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बांद्रा स्टेशन का वो अंतहीन और भारी शोर, हवा में घुली सिगरेट के धुएँ की महक, और...
️ हुक्म और हसरत ️#Arsiaएपिसोड 37 — नकाब के पीछे कौन? अवॉर्ड समारोह आगे बढ़ रहा थ...
Mr. & Ms. FakeEpisode 43 – The Ring That Changed Everything“ये अंगूठी…”राजवीर की...
Aashi घर पहुँची तो उसके चेहरे पर अब भी वही हल्की-सी मुस्कान थी।उसने बैग मेज़ पर...
कंपनी के बडे project को सफलतापूर्वक पूरा हुए कुछ दिन बीत चुके थे.ऑफिस में अब राह...
भाग 5 — जीवन की तलाशदसवीं कक्षा के बाद भी विभा के जीवन में बहुत कुछ बदल रहा था।...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 66 : कहानीकार का पहला पन्नाअंतिम पुस्तकालय अब शांत था...
(खिड़की से हल्की धूप अंदर आ रही है। कमरे में अब सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब-सी श...
उन्होंने आगे कहा, "इसके जन्म के समय ही मेरी पत्नी रागिनी की मौत हो गई थी। चिरा...
यादों का एक जाम भरो मोहब्बत में नशीली यादों का एक जाम भरो l बुलाने पर आने के वाद...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
भादो मांझी — वंश और विरासतभादो मांझी कई दिनों से मुँह फुलाए बैठा था।घर में उसकी बूढ़ी पत्नी के साथ रोज की तरह छोटी-बड़ी बातों पर नोकझोंक होती रहती थी। उस दिन भी दोपहर के भोजन पर पत...
कभी कभी इन्सान अपने जीवन से विरक्त होकर इस सांसारिक जीवन से सन्यास लेकर सन्यासी बन जाता है, लेकिन क्या वो सच में इस संसार के चक्रव्यूह से निकल पाता है,शायद नहीं! क्योंकि सांसारिक ज...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...
(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...
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