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कहानी की कहानी की कहानी - 3 - वो जिसे एक नदी निगल गई
द्वारा कलम नयन
  • 82

Part-1मैं अपनी साँसें रोक कर सीता की आहट सुनने की कोशिश कर रहा था। मेरा पूरा शरीर किसी अनजाने डर की आशंका से पसीने से भीग चुका था। दीवार ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 8
द्वारा harshad solanki
  • 258

"अच्छा! वो क्या!?" जेसिका ने खुश होते हुए बड़ी बेताबी से पूछा. इसके उत्तर में राजू कहने लगा. "जब नानू ने उस तस्वीर, चाबी और नक्शे को देखा, तभी ...

कहानी की कहानी की कहानी - 2 - नरक का रास्ता
द्वारा कलम नयन
  • 98

राय बहादुर ने अपनी पुरानी रंजिश निकालने के लिए फिरंगी सिपाहियों का एक दस्ता भेजकर बाउजी और गाँव के सारे मर्दों को उठा लाने का फ़रमान भिजवा दिया। बाउजी ...

कहानी की कहानी की कहानी - 1
द्वारा कलम नयन
  • 202

हादसों के उस सावन को बीते आज एक लंबा अरसा हो चुका है। मेरे शरीर के घाव अब तक भर चुके हैं पर उस शाप की तबाही ने बाकी ...

विक्रम - द ब्रेव सोल्जर
द्वारा Shubh Dudhabale
  • 236

इस कहानी के सभी घटनाएं काल्पनिक है । कुछ पात्र मेरे दोस्तो के नाम है । विक्रम रेल्वे में बैठ मंद मंद मुस्कुरा रहा था। एक साल बाद जो  ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 7
द्वारा harshad solanki
  • 352

अचानक जगा की जोर जोर की कान फोड़ने वाली चीखें वातावरण में गूंज उठी. हम सब दहशत से थरथरा गए. क्या हो गया? सब के मन में एक ही ...

डेविल्स ट्राएंगल
द्वारा suraj sharma
  • 238

     ये मुमकिन ही नहीं की जब भी किसी रहस्यमयी जगह कि बात हो और बरमूडा ट्राएंगल को भूल जाए..           बरमूडा ट्राएंगल को 'डेविल्स ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे- भाग 19
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 246

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे-भाग-19  चलो जान छूटी    “तुम्हारी शादी हो गई उस मत्स्यकन्या या जलपरी से अथवा मरमेंड या जो भी तुम कहो, उससे?” उस नवागंतुक डाकू ...

महारानी लक्ष्मीबाई की अमर गाथा
द्वारा राज बोहरे
  • 274

ऐतिहासिक कहानी-                         महारानी लक्ष्मीबाई की अमर गाथा   “ तुम्हारे पति बिना संतान मरे हैं, इसलिये अब झाँसी पर हमारा कब्जा होगा ”   अंग्रेजों के सबसे बड़े ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 6
द्वारा harshad solanki
  • 364

"अरे! ये तो मर गया! इसकी हत्या किसने की!?" हसमुख चीख पड़ा.तुरंत हम सब की नजर उस लाश पर पड़ी. "ओ...ह गोद...!" एक उद्गार के साथ सब की आंखें ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे- भाग 18
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 232

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे- भाग-18  एक विद्रोह    अंधेरी रात। मशालों की लपलपाती रौशनी और भयानक बोझिल सा वातावरण। मेरे प्रेम ने मेरे साथ साथ मेरे मित्र… मेरे ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 5
द्वारा harshad solanki
  • 694

हम देर तक सोच विचार करते रहे. हमारे मन में बहुत से संदेह पैदा हो रहे थे. उस मनहूस आदमी और नानू की मिलीभगत पर भी हमने सोचा. पर ...

सदगति - 1
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • 476

अग्नि का स्पर्श होते ही चिता ने आग पकड़ ली।चिता के चारों ओर लोग खड़े थे।गीतिका चिता से दूर खड़ी थी।शमशान मे नीरवता छायी थी।वातावरण में अजीब सी  खामोशी ...

प्रथम ग्रासे मूषक पातः - 3
द्वारा Anil Makariya
  • 246

मुश्किलों और मुसीबतों के अविराम सिलसिलें के बाद आखिर कौन साबित हुआ विजेता ?

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - 18
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 298

भाग-18  एक विद्रोह    अंधेरी रात। मशालों की लपलपाती रौशनी और भयानक बोझिल सा वातावरण। मेरे प्रेम ने मेरे साथ साथ मेरे मित्र… मेरे अभिन्न मित्र गेरिक के प्राण ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 4
द्वारा harshad solanki
  • 1.5k

जब हमारी वहां बातचीत चल रही थी, तभी कृष्णा को ऐसा लगा जैसे कोई उन्हें देख रहा हो. उसने मुड़कर एक नजर देखा; और तुरंत ही अपना चेहरा वापस ...

life is Mathematics
द्वारा Anant Dhish Aman
  • 2.3k

बचपन और गणित मुझे गणित विषय से शुरु से हीं खास रुचि नही रही जिसका सबसे बङा कारण अंको के साथ खेलना हीं नही आया ।। आठवां बोर्ड के इग्जाम में ...

बैकुंठ के दर्शन ।
द्वारा सुप्रिया सिंह
  • 2.1k

मुझे अच्छी तरह से याद है ,मैं रात पढ़ते -पढ़ते सो गया था । मेरे दोंनो हाथ मेरे सीने पर रखे हुए थे । उससे पहले मैं कोई सस्पेंस ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - 17
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 2k

भाग-17  प्रेम का अनावरण    ऊपर आते ही इन लोगों ने मुझे घेरे में ले लिया। और उस गुप्तचर ने तो बढ़कर मुझे जकड़ लिया और एक खंजर मेरे ...

ज्वेल थीफ़
द्वारा Amar Gaur
  • 797

दिन भर आग के गोले की तरह तपने के बाद धरती ठंडी हो रही थी, मीठी मीठी पुर्वा चल रही थी और मोहल्ले में एकदम सन्नाटा था । चौहान ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 3
द्वारा harshad solanki
  • 756

लखन अंकल ने शराब का गिलास उठाते हुए घडी में देखा. रात्रि के बारह बजने को हुए थे. उसने शुरू किया.कहानी शुरू होती है हसमुख के दादा मेघ्नाथ्जी के ...

रहस्य - 1
द्वारा Prajkta B Jadhav
  • 496

     "कोई तो बचाओ मुझे, कोई तो मदत करो मेरी, क्यों मारना चाहते हो मुझे, छोड दो मुझे, मुझे जीना हैं, छोड दो मुझे" ये सपना देखते हुए ...

जावेद
द्वारा Neeraj Neer
  • 509

जावेद                     ------- नीरज नीर कहानी की शुरुआत तो बहुत पहले हो गयी थी। लेकिन यह भूली हुई कहानी फिर से शुरू हुई बीमा कंपनी के एक खत से। ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 2
द्वारा harshad solanki
  • 740

"क्या बात है? तुम्हारी पापा के साथ बात हो रही थी तब मैं वहीँ बैठी हुई थी! तुम्हारी बात सुनकर पापा गभरा गए थे. ऐसी क्या बात हो गई?""ओह! ...

गहरी चाल
द्वारा bharat Thakur
  • 696

हाथ मे चाकू लिए रोमिल कमरे के एक कोने में खड़ा हुआ था। कमरे में खून पसरा हुआ था। खून की अजीब सी गंध वातावरण में फैली हुई थी। ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - 16
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 497

    अब तक आपने पढ़ा... सहसा प्रकाश की एक किरण नज़र आई। एक लपलपाती हुई अग्नि... फिर उसे धारण किये हुये एक हाथ। एक परछाई ऊपर छत की ...

पता, एक खोये हुए खज़ाने का - 1
द्वारा harshad solanki
  • 1.2k

राजू के हाथों में आज उसके पिताजी का सामान शिफ्ट करते वक्त एक छोटी, मगर बहुत पुराणी डायरी आई थी. उसने वह डायरी पर नजर डाली. उस पर हाथ ...

आगे का कुछ सोचे हो ?
द्वारा Haseeb Anwer
  • 470

           'आगे का कुछ सोचे हो'  "अनवर ने मासूमियत से फ़ोन पर पूछ लिया""इंदु" कुछ समय ख़ामोश रही और जवाब आया 'क्या' ? शाम का वक़्त ...

अनजाने लक्ष्य की यात्रा पे - 15
द्वारा Mirza Hafiz Baig
  • 495

पिछले भाग में आपने पढ़ा... तो निष्कर्ष्र यह निकलता है कि प्रशंसा एक ब्रह्मास्त्र है और कोई भी इस अस्त्र से बच नहीं सकता। क्योंकि थोड़ी बहुत प्रशंसा तो ...

सफर ...
द्वारा Pallavi Saxena
  • 764

न जाने मैं कहाँ हूँ मुझे कुछ समझ नही आ रहा है शायद किसी बस या ट्रैन की खिड़की के निकट बैठी बाहर देख रही हूँ ट्रैन रफ्तार से ...