सर्वश्रेष्ठ यात्रा विशेष कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

अपना जाबांज पंजाब
द्वारा Radheshyam Kesari
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पंजाबहुत ही संयोग के बाद 18 जनवरी 2020 को पंजाब प्रांत को नजदीक से देखने का अवसर प्राप्त हुआ यह संभव हो पाया अमूल्या हर्ब्स के टूर के बदौलत। हमने ...

मेरी सफर
द्वारा Pandya Ravi
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मेरी सफर इस बार बहुत दिन पहले ही तय हो चुकी थी बस उस दिन का इंतजार था दिनो को गिनता था फिर वो दिन आ ही गया!  मेरी ...

प्रीति सेनगुप्ता की उत्तरी ध्रुव की यात्रा
द्वारा Neelam Kulshreshtha Verified icon
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विश्व की अकेले यात्रा करने वाली तृतीय महिला यात्री प्रीति सेनगुप्ता की उत्तरी ध्रुव की यात्रा प्रस्तुति - नीलम कुलश्रेष्ठ [ परिचय -- न्यूयॉर्क में रहने वाली प्रीति सेनगुप्ता, ...

लेना क्या ? - देना क्या ?
द्वारा Narendra Rajput
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लेना क्या ? - देना क्या ? हमें यह पता चल जाए की जीवन में कब कहाँ से क्या लेना है और कहाँ क्या देना है तो यह धरती ...

केसरिया बालम पधारो म्हारे देश.......
द्वारा Dr Sudha Gupta
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केसरिया बालम पधारो म्हारे देश....... अरावली पर्वत की गोद में बसा अजमेर जहाँ सुबह - शाम के अद्भुत नजारों को देखती आँखें नहीं अघातीं, पर्वतों के सीने से उठता धुंआ ...

बदलाव की बयार
द्वारा Dr. Vandana Gupta Verified icon
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    परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन प्रगति का सूचक भी है। कुछ चीजों का बदलना सुखद होता है और कुछ चीजें बदलने के साथ दुःख दे जाती ...

ले देख
द्वारा Neelam Kulshreshtha Verified icon
  • 301

ले देख नीलम कुलश्रेष्ठ मटमैली सह्रदयी पहाड़ियों पर से कैब गुज़रती जा रही थी। कभी मैदान सा आ जाता, कभी सर्पीली चढ़ाई शुरू हो जाती. मम्मी तो सापूतारा के ...

गुजरात के सौराष्ट्र के नानु रन के गौरक्षक वाछड़ा दादा
द्वारा Neelam Kulshreshtha Verified icon
  • 843

दूर दूर तक अँधेरा साँय सांय कर रहा था -----गुजरात के सौराष्ट्र के रन जिसे `नानु रन `अर्थात छोटा रन कहा जाता है, की बंजर ज़मीन ----ज़मीन ऐसी कि ...

आमची मुम्बई - 44 - Last Part
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 490

मुम्बई से अगर चॉल शब्द हटा दिया जाए तो मुम्बई की पहचान और इतिहास दोनों ख़त्म हो जाएँगे चॉल मुम्बईकरों की एकजुटता का उदहारण है ...

आमची मुम्बई - 43
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 451

मुम्बई की अपनी अलग संस्कृति है मुम्बई में हर शख़्स ज़िन्दादिल है वो ज़िन्दग़ी को हर हाल में हँसते-हँसते जीता है चाहे भीड़ भरी ...

रिजर्वेशन की टिकिट
द्वारा Ajay Kumar Awasthi Verified icon
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  • 1.5k

     कुछ साल पहले हम लोग समूह में अमरनाथ जी की यात्रा के लिए जम्मू जा रहे थे हम सबका रिजर्वेशन था सो अपनी अपनी बर्थ में हम ...

आमची मुम्बई - 42
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 497

शायद यही वजह है कि मुम्बई की जीवन रेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन चौबीसों घंटे में से कभी भी खाली नहीं मिलती प्रत्येक प्रहर अलग-अलग तरह ...

आमची मुम्बई - 41
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 385

मुम्बई कभी सोती नहीं उसकी नाइटलाइफ़ के बारे में यही कहा जाता है मुझे याद आ रहाहै ‘मुम्बई रात की बाहों में’ एथेना, लश, ...

एक दिन रेल के सफर में
द्वारा Upasna Siag Verified icon
  • 1.3k

मैं एक व्यवसायी या कहिये एक सफल व्यवसायी रहा हूँ। अपने जीवन में बहुत रुपया, नाम, इज्ज़त कमाई है। लेकिन कभी बाहर की दुनिया का भ्रमण ही नहीं कर पाया। अब ...

आमची मुम्बई - 40
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 471

एक ज़माने में मुम्बई में पारदर्शी मीठे पानी की पाँच प्रमुख नदियाँ बहती थीं उल्हास नदी जहाँ चायना क्रीक में फिल्म वालों के आकर्षण का केन्द्र रही ...

आमची मुम्बई - 39
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 429

चर्चगेट से विरार तक जाने वाली लोकल ट्रेन मुम्बई की सबसे रोमाँचक यात्रा कराती है इस पर पीक आवर्स में चढ़ना तो दूर दरवाज़े पर लटकने भी ...

आमची मुम्बई - 38
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 286

जनवरी लगते ही मुम्बई का आकाश और खाड़ियों के किनारे खूबसूरत गुलाबीपंखों वाले समुद्री पक्षी फ्लेमिंगो से भर जाता है मुम्बई में खारे समुद्री पानी की कई ...

रेल का सफर
द्वारा Satender_tiwari_brokenwords
  • (11)
  • 581

ये कहानी काल्पनिक हैं और इसके किरदार भी काल्पनिक हैं।किरदार -              दो अजनबी दोस्त रिया और अजय।।कहानी ????             पढ़कर ...

आमची मुम्बई - 37
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 335

प्रकृति ने न केवल सुरम्य तटों की समृद्धि मुम्बई कोदी है बल्कि अरब महासागर के साथ-साथचली गई समुद्र रेखा के सामानांतर पश्चिमी घाट माथेरान, खंडाला, लोनावला, अम्बोली, एम्बीवैली और ...

आमची मुम्बई - 36
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 322

जब भी वर्ली सी लिंक से गुज़रती हूँ लगता है समँदर मेरा हमसफ़र है नजाने मुझसे कहाँ-कहाँ की सैर करा देता है न जाने कितने ...

आमची मुम्बई - 35
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 341

बांद्रा रिक्लेमेशन से वर्ली की आधा घंटे की दूरी आठ मिनट से भी कम समय में!! सचमुच यकीन नहीं होता, मगर ये संभव कर दिखाया है बाँद्रा वर्ली सी ...

घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 16 - लास्ट पार्ट
द्वारा Ranju Bhatia Verified icon
  • 393

यदि बिरयानी नाम सुनते ही आपको जिस शहर का नाम ध्यान में आता है हैदराबाद तो यह इसके अलावा भी बहुत कुछ है इस शहर के बारे में जिसके ...

आमची मुम्बई - 34
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
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वैसे तो मुम्बई जो किसी ज़माने में हरा भरा नदी, सरोवरऔर समँदर को अपने आगोश में समेटे पूरी दुनिया को आकर्षित करता था, अब विकास के जुनून में कंकरीट ...

घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 15
द्वारा Ranju Bhatia Verified icon
  • 314

दिल्ली की सुबह जब बारिश से शुरू होती है तो न जाने क्यों मुझे ” माण्डू” बहुत याद आता है । शायद इसलिए कि वहां की बारिश बहुत ही ...

आमची मुम्बई - 33
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 285

ब्राह्ममुहूर्त में यानी चार बजे से ही भूलेश्वर में फूलों से लदे ट्रक फूलों की दुकानों पर उँडलना शुरू हो जाते हैं हवाओं में भक्तों की आस्थाके ...

आमची मुम्बई - 32
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
  • 246

मुम्बई में हर त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है होली, दीपवाली, ईद, क्रिसमस, गणेशोत्सव बाज़ारों की सजधज से ही पता लग जाते हैं रथयात्रा जुहू ...

घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 14
द्वारा Ranju Bhatia Verified icon
  • 299

महेश्वर इंदौर से सिर्फ ९० किलोमीटर की दूरी पर है, यह मध्य प्रदेश के खरगौन ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर तथा प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह नर्मदा नदी ...

आमची मुम्बई - 31
द्वारा Santosh Srivastav Verified icon
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गोरेगाँव पूर्व में एक बहुत बड़ालगभग १६ स्क्वेयरकिलोमीटर तक फैला हरा भरा इलाका है जिसे आरे कॉलोनी से जाना जाता है १९४९ में यहाँ मिल्ककॉलोनी बनी जिसमें ...

सची का बस्ता
द्वारा Yayawargi (Divangi Joshi) Verified icon
  • 620

सचि का बस्तामैं वेसे तो एक आम सा बस्ता हूँ पर खास तब बना जब मैं सचि का बस्ता बना…हा मैं ही हूँ सचि का बस्ता मैं ही सबसे ...

घुमक्कड़ी बंजारा मन की - 13
द्वारा Ranju Bhatia Verified icon
  • 401

बंजारा मन कहीं देर तक टिकता नहीं न, जिन्हें घूमने का शौक हो रास्ता निकल ही जाता है, कहीं पढ़ा था, ट्रेवेल के बारे में कि, आप कहाँ पैदा ...