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रुहानियत (दास्ताँ - ए - रूह) का शायरनामा
द्वारा nirav kruplani
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रुहानियत (दास्ताँ - ए - रूह) का शायरनामा... 1. तुम्हारे होठों को छूकर जो गिला की रोशनी आई थी, इतना गुरूर तो अब भी है की, रोशन करने के ...

मेरे लफ्ज़ मेरी कहानी - 3
द्वारा Monika kakodia
  • 1k

मैं एक लेखिका हूँ इस नाते ये मेरा दायित्व है कि लोगों की सोच पर पड़ी हुई गर्द को अपने अल्फ़ाज़ से साफ कर दूँ , हो सकता है ...

आजाद की वीरगति।
द्वारा Manish Kumar Singh
  • 966

जिसने हर संभव यत्न किये, भारत आजाद कराने के।जो अधिकारी अमृत का था,विष उसे मिला पी जाने को।।अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु,रखता था जान हथेली पर।शिव के समान रणधीर ...

ये मेरा और तुम्हारा संवाद है कृष्ण
द्वारा Meenakshi Dikshit
  • 935

1.  हमारे प्रेम के अमरत्व का पल   तुम्हारा स्वर सदा की तरह, आत्मीयता के चरम बिंदु सा कोमल था. आगे महाभारत है, अब वापस आना नहीं होगा. तुम ...

ख्यालों का बगीचा
द्वारा Chandni Sethi Kochar
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काव्य संग्रह "ख्यालों का बगीचा" भूमिका "साहित्य समाज का दर्पण होता है।''यह कहावत तभी तक सार्थक है, जब तक साहित्य समाज को आईना दिखाने का काम करे। साहित्य समाज ...

यम याचन
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 988

ये कविता एक आत्मा और यमराज के बीच वार्तालाप पर आधारित है।आत्मा का प्रवेश जब माता के गर्भ में होता है, तभी से यमराज उसका पीछा करने लगते है। ...

वीर शिरोमणिःमहाराणा प्रताप।(भाग-(२)
द्वारा Manish Kumar Singh
  • 347

सांगा को मिली पराजय अब, भीतर ही भीतर खाती है।बाबर से बदला लेने को,हर पल ही जलती छाती है।।प्रण उसने कठिन लिया ऐसा, प्रतिशोध नहीं जब तक लूंगा।सिर पर ...

अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।। - Dilwali Kudi की कलम से।।
द्वारा Dilwali Kudi
  • 365

*अरसा हो गया गुजरे तेरी गली की अंगड़ाई से।*अब चांद से होती गुफ़्तगू की रिहाई से,पा लेते है राहत चंद लम्हो की कटाई से।क्योंकि,अरसा हो गया गुजरे तेरी गली ...

अवसान
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 342

जिन्हें चाह है इस जीवन में, स्वर्णिम भोर उजाले की,उनके राहों पे स्वागत करते,घटा टोप अन्धियारे भी।इन घटाटोप अंधियारों का, संज्ञान अति आवश्यक है,गर तम से मन में घन ...

कल्पना की उड़ान
द्वारा Er Bhargav Joshi બેનામ
  • (47)
  • 477

            ऐ वीरो जागो..घनघोर घटाए छाई हुई है ।दीप कहीं भी नजर ना आए ।।जागो ऐ वीरो जागो तुम फिर।आपदा है बड़ी सीरत में आई।।बलिदान तुम्हारी ...

मे और मेरे अह्सास - 10
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 299

मे और मेरे अह्सास भाग- १० **** बात को भुलाना आसाँ होता lयाद को भुलाना आसाँ होता ll चांदनी मे डूबी हुई महकती lरात को भुलाना आसाँ होता ll ...

कोरोना वोरीयर्स
द्वारा #Krishna Solanki
  • 299

‌‌                कहता  है  ? तुम  पुलिस  ,डॉक्टर  या  फौज  वाले  हो !                       ...

माटी का पुतला
द्वारा mansvi
  • 485

माटी का एक पुतला आया! माँ का दिल हर्षाया, पिता ने जश्न मनाया गरीब थे, पर पुतले को हर खिलौना दिलवाया|     घर में खाना कुछ काम होता ...

शायरी - 7
द्वारा pradeep Kumar Tripathi
  • 295

कुछ इस तरह हो गई है ज़िन्दगी किमीठी तो सुगर थी और तारीफ चाय की होती रहीये कैसा दस्तूर है दुनिया का ये देख कर प्याला भी हैरान हैलोग ...

वीर शिरोमणिः महाराणा प्रताप ‌।(भाग-(१)
द्वारा Manish Kumar Singh
  • 406

वीणापाणि नमन है तुमको, मेरे कंठ में कर लो वास।देकर ज्ञान पुंज हे माता, निमिष में संशय कर दो नाश।।हे गौरी-शिव शंकर के सुत, मुझ अज्ञानी का ध्यान करो।कर ...

मेरी भूल का एहसास
द्वारा SARWAT FATMI
  • 387

एहसास तेरा एहसास हर पल हैं पर क्यू इस एहसास में भी तूम नहीं हो साथ थे तो दूर दूर थे अब दूर दूर हो तो एहसास में भी नहीं  हो गलती हो तो सुधार ...

एक कप शायरी...
द्वारा Gadhavi Prince
  • 355

प्रस्तावना:ये किताब मेरी कुछ रचनाओं का संकलन हे,ओर मुजे आसा हे की आप मेरी रचनाओं को पसंद करेंगे, मेरी प्रस्तावना पढ़ कर ये मत सोचिएगा की मे कोइ पंडित ...

प्रकृति - Dilwali kudi की कलम से।
द्वारा Dilwali Kudi
  • 487

*न जाने मानव जात ने क्या करने की ठानी है।*स्वार्थ के इस खेल में हुआ मानव अभिमानी है,इस प्रकृति को मानव पहोचा रहा क्यू हानि है;न जाने मानव जात ...

लोगो का तो काम हैं बोलना
द्वारा SARWAT FATMI
  • 429

लोगो का काम हैं बोलना हमारा काम हैं चलना लोगो का क्या आज आप पर बोले कल दूसरे पर ये तो दस्तूर हैं ज़माने का इस बात पर दिल दुखाया मत करो मैं तेरा आज ...

कविता - प्रेरक कविता
द्वारा Karan Somani
  • 415

"सपनो की जिंदगी "                                         (क्या मे कर बैठा )ये खूबसूरत ...

कुन्ती...
द्वारा Trisha R S
  • 391

 (एक छोटा सा प्रयास हैं किसी ऐसी माँ की व्यथा को वर्णित करने का जिसने अपने परिवार की मान मर्यादा के लिए अपनेी मम्मता को विसर्जित कर दिया। फिर ...

बाजार
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 330

1.बाजार झूठ हीं फैलाना कि,सच हीं में यकीनन,कैसी कैसी बारीकियाँ बाजार के साथ।औकात पे नजर हैं जज्बात बेअसर हैं ,शतरंजी चाल बाजियाँ करार के साथ। दास्ताने क़ुसूर दिखा के ...

मे और मेरे अह्सास - 9
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 459

मे और मेरे अह्सास भाग - ९ बहाना ना बनाना दूर जाने के लिये lचले जाना गर जाना चाहो शोख से ll ******** चले जाना था तो बताकर जाते ...

लाल पलाश
द्वारा Yasho Vardhan Ojha
  • 331

(भोजपुरी बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक बड़े भूभाग में बोली जाने वाली भाषा है। तीन कविताओं के बाद एक पटनहिया और अंत में भोजपुरी की एक कविता सुधी ...

मेरे लफ़्ज़ मेरी कहानी - 2
द्वारा Monika kakodia
  • 309

अल्फ़ाज़ जो हर पल अपने से लगते हैं , जज़्बात जो महसूस होते हैं

भारत ना कभी हारा था, ना कभी हारेगा
द्वारा जगदीप सिंह मान दीप
  • 1.6k

"भारत ना कभी हारा था ना कभी हारेगा"कोरोना से लड़ने की जब भारत ने ठानी थी,मैंने भी लिखी कविता,  जो याद जुबानी थी।कोरोना तेरा जन्म हुआ चीन में, बना ...

खुशी
द्वारा Karan Somani
  • 437

जीवन की भागमभाग होड़ में खुशी का कोई ठिकाना ना रहा इंसान जीवन के संपूर्ण खुशी के लिए उन मुसाफिरों की दौड़ में लग गया जहां इस  संसार की ...

माँ: एक गाथा - भाग - 4
द्वारा Ajay Amitabh Suman
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जब भी बालक निकले घर से,काजल दही टीका कर सर पे,अपनी सारी दुआओं को,चौखट तक छोड़ आती है,धरती पे माँ कहलाती है।फिर ऐसा होता एक क्षण में,दुलारे को सज्ज ...

मेरा इरादा न था ।
द्वारा Er Bhargav Joshi બેનામ
  • (53)
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     नमस्ते दोस्तो,        ये हिंदी में मेरा दूसरा प्रयास है। पहले प्रयास में की गई क्षतिया और गलतियां सुधारने की कोशिश की है । फ़िर ...

कविता संग्रह
द्वारा S Sinha
  • 433

     कविता  संग्रह           1 .  कविता -- भारत की नारी    मैं आधुनिक भारत की नारी हूँ    अबला न समझना मुझको    मैं 'तुलसी ...