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एक आम सी प्रेम कहानी भाग- १लेखिका "अनामिका"लेखिका की ओर सेअक्सर ऐसा होता हे की ह...
आख़िरी कॉलरात के ठीक 12 बजे थे। नेहा अपने कमरे में अकेली बैठी थी। तभी उसका मोबाइ...
फ्लैशबैक...लगभग छह से सात महीने पहले...पुलिस स्टेशन..."यस सर, आपने मुझे बुलाया।...
“अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम।दास मलूका कहि गए, सब के दाता राम॥” — संत मलूक...
“आपने जवाब नहीं दिया सर।”राजवीर की आवाज़ सुनते ही मैं एक ही झटके से फ़्लैशबैक से...
वर्षा का गीत लेखक: विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसरआसमान पर काले बादलों ने धीरे-धी...
क्या सच में हमारी परछाई हमें सुन सकती है? अगर ऐसा होता, तो क्या दुनिया के सारे ल...
एपिसोड 40: समाधि का द्वार और अंधेरे का विस्तार---शहर की बेचैनीसमाधि के द्वार से...
वो लड़की जो कभी नहीं हारीलेखिका: कांता जयपालभूमिकाकुछ कहानियाँ पढ़ने के लिए नहीं...
इस महा- श्रृंखला के रचनाकार लोकप्रिय लेखक एवं पूर्व पत्रकार, इकबाल राज हैं. यह क...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
सोने का पिंजरा हवेली बड़ी थी। इतनी बड़ी कि गौरी को बचपन में लगता था कि अगर वह एक कने से दौड़ना शुरू करे, तो साँस फल जाएगी दूसरे कोने तक पहुँचने से पहले। सेठ धरमचंद की इकलौती...
दोपहर का समय था , घर की गैलरी में दो चारपाई बिछी हुई थी जिन पर दो बच्चे सो रहे थे जिसमे से एक की उम्र लगभग 4 महीने और दूसरे की लगभग 3 वर्ष होगी ।दोनों बच्चो के पास दो औरते बैठी बात...
हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन सी कितनी ट्रेनें हर वक्त बेवक्त गुजरती रहती थीं। सुबह सबेरे और आधी रात के वक्त के गुजरने के बाद ही...
केशव किसी तरह धक्कामुक्की से निकलते हुए सप्त क्रांति ट्रेन में चढ़ पाया। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन लोगों से खचाखच भरा हुआ था— किसी की आँखों में बिछड़ने का दर्द था, तो किसी के चे...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
बड़ी मशक्कत के बाद एक अच्छा रिश्ता हाथ लगा था , नारायणी के पिता इसे हाथ से जाने देना नहीं चाहते थे। इस लिए मुंह मांगा दान दक्षिणा देकर, विवाह की सारी रस्में अदा की गईं। नारायणी औ...
“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी की रफ्तार है… पर मैं अब 25 की नहीं रही… थोड़ा साथ चल ले।”आज माँ राधा को साथ लेकर बाज़ार आई थी।कुछ ही...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
कक्षा में अचानक ठहाकों की आवाज़ गूँज उठी।Sneha ने इधर-उधर देखा तो पाया कि सब बच्चे उसी की ओर घूर-घूरकर देख रहे थे और हँस भी रहे थे।लड़कियाँ Sneha को देख कर अजीब-सी मुस्कान लिए खड़ी...
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