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मुक्ति.
by Pritpal Kaur verified
  • (3)
  • 80

“तुम जिंदा क्यों हो? मर क्यों नहीं जाते? मर जाओ...” उसकी तरफ से यह सलाह अनायास नहीं आयी थी. कई दिनों से देख रहा था, वह मुझसे ऊब चली थी. ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 20
by Mohd Arshad Khan
  • (1)
  • 14

‘‘क्या हुआ पुंतुलु, भाई? इतना परेशान क्यों दिख रहे हैं?’’ आतिश जी ने खिड़की से झाँककर पूछा। ‘‘नहीं-नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है।’’ पुंतुलु मुस्कराने का असफल प्रयास करते हुए ...

एकता दिवस
by JYOTI PRAKASH RAI
  • (1)
  • 35

आज दिनांक ३१ अक्टूबर है, हम और आप आज के दिन को एकता दिवस के रूप में मना रहे है! एकता क्या है और इसका क्या अर्थ है यह ...

प्रायष्चित
by Rajesh Maheshwari verified
  • (6)
  • 128

                                             प्रायष्चित   नर्मदा नदी के किनारे पर बसे रामपुर नामक गाँव में रामदास नाम का एक संपन्न कृषक अपने दो पुत्रों के साथ रहता था। उसकी पत्नी का ...

डकैत
by अ, का, पुत्र
  • (8)
  • 118

विशवाजीत साधारण सा दिखने वाला सामान्य लोगों मे रह रहा एक शातिर डकैत थाउसको देख कर होशियार से होशियार आदमी भी चकमा खा जाये ऐसा रूप धारण कर रखा ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 19
by Mohd Arshad Khan
  • (3)
  • 73

आतिश जी सोकर उठे तो बहुत हल्का महसूस कर रहे थे। शरीर में स्फूर्ति और ताज़गी भरी हुई थी। संपादक से हुई नोंक-झोंक का तनाव मन से निकल चुका ...

आस्था भूचाल
by Sohail Saifi
  • (4)
  • 62

भूचालयूँ तो श्रीमान सोमनाथ का एक मंजिला छोटा सा मकान था किन्तु अति सुन्दर था मकान के चारो ओर चार फिट की दीवारे थी अंदर प्रवेश करने के लिए एक ...

शुरूआत
by Sapna Singh verified
  • (8)
  • 224

नेहा ज्यों ही लाइब्रेरी में दाखिल हुई, कोई आंधी की तरह उस से टकराते-टकराते बचा, ’’ सुनिए आप ने ’’ ’मैडम बावेरी’ इष्यू करवाई है क्या? आप शायद हफ्ते ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 18
by Mohd Arshad Khan
  • (2)
  • 61

मोबले शाम तक अस्पताल में रहे। उन्हें देखने कोई नहीं आया, अलावा आतिश जी के। उन्हें आधे घंटे बाद ही ख़बर हो गई थी। फौरन भागे आए। हालाँकि उन्हें ...

अप्रतिम चाहत
by Rajesh Maheshwari verified
  • (6)
  • 152

अप्रतिम चाहत   यशवंतपुर नाम के एक नगर में प्रेमवती नाम की एक संभ्रांत महिला रहती थी। उसे बचपन से ही चित्रकला का बहुत शौक था। वह दिन भर ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 17
by Mohd Arshad Khan
  • (3)
  • 76

मोबले का एक्सीडेंट हो गया। बुधवार के दिन चौक में बड़ी भीड़ रहती थी। उस दिन बुध-बाज़ार लगती थी। फुटपाथ की पटरियों पर सस्ते सामानों की दूकानें सजती थीं। महँगाई ...

भूख...
by Sarvesh Saxena verified
  • (14)
  • 2.3k

आज मंगलवार है | मैं और श्याम चौराहे के पास वाले हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ा के सीधा श्याम की बुआ जी को लेने बस अड्डे पहुंच गए, बस ...

आस्था तर्क वितर्क
by Sohail Saifi
  • (4)
  • 123

तर्क वितर्कएक दिन प्रात काल दफ्तर के लिए घर से सोम नाथ जो निकले तो नुक्कड़ पर चायवाले के यहाँ खड़े पंडित जी ने सोम बाबू को अपनी ओर ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 16
by Mohd Arshad Khan
  • (6)
  • 112

‘‘घोष बाबू!’’ आतिश जी ने लगभग हाँफते हुए अंदर प्रवेश किया, ‘‘एक ज़रूरी काम से निकल रहा था, आपका ध्यान आया तो भागा आया।’’ ‘‘क्यों, ऐसी क्या बात हो गई?’’ ...

प्राप्ति
by Sapna Singh verified
  • (7)
  • 1.6k

‘‘गुड नाईट‘‘ मिसेज राव । ‘‘शायद घर जाने से पहले अन्तिम बार वह राउंड मे आये थे। पीठ कि तरफ तकिया लगाये वह पूरी तरह किताब मे डूबी थी ...

विदाई
by Rajesh Maheshwari verified
  • (12)
  • 206

विदाई   रामसिंह शहर के एक जाने माने उद्योगपति थे। उनकी दो बेटियों हेमा और प्रभा का विवाह बडी धूमधाम से संपन्न हो गया था उनकी विदाई का समय ...

पदक
by Upasna Siag
  • (2)
  • 158

विभा शाम को अक्सर पास के पार्क चली जाया करती है .उसे छोटे बच्चों से बेहद लगाव है, सोचती है कितने प्यारे कितने मासूम, दौड़ते, भागते, मस्त हो कर ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 15
by Mohd Arshad Khan
  • (3)
  • 79

मुहल्ले की ख़ुशियों को जैसे ग्रहण लग गया। लोग हँसना-मुस्कराना भूल गए। हँसी-मज़ाक़, चुहल-ठिठोली जैसे बीते ज़माने की बात हो गई। लोग एक-दूसरे के सामने पड़ने से कतराने लगे। ...

आस्था परिचय
by Sohail Saifi
  • (6)
  • 116

परिचयमहाशय सोम एक नैतिक और सामाजिक व्यक्ति हैं ज्ञान का सागर उनके मस्तिष्क मे भरा पड़ा था किन्तु थे वो नास्तिक समाज की धार्मिक नीतियाँ उनको लुभाती तो थी मगर धार्मिकता ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 14
by Mohd Arshad Khan
  • (5)
  • 127

बारिश अभी-अभी थमी थी। लेकिन बादल पानी का बोझ लिए आसमान में ऐसे डटे थे कि लगता था अब बरसे कि तब। बारिश थमी देख मोबले दौड़े आए। ‘‘मौलाना साहब, जल्दी ...

नवोदय
by Rajesh Maheshwari verified
  • (5)
  • 110

                                                      नवोदय   ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 13
by Mohd Arshad Khan
  • (2)
  • 153

अगले दिन स्कूल से लौटते समय मौलाना साहब पंडित जी के दरवाज़े रुक गए। सोचा पंडित जी के हाल-चाल लेता चलें। मन में यह भी था कि पंडित जी ...

साहित्य और मैं !..
by Pandit Swayam Prakash Mishra
  • (2)
  • 161

दोस्तों !..आज मैं जिंदगी  के उस दोहराहे पर खड़ा हूँ जहां मेरे लिए यह तय कर पाना संभव नही कि मैं किस रास्ते का चुनाव करू?एक ओर जहां साहित्य ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 12
by Mohd Arshad Khan
  • (3)
  • 102

दोपहर को मौलाना साहब जब लौटकर आए तो धरमू उनके तख़त पर पाँव पसारे सो रहा था। यह तख़त मौलाना साहब की यह ख़ास आरामगाह थी। जाड़ा छोड़कर वह ...

दीवाली
by Rajesh Bhatnagar
  • (3)
  • 171

आज सरला मुंह अंध्ंारे ही उठ बैठी थी । उसने पौ फअने तक तो आंगन की झाड़ू लगाकर हैण्डपम्प से पानी भी भर लिया था । पानी भरते-भरते उसका ...

वरुण का सफर -- अजनबी से........तक
by Deepak Singh
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  • 132

नमस्कार मित्रों,सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार।आप सभी पाठकों ने मेरा पहला लेख "मेरा पहला अनुभव...." को इतना प्यार और स्नेह दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके इतने ...

आपदा प्रबंधन
by Rajesh Maheshwari verified
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  • 73

                                                        आपदा प्रबंधन   गोकुलदास नाम का एक नवयुवक नये साल की पूर्व संध्या का आनंद उठाने के लिए दुबई गया था। वहाँ वह सायंकाल के समय विश्व प्रसिद्ध ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 11
by Mohd Arshad Khan
  • (3)
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‘‘साहब, यह देखिए, असली सूती क़ालीन। सबसे महँगा। विलायत में बड़ी क़ीमत में बिकता है।’’ बानी कर्तार जी को अपने क़ालीन दिखा रहा था। ‘‘सचमुच, बड़ा सुंदर है!’’ कर्तार जी ...

माँ की पूर्ति
by Sohail Saifi
  • (6)
  • 132

सरद बाबू को विद्यालय की ओर से माँ के ऊपर  कुछ पंक्तिया लिखी मिली जिसको उनके बेटे ने लिखा था पुत्र द्वारा लिखी पत्रिका  पड़ पिता के भीतर संवेदना ...

डाक्टर मित्र (फेसबुक)
by महेश रौतेला
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डाक्टर मित्र(फेसबुक) :   फेसबुक पर मुझे एक मित्र अनुरोध मिला,अटलांटा, संयुक्त राज्य अमेरिका से। नाम है  सोरेल। मैंने अनुरोध स्वीकार करने का मन बनाया। इससे पहले मैं सरला देवी ...