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(खिड़की से हल्की धूप अंदर आ रही है। कमरे में अब सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब-सी श...
उन्होंने आगे कहा, "इसके जन्म के समय ही मेरी पत्नी रागिनी की मौत हो गई थी। चिरा...
यादों का एक जाम भरो मोहब्बत में नशीली यादों का एक जाम भरो l बुलाने पर आने के वाद...
अब तकतभी उस आदमी ने उस के कपड़ों को उसके बदन से अलग कर दिया और बेड के नीचे फेंक...
अगला दृश्य...युई का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था। उसकी नज़र सामने खड़े जुशेंग...
अनंत प्रभा प्रवाह नव प्रभात -डॉ विद्या निवास मिश्र जी --कलजयी व्यक्तित्व ----समय...
बहुत समय पहले की बात है। एक घने हरे पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर एक नन्हीं सी चिड़िय...
" रेगिस्तान का मेला”गाँव में आए उन्हें लगभग तीन हफ्ते हो चुके...
"बहू बनकर आई थी उस घर में, पर जब बुखार में पूरा शरीर तप रहा था, तब सास के मुँह स...
Chapter 4: पार्टी ऑन द रिस्कप्रैक्टिकल खत्म होते ही लैब से बाहर निकलते शैलेंद्र...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
भादो मांझी — वंश और विरासतभादो मांझी कई दिनों से मुँह फुलाए बैठा था।घर में उसकी बूढ़ी पत्नी के साथ रोज की तरह छोटी-बड़ी बातों पर नोकझोंक होती रहती थी। उस दिन भी दोपहर के भोजन पर पत...
कभी कभी इन्सान अपने जीवन से विरक्त होकर इस सांसारिक जीवन से सन्यास लेकर सन्यासी बन जाता है, लेकिन क्या वो सच में इस संसार के चक्रव्यूह से निकल पाता है,शायद नहीं! क्योंकि सांसारिक ज...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...
(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...
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