प्रेरक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Motivational Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations a...Read More


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  • ऊपरवाले की अदालत

    ऊपरवाले की अदालत   एक छोटे से गाँव में रहता था एक धनी सेठ रामेश्वर। वह गाँव का स...

  • सफलता का शॉर्टकट

    शीर्षक: सफलता का शॉर्टकटलेखक: विजय शर्मा एरी---रवि एक छोटे से कस्बे में रहने वाल...

  • कचरे का सोना

    शहर की उस विशाल कचरा पट्टी के मुहाने पर सड़ांध का साम्राज्य था। हवा में एक ऐसी भा...

ऊपरवाले की अदालत By Harshad Kanaiyalal Ashodiya

ऊपरवाले की अदालत   एक छोटे से गाँव में रहता था एक धनी सेठ रामेश्वर। वह गाँव का सबसे अमीर व्यापारी था – सूद पर पैसा देने वाला, जमीनें खरीदने वाला। उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी, ले...

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एक गलती By Vijay Erry

एक गलतीलेखक: विजय शर्मा एरीकहते हैं, इंसान की ज़िंदगी में सबसे महँगी चीज़ उसकी एक छोटी-सी गलती होती है। वही गलती, जो पल भर में होती है, लेकिन उसके साए में पूरी उम्र कट जाती है।रमेश...

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The Subscriber By Ravi Bhanushali

The subscriberरात के ठीक बारह बजे थे।मोबाइल की स्क्रीन पर सिर्फ़ एक नोटिफिकेशन चमक रहा था।“Matru Bharti YouTube Channel – New Video Uploaded”आरव ने अनमने मन से स्क्रीन पर उंगली रखी...

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सफलता का शॉर्टकट By Vijay Erry

शीर्षक: सफलता का शॉर्टकटलेखक: विजय शर्मा एरी---रवि एक छोटे से कस्बे में रहने वाला साधारण सा लड़का था। पिता सरकारी स्कूल में क्लर्क थे और माँ गृहिणी। घर में सुविधाएँ सीमित थीं, लेकि...

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कचरे का सोना By Jeetendra

शहर की उस विशाल कचरा पट्टी के मुहाने पर सड़ांध का साम्राज्य था। हवा में एक ऐसी भारी गंध घुली रहती थी, जो नए आदमी का गला घोंट दे, लेकिन वहाँ रहने वालों के लिए वह हवा ही उनकी सांसों क...

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सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 2 By Geeta Kumari

[5/1, 15:14] Vivek Kumar: शीर्षक: कलम की ताकत: लेखिका गीता कुमारी (एपिसोड 2)​पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि कैसे 10वीं तक की पढ़ाई के बाद भी मेरे मन में लेखिका बनने का सपना जि...

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दीये की लौ By Kalpana

गाँव के आख़िरी छोर पर एक छोटा-सा कच्चा घर था, जहाँ मीरा अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहती थी। घर में न ज़्यादा सामान था, न सुख सुविधा, पर एक चीज़ भरपूर थी—संवेदनशीलता। मीरा रोज़ सुबह सूरज...

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रंगीन तस्वीरें By Vijay Erry

रंगीन तस्वीरेंलेखक: विजय शर्मा एरीशहर की उस तंग-सी गली में एक पुरानी-सी फोटो स्टूडियो थी—नाम था “रंगीन तस्वीरें”। बाहर से देखने पर वह स्टूडियो किसी बीते ज़माने की कहानी लगता था। शी...

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सफलता की राह By Raju kumar Chaudhary

सफलता की राह(Success पाने की पूरी Guide – सोच से सफलता तक)️ लेखक: Raju Kumar Chaudhary अनुक्रमणिकासफलता क्या हैअसफलता से दोस्तीसोच बदलो, ज़िंदगी बदलेगीलक्ष्य कैसे तय करेंसमय का सही...

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बड़े दिल वाला - भाग - 6 By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा कि अनुराग ने पहली रात अनन्या की थकान का सम्मान करते हुए उसे नहीं जगाया और सुबह उसे प्यार से सुहाग का पूरा सामान उपहार में दिया। हीरे का मंगलसूत्र और चूड़ियाँ देखकर...

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यादों के रंग By Vijay Erry

---शीर्षक: यादों के रंगलेखक: विजय शर्मा एरी---शहर के सबसे पुराने मोहल्ले की एक तंग-सी गली में स्थित था वर्मा स्टूडियो। लकड़ी का जर्जर बोर्ड, जिस पर कभी सुनहरे अक्षरों में लिखा था—...

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खोया सम्मान By Vijay Erry

खोया सम्मानएक भावनात्मक हिंदी कहानीलेखक: विजय शर्मा एरी---कहते हैं—इंसान सब कुछ खो सकता है, पैसा, पद, रिश्ते… लेकिन अगर उसने अपना सम्मान खो दिया, तो वह भीतर से खाली हो जाता है। यही...

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ऑनलाइन वाला प्यार By Jeetendra

आर्यन एक 22 साल का युवा इंजीनियरिंग छात्र था। दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था और हॉस्टल में रहता था। कोविड के बाद की दुनिया में उसकी जिंदगी ज्यादातर ऑनलाइन ही बीतती थी – क्ल...

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अनोखी परीक्षा By RAMESH SOLANKI

               अनोखी_परीक्षा                "बेटा! थोड़ा खाना खाकर जा ..!! दो दिन से तुने कुछ खाया नहीं है।" लाचार माता के शब्द है अपने बेटे को समझाने के लिये।"देख मम्मी! मैंने मेरी...

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ईमानदार की विदाई By Jeetendra

"देखो भाई, इस देश में बेईमान को जेल भेजने का रिवाज पुराना हो गया है, अब हम ईमानदार को विदा करने की परंपरा डाल रहे हैं।"यह शब्द हमारे दफ्तर के बड़े बाबू, खन्ना जी के थे। अवसर था—मिश्...

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अधूरे सिंदूर की पूरी रस्म By manoj

खेतों के बीच से गुजरती वह कच्ची राह, जहाँ लाजो अक्सर अपनी सहेलियों के साथ पानी भरने जाती थी। सावन का उसे दूर से देखना और लाजो का अपनी ओढ़नी के पल्लू को उँगलियों में लपेटना।गाँव की प...

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मौसम की करवट By Vijay Erry

मौसम की करवट लेखक – विजय शर्मा एरी(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)---सर्दियों की पहली हल्की-सी ठंड पड़ चुकी थी। सुबह की धूप में एक अजीब-सी नरमी थी, जैसे मौसम खुद किसी नए मोड़ से गुज़र र...

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अदृश्य रक्षक By manoj

​आन्या की आँखें खुलती हैं। कमरा अंधेरे में डूबा है और फर्श पर कपड़ों का ढेर लगा है। उसकी धड़कनें तेज़ हैं—वही पुरानी घबराहट। लेकिन वह अपनी मानसिक स्थिति पर ध्यान देने के बजाय सीधे अपन...

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माँ की ममता By Vijay Erry

माँ की ममतालेखक – विजय शर्मा एरी(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)---1. एक छोटी-सी सुबह, बड़ा-सा एहसाससर्दियों की हल्की-हल्की गुनगुनाती सुबह थी। गाँव के छोटे-से घर में चूल्हा जल चुका था औ...

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नये साल में हर तरफ खुशियों की बाहर हो By Dr Yogendra Kumar Pandey

    आज आंग्ल नववर्ष का प्रथम दिवस है। कैलेंडर में पूरे एक साल की तारीख बदलना और नये वर्ष का आना स्वयं में महत्वपूर्ण तो है ही। हिंदू कैलेंडर और देश में प्रचलित अन्य भारतीय कैलैंडरो...

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एक चाय वाला By Vijay Erry

──────────────────एक चाय वालालेखक : विजय शर्मा ‘एरी’आड़ा शहर की सबसे टेढ़ी सड़क का नाम है जवाहर मार्ग। सड़क टेढ़ी है, पर फुटपाथ सीधा। उसी फुटपाथ पर पिछले बारह साल से एक ठेला खड़ा ह...

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जिंदगी उधार नहीं होती By PAYAL PARDHI

शीर्षक: ज़िंदगी उधार नहीं होतीराहुल के घर में हर सुबह डर के साथ शुरू होती थी।डर इस बात का नहीं कि वह बीमार है—डर इस बात का था कि समय उसके साथ ईमानदार नहीं है।डॉक्टर की रिपोर्ट कह च...

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नया रास्ता By Rajeev kumar

  कहीं कोई रास्ता न दिखे फिर भी रास्ता तो निकालना ही पड़ता है। सारे लोग एक दुसरे का मुंह ताकने लगते हैं मगर उसी में से एक आदमी आगे बढ़ता है और वो भी अकेला। शारिरिक और मानसिक सहायता त...

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Phenomenal Pablo: मेरी यात्रा, मेरे सबक By Omkar Dutta

कहते हैं हर कहानी की शुरुआत आसान नहीं होती। मेरी भी नहीं थी। मैं वह लड़का था जो सपनों में बहुत बड़ा सोचता था, पर marks sheet में एक subject ने मेरी नींद उड़ा दी – Maths। पहला बड़ा...

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नयी राह By Vijay Erry

नयी राह Hindi Kahani • लगभग 1500 शब्दलेखक – Vijay Sharma Erry---शाम का सूरज गाँव धनपुरा की पगडंडी पर अपने सुनहरे रंग बिखेर रहा था। हवा में सरसों के फूलों की महक घुली हुई थी। इसी पग...

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ट्रिपलेट्स भाग 4 By Raj Phulware

ट्रिपलेट्स भाग 4लेखक राज फुलवरे अध्याय 8 : अंडरग्राउंड लैब — जहाँ इंसान प्रयोग बन जाते हैंभाग 1 : अंधेरे की सीढ़ियाँरात के बारह बज चुके थे।शहर के बाहर, जर्जर फैक्ट्री के पीछे ज़मीन...

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भगवत गीता जीवन अमृत By Deepak Bundela Arymoulik

प्रश्न 1: बार-बार असफलता क्यों मिलती है?कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन — भगवद गीता 2.47️ फल नहीं, कर्म पर ध्यान दो।जीवन में असफलता का अनुभव लगभग हर व्यक्ति करता है। कोई परीक्षा...

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कृष्ण–अर्जुन By Raj Phulware

⭐ कृष्ण–अर्जुन कुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हो चुका था।घोड़ों की हिनहिनाहट, रथों की गड़गड़ाहट,तीरों की वर्षा और रणभूमि की गर्जना—सब इतिहास बन चुके थे।लेकिन अर्जुन के भीतरएक ऐसी वीरा...

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डिग्री, लेकिन भविष्य नहीं [Indian Education System] By Om Prakash

               डिग्री के बाद भी बेरोज़गारी(भारतीय शिक्षा व्यवस्था की एक सच्ची कहानी)रमेश एक छोटे से गाँव में पैदा हुआ, जहाँ सपने बड़े थे लेकिन साधन बहुत छोटे। पिता दिहाड़ी मज़दूर थ...

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क़ानून और इंसाफ By Wajid Husain

वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी अदालत की खिड़की से हल्की धूप भीतर घुस रही थी। धूप की वह पतली लकीर लकड़ी की पुरानी मेज़ पर फैलते हुए जैसे पूरे कमरे की उदासी  कोचीर देना चाहती थी। बाह...

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जहाँ से खुद को पाया - 4 (लास्ट पार्ट) By vikram kori

Part - 4 लास्ट पार्ट सुबह की हवा में हल्की ठंडक थी, लेकिन सयुग के भीतर अजीब सी तपिश थी। ‎रात भर उसने करवटें बदली थीं। आँखें बंद करता तो आयशा का चेहरा सामने आ जाता, और खुलतीं तो वही...

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खोयी हुई चाबी By Vijay Erry

खोयी हुई चाबीVijay Sharma Erry सवाल यह नहीं कि चाबी कहाँ खोयी, सवाल यह है कि हमने कब से खुद को ताला लगा रखा है।रामपुर की पुरानी हवेली में रहता था अवध बिहारी लाल, उम्र साठ के पार, द...

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अधूरी प्रेम कहानी By Vijay Erry

–––अधूरी प्रेम कहानीलेखक : विजय शर्मा एरीमालगाँव में गर्मियों की दोपहरें इतनी लम्बी होती हैं कि लगता है सूरज रुककर किसी से कुछ कहना चाहता है। लाइब्रेरी की पुरानी लकड़ी की खिड़कियों...

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जगन्नाथ की कृपा और रवि भानुशाली का नया मार्ग By Ravi Bhanushali

पुरी के समुद्र से उठती नम हवा में शंखध्वनि घुली हुई थी। रथयात्रा का समय निकट था और श्रीजगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में अद्भुत ऊर्जा थी। इसी शहर में दूर गुजरात के वापि से आया एक युवक,...

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स्वयं पर नज़र: जीवन को समझने का असली मार्ग - 3 By Sweta Pandey

           हमारा समाज अपने व्यक्तियों की उपलब्धियों एवं सफलता के मानकों का समय-समय पर निर्धारण करता रहता है। कुछ परिस्थितियों में ये मानता है कि समाज के नियम सर्वोपरि हैं तो अन्य म...

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सुख की कामना By Vijay Erry

सुख की कामना लेखक: विजय शर्मा एरी(लगभग १५०० शब्दों की कहानी)गाँव का नाम था नंदगाँव। पहाड़ों के बीच बसा यह गाँव इतना सुंदर था कि लगता था प्रकृति ने अपनी सारी कलाकारी यहीं उड़ेल दी ह...

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बिटिया — शक्ति, सृष्टि और समाज का आत्मबोध By Ganesh Kachhwaha

शीर्षक : बिटिया — शक्ति, सृष्टि और समाज का आत्मबोधखंड 1 : बिटिया और पिता — जीवन की ऊर्जाथकान भरे दिन के बाद जब कोई पिता घर लौटता है और अपनी बिटिया का मुस्कुराता चेहरा देखता है, तो...

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कर्म नहीं, अंतर By Raj Phulware

कर्म नहीं, अंतर लेखक राज फुलवरेपुराने समय की बात है। हरे-भरे खेतों, मिट्टी की सोंधी खुशबू और शांत वातावरण से भरा एक छोटा-सा गाँव था— अमलपुर। गाँव बहुत बड़ा नहीं था, पर वहाँ के लोग...

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एक अनोखा डर By Vijay Erry

एक अनोखा डर लेखक: विजय शर्मा एरीशब्द संख्या: लगभग १५००रात के दो बज रहे थे। दिल्ली की उस ऊँची इमारत की २७वीं मंज़िल पर विजय शर्मा अपनी कुर्सी पर पीछे झुका हुआ था। सामने लैपटॉप की स्...

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ठहराव में डूबा दिसंबर By Nensi Vithalani

साल का आख़िरी महीना कोई साधारण महीना नहीं होता। यह सिर्फ़ कैलेंडर का आख़िरी पन्ना नहीं, बल्कि ज़िंदगी का एक ठहराव होता है — जहाँ हम रुककर खुद से मिलते हैं। दिसंबर आते ही हवा ठंडी ह...

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प्रेरक - जीवन अनुभव By Ganesh Kachhwaha

सेवानिवृत्ति : जीवन की दूसरी पारी — सृजन का एक सुनहरा अवसरसेवानिवृत्ति का दिन मेरे जीवन का कोई सामान्य दिन नहीं था। वर्षों तक नियमित समय पर दफ्तर जाना, जिम्मेदारियाँ निभाना और समय...

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8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 2 By Bhumika Gadhvi

       बस धीरे-धीरे विजय चौकड़ी की ओर बढ़ी। अवनी ने खिड़की से बाहर देखा, सड़क के किनारे छोटे-छोटे कैफे, आधुनिक इमारतें, और दूर से IT कंपनी की गगनचुंबी इमारतें दिखाई देने लगीं। हर म...

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ऊपरवाले की अदालत By Harshad Kanaiyalal Ashodiya

ऊपरवाले की अदालत   एक छोटे से गाँव में रहता था एक धनी सेठ रामेश्वर। वह गाँव का सबसे अमीर व्यापारी था – सूद पर पैसा देने वाला, जमीनें खरीदने वाला। उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी, ले...

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एक गलती By Vijay Erry

एक गलतीलेखक: विजय शर्मा एरीकहते हैं, इंसान की ज़िंदगी में सबसे महँगी चीज़ उसकी एक छोटी-सी गलती होती है। वही गलती, जो पल भर में होती है, लेकिन उसके साए में पूरी उम्र कट जाती है।रमेश...

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The Subscriber By Ravi Bhanushali

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सफलता का शॉर्टकट By Vijay Erry

शीर्षक: सफलता का शॉर्टकटलेखक: विजय शर्मा एरी---रवि एक छोटे से कस्बे में रहने वाला साधारण सा लड़का था। पिता सरकारी स्कूल में क्लर्क थे और माँ गृहिणी। घर में सुविधाएँ सीमित थीं, लेकि...

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कचरे का सोना By Jeetendra

शहर की उस विशाल कचरा पट्टी के मुहाने पर सड़ांध का साम्राज्य था। हवा में एक ऐसी भारी गंध घुली रहती थी, जो नए आदमी का गला घोंट दे, लेकिन वहाँ रहने वालों के लिए वह हवा ही उनकी सांसों क...

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सादगी के स्वर : लेखिका गीता कुमारी - 2 By Geeta Kumari

[5/1, 15:14] Vivek Kumar: शीर्षक: कलम की ताकत: लेखिका गीता कुमारी (एपिसोड 2)​पिछले भाग में मैंने आपको बताया था कि कैसे 10वीं तक की पढ़ाई के बाद भी मेरे मन में लेखिका बनने का सपना जि...

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दीये की लौ By Kalpana

गाँव के आख़िरी छोर पर एक छोटा-सा कच्चा घर था, जहाँ मीरा अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहती थी। घर में न ज़्यादा सामान था, न सुख सुविधा, पर एक चीज़ भरपूर थी—संवेदनशीलता। मीरा रोज़ सुबह सूरज...

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रंगीन तस्वीरें By Vijay Erry

रंगीन तस्वीरेंलेखक: विजय शर्मा एरीशहर की उस तंग-सी गली में एक पुरानी-सी फोटो स्टूडियो थी—नाम था “रंगीन तस्वीरें”। बाहर से देखने पर वह स्टूडियो किसी बीते ज़माने की कहानी लगता था। शी...

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सफलता की राह By Raju kumar Chaudhary

सफलता की राह(Success पाने की पूरी Guide – सोच से सफलता तक)️ लेखक: Raju Kumar Chaudhary अनुक्रमणिकासफलता क्या हैअसफलता से दोस्तीसोच बदलो, ज़िंदगी बदलेगीलक्ष्य कैसे तय करेंसमय का सही...

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बड़े दिल वाला - भाग - 6 By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा कि अनुराग ने पहली रात अनन्या की थकान का सम्मान करते हुए उसे नहीं जगाया और सुबह उसे प्यार से सुहाग का पूरा सामान उपहार में दिया। हीरे का मंगलसूत्र और चूड़ियाँ देखकर...

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यादों के रंग By Vijay Erry

---शीर्षक: यादों के रंगलेखक: विजय शर्मा एरी---शहर के सबसे पुराने मोहल्ले की एक तंग-सी गली में स्थित था वर्मा स्टूडियो। लकड़ी का जर्जर बोर्ड, जिस पर कभी सुनहरे अक्षरों में लिखा था—...

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खोया सम्मान By Vijay Erry

खोया सम्मानएक भावनात्मक हिंदी कहानीलेखक: विजय शर्मा एरी---कहते हैं—इंसान सब कुछ खो सकता है, पैसा, पद, रिश्ते… लेकिन अगर उसने अपना सम्मान खो दिया, तो वह भीतर से खाली हो जाता है। यही...

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ऑनलाइन वाला प्यार By Jeetendra

आर्यन एक 22 साल का युवा इंजीनियरिंग छात्र था। दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था और हॉस्टल में रहता था। कोविड के बाद की दुनिया में उसकी जिंदगी ज्यादातर ऑनलाइन ही बीतती थी – क्ल...

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अनोखी परीक्षा By RAMESH SOLANKI

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ईमानदार की विदाई By Jeetendra

"देखो भाई, इस देश में बेईमान को जेल भेजने का रिवाज पुराना हो गया है, अब हम ईमानदार को विदा करने की परंपरा डाल रहे हैं।"यह शब्द हमारे दफ्तर के बड़े बाबू, खन्ना जी के थे। अवसर था—मिश्...

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अधूरे सिंदूर की पूरी रस्म By manoj

खेतों के बीच से गुजरती वह कच्ची राह, जहाँ लाजो अक्सर अपनी सहेलियों के साथ पानी भरने जाती थी। सावन का उसे दूर से देखना और लाजो का अपनी ओढ़नी के पल्लू को उँगलियों में लपेटना।गाँव की प...

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मौसम की करवट By Vijay Erry

मौसम की करवट लेखक – विजय शर्मा एरी(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)---सर्दियों की पहली हल्की-सी ठंड पड़ चुकी थी। सुबह की धूप में एक अजीब-सी नरमी थी, जैसे मौसम खुद किसी नए मोड़ से गुज़र र...

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अदृश्य रक्षक By manoj

​आन्या की आँखें खुलती हैं। कमरा अंधेरे में डूबा है और फर्श पर कपड़ों का ढेर लगा है। उसकी धड़कनें तेज़ हैं—वही पुरानी घबराहट। लेकिन वह अपनी मानसिक स्थिति पर ध्यान देने के बजाय सीधे अपन...

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माँ की ममता By Vijay Erry

माँ की ममतालेखक – विजय शर्मा एरी(लगभग 1500 शब्दों की कहानी)---1. एक छोटी-सी सुबह, बड़ा-सा एहसाससर्दियों की हल्की-हल्की गुनगुनाती सुबह थी। गाँव के छोटे-से घर में चूल्हा जल चुका था औ...

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नये साल में हर तरफ खुशियों की बाहर हो By Dr Yogendra Kumar Pandey

    आज आंग्ल नववर्ष का प्रथम दिवस है। कैलेंडर में पूरे एक साल की तारीख बदलना और नये वर्ष का आना स्वयं में महत्वपूर्ण तो है ही। हिंदू कैलेंडर और देश में प्रचलित अन्य भारतीय कैलैंडरो...

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एक चाय वाला By Vijay Erry

──────────────────एक चाय वालालेखक : विजय शर्मा ‘एरी’आड़ा शहर की सबसे टेढ़ी सड़क का नाम है जवाहर मार्ग। सड़क टेढ़ी है, पर फुटपाथ सीधा। उसी फुटपाथ पर पिछले बारह साल से एक ठेला खड़ा ह...

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जिंदगी उधार नहीं होती By PAYAL PARDHI

शीर्षक: ज़िंदगी उधार नहीं होतीराहुल के घर में हर सुबह डर के साथ शुरू होती थी।डर इस बात का नहीं कि वह बीमार है—डर इस बात का था कि समय उसके साथ ईमानदार नहीं है।डॉक्टर की रिपोर्ट कह च...

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नया रास्ता By Rajeev kumar

  कहीं कोई रास्ता न दिखे फिर भी रास्ता तो निकालना ही पड़ता है। सारे लोग एक दुसरे का मुंह ताकने लगते हैं मगर उसी में से एक आदमी आगे बढ़ता है और वो भी अकेला। शारिरिक और मानसिक सहायता त...

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Phenomenal Pablo: मेरी यात्रा, मेरे सबक By Omkar Dutta

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नयी राह By Vijay Erry

नयी राह Hindi Kahani • लगभग 1500 शब्दलेखक – Vijay Sharma Erry---शाम का सूरज गाँव धनपुरा की पगडंडी पर अपने सुनहरे रंग बिखेर रहा था। हवा में सरसों के फूलों की महक घुली हुई थी। इसी पग...

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ट्रिपलेट्स भाग 4 By Raj Phulware

ट्रिपलेट्स भाग 4लेखक राज फुलवरे अध्याय 8 : अंडरग्राउंड लैब — जहाँ इंसान प्रयोग बन जाते हैंभाग 1 : अंधेरे की सीढ़ियाँरात के बारह बज चुके थे।शहर के बाहर, जर्जर फैक्ट्री के पीछे ज़मीन...

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भगवत गीता जीवन अमृत By Deepak Bundela Arymoulik

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कृष्ण–अर्जुन By Raj Phulware

⭐ कृष्ण–अर्जुन कुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हो चुका था।घोड़ों की हिनहिनाहट, रथों की गड़गड़ाहट,तीरों की वर्षा और रणभूमि की गर्जना—सब इतिहास बन चुके थे।लेकिन अर्जुन के भीतरएक ऐसी वीरा...

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डिग्री, लेकिन भविष्य नहीं [Indian Education System] By Om Prakash

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क़ानून और इंसाफ By Wajid Husain

वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी अदालत की खिड़की से हल्की धूप भीतर घुस रही थी। धूप की वह पतली लकीर लकड़ी की पुरानी मेज़ पर फैलते हुए जैसे पूरे कमरे की उदासी  कोचीर देना चाहती थी। बाह...

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जहाँ से खुद को पाया - 4 (लास्ट पार्ट) By vikram kori

Part - 4 लास्ट पार्ट सुबह की हवा में हल्की ठंडक थी, लेकिन सयुग के भीतर अजीब सी तपिश थी। ‎रात भर उसने करवटें बदली थीं। आँखें बंद करता तो आयशा का चेहरा सामने आ जाता, और खुलतीं तो वही...

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खोयी हुई चाबी By Vijay Erry

खोयी हुई चाबीVijay Sharma Erry सवाल यह नहीं कि चाबी कहाँ खोयी, सवाल यह है कि हमने कब से खुद को ताला लगा रखा है।रामपुर की पुरानी हवेली में रहता था अवध बिहारी लाल, उम्र साठ के पार, द...

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अधूरी प्रेम कहानी By Vijay Erry

–––अधूरी प्रेम कहानीलेखक : विजय शर्मा एरीमालगाँव में गर्मियों की दोपहरें इतनी लम्बी होती हैं कि लगता है सूरज रुककर किसी से कुछ कहना चाहता है। लाइब्रेरी की पुरानी लकड़ी की खिड़कियों...

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जगन्नाथ की कृपा और रवि भानुशाली का नया मार्ग By Ravi Bhanushali

पुरी के समुद्र से उठती नम हवा में शंखध्वनि घुली हुई थी। रथयात्रा का समय निकट था और श्रीजगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में अद्भुत ऊर्जा थी। इसी शहर में दूर गुजरात के वापि से आया एक युवक,...

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स्वयं पर नज़र: जीवन को समझने का असली मार्ग - 3 By Sweta Pandey

           हमारा समाज अपने व्यक्तियों की उपलब्धियों एवं सफलता के मानकों का समय-समय पर निर्धारण करता रहता है। कुछ परिस्थितियों में ये मानता है कि समाज के नियम सर्वोपरि हैं तो अन्य म...

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सुख की कामना By Vijay Erry

सुख की कामना लेखक: विजय शर्मा एरी(लगभग १५०० शब्दों की कहानी)गाँव का नाम था नंदगाँव। पहाड़ों के बीच बसा यह गाँव इतना सुंदर था कि लगता था प्रकृति ने अपनी सारी कलाकारी यहीं उड़ेल दी ह...

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बिटिया — शक्ति, सृष्टि और समाज का आत्मबोध By Ganesh Kachhwaha

शीर्षक : बिटिया — शक्ति, सृष्टि और समाज का आत्मबोधखंड 1 : बिटिया और पिता — जीवन की ऊर्जाथकान भरे दिन के बाद जब कोई पिता घर लौटता है और अपनी बिटिया का मुस्कुराता चेहरा देखता है, तो...

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कर्म नहीं, अंतर By Raj Phulware

कर्म नहीं, अंतर लेखक राज फुलवरेपुराने समय की बात है। हरे-भरे खेतों, मिट्टी की सोंधी खुशबू और शांत वातावरण से भरा एक छोटा-सा गाँव था— अमलपुर। गाँव बहुत बड़ा नहीं था, पर वहाँ के लोग...

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एक अनोखा डर By Vijay Erry

एक अनोखा डर लेखक: विजय शर्मा एरीशब्द संख्या: लगभग १५००रात के दो बज रहे थे। दिल्ली की उस ऊँची इमारत की २७वीं मंज़िल पर विजय शर्मा अपनी कुर्सी पर पीछे झुका हुआ था। सामने लैपटॉप की स्...

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ठहराव में डूबा दिसंबर By Nensi Vithalani

साल का आख़िरी महीना कोई साधारण महीना नहीं होता। यह सिर्फ़ कैलेंडर का आख़िरी पन्ना नहीं, बल्कि ज़िंदगी का एक ठहराव होता है — जहाँ हम रुककर खुद से मिलते हैं। दिसंबर आते ही हवा ठंडी ह...

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प्रेरक - जीवन अनुभव By Ganesh Kachhwaha

सेवानिवृत्ति : जीवन की दूसरी पारी — सृजन का एक सुनहरा अवसरसेवानिवृत्ति का दिन मेरे जीवन का कोई सामान्य दिन नहीं था। वर्षों तक नियमित समय पर दफ्तर जाना, जिम्मेदारियाँ निभाना और समय...

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8:30 pm शांति एक्सप्रेस - 2 By Bhumika Gadhvi

       बस धीरे-धीरे विजय चौकड़ी की ओर बढ़ी। अवनी ने खिड़की से बाहर देखा, सड़क के किनारे छोटे-छोटे कैफे, आधुनिक इमारतें, और दूर से IT कंपनी की गगनचुंबी इमारतें दिखाई देने लगीं। हर म...

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