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माॉतक की बात सुनकर वेटर गुस्सा से कहता है :"लगता है तुम ऐसे नही मानोगे रुको तुम...
भाग 2: कांटों भरा गुलाब**सुबह की धूप जब रुद्र प्रताप सिंह के आलीशान केबिन की कां...
होटल का नजारा देखने लायक था।माया ने हंस कर कहा जीयो मेरे भाई।विक्की ने कहा थैंक...
खुशहाल जीवन के 10 नियमतनाव (Tension) और डिप्रेशन से दूर रहकर खुशहाल जीवन जीने के...
जैसे ही सात मिनट की गिनती पूरी हुई, विक्रम के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। वह बिना...
महाराणा लक्ष्य सिंह (लाखा) : हिंदुओं के रक्षक व चूँडा की अमर गाथा (1382-1421 ईसव...
महक जैसे ही हॉल में दाखिल हुई, हल्की-सी हलचल हुई। कई लोगों ने उसकी ओर देखा — उसक...
"यह किताब नहीं है" अध्याय 1: उधार का बोझ — हम कैसे फँसे?कहाँ से शुरू हुआ:बच्चा...
Snow City :रात का वक़्त…: ध्रुविका ने घूर कर लड़के की ओर देखा ! और फिर अपनी गर्द...
अचानक शांति टूट गई पेड़ के भीतर से एक भयंकर धमाका हुआ और जमीन ऐसे हिली जैसे नीचे...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं। हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा। अब...
यह कहानी राजा विक्रमादित्य के समय की है, जिसे "विक्रम और बेताल" की कहानियों की शुरुआत माना जाता है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे राजा विक्रमादित्य ने एक साधु को दिए गए अ...
सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...
“राजू… उठ जा बेटा… चल, काम पर नहीं जाना है क्या?” राजू की माँ उसे रोज़ सुबह जल्दी जगा दिया करती थी, जिससे वह हमेशा चिढ़ जाता था। वह अपने कानों पर हाथ रखकर चादर फिर से मुँह तक खी...
निधि की नन्ही उम्मीद” (श्रृंखला: निधि – मौन प्रेम की कहानी) सुधांशु की अनुपस्थिति में जब निधि ने बेटी को जन्म दिया, तब पहली बार उसके चेहरे पर शांति की झलक आई थी। वो मुस्कुरा...
"कभी-कभी ज़िंदगी से भागने वाले, सबसे ज़्यादा ज़िंदा महसूस करने वाले होते हैं..." यह उपन्यास एक प्रेम कथा नहीं है, न ही कोई रहस्यपूर्ण थ्रिलर। यह उन साँसों की कहानी है, ज...
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