prem chand hembram लिखित उपन्यास खोटा सिक्का

खोटा सिक्का द्वारा  prem chand hembram in Hindi Novels
खोटा सिक्काफागुन का महीना था।आम के वृक्षों पर बौर आ चुके थे। पलाश के फूलों से पूरा गाँव मानो अग्नि की लालिमा से रंग उठा...
खोटा सिक्का द्वारा  prem chand hembram in Hindi Novels
चंद रुपयों से न तो पेट भर भोजन मिल सकता था और न ही रेल की टिकट खरीदी जा सकती थी। भूख, अपमान और अनिश्चित भविष्य की चिंता...
खोटा सिक्का द्वारा  prem chand hembram in Hindi Novels
खोटा सिक्का – भाग 03संध्या का समय था। गौशाला में गायों को चारा दिया जा चुका था। पश्चिम दिशा में डूबते सूर्य की लालिमा पू...
खोटा सिक्का द्वारा  prem chand hembram in Hindi Novels
भोर की प्रार्थना समाप्त होते ही शिबू बिना किसी को कुछ बताए मठ से निकल पड़ा। पूर्व दिशा में उगते सूर्य की सुनहरी किरणें ध...
खोटा सिक्का द्वारा  prem chand hembram in Hindi Novels
खोटा सिक्काशिबू धीरे-धीरे अपने आसन से उठा। उसने एक बार चारों ओर बैठे लोगों पर दृष्टि डाली। सामने चौधरी चाचा, सतीश ओझा, क...