है, वहीं कॉलेज के बाहर एक लड़का, आरव, अपनी किताबों में खोया हुआ बैठा था। वह मेडिकल का छात्र था, अपने माता-पिता की उम्...
यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और इसका किसी विशेष जाति या धर्म से कोई संबंध नहीं है। यदि लिखते समय कोई भी गलती हुई हो, तो कृपया उसे माफ करें। इस कहानी में जो भी विचार प्रस्तुत कि...
पूरे गाँव में रामलाल काका की ही चर्चा थी। जब से उस विशाल घर परिवार के मुखिया की जिम्मेदारी उन्हें मिली थी, उन्होंने कई क्रांतिकारी फैसले लिए जिनके खिलाफ उनके पुरखे सदैव ही रहे। सा...
आज खुद को किसी की जुबान से सुना एक नन्ही सी परी ओर इतने बड़े बड़े शब्दों में सिमटी हुई कुछ तो गुजर रहा होगा जिन्दगी में उसके जो खेलने कूदने खिलकर हंसने की उम्र में डिप्रेशन,एंजायटी...
यहाँ हमने पहले बुज़ुर्गो के आशिष नाम से novel मतलब motivational कहानियाँ लिखी थी, अभी कहानियाँ पुरानी हैँ, अनसुनी हैँ, सीखने बहुत मिलता हैँ *!! कठिनाईयां !!* ~~~~~~~~~~~~~~~~...
एक बार एक छोटे से गाँव में एक बहुत ही शरारती लड़का रहता था जिसका नाम रमेश था। गाँव के लोग उससे परेशान रहते थे क्योंकि वह हमेशा किसी न किसी की नकल करता और लोगों को चिढ़ाने के लिए नई...
कथन बहुत पुराना है। स्वामी विवेकानंद ने एक बार अपने भाषण में कहा था की संचार के साधन संसार में तबाही का कारण बन सकते हैं। पिछले 130 वर्षों में मानव ंने विज्ञान तथा तकनीकी क्षेत्र म...
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