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यूँ ही राह चलते चलते - 15
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -15- रजत तो बस के बाहर के अप्रतिम सौंदर्य में खोये थे, यह अस्वाभाविक भी नहीं था चारों ओर दूर दूर तक फैली ऊँची ...

यूँ ही राह चलते चलते - 14
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -14- कारवाँ चल पड़ा धरती के स्वर्ग स्विटजरलैंड । सुबह ठीक आठ बजे ही सब उपस्थित थे ब्रेकफास्ट करने के लिये, मानो स्विट्जरलैंड में ...

यूँ ही राह चलते चलते - 13
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -13- यशील सप्रयास वान्या से दूर रहने का प्रयास कर रहा था और इस परिवर्तन को अर्चिता अनुभव कर रही थी । अवश्य संकेत ...

पहली हवाई यात्रा - 2
द्वारा Lalit Rathod
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मुम्बई टू रायपुर- भाग दो खिड़की वाली जगह पाकर जितनी खुशी हुई थी, उतनी दो घंटे में मुंम्बई पहुंचने पर भी नही हुई...मन कह रहा था थोड़ी देर ऊपर से ...

यूँ ही राह चलते चलते - 12
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -12- वहीं पर एक टाइलोरियन पिलर था।मीना श्रेष्ठ जिन्होंने काफी समय से अपने ज्ञान का ढिंढोरा नही पीटा था कहा ’’सुमित मुझे पता है ...

यूँ ही राह चलते चलते - 11
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -11- सुबह ग्रुप के काफी लोग लाबी में एकत्र हो गए थे सुमित ने कहा ‘‘ आज हमारे ग्रुप में एक सदस्य और जुड़ ...

यूँ ही राह चलते चलते - 10
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -10- लौटते में सब को सुमित वेनिस की एक गली में ले गये, वह एक सँकरी पर साफ-सुथरी गली थी । वहाँ सुमित ने ...

यूँ ही राह चलते चलते - 9
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -9- आज का लक्ष्य वेनिस था, वही वेनिस जिसे शेक्सपियर के बहुचर्चित उपन्यास ’मर्चेन्ट आफ वेनिस‘ ने लोकप्रिय बना दिया था। पानी पर बसा ...

यूँ ही राह चलते चलते - 8
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -8- रोम में पहुँच कर शाम का समय खाली था तो सब गाने के मूड में आ गये। निमिषा ने अपने मधुर गीत से ...

यूँ ही राह चलते चलते - 7
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -7- सुमित ने सबको वहाँ से आगे चलने के लिये कहा, अगला पड़ाव था ट्रेवी फाउन्टेन । दुकानों से सजी एक गली को पार ...

यूँ ही राह चलते चलते - 6
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -6- आज का दिन रोम के नाम था, सबसे पहले सबको कोलोसिमय दिखाने की योजना थी। रोम के नाम पर ही अनुभा का मन ...

यूँ ही राह चलते चलते - 5
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -5 - लेवेरियान के पोर्ट पर क्रूस से उतर कर सब बाहर आये। निमिषा ने सचिन से कहा ‘‘ आज तो तुम मेरे पाँवों ...

यूँ ही राह चलते चलते - 4
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -4- कोच आया तो अपनी आयु को भूल कर कोच में आगे सीट के लिये सभी दौड़ पडे़। सब सीट लेने में व्यस्त थे ...

यूँ ही राह चलते चलते - 3
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -3- आज से तीन दिनों तक सबको क्रूस (पानी के जहाज ) का आनन्द उठाना था । क्रूस उनकी प्रतीक्षा में पलकें बिछाए, सागर ...

यूँ ही राह चलते चलते - 2
द्वारा Alka Pramod
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यूँ ही राह चलते चलते -2- कमरे में आ कर लम्बे सफर के बाद वो पीठ सीधी करने को लेटे ही थे कि आधा घंटा बीत गया।अनुभा ने रजत ...

यूँ ही राह चलते चलते - 1
द्वारा Alka Pramod
  • 3k

यूँ ही राह चलते चलते -1- चाय की चुस्की लेते हुए रजत बोले ’’ अगर तुम मुझे पाँच लाख रुपये दो तो मैं तुम्हें एक सरप्राइज दे सकता हूँ। ...

कहानी मेरी कामयाबी की...
द्वारा Singh Srishti
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कामयाबी के सपने बुनते हुए मैं नए सफर की ओर बढ़ रही थी। बाहर के दृश्य को रोचकता से देखते हुए मैं बस में खिड़की किनारे से टिकाए बैठी ...

तिरूपति--मेरी पहली दक्षिण यात्रा
द्वारा किशनलाल शर्मा
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"तिरूपति चले"चालीस साल रेलवे मे सेेवा के दौरान  दक्षिण यात्रा का  संयोग   नही बन पाया।एक बार नागपुर तक जरूर जा आया था।उस समय भी नही जा पाया।जब मेरे सालेे ...

द मोस्ट लक्जरियस ट्रेन - महाराजा एक्सप्रेस
द्वारा S Sinha
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                           आलेख -  द मोस्ट लक्जरियस ट्रेन - महाराजा एक्सप्रेस      आमतौर पर  भारतीय  रेलगाड़ियों में बहुत भीड़ होती है सिवाय अपर वातानुकूलित क्लासेज के  . इसके विपरीत ...

अपना जाबांज पंजाब
द्वारा Radheshyam Kesari
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पंजाबहुत ही संयोग के बाद 18 जनवरी 2020 को पंजाब प्रांत को नजदीक से देखने का अवसर प्राप्त हुआ यह संभव हो पाया अमूल्या हर्ब्स के टूर के बदौलत। हमने ...

मेरी सफर
द्वारा Pandya Ravi
  • 1.3k

मेरी सफर इस बार बहुत दिन पहले ही तय हो चुकी थी बस उस दिन का इंतजार था दिनो को गिनता था फिर वो दिन आ ही गया!  मेरी ...

प्रीति सेनगुप्ता की उत्तरी ध्रुव की यात्रा
द्वारा Neelam Kulshreshtha
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विश्व की अकेले यात्रा करने वाली तृतीय महिला यात्री प्रीति सेनगुप्ता की उत्तरी ध्रुव की यात्रा प्रस्तुति - नीलम कुलश्रेष्ठ [ परिचय -- न्यूयॉर्क में रहने वाली प्रीति सेनगुप्ता, ...

लेना क्या ? - देना क्या ?
द्वारा Narendra Rajput
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लेना क्या ? - देना क्या ? हमें यह पता चल जाए की जीवन में कब कहाँ से क्या लेना है और कहाँ क्या देना है तो यह धरती ...

केसरिया बालम पधारो म्हारे देश.......
द्वारा Dr Sudha Gupta
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केसरिया बालम पधारो म्हारे देश....... अरावली पर्वत की गोद में बसा अजमेर जहाँ सुबह - शाम के अद्भुत नजारों को देखती आँखें नहीं अघातीं, पर्वतों के सीने से उठता धुंआ ...

बदलाव की बयार
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • (15)
  • 712

    परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन प्रगति का सूचक भी है। कुछ चीजों का बदलना सुखद होता है और कुछ चीजें बदलने के साथ दुःख दे जाती ...

ले देख
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 1.4k

ले देख नीलम कुलश्रेष्ठ मटमैली सह्रदयी पहाड़ियों पर से कैब गुज़रती जा रही थी। कभी मैदान सा आ जाता, कभी सर्पीली चढ़ाई शुरू हो जाती. मम्मी तो सापूतारा के ...

गुजरात के सौराष्ट्र के नानु रन के गौरक्षक वाछड़ा दादा
द्वारा Neelam Kulshreshtha
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दूर दूर तक अँधेरा साँय सांय कर रहा था -----गुजरात के सौराष्ट्र के रन जिसे `नानु रन `अर्थात छोटा रन कहा जाता है, की बंजर ज़मीन ----ज़मीन ऐसी कि ...

आमची मुम्बई - 44 - Last Part
द्वारा Santosh Srivastav
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मुम्बई से अगर चॉल शब्द हटा दिया जाए तो मुम्बई की पहचान और इतिहास दोनों ख़त्म हो जाएँगे चॉल मुम्बईकरों की एकजुटता का उदहारण है ...

आमची मुम्बई - 43
द्वारा Santosh Srivastav
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मुम्बई की अपनी अलग संस्कृति है मुम्बई में हर शख़्स ज़िन्दादिल है वो ज़िन्दग़ी को हर हाल में हँसते-हँसते जीता है चाहे भीड़ भरी ...

रिजर्वेशन की टिकिट
द्वारा Ajay Kumar Awasthi
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     कुछ साल पहले हम लोग समूह में अमरनाथ जी की यात्रा के लिए जम्मू जा रहे थे हम सबका रिजर्वेशन था सो अपनी अपनी बर्थ में हम ...