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मल्टीवर्स के चारों ओर चक्र की लहरें चमक रही थीं। फैमिली अब सुपर चार्ज—वाटर, फायर...
गोदान: शब्दार्थ सहित,(भाग 2) मूल लेखक: मुंशी प्...
32--- पता ही नहीं चलता एक के साथ एक रिश्ता कैसे खिंचता चला आ...
भाग 3: शाश्वत काल का दंशआर्यन की नींद उस रात टूटी हुई थी। मृया के जाने के बाद से...
भाग 1: नीली स्क्रीन का जादूमुंबई की शामें कभी शांत नहीं होतीं। मरीन ड्राइव पर टक...
रॉनी ने अपने कुछ आदमियों को काम पर लगा दिया और खुद 'बॉस' के अगले आदेश क...
महाभारत की कहानी - भाग-२२३ युधिष्ठिर की मानसिक कष्ट में बेदब्यास की उपदेश और मरु...
अगस्त्य सय्युरी के साथ तुरंत कार में बैठा, और कार सीधा अस्पताल पर रुकी।वह कार से...
ऋगुवेद सूक्ति-- (63)की व्याख्या "धियं धारय"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ -- मन को स्थिर...
आश्रम में पुनः वापसीबालक प्रह्लाद आचार्य शंड के साथ पुनः आश्रम में वापस आ गए थे।...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
बड़ी मशक्कत के बाद एक अच्छा रिश्ता हाथ लगा था , नारायणी के पिता इसे हाथ से जाने देना नहीं चाहते थे। इस लिए मुंह मांगा दान दक्षिणा देकर, विवाह की सारी रस्में अदा की गईं। नारायणी औ...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी की रफ्तार है… पर मैं अब 25 की नहीं रही… थोड़ा साथ चल ले।”आज माँ राधा को साथ लेकर बाज़ार आई थी।कुछ ही...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
कक्षा में अचानक ठहाकों की आवाज़ गूँज उठी।Sneha ने इधर-उधर देखा तो पाया कि सब बच्चे उसी की ओर घूर-घूरकर देख रहे थे और हँस भी रहे थे।लड़कियाँ Sneha को देख कर अजीब-सी मुस्कान लिए खड़ी...
राज्य की शाम हमेशा शांत हुआ करती थी, लेकिन आज हवा में अजीब-सी घबराहट थी। सूरज की लाल किरणें पहाड़ों के पीछे डूब रही थीं, और किले की ऊँची दीवारों पर जली मशालों की रोशनी लहरों की त...
माही आज पहले दिन जब ऑफिस पहुँची तो सबसे पहले उसकी मुलाकात उस लड़के से हुई जिसकी तस्वीर कुछ दिन पहले ही उसके घर आई थी। उनके रिश्ते की बातें भी दोनों के माता-पिता के बीच चल रही थीं।...
अटारी में धूल के कण हवा में तैर रहे थे, मानो समय के साथ उलझी कोई पुरानी कहानी बुन रहे हों। नाना जी का बंगला, जो कभी किताबों की सौंधी खुशबू, कविताओं की गूंज, और ज्ञान की चर्चाओं से...
"छाया की जिंदगी का एक ही सपना था—विशाल का प्यार। लेकिन जब उसका सपना बिखर जाता है, तो उसके साथ टूटती है उसकी मोहब्बत की दीवानगी। उसी पल उसमें जन्म लेता है आत्मसम्मान और नारी-शक्...
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