सर्वश्रेष्ठ रोमांचक कहानियाँ कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

वो बिल्ली...
द्वारा Saroj Verma
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ये बात कोई दस पन्द्रह साल पुरानी है,तब मेरी उम्र यही कोई तीस पैंतीस साल रही होगी, मैं सरकारी अस्पताल में गायनोलोजिस्ट थी,मेरा उस कस्बे में नया नया तबादला ...

नेट की कल्पना
द्वारा Vijay Tiwari Kislay
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नेट की कल्पना           राघव ग्रेजुएशन, कंप्यूटर के अनेक कोर्स और प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के बाद भी अब तक बेरोजगार ही है। ऐसा नहीं है ...

प्यार भी इंकार भी (अंतिम भाग)
द्वारा किशनलाल शर्मा
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"क्या प्यार का मतलब सिर्फ शादी ही है?"चारुलता ने प्रश्न किया था।"प्यार को सामाजिक सम्मान प्रदान करने के लिए शादी का प्रावधान है।विवाह मर्द और औरत को प्यार करने ...

अप्सराएं या परियां
द्वारा Shakti Singh Negi
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अप्सराओं का बंदी   कुछ समय पहले की बात है. यह उत्तराखंड के एक गांव की बात है. उत्तराखंड के किसी गांव में एक बहुत कुशल संगीतकार रहता था. उसके ...

वो ख़्वाब था या हक़ीक़त......
द्वारा Saroj Verma
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कभी कभी वो रात और वो मंज़र याद आता है तो मेरा दिल दहल उठता है आखिर वो क्या था?वो मह़ज मेरा कोई ख्वाब था या हक़ीक़त ,जिसे मैं ...

टकटक (केवल प्रबुद्ध वयस्कों के लिए)
द्वारा Pawan Kumar
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Story Title: Taktak                                                  WITH PAWAN ...

भूख--एक औरत की व्यथा(अंतिम भाग)
द्वारा किशनलाल शर्मा
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 थोड़ा सा बदलाव उसकी जिंदगी में आया था।सेठ ने उसे छ महीने तक रखैल बनाकर रखा और उससे जी भर जाने पर उसे बेच दिया था।वह एक आदमी से ...

पार - महेश कटारे - 4 - अंतिम भाग
द्वारा राज बोहरे
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महेश कटारे - कहानी–पार 4                  बादल छँट जाने से सप्तमी का चन्द्रमा उग आया था। पार के किनारे धुँधले–से दिखाई देने लगे थे। तीनों उघाड़े होकर पानी ...

सजा---एक अनोखी प्रेम कथा
द्वारा किशनलाल शर्मा
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दरोगा अनवर तैयार होकर थाने के लिए निकल पड़ा।घर से थाने तक का रास्ता सड़क से होकर लम्बा था।लेकिन एक छोटा रास्ता भी था,जो  सुनसान जंगल के बीच से ...

पार - महेश कटारे - 3
द्वारा राज बोहरे
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महेश कटारे - कहानी–पार 3                                 अलसाता गिरोह चौक गया। कमला ने दीवार से टिकी ग्रीनर दुनाली झटके के साथ पकड़ ली। और कमर में बँधी बेल्ट से ...

भूत बंगला - भाग 3
द्वारा Shakti Singh Negi
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दिव्य तलवार के मेरे हाथ में आते ही मेरे सब घाव अपने आप ठीक हो गए और मेरे शरीर में नया बल और उत्साह आ गया। मैंने तलवार से ...

पार - महेश कटारे - 2
द्वारा राज बोहरे
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महेश कटारे - कहानी–पार 2                                 कमला मोहिनी में बँध उठी। घाटी और उसके सिर पर तिरछी दीवार की तरह उठे पहाड़ पर जगर–मगर छाई थी। जुगनुओं के ...

पार - महेश कटारे - 1
द्वारा राज बोहरे
  • 789

महेश कटारे - कहानी–पार 1                                 जान–पहचानी गैल पर पैर अपने–आप इच्छित दिशा को मुड़ जाते थे। हरिविलास आगे था–पीछे कमला, उसके पीछे अपहरण किया गया लड़का तथा ...

भूत बंगला - भाग 2
द्वारा Shakti Singh Negi
  • 993

भूत बंगला भाग 2   कुछ ही दूरी पर एक विशाल हिम मानव सा प्राणी एक जिंदे इंसान को खा रहा था। मैंने अपने कुलदेव का स्मरण किया। और तलवार ...

प्यार भी इंकार भी - 1
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • 1.1k

सूरज दूर क्षितिज में कब का ढल चुका था।शाम अपनी अंतिम अवस्था मे थी।धरती से उतर रही अंधेरे की परतों ने धरती को अपने आगोश में समेटना शुरू कर ...

प्रायश्चित - भाग-21
द्वारा Saroj Prajapati
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किरण ने अपनी उखडती हुई सांसो को फिर से समेटा और शिवानी की ओर देखते हुए बोली "आपने मुझे जीवन का नया नजरिया दिया। मुझमें आशा का संचार किया। ...

रंभाला का रहस्य - भाग 1
द्वारा Shakti Singh Negi
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   प्रताप अपनी स्टडी में बैठकर एक दुर्लभ पुस्तक का अध्ययन कर रहे थे। उनकी पत्नी उनके द्वारा कही गई बातों को कंप्यूटर पर माइक्रोसॉफ्ट वर्ड पर टाइप कर ...

जोरावर गढ़ - भाग 3
द्वारा Shakti Singh Negi
  • 1.3k

   यहां सभी लोग बहुत संपन्न थे। परंतु 40% लोग बहुत गरीब थे। अर्थात 8 लाख लोग बहुत गरीब थे। हालांकि अब यह भारत की प्रजा थे। परंतु ये ...

जोरावर गढ़ - भाग 2
द्वारा Shakti Singh Negi
  • 1k

प्रिया - भोजन कर लीजिए। मैं - ठीक है राजकुमारी जी।प्रिया - मैं कुछ देर में आती हूं।मैं - ठीक है जी।    मैंने भोजन कर लिया और हाथ मुंह ...

प्रायश्चित - भाग-20
द्वारा Saroj Prajapati
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हॉस्पिटल के अनेक गलियारों से गुजरते हुए , शिवानी किरण की बहन के पीछे पीछे यंत्रवत सी चली जा रही थी। शिवानी के मन में विचारों का झंझावात उमड़ ...

जोरावर गढ़ - भाग 1
द्वारा Shakti Singh Negi
  • 1.8k

   मैं एक लेखक हूं। मेरे लेख और कहानियां पत्र-पत्रिकाओं तथा सोशल मीडिया में प्रकाशित होते रहते हैं। अनेक पाठक - पाठिकाओं के पत्र इस संबंध में मुझे आते ...

नागमणी (संस्मरण ) - अंतिम भाग
द्वारा राज कुमार कांदु
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रात के लगभग दो बजे मैं अपने घर पहुंचा । घर में किसी को भी इस घटना के बारे में जानकारी ना हो इसलिए मैंने वह पात्र रखने और ...

प्रायश्चित - भाग-19
द्वारा Saroj Prajapati
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पूरे रास्ते शिवानी, किरण व उसकी बीमारी के बारे में ही सोचती रही। जिस किरण से वह रात दिन, उठते बैठते, सालों से नफरत करती आई थी!! जिसके लिए ...

नागमणी (संस्मरण ) - 6
द्वारा राज कुमार कांदु
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अब गुरूजी ने वह आटे से बनाया हुआ दीया प्रज्वलित कर दिया और उसके ठीक नीचे की सीढ़ी पर जहाँ तक पानी चढ़ा हुआ था वह बर्तन रख दिया ...

नागमणी (संस्मरण ) - 5
द्वारा राज कुमार कांदु
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गुरूजी की बात अब मेरे समझ में आ रही थी । ‘  वाकई रात के अँधेरे में हम वहां मंदिर के पास क्या कर रहे हैं कौन जान पायेगा ...

नागमणी (संस्मरण ) - 4
द्वारा राज कुमार कांदु
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दूसरे दिन गुरूजी निर्धारित समय पर हमारे घर आ गए । उन्हें घर पर जलपान वगैरह कराकर हम साथ में ही घर से बाहर निकले । मुझे यह देखकर ...

प्रायश्चित - भाग- 18
द्वारा Saroj Prajapati
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धीरे धीरे दिन,  महीने, साल यूं ही गुजरते रहे । बच्चे बड़े हो गए लेकिन शिवानी के मन की कड़वाहट दूर नहीं हुई। उन दोनों के बीच फासले समय ...

इत्तफाक-
द्वारा किशनलाल शर्मा
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"अरे आप? राजन बस की क्यू मे लगा,तो अपने आगे लगी युवती को देखकर  चोंका था,"कल आप मेट्रो में मिली थीं और आजराजन की बात सुनकर वह युवती मुस्करायी ...

अघोरी का शाप - अंतिम
द्वारा नवीन एकाकी
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समय के साथ साथ वो सब भूल गयी। बाबा के पिता ने भी उसे कुछ भी न बताया और वो भी अपनी गृहस्थी में रमने की कोशिश करने लगा। ...

मेरी पागल बहना
द्वारा Asawari Deo
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हमें किसी नियम के तहत जीवन क्यों जीना है? हम अपनी किस्मत क्यों नहीं बदल सकते? हमें हमेशा वह सब क्यों स्वीकार करना पड़ता है जो भगवान ने लिखा है? आपको मेरी ...