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  • RAJPUTANA - The War of Love and Revenge - 18

    भीम सिंह ने ग़ुस्से में कहा,"बस, बहुत हुआ! कुछ मत कहिए। हम आज ही अलवर के लिए रवा...

  • क्या नसीब है यार

    सुबह के करीब छह बज रहे थे।गाँव की गलियों में अभी पूरी तरह चहल-पहल शुरू नहीं हुई...

  • दो पतियों की लाडली पत्नी - 69

    अगले दिन बेबी सिटर आ गई थी…घर का काम थोड़ा आसान हो गया था।दिन भर की भागदौड़ और ऑ...

  • SHADOW KING - 1

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  • Shakti ke Shiv - 25

    अगली सुबह...बनारस की सड़कों पर रोज़ की तरह भीड़ थी, लेकिन शक्ति की नज़र उस भीड़...

  • कान्हा का संदेश

    जन्माष्टमी पर लेखकान्हा से सीखें जीने का सूत्रराधे-राधे!श्री कृष्ण का पूर्ण जीवन...

  • अधूरापन - 17

    अध्याय-१७अपूर्व जब अपने कमरे में गया, तब भार्गवी अलमारी में कपड़े व्यवस्थित रख र...

  • सत्य, शून्यता और काल

     सत्य, शून्यता और काल बुद्ध भिक्षापात्र लेकर खड़े होते हैं। उसका बाहरी अर्थ गरीब...

  • अर्थ - अनर्थ

    अर्थ - अनर्थ  यह श्लोक महाभारत का नहीं है। यह एक आधुनिक संस्कृत पहेली (riddle) य...

  • प्यारा भूत

    रामपुर नाम का एक छोटा और बेहद खूबसूरत गाँव था। उस गाँव के किनारे से ही एक बहुत ब...

बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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टूटता हुआ मन By prem chand hembram

(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...

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क्या सब ठीक है By Narayan Menariya

यह किताब उन अनकहे सवालों और अधूरी बातों का संग्रह है, जिन्हें हम अक्सर अपने अंदर दबाकर जीते रहते हैं।
हर कहानी हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी एक सच्चाई को सामने लाती है - रिश्तो...

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अम्मा By Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा।

अब...

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विक्रम और बेताल. By Vedant Kana

यह कहानी राजा विक्रमादित्य के समय की है, जिसे "विक्रम और बेताल" की कहानियों की शुरुआत माना जाता है। यह कहानी हमें दिखाती है कि कैसे राजा विक्रमादित्य ने एक साधु को दिए गए अ...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

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टूटता हुआ मन By prem chand hembram

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