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यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................
(शाम का समय। ऑफिस का कमरा सुनसान। सिमरन अपने डेस्क पर बैठी है। बाहर हल्की धूप और...
**माफिया की दीवानगी - सीजन 2****(ऑथर नोट: हेलो मेरे प्यारे रीडर्स! आज का पार्ट...
शहद कि गुड़िया - प्रकरण 62 " दादू! एक बार हारमोनियम...
वो आया शाम को। जब रोशनी और अंधेरा बीच में होते हैं, वो बीच का वक्त जब विरासत क्ष...
रुद्रा ( मासुमियत से ) :- क्या ... सच मे ऐसा हूआ क्या ? मेरी वजह से इन कन्याओं क...
अध्याय: 13दिल्ली शहर के सबसे प्रतिष्ठित फाइव स्टार होटल में देश के नामी बिजनेस म...
सृष्टि पाँचवीं मंज़िल की उस जर्जर छत के किनारे पर खड़ी थी। उसके बाल हवा में लहरा र...
ऋगुवेद सूक्ति--(३५) की व्याख्या "स न: पर्षदति द्विष:"।ऋगुवेद 10-187-5भावार्थ--वह...
रात के लगभग साढ़े नौ बज रहे थे।मुंबई की चमचमाती सड़कें रोशनी से जगमगा रही थीं।एक...
इस दिवाली की रात शायदा करीब करीब 2/3 बजे होंगे मेरी नींद खुल गई थी मे कमरे से बाहर निकला सोचा कुछ टहल के फिर बिस्तर पर गिरा जाए ताकि सुबह तक आंख ना खुले, हमारे प्लांट के कंपाउंड मे...
मेरी दिन मे दो बार धर्म पत्नी से बात होती थी अक्सर फोन मै ही करता था किन्तु एक दिन मोबाईल पर घंटी बजी टर्न..टर्न मैने देखा कि पत्नी का फोन.. मै खुश हुआ खुशी का कारण यह था कि जब भी...
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