प्रेरक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Motivational Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations a...Read More


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  • सड़क किनारे की चाय

    सड़क किनारे की चाय— चाँदनी चौधरीकुछ समय पहले की बात है। मैं अपने कुछ प्रिय मित्र...

  • स्कूल का पहला दिन

    विजय शर्मा एरी   अजनाला, अमृतसर               स्कूल का पहला दिन       सुबह की पह...

  • अधूरी उड़ान - 1

    आज के जमाने में सब अपने में ही बीजी (busy) रहते हैं। कोई भी किसी पे ध्यान नहीं द...

अधूरापन - 5 By Falguni Dost

अध्याय - ५गायत्री अपनी दिनचर्या समाप्त करके घर के मंदिर में दीपक जलाते हुए प्रार्थना कर रही थी। उसे बहुत अफ़सोस हो रहा था। उसके मन-मस्तिष्क पर लगातार अमृता भाभी की स्थिति ही छाई हु...

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सड़क किनारे की चाय By Chandni

सड़क किनारे की चाय— चाँदनी चौधरीकुछ समय पहले की बात है। मैं अपने कुछ प्रिय मित्रों के साथ एक यात्रा पर निकली थी। लंबा सफर तय करने के बाद हमने सड़क किनारे बनी एक छोटी-सी चाय की दुका...

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मेरा घर By Vijay Erry

मेरा  घर  लेखक: विजय शर्मा एर्रीगाँव की धूल भरी पगडंडी पर चलते हुए जब मैंने पहली बार उस छोटे से मकान को देखा था, तब मेरी उम्र सिर्फ आठ साल थी। बाबा के हाथ में मेरा हाथ था, और अम्मा...

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सपनों का बाज़ार, आरक्षण By Vedanta Life Agyat Agyani

  सपनों का बाज़ार और आत्म-विस्मृति: कोचिंग से गुरु तक, मौलिकता की हत्या का धंधा   लेखक/शोधकर्ता: अज्ञात अज्ञानी (Agyat Agyani)     विषय: आधुनिक शिक्षा का व्यवसायीकरण, गुरु-संस्कृति...

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आजादी By shrish sharma

आजादी - एक अधूरे खत की पूरी कहानीसन 1930 की बात है। बंगाल के एक छोटे से गाँव सोनापुर में एक लड़का रहता था - बिरजू। बिरजू की उम्र उस समय महज बारह साल थी। उसके पिता हरिराम काका गाँव...

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खेत का बैल By RAVINDRA

गाँव की मिट्टी में जब पहली बारिश की बूँदें गिरतीं, तो सबसे पहले जो आवाज़ सुनाई देती थी, वह थी हल की चरचराहट और बैलों के गले में बँधी घंटियों की टुनटुन। उन्हीं आवाज़ों में एक थी हीर...

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स्कूल का पहला दिन By Vijay Erry

विजय शर्मा एरी   अजनाला, अमृतसर               स्कूल का पहला दिन       सुबह की पहली किरण जब खिड़की से अंदर घुसी, तो रोहन की आँखें पहले से ही खुली हुई थीं। उसने पूरी रात लगभग नहीं सो...

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अधूरी उड़ान - 1 By piyu bhuva

आज के जमाने में सब अपने में ही बीजी (busy) रहते हैं। कोई भी किसी पे ध्यान नहीं देता। पर सीया एक ऐसी लड़की है। जो सबसे प्यारी है। सीया का रूप इतना अच्छा नहीं है। लेकीन उसका स्वभाव ब...

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राहें - 14 By shiromani mathur

मरना तो हैसाकेत कई दिनों से परेशान हो रहा था। बेटी की शादी कीतैयारी पूरी हो चुकी थी, कल बारात आने वाली है और सुनार ने बेटीके आभूषण अभी तक बनाकर नहीं दिये थे। घर में पिताजी भीचिल्ला...

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परदेस और पराई माटी By sukhvinder Singh Rai

पंजाब की सुनहरी धूप में चमकते वो पाँच एकड़ के खेत अब विक्रम की मलकियत नहीं रहे थे। आज सुबह ही तहसील में कांपते हाथों से अंगूठा लगाकर आए थे विक्रम। उनके हाथों की वो गहरी लकीरें उस म...

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सपनें और साइकिल: आरव की सफलता की कहानी By Mohsinkhan Tunvar

बिहार के एक छोटे से गाँव में रहने वाले आरव का जीवन कभी आसान नहीं था। उसके पिता गाँव में एक छोटी सी दर्जी की दुकान चलाते थे, जिससे बमुश्किल घर का गुजारा होता था। आरव बचपन से ही पढ़ा...

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पीछे छूटा इंसान- भाग 2 By RAVINDRA

उस छोटे से, बदबूदार कमरे में पसरे सन्नाटे को फाड़ती हुई एक नीली रोशनी चमकी।​मेरे हाथ में थमा वह पाँच सौ रुपये का पुराना चाइनीज़ मोबाइल, जिसकी स्क्रीन पर मकड़ी के जाले की तरह दरारें...

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मिट्टी की खुशबू By Jeetendra

राधा शर्मा। उन्नीस साल की। दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास की छात्रा। उसके पिता रामेश्वर शर्मा एक साधारण क्लर्क थे, माँ सरस्वती देवी घर संभालती थीं। घर में हर सुबह गायत्री मंत्र की...

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वो लड़की जो कभी - Chapter 12-13 By kanta

वो लड़की जो कभी नहीं हारीअध्याय 12 — वह अनजान सहारासुबह की धूप आँगन में फैली हुई थी। तुलसी के पास रखा दीपक बुझ चुका था, लेकिन उसकी हल्की-सी खुशबू अभी भी हवा में थी।रुहिका अपने कमरे...

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गुरु गोविंद सिंह का सचित्र जीवन - 5 By Sapna Badh

बाल गोविन्द जी उस वक्त तक हाथ पैर चलाने लाएक हो ग‌ए थे उन्होंने अपने हाथों से मिश्री और स्वर्ण मुद्राएं के घड़े पकड़ लिए थे।बाल गोविन्द की मजबूत पकड़ देखकर,पीर जी बहुत खुश हुए उन्ह...

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संस्कारों की वापसी By Jeetendra

2019 की शरद ऋतु थी। दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ने वाली अनन्या शर्मा, जो उत्तर प्रदेश के एक छोटे कस्बे की रहने वाली थी, पहली बार अपने सीनियर विक्रम मेहता से मिली। विक्रम म...

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वह जगह जहाँ हम खिलते हैं By Madhavi Tripathi

“मुझे किसी एक दायरे में मत बाँधिए। मैं वहाँ खिलती हूँ जहाँ मुझे अपनापन मिलता है, वहाँ शांत हो जाती हूँ जहाँ मुझे आँका जाता है, और वहाँ धीरे-धीरे खो जाती हूँ जहाँ मेरी ऊर्जा खत्म हो...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 16 By Nitya Oswal

हम सब जीवन में ज्ञान पाना चाहते हैं, ईश्वर को खोजना चाहते हैं, और मन की शांति चाहते हैं। इसके लिए हम मोटी-मोटी किताबें पढ़ते हैं, बड़े-बड़े प्रवचन सुनते हैं और खुद को बहुत ज्ञानी स...

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भ्रष्टाचार हटाओ By Skp divine

# **भ्रष्टाचार हटाओ**## **भाग 1: एक रिश्वत की कीमत***"भ्रष्टाचार केवल पैसों की चोरी नहीं, बल्कि किसी के सपनों की हत्या भी है।"*सुबह के पाँच बजे थे। सूरज की पहली किरणें गाँव की कच्च...

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गुड सर्वेंट By Wajid Husain

            वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीहेड पोस्ट ऑफिस की पुरानी इमारत शहर के बीचो-बीच अंग्रेज़ी हुकूमत की अकड़ की तरह खड़ी थी। सुबह के धुंधलके में जब पूरा शहर उनींदा पड़ा रहता,...

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बेटी को संभालते हुए मैंन जो तीन बातें सीखीं By Mere Rab Ki mArzi

जब मेरी बेटी आई, तो लगा जिंदगी बदल गई। पहले दिन रात एक जैसी लगती थी। रोना, दूध, फिर से रोना... मैं थक जाती थी। पर इसी थकान के बीच उसने मुझे 3 सबसे बड़ी बातें सिखाईं।1. सब्र करना सी...

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ज़हरीली थाली By sukhvinder Singh Rai

मिट्टी में ज़हर घोलकर, कैसा स्वाद ढूंढते हो, बीमारियों की फसल बोकर, फौलाद ढूंढते हो। डाइनिंग टेबल पर माहौल खामोश था। आर्यन अपनी थाली के सामने गुमसुम बैठा था, उसके हाथ में रोटी का एक...

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अनजानी भाषा By Vijay Erry

अनजानी भाषाभाषाएँ केवल शब्दों से नहीं बनतीं। कुछ भाषाएँ आँखों में बसती हैं, कुछ मौन में, और कुछ सीधे आत्मा तक पहुँच जाती हैं।राघव एक प्रसिद्ध भाषाविद् था। उसने संसार की पचास से अधि...

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ज़िंदगी अपडेट देती है… हम पुराने संस्करण चलाते रहते हैं By Madhavi Tripathi

ज़िंदगी अपडेट देती है… हम पुराने संस्करण चलाते रहते हैंएक समय ऐसा आता है जब बदलना हमारी पसंद नहीं, बल्कि हमारी ज़रूरत बन जाता है।क्या आपने कभी अपने मोबाइल पर यह संदेश देखा है“Stora...

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मौन की आवाज By Vijay Erry

शीर्षक: मौन की आवाजगांव के किनारे एक पुराना बरगद का पेड़ था. उसकी छांव में रोज़ एक वृद्ध व्यक्ति बैठा रहता था. सफेद दाढ़ी, साधारण कपड़े, शांत चेहरा और आंखों में गहरा सागर. लोग उसे...

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​बिन माँ की रसोई By sukhvinder Singh Rai

घर में मेहमानों का ताँता लगा हुआ था और रसोई की पूरी कमान पड़ोस की ताईजी के हाथों में थी, क्योंकि माँ किसी पारिवारिक रिश्तेदार की शादी में शहर से बाहर गई हुई थीं। ताईजी ने मेहमानों क...

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​भरोसे का खून By sukhvinder Singh Rai

*लकी गलियों में अपनी दरियादिली और याराना मिजाज के लिए जाना जाता था, पर यही खूबी एक दिन उसके गले का फंदा बन गई। खन्ना का रौबदार चेहरा, महंगे सूट-बूट और मीठी बातें देखकर लकी उस पर आँ...

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सच्ची परवाह हमेशा मीठी नहीं होती By Madhavi Tripathi

जो लोग हमें हमारी कमियाँ बताते हैं, वे हमेशा हमें असहज कर सकते हैं… लेकिन अक्सर वही लोग हमें बेहतर बनने में सबसे ज़्यादा मदद करते हैं।कुछ साल पहले मैं एक पारिवारिक समारोह में गई थी...

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अंतिम चिट्ठी By Vijay Erry

शीर्षक: " अंतिम चिट्ठी"एक छोटे से पहाड़ी गाँव में रहने वाला सोलह वर्षीय आरव हर रात छत पर लेटकर तारों को घंटों निहारा करता था। गाँव वाले उसे "पागल खगोलशास्त्री" कहकर चिढ़ाते थे। कोई...

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अंतिम युद्ध By Vijay Erry

आपके दिए गए शीर्षक में अपार संभावनाएँ हैं। यह एक प्रेरणादायक, रहस्यपूर्ण और दार्शनिक कहानी बन सकती है।शीर्षक: अंतिम युद्धलेखक: विजय शर्मा ऐरीएक समय की बात है। पृथ्वी पर विज्ञान अपन...

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हर बार हाँ , खुद को ना By Madhavi Tripathi

दूसरों के लिए हर बार “हाँ” कहना, कहीं अपने लिए “ना” कहना तो नहीं बन जाता?आज मैंने अपने भीतर एक बात महसूस की, मैं कितनी आसानी से “हाँ” कह देती हूँ, तब भी जब मेरा मन पूरी तरह तैयार न...

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मोबाइल की लत By Vandna Sharma

मोबाइल की लतमोहन पुणे में एक अच्छी कंपनी में जॉब करता था। उसकी पत्नी नेहा भी वर्किंग थी। इसी वजह से दोनों अपने 12 वर्षीय बेटे रोहन को घर पर अकेला छोड़कर चले जाते थे। स्कूल से आते ह...

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अपनों का नकाब: खून से गहरा दर्द By sukhvinder Singh Rai

yourआर्यन और रिया की दुनिया उनकी चार साल की बेटी 'परी' के इर्द-गिर्द सिमटी थी। घर में परी की किलकारियां गूँजतीं, तो मानो दीवारें भी मुस्कुरा उठतीं। आर्यन का दिल बड़ा था—शायद...

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लड़कियों के सामाजिक अधिकार By DrAnamika

लड़कियों के सामाजिक अधिकारप्रस्तावनासमाज में लड़कियों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला हैं। किसी भी देश का विकास तभी संभव है जब वहाँ...

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एक रात और l By Madhavi Tripathi

हर निर्णय का जवाब उसी पल देना ज़रूरी नहीं होता। कभी-कभी एक रात का इंतज़ार पूरी ज़िंदगी बदल देता है।एक बार मेरी एक मित्र ने मुझे ऐसी बात बताई, जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाई।उसका दिन ब...

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चाँद पर जीवन By Vijay Erry

आपकी शैली के अनुरूप एक प्रेरणादायक, कल्पनाशील और भावनात्मक कहानी प्रस्तुत है।चाँद पर जीवन।  लेखक: विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसर।        जब भी रात के आकाश में चाँद चमकता, बारह वर्ष...

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अधूरापन - 5 By Falguni Dost

अध्याय - ५गायत्री अपनी दिनचर्या समाप्त करके घर के मंदिर में दीपक जलाते हुए प्रार्थना कर रही थी। उसे बहुत अफ़सोस हो रहा था। उसके मन-मस्तिष्क पर लगातार अमृता भाभी की स्थिति ही छाई हु...

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सड़क किनारे की चाय By Chandni

सड़क किनारे की चाय— चाँदनी चौधरीकुछ समय पहले की बात है। मैं अपने कुछ प्रिय मित्रों के साथ एक यात्रा पर निकली थी। लंबा सफर तय करने के बाद हमने सड़क किनारे बनी एक छोटी-सी चाय की दुका...

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मेरा घर By Vijay Erry

मेरा  घर  लेखक: विजय शर्मा एर्रीगाँव की धूल भरी पगडंडी पर चलते हुए जब मैंने पहली बार उस छोटे से मकान को देखा था, तब मेरी उम्र सिर्फ आठ साल थी। बाबा के हाथ में मेरा हाथ था, और अम्मा...

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  सपनों का बाज़ार और आत्म-विस्मृति: कोचिंग से गुरु तक, मौलिकता की हत्या का धंधा   लेखक/शोधकर्ता: अज्ञात अज्ञानी (Agyat Agyani)     विषय: आधुनिक शिक्षा का व्यवसायीकरण, गुरु-संस्कृति...

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आजादी By shrish sharma

आजादी - एक अधूरे खत की पूरी कहानीसन 1930 की बात है। बंगाल के एक छोटे से गाँव सोनापुर में एक लड़का रहता था - बिरजू। बिरजू की उम्र उस समय महज बारह साल थी। उसके पिता हरिराम काका गाँव...

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खेत का बैल By RAVINDRA

गाँव की मिट्टी में जब पहली बारिश की बूँदें गिरतीं, तो सबसे पहले जो आवाज़ सुनाई देती थी, वह थी हल की चरचराहट और बैलों के गले में बँधी घंटियों की टुनटुन। उन्हीं आवाज़ों में एक थी हीर...

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स्कूल का पहला दिन By Vijay Erry

विजय शर्मा एरी   अजनाला, अमृतसर               स्कूल का पहला दिन       सुबह की पहली किरण जब खिड़की से अंदर घुसी, तो रोहन की आँखें पहले से ही खुली हुई थीं। उसने पूरी रात लगभग नहीं सो...

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अधूरी उड़ान - 1 By piyu bhuva

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मरना तो हैसाकेत कई दिनों से परेशान हो रहा था। बेटी की शादी कीतैयारी पूरी हो चुकी थी, कल बारात आने वाली है और सुनार ने बेटीके आभूषण अभी तक बनाकर नहीं दिये थे। घर में पिताजी भीचिल्ला...

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परदेस और पराई माटी By sukhvinder Singh Rai

पंजाब की सुनहरी धूप में चमकते वो पाँच एकड़ के खेत अब विक्रम की मलकियत नहीं रहे थे। आज सुबह ही तहसील में कांपते हाथों से अंगूठा लगाकर आए थे विक्रम। उनके हाथों की वो गहरी लकीरें उस म...

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सपनें और साइकिल: आरव की सफलता की कहानी By Mohsinkhan Tunvar

बिहार के एक छोटे से गाँव में रहने वाले आरव का जीवन कभी आसान नहीं था। उसके पिता गाँव में एक छोटी सी दर्जी की दुकान चलाते थे, जिससे बमुश्किल घर का गुजारा होता था। आरव बचपन से ही पढ़ा...

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पीछे छूटा इंसान- भाग 2 By RAVINDRA

उस छोटे से, बदबूदार कमरे में पसरे सन्नाटे को फाड़ती हुई एक नीली रोशनी चमकी।​मेरे हाथ में थमा वह पाँच सौ रुपये का पुराना चाइनीज़ मोबाइल, जिसकी स्क्रीन पर मकड़ी के जाले की तरह दरारें...

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मिट्टी की खुशबू By Jeetendra

राधा शर्मा। उन्नीस साल की। दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास की छात्रा। उसके पिता रामेश्वर शर्मा एक साधारण क्लर्क थे, माँ सरस्वती देवी घर संभालती थीं। घर में हर सुबह गायत्री मंत्र की...

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वो लड़की जो कभी - Chapter 12-13 By kanta

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गुरु गोविंद सिंह का सचित्र जीवन - 5 By Sapna Badh

बाल गोविन्द जी उस वक्त तक हाथ पैर चलाने लाएक हो ग‌ए थे उन्होंने अपने हाथों से मिश्री और स्वर्ण मुद्राएं के घड़े पकड़ लिए थे।बाल गोविन्द की मजबूत पकड़ देखकर,पीर जी बहुत खुश हुए उन्ह...

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संस्कारों की वापसी By Jeetendra

2019 की शरद ऋतु थी। दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में पढ़ने वाली अनन्या शर्मा, जो उत्तर प्रदेश के एक छोटे कस्बे की रहने वाली थी, पहली बार अपने सीनियर विक्रम मेहता से मिली। विक्रम म...

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वह जगह जहाँ हम खिलते हैं By Madhavi Tripathi

“मुझे किसी एक दायरे में मत बाँधिए। मैं वहाँ खिलती हूँ जहाँ मुझे अपनापन मिलता है, वहाँ शांत हो जाती हूँ जहाँ मुझे आँका जाता है, और वहाँ धीरे-धीरे खो जाती हूँ जहाँ मेरी ऊर्जा खत्म हो...

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अमृत वाणी - संत वाणी - 16 By Nitya Oswal

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जब मेरी बेटी आई, तो लगा जिंदगी बदल गई। पहले दिन रात एक जैसी लगती थी। रोना, दूध, फिर से रोना... मैं थक जाती थी। पर इसी थकान के बीच उसने मुझे 3 सबसे बड़ी बातें सिखाईं।1. सब्र करना सी...

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ज़हरीली थाली By sukhvinder Singh Rai

मिट्टी में ज़हर घोलकर, कैसा स्वाद ढूंढते हो, बीमारियों की फसल बोकर, फौलाद ढूंढते हो। डाइनिंग टेबल पर माहौल खामोश था। आर्यन अपनी थाली के सामने गुमसुम बैठा था, उसके हाथ में रोटी का एक...

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अनजानी भाषा By Vijay Erry

अनजानी भाषाभाषाएँ केवल शब्दों से नहीं बनतीं। कुछ भाषाएँ आँखों में बसती हैं, कुछ मौन में, और कुछ सीधे आत्मा तक पहुँच जाती हैं।राघव एक प्रसिद्ध भाषाविद् था। उसने संसार की पचास से अधि...

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ज़िंदगी अपडेट देती है… हम पुराने संस्करण चलाते रहते हैंएक समय ऐसा आता है जब बदलना हमारी पसंद नहीं, बल्कि हमारी ज़रूरत बन जाता है।क्या आपने कभी अपने मोबाइल पर यह संदेश देखा है“Stora...

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मौन की आवाज By Vijay Erry

शीर्षक: मौन की आवाजगांव के किनारे एक पुराना बरगद का पेड़ था. उसकी छांव में रोज़ एक वृद्ध व्यक्ति बैठा रहता था. सफेद दाढ़ी, साधारण कपड़े, शांत चेहरा और आंखों में गहरा सागर. लोग उसे...

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​बिन माँ की रसोई By sukhvinder Singh Rai

घर में मेहमानों का ताँता लगा हुआ था और रसोई की पूरी कमान पड़ोस की ताईजी के हाथों में थी, क्योंकि माँ किसी पारिवारिक रिश्तेदार की शादी में शहर से बाहर गई हुई थीं। ताईजी ने मेहमानों क...

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​भरोसे का खून By sukhvinder Singh Rai

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सच्ची परवाह हमेशा मीठी नहीं होती By Madhavi Tripathi

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अंतिम चिट्ठी By Vijay Erry

शीर्षक: " अंतिम चिट्ठी"एक छोटे से पहाड़ी गाँव में रहने वाला सोलह वर्षीय आरव हर रात छत पर लेटकर तारों को घंटों निहारा करता था। गाँव वाले उसे "पागल खगोलशास्त्री" कहकर चिढ़ाते थे। कोई...

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हर बार हाँ , खुद को ना By Madhavi Tripathi

दूसरों के लिए हर बार “हाँ” कहना, कहीं अपने लिए “ना” कहना तो नहीं बन जाता?आज मैंने अपने भीतर एक बात महसूस की, मैं कितनी आसानी से “हाँ” कह देती हूँ, तब भी जब मेरा मन पूरी तरह तैयार न...

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मोबाइल की लत By Vandna Sharma

मोबाइल की लतमोहन पुणे में एक अच्छी कंपनी में जॉब करता था। उसकी पत्नी नेहा भी वर्किंग थी। इसी वजह से दोनों अपने 12 वर्षीय बेटे रोहन को घर पर अकेला छोड़कर चले जाते थे। स्कूल से आते ह...

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एक रात और l By Madhavi Tripathi

हर निर्णय का जवाब उसी पल देना ज़रूरी नहीं होता। कभी-कभी एक रात का इंतज़ार पूरी ज़िंदगी बदल देता है।एक बार मेरी एक मित्र ने मुझे ऐसी बात बताई, जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाई।उसका दिन ब...

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चाँद पर जीवन By Vijay Erry

आपकी शैली के अनुरूप एक प्रेरणादायक, कल्पनाशील और भावनात्मक कहानी प्रस्तुत है।चाँद पर जीवन।  लेखक: विजय शर्मा ऐरी, अजनाला, अमृतसर।        जब भी रात के आकाश में चाँद चमकता, बारह वर्ष...

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