सर्वश्रेष्ठ कविता कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

शब्दांश (मेरा काव्य संग्रह )
द्वारा Arjuna Bunty
  • 91

पहला संस्करण: 2020   इस पुस्तक का कोई भी भाग लेखक की लिखित अनुमति के बिना किसी भी रूप में पुन: प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है ! कवर ...

दिल ऐ नूर
द्वारा મોહનભાઈ આનંદ
  • 85

========दिल ए नूर, टपकता है टपक टपक,मन कहीं चमकता है, चमक चमक;आइना ए दिल। , रोशन चांद सूरज,रुह ए दिल जिंदगी है ,लपक झपक;====================

मे और मेरे अह्सास - 15
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 262

मे और मेरे अह्सास भाग 15 दुनिया की जंजीर तोड़कर आजा lप्यार के बंधन मे बंधकर आजा ll ********************************************************************* फोन पे बाते करना अच्छा लगाता है lपर नज़रे तुझे ...

From Bottom Of Heart - 7
द्वारा Jiya Vora
  • 116

1.Not everytime It is her attitude, If she is ignoring you.But Sometimes, It is her SELF RESPECT!2.दिल क्या चाहता है! जब सारी उम्मीदें टूट जाती  हैं, जब सारी कोशिशें नाकाम हो ...

ये मेरा और तुम्हारा संवाद है #कृष्ण – 2
द्वारा Meenakshi Dikshit
  • 272

  1.       तुम्हारे स्वर का सम्मोहन तुम्हारे अनुराग की तरह, तुम्हारे स्वर का सम्मोहन भी अद्भुत  है, अपनत्व की सघनतम कोमलता, और सत्य की अकम्पित दृढ़ता का ये संयोग ...

सिर्फ तुम.. - 3
द्वारा Sarita Sharma
  • (15)
  • 526

सिर्फ तुम-3दर्द जब हद से बढ़ जाता है,चीखना चाहते है..चिल्लाना चाहते है.  मन में जमी धूल एक पल में निकालना चाहते है...चाहते हैं कह दें सब हाल-ए-दिल,पर कुछ कह नहीं ...

मानवता के डगर पे
द्वारा Shivraj Anand
  • 111

प्यारे  तुम मुझे भी अपना लो ।गुमराह हूं  कोई राह बता दो।युं ना छोडो एकाकी अभिमन्यु सा रण पे।मुझे भी साथले चलो मानवताकी डगर पे।।वहां बडे सतवादी है।सत्य -अहिंसाकेपुजारी ...

जय हो बकरी माई
द्वारा Ajay Amitabh Suman
  • 164

(१)   जय हो बकरी माई   बकरी को प्रतीक बनाकर मानव के छद्म व्यक्तित्व और बाह्यआडम्बर को परिभाषित करती हुई एक हास्य व्ययांगात्म्क कविता।   सच कहता हूँ ...

सलाखों के पीछे
द्वारा SHAMIM MERCHANT
  • 298

आज बोहोत दिनों बाद, सुकून से सोऊंगा,आज बड़े दिनों बाद, अच्छी नींद आएगी।जेल में वो सुकून कहां?सलाखों के पीछे वो आराम कहां?एक ऐसी बात के लिए अंदर हुआ था,जिसमे ...

प्रयास
द्वारा ભૂમિકા
  • (46)
  • 1.1k

मेरा सर्व प्रथम हिन्दी  गजलसंग्रह "प्रयास" आप समक्ष रख रही हूं.ये छोटा सा  प्रयास है मेरा आप सबके दिल तक पहुंचने का,आप सभी की संवेदना से जूडने का, आशा ...

हम कल ही तो मिले थे
द्वारा Niraj Bishwas
  • 350

हम कल ही मिले हो ऐसे लगता है,फिर तुम्हे क्यों लगता है हमें अलग ,हो जाना चाहिए ,मुझे तो नही लगता,मैंने तो सोचा भी था कि हम दोनों ,साथ ...

मे और मेरे अह्सास - 14
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 457

मे और मेरे अह्सास भाग -14 जाम पे जाम पीए जा रहे हैं lशाम का नाम लिए जा रहे हैं ll ******************************************* *शाम है जाम है और क्या चाहिये**काम ...

लिख रहे वे नदी की अन्तर्कथाऐं,
द्वारा कृष्ण विहारी लाल पांडेय
  • 235

गीात क्ृष्ण विहारी लाल पांडेय                                    घाट पर बैठे हुए हैं जो सुरक्षित         लिख रहे वे नदी की अन्तर्कथाऐं,                आचमन तक के लिए उतरे नहीं जो ...

सीता: एक नारी - 7 - अंतिम भाग
द्वारा Pratap Narayan Singh
  • 291

सीता: एक नारी ॥ सप्तम सर्ग॥ निर्विघ्न सकुशल यज्ञ मर्यादा पुरुष का चल रहा किस प्राप्ति का है स्वप्न उनके हृदयतल में पल रहा ? अर्धांगिनी के स्थान पर अब तो ...

मे और मेरे अह्सास - 13
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 480

मे और मेरे अह्सास भाग-13 आदमी खुद को जान लेता हैं lये जग उस को पहचान लेता है ll ************************************ शुरुआत जोरदार होने से कुछ नहीं होता lजीत ने ...

बेनाम शायरी - 2
द्वारा Er Bhargav Joshi
  • (34)
  • 1k

                                                 "बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???एक ...

कविता
द्वारा प्रतिभा चौहान
  • 355

अधूरी कविताओं को अधूरी लालसाएं समझना…    जब सांस घुटती  है बारुद के धुँएं में आवाजें  कलेजा चीर देती हैं अपने खौफनाक रूप से सुनती है सेंध में चुपचाप ...

कुछ ख्याल सुनोगे?
द्वारा Gadhavi Prince
  • 269

सब से पहले एक छोटिशी रचना पेश करता हूं।लडकिचाय के बागानों से निकलती खुशबू लगती हो;लडकी साडी पहना करो अच्छी लगती हो।आइने की नज़र ना लगे तुमको;क्या ईस लीये ...

सीता: एक नारी - 6
द्वारा Pratap Narayan Singh
  • 205

सीता: एक नारी ॥ षष्टम सर्ग॥ कितने युगों से अनवरत है सृष्टि-क्रम चलता रहा इस काल के अठखेल में जीवन सतत पलता रहा गतिमान प्रतिक्षण समय-रथ, पल भर कभी रुकता ...

ऐ जिंदगी
द्वारा Yakshita Patel
  • (36)
  • 854

नमस्कार मित्रो... हिन्दीमे कविता लिखने का  ये मेरा पहला प्रयास है,  इसमे कई सारी कमिया हो सकती है, शब्दो की गलतियां भी हो सकती है। आप इसे पढ़कर अपने ...

सीता: एक नारी - 5
द्वारा Pratap Narayan Singh
  • 282

सीता: एक नारी ॥पंचम सर्ग॥ संतप्त मन, हिय दाह पूरित, नीर लोचन में लिएमुझको विपिन में छोड़कर लक्ष्मण बिलखते चल दिए निर्लिप्त, संज्ञा शून्य, आगे लड़खड़ाते वे बढ़ेउठते नहीं थे पाँव, ...

अर्धनिमिलिप्त
द्वारा Er Bhargav Joshi
  • (26)
  • 796

                                   "अर्धनिमिलिप्त"??? ?? ??? ?? ???                ...

ग़ज़ल, कविता, शेर
द्वारा Kota Rajdeep
  • 292

प्रेम-जल बरशा बादल से, दरख़्त की हर पत्तियां सुनहरी हों चली हैं।अंगड़ाई लिए नई कोंपलें उठती हैं, जमीं कितनी ताज़ा हो चली हैं।___Rajdeep Kotaएक रोज़ शादाब शामों से दूर जाना होगा।ज़िन्दगी ...

सीता: एक नारी - 4
द्वारा Pratap Narayan Singh
  • 284

सीता: एक नारी ॥चतुर्थ सर्ग॥ सहकर थपेड़े अंधड़ों के अनगिनत रहता खड़ा खंडित न होता काल से, बल प्रेम में होता बड़ा पहले मिलन पर प्रीति की जो अंकुरित थी ...

From Bottom Of Heart - 4
द्वारा Jiya Vora
  • 442

1.Kheriyat maat pucho hamari,Hum to sirf unhi ke khwaab mein rehte hai!Unse dur chahe kitne bhi ho fasle,Par hum to sirf unhi ke dil mein dhadak te hai! 2.थे ...

और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा )
द्वारा Pranava Bharti
  • 438

और ख़ामोशी बोल पड़ी  (पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------              ख़ामोशी मनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर ...

सीता: एक नारी - 3
द्वारा Pratap Narayan Singh
  • 253

सीता: एक नारी ॥तृतीय सर्ग॥ स्वीकार करती बंध जब, सम्मान नारी का तभीहोती प्रशंसित मात्र तब, संतुष्ट जब परिजन सभी भ्राता, पिता, पति, परिजनों की दासता में रत रहेहोती विभूषित ...

बेनाम शायरी - 1
द्वारा Er Bhargav Joshi
  • (39)
  • 968

                        "बेनाम शायरी"??? ?? ??? ?? ???क्रूर भी है, निष्ठुर भी है, वो खुदा मेरा मगरुर भी है।"बेनाम" ...

कविता - ‘ माँ ‘
द्वारा प्रतिभा चौहान
  • 307

माँ... तुम बिन बिन इह लोक, जगत मर्माहत सूने अंचल और इन्द्रधनुष प्रेम,त्याग,क्षमा,दया की धाराधैर्य,कुशलता,धर्मपरायण जीवन रहा तुम्हारा, इठलाती, बलखाती गुण तेरे ही गाती माँन पड़ता कम ...

मे और मेरे अह्सास - 12
द्वारा Darshita Babubhai Shah
  • 369

मे और मेरे अह्सास भाग- १२ उदास मत हो lजी ले जिंदगी ll वो लम्हें ना रहे हैं lये लम्हें ना रहेगे ll तू जी रहा था जैसे lफिरसे ...