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अधूरी किताबएपिसोड 74— हवेली में इंतज़ार करती माँहवेली की सबसे ऊपरी खिड़की में खड...
समय अपनी रफ्तार से आगे बढ़ता गया। देखते ही देखते कुछ साल बीत गए। अग्निहोत्री हाउ...
शाम के लगभग सात बज चुके थे।ऑफिस की ज्यादातर लाइटें बंद हो चुकी थीं। कर्मचारियों...
बिजली की चमक हवेली की पुरानी दीवारों पर पड़ती है।दरवाज़ा ज़ोर से खुलता है — करन...
ज़िंदगी न जाने कैसी हो चली थी। माँ को मैं अब अक्सर ठाकुर साहब के साथ देखता था। द...
अक्षय ने बिना एक पल गँवाए रिया को अपनी बाँहों में भर लिया। रिया का शरीर अब भी का...
Chapter 12कांड वाली गली, शेरू का शक और दरोगा जी की दावतदोपहर के तीन बजे कमरा नंब...
ध्रुव की ताराभाग - ३०लेखिका: अनामिकाध्रुव के जाने का दिन देखते ही देखते आ पहुँच...
अनकहा सच___हितेश के मम्मी-पापा राजू से लगातार हाथ जोड़कर माफी मांगते रहते हैं। उ...
फ्रांस ,वह लड़की और किंग दोनों ही चेयर पर आमने-सामने बैठे हुए थे लड़की अपना सर झ...
0.0 — रामायण और रामायण की व्याख्या में अंतररामायण केवल राम और रावण के बीच हुए युद्ध की कथा नहीं है। इसे धर्म, अधर्म, कर्तव्य, अहंकार, मोह, बुद्धि और नियति के प्रश्नों के रूप में भी...
कलयुगी महा-उत्पाद और अधर्म की भयानक ज्वालाएँ भड़कने से ठीक १०० वर्ष पूर्व, जब काल-चक्र ने एक पावन युग की रचना का निर्णय लिया, तब पृथ्वी पर परम-पवित्र भूमि सिंभाला की स्थापना हुई। स...
प्रस्तावना: तमस का साम्राज्य और अदृश्य आशाकलयुग का वातावरण: सन 4,28,126 ईस्वीसन 4,28,126 ईस्वी का यह भयानक काल-चक्र संपूर्ण ब्रह्मांड का सबसे खौफनाक, क्रूर और घिनौना दौर बन चुका था...
इतना घना कि सूरज की सुनहरी किरणें भी ज़मीन तक पहुँचने से पहले ही थककर बिखर जाती थीं। यहाँ रोशनी का प्रवेश वर्जित था। पत्तों की अनगिनत परतें ऊपर से नीचे तक ऐसे एक-दूसरे में गुथी हुई...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................ नेपाल के सरहद से सटा भारत में एक छोटा सा गाँव था विष्णुपुर । इसी गाँव के ठीक बीचोबीच बने कु...
एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके ए...
अयोध्या नगरी... एक ऐसी नगरी जिसके नाम का मतलब ही था, जिसे कोई युद्ध में जीत न सके। सरयू नदी के किनारे बसी इस सुंदर और भव्य नगरी में हर तरफ खुशहाली थी। ऊंचे-ऊंचे महल थे, चौड़ी सड़के...
आचार्य गंधर्व ने करीब १९ साल के युवा राजकुमार के हाथ मे तलवार थमाते हुए अपने ऊपर प्रहार करने का आदेश दिया। वो युवा था यज्वपाल राजघराने का सदस्य, तनिष्क यज्वपाल जो सामने खड़े आचार्य...
रात का समय था… रेगिस्तान अपनी गहरी खामोशी में डूबा हुआ था, लेकिन उस खामोशी के भीतर भी एक अजीब सी बेचैनी तैर रही थी। हवा आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ चल रही थी ऐसी कि रेत के कण उड़-...
साल 1540 की एक ठंडी सुबह। अरावली की ऊँची पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला अपने विशाल द्वारों और मजबूत दीवारों के साथ एक नए इतिहास का साक्षी बनने वाला था। किले के भीतर हलचल थी,...
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