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अम्मा -२ मेरे सामने ' वाले घर से चीखने चिल्लाने की आवाजे आ रही थी। सुबह - सु...
अशोक :- कोई बात नही बेटा । तु समझ गयी पर बेटा आज के जमाने मे तो बेटीयां अपने मां...
सूक्ष्म का धर्म — बिंदु से ब्रह्मांड तक — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲 प्रस्तावना मनुष्य की...
अध्याय 3: नियति का उपहास और काली परछाइयांशून्य-प्रस्थ के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर मो...
अयान,अपनी झोपड़ी से बाहर निकला, तो सामने का नजारा किसी डरावने सपने जैसा था। वही...
भाग 4 The Catcher in the Rye – युवाओं की बेचैनी को दर्शाने वाला उपन्यासलेखक: J....
Part 7 last part आख़िरी कोशिशसुहानी देर तक मोबाइल को देखती रही।हर्ष का मै...
“बच्चा वही, स्कूल वही… फिर हर साल ‘एडमिशन फीस’ क्यों?” “जब म...
: : प्रकरण - 57 : : ' बेबी बर्थ कं...
हम फिर से मिले मगर इस तरह{ एपीसोड़ - 13}आज पूरा दिन अरुण रूपाली के साथ गुजरने वा...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा। अब...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
1. प्रारंभिक स्वरूप परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है, मंत्रोच्चार औ...
शून्य-प्रस्थ के क्षितिज पर जब सूर्य अपनी पहली किरणें बिखेरता है, तो वह केवल प्रकाश नहीं, बल्कि एक जादुई उत्सव होता है। यहाँ का प्रकाश हल्का केसरिया है, जो हवा में तैरते बारीक स्वर्...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
Lady Chatterley's Lover – प्रेम, समाज और प्रतिबंध की कहानी लेखक: D. H. Lawrence दुनिया के साहित्य इतिहास में कुछ ऐसी किताबें हैं जिन्होंने समाज की सोच को चुनौती दी और अपन...
सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था। शहर की यह शाम भी कुछ वैसी ही थी—आधी भागदौड़ में डूबी हुई, आधी थकी हुई। वह कैफ़े के कोने वाली कुर्सी पर ब...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
इंसान की किस्मत मे जो लिखा वो उसे मिलकर ही रहेता है, चाहे मौहब्बत हो या हो अश्क.ये कहानी है अरुण और रूपाली की जो कॉलेज मे मिले फिर अच्छे दोस्त बने , रूपाली जो अरुण से प्यार कर बैठी...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
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