प्रेरक कथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Motivational Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations a...Read More


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खण्ड - 01 महाराणा सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध - 7 By Hind Gaurav

महाराणा कुंभकर्ण (कुंभा) :अविश्वसनीय प्रतिभा के धनी, अद्वितीय योद्धा व अद्भुत निर्माता (1433-1468 ईसवी)महाराणा लाखा के पश्चात् उनके पुत्र मोकल, जो लाखा की अधिक उम्र में जन्मे थे, म...

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कुदरत का आईना By Praveen Kumrawat

कुदरत का अकाट्य नियम: हम जो देते हैं, वही लौटकर आता हैयह धरती किसी एक प्रजाति की जागीर नहीं, बल्कि पेड़, पौधे, नदियाँ और मूक पशु-पक्षी जीवन की वे ज़रूरी कड़ियाँ हैं जिनसे यह संसार...

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डिजिटलजाल By sukhvinder Singh Rai

कमरे की सीलन भरी हवा में छत वाले पुराने पंखे की 'कटर-कटर' आवाज़ किसी उल्टी गिनती की तरह गूंज रही थी। आर्यन ज़मीन पर, घुटनों के बीच सिर दिए बैठा था। उसके माथे से पसीने की एक ठ...

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अपने ही हाथों लिखी बर्बादी By sukhvinder Singh Rai

सड़क के किनारे लगा इकलौता पीला बल्ब बारिश की तेज़ बौछारों के बीच किसी बीमार इंसान की तरह टिमटिमा रहा था। आसमान में घुप्प अँधेरा था, ऐसा अँधेरा जो आँखों को नहीं, सीधा रूह को अंधा कर द...

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झूठा रुतबा By sukhvinder Singh Rai

शहर के उस सबसे महंगे कैफे के बाहर एस्प्रेसो कॉफी और बेक हो रही ब्रेड की महक हवा में घुली थी। कांच की विशाल दीवारों के पार अमीरज़ादे अपनी दौलत का प्रदर्शन कर रहे थे। उसी कांच की दीवा...

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क्या भारत का युवा 'कॉकरोच' है? By ARTI MEENA

हाल ही में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक टिप्पणी को लेकर काफी चर्चा हुई। कहा गया कि भारत युवाओं के लिए "Cockroach Paradise" बन गया है। जब इस टिप्पणी पर युवाओं और आम लोगों की प...

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जब आपके बच्चे गलतियाँ करें तो क्या करें? By Nitya Oswal

जब बच्चे गलतियाँ करते हैं या कुछ गलत करते हैं, तब सच्चा रास्ता यह है की आप उनसे मित्र की जैसे बात करे की, बेटा, आप जो यह कर रहे हो उसके लिए आपने सोचा है?‘ और क्या ऐसा आपको ठीक लगता...

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सफलता की कोई उम्र नहीं होती By Ashish

सफलता की कोई उम्र नहीं होती – अशिष शाहदोस्तों,बहुत से लोग कहते हैं कि सफलता पाने की एक सही उम्र होती है। कोई कहता है 25 साल में सफल हो जाओ, कोई कहता है 40 के बाद बहुत देर हो जाती ह...

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तनाव और डिप्रेशन से मुक्ति - भाग 1 By Nitya Oswal

आज के तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में, टेंशन और डिप्रेशन सामान्य होते जा रहे हैं। काम का दबाव, रिश्तों की चुनौतियाँ, वित्तीय समस्याएँ, और सोशल मीडिया की निरंतर तुलना - ये सभी हमारे मानस...

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घर चलाने की तरकीब By Anika Ku

"कहानी शुरू करने से पहले एक सवाल। क्या आपके घर में भी कभी सास और बहू के बीच शीत युद्ध चला है? क्या आप भी उस सैंडविच की तरह महसूस करते हैं जो दो पार्टों के बीच पिस रहा है? अगर ह...

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शांति की शक्ति By Dayanand Jadhav

गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। उस घर में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। अर्जुन पढ़ा-लिखा था, मेहनती था और अपने परिवार से बहुत प्रेम करता था। लेकिन उसके स्वभाव में एक बड़ी कमी थी—...

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सहते-सहते By कमल चोपड़ा

सहते-सहतेकमल चोपड़ा​पहली बार ही ऐसा हुआ कि वह अपने पति के चेहरे को देखकर कुछ भी अनुमान नहीं लगा पा रही थी कि उसकी आज कहीं दिहाड़ी लगी या नहीं? पूछने पर पता चला कि वह खाली हाथ ही लौ...

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शब्दों का रिश्ता By Vijay Erry

“शब्दों  का रिश्ता”हिंदी कहानी (4000 शब्दों का विस्तृत रूप)लेखक: विजय शर्मा एरीप्रस्तावनारिश्ते कई रूपों में जन्म लेते हैं—कुछ खून से, कुछ परंपरा से, और कुछ सिर्फ़ शब्दों से। यह कह...

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मेरा महान देश By aakanksha

रवि एक साधारण परिवार का युवक था। बचपन से ही उसने अपने शिक्षकों, माता-पिता और किताबों से यह सुना था कि भारत एक महान देश है। देश की संस्कृति, सभ्यता, स्वतंत्रता संग्राम और वीरों की ग...

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जीने आये हो या बिल भरने By Ashish

जीने आए हो या सिर्फ बिल भरने?आज का इंसान सुबह अलार्म से उठता है, ट्रैफिक से लड़ता है, ऑफिस में Targets पूरे करता है, EMI भरता है, बच्चों की फीस भरता है, बिजली का बिल भरता है, मोबाइ...

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आईपीएल ने हमें क्या शिखाया By Ashish

RCB vs GT – Motivational Speechआज मैदान पर सिर्फ 11 खिलाड़ी नहीं उतरेंगे,आज उतरेंगे सपने, जुनून और करोड़ों फैंस की उम्मीदें।स्कोरबोर्ड सिर्फ रन गिनेगा,लेकिन इतिहास हौसले को याद रखे...

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आख़िरी वारिस की गवाही By Wajid Husain

वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी।  पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बस्तियों में कब्रिस्तान अक्सर गांव से बाहर नहीं होते, बस्ती के आख़िरी छोर पर, जहां आबादी ख़त्म होती थी और ख़ामोशी शुरू। बिय...

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अधूरी खुशियों का सफर By Dayanand Jadhav

गाँव के किनारे एक पुराना पीपल का पेड़ था। उसकी जड़ों के पास बैठकर लोग अक्सर अपने दुख-सुख बाँटते थे। उसी पेड़ के नीचे हर शाम एक बूढ़ा आदमी बैठा करता था — नाम था हरिराम। सफेद दाढ़ी,...

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जंगल - 40 By Neeraj Sharma

 51 वा धारावाहिक "अर्थ " कहानी के माधम से जान लो।जिंदगी का मतलब समझ जाओ, तो ये बे अर्थ सी लगती है अगर स्टॉक मार्किट की तरा लोगे तो मतलब और होगा... तुम इस से खेलो नहीं, हरी को आपने...

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दिए की रोशनी वाला ऑफिसर। By Jeetendra

पौड़ी गढ़वाल से कोई बाईस किलोमीटर ऊपर, थलीसैंण ब्लॉक की एक पतली सी सड़क चीड़ के जंगल को चीरती हुई ग्वाड़ गांव तक जाती है। सर्दियों में वहां धुंध इतनी घनी होती है कि सामने वाला घर भ...

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अद्भुत पात्र - रोहताश. By Raunak

सुबह घर की पुरानी पुस्तकों के बीच एक छोटी-सी, मात्र बासठ पन्नों की पुस्तिका हाथ लगी—सत्यवादी हरिश्चंद्र। उसे देखते ही बचपन की अनेक स्मृतियाँ जाग उठीं। कॉलेज जाने की जल्दी थी, इसलिए...

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तूफ़ानी राह By manasvi Manu

गाँव की बारिश ने अचानक रौद्र रूप धारण कर लिया था। शाम के साढ़े छह बजे सूर्यास्त हुआ, और देखते ही देखते आसमान में काले घने बादल छा गए। पेड़ झुक-झुककर काँप रहे थे, बिजलियां चमक रही थ...

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उसकी गलती क्या थी? - 2 By blue sky and purple ocean

Elena ने अपनी आँखों से वो सब देखा…जो उसके पिता उसकी माँ के साथ करते थे।उसकी माँ बार-बार रोते हुए कह रही थी—“मत मारो…”लेकिन उसके पिता ने उसकी एक नहीं सुनी।डरी हुई Elena भागकर अपनी द...

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चिप में कैद जिंदगी By Vijay Erry

चिप में कैद ज़िंदगीलेखक: विजय शर्मा एरीप्रस्तावनातकनीक ने इंसान को जितना आज़ाद किया है, उतना ही कैद भी। यह कहानी एक ऐसे भविष्य की है जहाँ इंसान की यादें, भावनाएँ और ज़िंदगी एक चिप...

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शक्तिपीठ देवबंद By Ritin Pundir

सहारनपुर जनपद में दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग (उत्तरी रेलवे) पर मुज़फ़्फ़रनगर से सहारनपुर (उत्तर) की ओर लगभग 25 कि०मी० की दूरी पर देवबन्द कस्बा स्थित है। देवबन्द नाम का उत्तरांश (बन्...

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सत्य इतिहास - भाग 2 - मानसिंह इतिहास की कुछ झलकियां By Ritin Pundir

                      ■■■ आमेर के राजा मानसिंह जी कछवाहा का वह इतिहास जो अंग्रेजों व मुगलों की चाटुकारिता करने वाले इतिहासकारों ने छुपाया , पढ़िए सच्चाई और तर्कपूर्ण बाते ताकि दिमाग...

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कंधे पर सपना By Raju kumar Chaudhary

एक गरीब लड़की अपने बच्चे के साथ उड़ान के दौरान एक सीईओ के कंधे पर सो जाती है, लेकिन जब वह जागती है तो चौंक जाती है जब उसे पता चलता है कि वह आदमी…विमान के केबिन में बच्चे की तेज़ रो...

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मौनता सबसे शक्तिशाली- बोधार्थी रौनक़। By Raunak

कोलकाता की एक पुरानी, शांत दोपहर थी। खिड़की से आती हल्की धूप कमरे में फैली हुई थी, और सामने बैठे थे सत्यजित राय...एक ऐसे कलाकार, जिनकी आँखों में दुनिया को देखने का अपना अलग ही नजरि...

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पहला दिन शहर में !! By Anjali kumari Sharma

      कदम बस से उतरी ! अकेले दुनिया बड़ी लगने लगी , मानो कि किस मेले में आ गए हो। नजर चारों ओर फेरने में लगी थी! मै तो यही सोच रही थी कि अब आजादी से जिऊंगी लेकिन, क्या पता था कि आग...

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कुसुम By Rajesh Maheshwari

कुसुम  रायपुर शहर में कुसुम अपने पति और बच्चों के साथ बडी शान से अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। वह बहुत अमीर थी। उसका पति शहर का एक माना हुआ डान और सट्टेबाज था जिसकी प्रतिदिन की कमाई...

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संगत भी भाग्य का हिस्सा है !! By Anjali kumari Sharma

मै ये नहीं कहती कि हर संगति अच्छी होती है या बुरी, हां पर ये जरूर कहूंगी कि संगत से खुद की जिंदगी में भी असर पड़ते हैं।अब आप ही अपने आस पास के बच्चों की ओर झाकी ये , क्या लगता है आ...

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Borahae : The Winter Bear By Deepika Patel

​सियोल की सर्द रातें कभी सोती नहीं, लेकिन ताएह्युंग के लिए आज की रात कुछ ज़्यादा ही बोझिल थी। 'गंगनम' के एक आलीशान, आधुनिक अपार्टमेंट की खिड़की के पास खड़ा होकर वह बाहर गिरत...

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Purple Feelings By priyanka katiyar

शहर के एक शांत स्कूल में पढ़ने वाली 11वीं की छात्रा अनुष्का की दुनिया दो हिस्सों में बंटी थी—एक असली दुनिया… और एक बैंगनी दुनिया उसकी बैंगनी दुनिया में बस एक ही नाम था—BTS।उनके गान...

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बदलते मौसम, बदलते चेहरे By Nensi Vithalani

गिरगिट को रंग बदलते हुए तो हम सभी ने कभी न कभी देखा है।वह अपनी सुरक्षा के लिए, परिस्थितियों के अनुसार अपना रंग बदलता है। यह उसकी प्रकृति है, उसका अस्तित्व बचाने का तरीका है। लेकिन...

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शादी एक अभिशाप क्यों? - 3 - (अंतिम भाग) By RACHNA ROY

कभी सासू मां के पेन्सन के पैसे हर महीने आ जाते हैं वो सब कुछ अपना करती है और कभी कभी हमारे लिए भी लाती है और जब उनका कुछ पैसे ना मिले तो तुरंत कहते हुए जरा भी संकोच नहीं होता कि यह...

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स्वयं आप By कमल चोपड़ा

   स्वयं आप   कमल चोपड़ा​खाकी लोगों की दीवार सामने थी और वे उनके सामने उन्हीं के खिलाफ नारे लगा रहे थे। यह हक उन्हें लोकतन्त्र ने दिया था। चिल्ला-चिल्लाकर उनकी गले की नसें दर्द करन...

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किराये के मकान की यादें By Vijay Erry

“किराये के घर की यादें” (लगभग 2000 शब्द), लेखक: विजय शर्मा एरी  ---किराये के घर की यादें1.ज़िंदगी के सफ़र में कई ठिकाने आते हैं। कुछ ठिकाने स्थायी होते हैं, तो कुछ अस्थायी। किराये...

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मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 4 By Abhi Anand

महीने का आखिरी हफ्ता आर्यन के लिए सबसे भारी होता था। जैसे-जैसे तारीखें खत्म होने को आतीं उसकी चिंताएँ बढ़ने लगतीं। उस रात भी कुछ ऐसा ही था पूरा शहर गहरी नींद में डूबा हुआ था, सड़को...

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नो एंट्री बनी रही By Wajid Husain

          वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी   कमरे में मोटे पर्दे पड़े थे। बाहर शाम कब उतर आई, इंद्राणी को पता ही नहीं चला। वह किताब खोले हुए थी, पर पढ़ कम रही थी- ज़्यादा अपने को भीत...

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बॉंस-फूस-खपच्ची By कमल चोपड़ा

​बाँस-फूस-खपच्ची कमल चोपड़ा​झुग्गी के अन्दर जगह कम थी। वे कुल चार जने थे। तीन अन्दर घुस आये थे। एक बाहर ही खड़ा रहा था। घुसते ही उन्होंने जयसुखलाल से तीन हजार रुपये माँगे। सुना-अनस...

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संक्रमण By कमल चोपड़ा

संक्रमणकमल चोपड़ा    ​आज कालू वहीं काम पर बैठा था, जिसे ना करने के लिए उसकी माँ ने मरते वक्त उसे सख्त ताकीद की थी। माँ ने मरते वक्त कहा था, "हे श्वान-पुत्र, इन अन्तिम क्षणों में तु...

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मुद्दा By कमल चोपड़ा

​मुद्दाकमल चोपड़ा ​इससे गिरी हुई हरकत और क्या होगी? बेटी की उम्र की बच्ची के साथ रँगे हाथों वह पकड़ा गया।​घोर कलियुग है वर्ना सूरज टूटकर गिर जाता या धरती फट जाती लेकिन कुछ भी नहीं...

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खण्ड - 01 महाराणा सहस्त्र वर्षों का धर्मयुद्ध - 7 By Hind Gaurav

महाराणा कुंभकर्ण (कुंभा) :अविश्वसनीय प्रतिभा के धनी, अद्वितीय योद्धा व अद्भुत निर्माता (1433-1468 ईसवी)महाराणा लाखा के पश्चात् उनके पुत्र मोकल, जो लाखा की अधिक उम्र में जन्मे थे, म...

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कुदरत का आईना By Praveen Kumrawat

कुदरत का अकाट्य नियम: हम जो देते हैं, वही लौटकर आता हैयह धरती किसी एक प्रजाति की जागीर नहीं, बल्कि पेड़, पौधे, नदियाँ और मूक पशु-पक्षी जीवन की वे ज़रूरी कड़ियाँ हैं जिनसे यह संसार...

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डिजिटलजाल By sukhvinder Singh Rai

कमरे की सीलन भरी हवा में छत वाले पुराने पंखे की 'कटर-कटर' आवाज़ किसी उल्टी गिनती की तरह गूंज रही थी। आर्यन ज़मीन पर, घुटनों के बीच सिर दिए बैठा था। उसके माथे से पसीने की एक ठ...

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अपने ही हाथों लिखी बर्बादी By sukhvinder Singh Rai

सड़क के किनारे लगा इकलौता पीला बल्ब बारिश की तेज़ बौछारों के बीच किसी बीमार इंसान की तरह टिमटिमा रहा था। आसमान में घुप्प अँधेरा था, ऐसा अँधेरा जो आँखों को नहीं, सीधा रूह को अंधा कर द...

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झूठा रुतबा By sukhvinder Singh Rai

शहर के उस सबसे महंगे कैफे के बाहर एस्प्रेसो कॉफी और बेक हो रही ब्रेड की महक हवा में घुली थी। कांच की विशाल दीवारों के पार अमीरज़ादे अपनी दौलत का प्रदर्शन कर रहे थे। उसी कांच की दीवा...

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क्या भारत का युवा 'कॉकरोच' है? By ARTI MEENA

हाल ही में देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक टिप्पणी को लेकर काफी चर्चा हुई। कहा गया कि भारत युवाओं के लिए "Cockroach Paradise" बन गया है। जब इस टिप्पणी पर युवाओं और आम लोगों की प...

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जब आपके बच्चे गलतियाँ करें तो क्या करें? By Nitya Oswal

जब बच्चे गलतियाँ करते हैं या कुछ गलत करते हैं, तब सच्चा रास्ता यह है की आप उनसे मित्र की जैसे बात करे की, बेटा, आप जो यह कर रहे हो उसके लिए आपने सोचा है?‘ और क्या ऐसा आपको ठीक लगता...

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सफलता की कोई उम्र नहीं होती By Ashish

सफलता की कोई उम्र नहीं होती – अशिष शाहदोस्तों,बहुत से लोग कहते हैं कि सफलता पाने की एक सही उम्र होती है। कोई कहता है 25 साल में सफल हो जाओ, कोई कहता है 40 के बाद बहुत देर हो जाती ह...

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तनाव और डिप्रेशन से मुक्ति - भाग 1 By Nitya Oswal

आज के तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में, टेंशन और डिप्रेशन सामान्य होते जा रहे हैं। काम का दबाव, रिश्तों की चुनौतियाँ, वित्तीय समस्याएँ, और सोशल मीडिया की निरंतर तुलना - ये सभी हमारे मानस...

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घर चलाने की तरकीब By Anika Ku

"कहानी शुरू करने से पहले एक सवाल। क्या आपके घर में भी कभी सास और बहू के बीच शीत युद्ध चला है? क्या आप भी उस सैंडविच की तरह महसूस करते हैं जो दो पार्टों के बीच पिस रहा है? अगर ह...

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शांति की शक्ति By Dayanand Jadhav

गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। उस घर में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। अर्जुन पढ़ा-लिखा था, मेहनती था और अपने परिवार से बहुत प्रेम करता था। लेकिन उसके स्वभाव में एक बड़ी कमी थी—...

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सहते-सहते By कमल चोपड़ा

सहते-सहतेकमल चोपड़ा​पहली बार ही ऐसा हुआ कि वह अपने पति के चेहरे को देखकर कुछ भी अनुमान नहीं लगा पा रही थी कि उसकी आज कहीं दिहाड़ी लगी या नहीं? पूछने पर पता चला कि वह खाली हाथ ही लौ...

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शब्दों का रिश्ता By Vijay Erry

“शब्दों  का रिश्ता”हिंदी कहानी (4000 शब्दों का विस्तृत रूप)लेखक: विजय शर्मा एरीप्रस्तावनारिश्ते कई रूपों में जन्म लेते हैं—कुछ खून से, कुछ परंपरा से, और कुछ सिर्फ़ शब्दों से। यह कह...

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मेरा महान देश By aakanksha

रवि एक साधारण परिवार का युवक था। बचपन से ही उसने अपने शिक्षकों, माता-पिता और किताबों से यह सुना था कि भारत एक महान देश है। देश की संस्कृति, सभ्यता, स्वतंत्रता संग्राम और वीरों की ग...

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जीने आये हो या बिल भरने By Ashish

जीने आए हो या सिर्फ बिल भरने?आज का इंसान सुबह अलार्म से उठता है, ट्रैफिक से लड़ता है, ऑफिस में Targets पूरे करता है, EMI भरता है, बच्चों की फीस भरता है, बिजली का बिल भरता है, मोबाइ...

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आईपीएल ने हमें क्या शिखाया By Ashish

RCB vs GT – Motivational Speechआज मैदान पर सिर्फ 11 खिलाड़ी नहीं उतरेंगे,आज उतरेंगे सपने, जुनून और करोड़ों फैंस की उम्मीदें।स्कोरबोर्ड सिर्फ रन गिनेगा,लेकिन इतिहास हौसले को याद रखे...

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आख़िरी वारिस की गवाही By Wajid Husain

वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी।  पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बस्तियों में कब्रिस्तान अक्सर गांव से बाहर नहीं होते, बस्ती के आख़िरी छोर पर, जहां आबादी ख़त्म होती थी और ख़ामोशी शुरू। बिय...

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अधूरी खुशियों का सफर By Dayanand Jadhav

गाँव के किनारे एक पुराना पीपल का पेड़ था। उसकी जड़ों के पास बैठकर लोग अक्सर अपने दुख-सुख बाँटते थे। उसी पेड़ के नीचे हर शाम एक बूढ़ा आदमी बैठा करता था — नाम था हरिराम। सफेद दाढ़ी,...

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जंगल - 40 By Neeraj Sharma

 51 वा धारावाहिक "अर्थ " कहानी के माधम से जान लो।जिंदगी का मतलब समझ जाओ, तो ये बे अर्थ सी लगती है अगर स्टॉक मार्किट की तरा लोगे तो मतलब और होगा... तुम इस से खेलो नहीं, हरी को आपने...

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दिए की रोशनी वाला ऑफिसर। By Jeetendra

पौड़ी गढ़वाल से कोई बाईस किलोमीटर ऊपर, थलीसैंण ब्लॉक की एक पतली सी सड़क चीड़ के जंगल को चीरती हुई ग्वाड़ गांव तक जाती है। सर्दियों में वहां धुंध इतनी घनी होती है कि सामने वाला घर भ...

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अद्भुत पात्र - रोहताश. By Raunak

सुबह घर की पुरानी पुस्तकों के बीच एक छोटी-सी, मात्र बासठ पन्नों की पुस्तिका हाथ लगी—सत्यवादी हरिश्चंद्र। उसे देखते ही बचपन की अनेक स्मृतियाँ जाग उठीं। कॉलेज जाने की जल्दी थी, इसलिए...

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तूफ़ानी राह By manasvi Manu

गाँव की बारिश ने अचानक रौद्र रूप धारण कर लिया था। शाम के साढ़े छह बजे सूर्यास्त हुआ, और देखते ही देखते आसमान में काले घने बादल छा गए। पेड़ झुक-झुककर काँप रहे थे, बिजलियां चमक रही थ...

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उसकी गलती क्या थी? - 2 By blue sky and purple ocean

Elena ने अपनी आँखों से वो सब देखा…जो उसके पिता उसकी माँ के साथ करते थे।उसकी माँ बार-बार रोते हुए कह रही थी—“मत मारो…”लेकिन उसके पिता ने उसकी एक नहीं सुनी।डरी हुई Elena भागकर अपनी द...

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चिप में कैद जिंदगी By Vijay Erry

चिप में कैद ज़िंदगीलेखक: विजय शर्मा एरीप्रस्तावनातकनीक ने इंसान को जितना आज़ाद किया है, उतना ही कैद भी। यह कहानी एक ऐसे भविष्य की है जहाँ इंसान की यादें, भावनाएँ और ज़िंदगी एक चिप...

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शक्तिपीठ देवबंद By Ritin Pundir

सहारनपुर जनपद में दिल्ली-सहारनपुर रेल मार्ग (उत्तरी रेलवे) पर मुज़फ़्फ़रनगर से सहारनपुर (उत्तर) की ओर लगभग 25 कि०मी० की दूरी पर देवबन्द कस्बा स्थित है। देवबन्द नाम का उत्तरांश (बन्...

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सत्य इतिहास - भाग 2 - मानसिंह इतिहास की कुछ झलकियां By Ritin Pundir

                      ■■■ आमेर के राजा मानसिंह जी कछवाहा का वह इतिहास जो अंग्रेजों व मुगलों की चाटुकारिता करने वाले इतिहासकारों ने छुपाया , पढ़िए सच्चाई और तर्कपूर्ण बाते ताकि दिमाग...

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कंधे पर सपना By Raju kumar Chaudhary

एक गरीब लड़की अपने बच्चे के साथ उड़ान के दौरान एक सीईओ के कंधे पर सो जाती है, लेकिन जब वह जागती है तो चौंक जाती है जब उसे पता चलता है कि वह आदमी…विमान के केबिन में बच्चे की तेज़ रो...

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मौनता सबसे शक्तिशाली- बोधार्थी रौनक़। By Raunak

कोलकाता की एक पुरानी, शांत दोपहर थी। खिड़की से आती हल्की धूप कमरे में फैली हुई थी, और सामने बैठे थे सत्यजित राय...एक ऐसे कलाकार, जिनकी आँखों में दुनिया को देखने का अपना अलग ही नजरि...

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पहला दिन शहर में !! By Anjali kumari Sharma

      कदम बस से उतरी ! अकेले दुनिया बड़ी लगने लगी , मानो कि किस मेले में आ गए हो। नजर चारों ओर फेरने में लगी थी! मै तो यही सोच रही थी कि अब आजादी से जिऊंगी लेकिन, क्या पता था कि आग...

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कुसुम By Rajesh Maheshwari

कुसुम  रायपुर शहर में कुसुम अपने पति और बच्चों के साथ बडी शान से अपना जीवन व्यतीत कर रही थी। वह बहुत अमीर थी। उसका पति शहर का एक माना हुआ डान और सट्टेबाज था जिसकी प्रतिदिन की कमाई...

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संगत भी भाग्य का हिस्सा है !! By Anjali kumari Sharma

मै ये नहीं कहती कि हर संगति अच्छी होती है या बुरी, हां पर ये जरूर कहूंगी कि संगत से खुद की जिंदगी में भी असर पड़ते हैं।अब आप ही अपने आस पास के बच्चों की ओर झाकी ये , क्या लगता है आ...

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Borahae : The Winter Bear By Deepika Patel

​सियोल की सर्द रातें कभी सोती नहीं, लेकिन ताएह्युंग के लिए आज की रात कुछ ज़्यादा ही बोझिल थी। 'गंगनम' के एक आलीशान, आधुनिक अपार्टमेंट की खिड़की के पास खड़ा होकर वह बाहर गिरत...

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शहर के एक शांत स्कूल में पढ़ने वाली 11वीं की छात्रा अनुष्का की दुनिया दो हिस्सों में बंटी थी—एक असली दुनिया… और एक बैंगनी दुनिया उसकी बैंगनी दुनिया में बस एक ही नाम था—BTS।उनके गान...

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बदलते मौसम, बदलते चेहरे By Nensi Vithalani

गिरगिट को रंग बदलते हुए तो हम सभी ने कभी न कभी देखा है।वह अपनी सुरक्षा के लिए, परिस्थितियों के अनुसार अपना रंग बदलता है। यह उसकी प्रकृति है, उसका अस्तित्व बचाने का तरीका है। लेकिन...

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शादी एक अभिशाप क्यों? - 3 - (अंतिम भाग) By RACHNA ROY

कभी सासू मां के पेन्सन के पैसे हर महीने आ जाते हैं वो सब कुछ अपना करती है और कभी कभी हमारे लिए भी लाती है और जब उनका कुछ पैसे ना मिले तो तुरंत कहते हुए जरा भी संकोच नहीं होता कि यह...

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स्वयं आप By कमल चोपड़ा

   स्वयं आप   कमल चोपड़ा​खाकी लोगों की दीवार सामने थी और वे उनके सामने उन्हीं के खिलाफ नारे लगा रहे थे। यह हक उन्हें लोकतन्त्र ने दिया था। चिल्ला-चिल्लाकर उनकी गले की नसें दर्द करन...

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किराये के मकान की यादें By Vijay Erry

“किराये के घर की यादें” (लगभग 2000 शब्द), लेखक: विजय शर्मा एरी  ---किराये के घर की यादें1.ज़िंदगी के सफ़र में कई ठिकाने आते हैं। कुछ ठिकाने स्थायी होते हैं, तो कुछ अस्थायी। किराये...

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मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग - 4 By Abhi Anand

महीने का आखिरी हफ्ता आर्यन के लिए सबसे भारी होता था। जैसे-जैसे तारीखें खत्म होने को आतीं उसकी चिंताएँ बढ़ने लगतीं। उस रात भी कुछ ऐसा ही था पूरा शहर गहरी नींद में डूबा हुआ था, सड़को...

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नो एंट्री बनी रही By Wajid Husain

          वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी   कमरे में मोटे पर्दे पड़े थे। बाहर शाम कब उतर आई, इंद्राणी को पता ही नहीं चला। वह किताब खोले हुए थी, पर पढ़ कम रही थी- ज़्यादा अपने को भीत...

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बॉंस-फूस-खपच्ची By कमल चोपड़ा

​बाँस-फूस-खपच्ची कमल चोपड़ा​झुग्गी के अन्दर जगह कम थी। वे कुल चार जने थे। तीन अन्दर घुस आये थे। एक बाहर ही खड़ा रहा था। घुसते ही उन्होंने जयसुखलाल से तीन हजार रुपये माँगे। सुना-अनस...

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संक्रमण By कमल चोपड़ा

संक्रमणकमल चोपड़ा    ​आज कालू वहीं काम पर बैठा था, जिसे ना करने के लिए उसकी माँ ने मरते वक्त उसे सख्त ताकीद की थी। माँ ने मरते वक्त कहा था, "हे श्वान-पुत्र, इन अन्तिम क्षणों में तु...

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मुद्दा By कमल चोपड़ा

​मुद्दाकमल चोपड़ा ​इससे गिरी हुई हरकत और क्या होगी? बेटी की उम्र की बच्ची के साथ रँगे हाथों वह पकड़ा गया।​घोर कलियुग है वर्ना सूरज टूटकर गिर जाता या धरती फट जाती लेकिन कुछ भी नहीं...

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