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बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...

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वंश और विरासत. By prem chand hembram

भादो मांझी — वंश और विरासतभादो मांझी कई दिनों से मुँह फुलाए बैठा था।घर में उसकी बूढ़ी पत्नी के साथ रोज की तरह छोटी-बड़ी बातों पर नोकझोंक होती रहती थी। उस दिन भी दोपहर के भोजन पर पत...

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सन्यासी By Saroj Verma

कभी कभी इन्सान अपने जीवन से विरक्त होकर इस सांसारिक जीवन से सन्यास लेकर सन्यासी बन जाता है, लेकिन क्या वो सच में इस संसार के चक्रव्यूह से निकल पाता है,शायद नहीं! क्योंकि सांसारिक ज...

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गरीब के बहते आंसु. By prem chand hembram

उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा था। बेला की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को मधुर बना रही थी।...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । By miss k

क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त By ALLA NOOR KHAN

क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...

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धर्मराज की सभा By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार फैल चुका था कि धर्म का संतुलन डगमगाने लगा था। मनुष्य अपनी बुद्धि और चत...

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टूटता हुआ मन By prem chand hembram

(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...

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बांसुरी की धुन By prem chand hembram

भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।
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वंश और विरासत. By prem chand hembram

भादो मांझी — वंश और विरासतभादो मांझी कई दिनों से मुँह फुलाए बैठा था।घर में उसकी बूढ़ी पत्नी के साथ रोज की तरह छोटी-बड़ी बातों पर नोकझोंक होती रहती थी। उस दिन भी दोपहर के भोजन पर पत...

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सन्यासी By Saroj Verma

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पवित्र बहु By archana

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खोटा सिक्का By prem chand hembram

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(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक...

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