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डाक्टर मित्र (फेसबुक)
by महेश रौतेला
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डाक्टर मित्र(फेसबुक) :   फेसबुक पर मुझे एक मित्र अनुरोध मिला,अटलांटा, संयुक्त राज्य अमेरिका से। नाम है  सोरेल। मैंने अनुरोध स्वीकार करने का मन बनाया। इससे पहले मैं सरला देवी ...

एक अच्छा-भला दिन
by Pritpal Kaur
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अशोका रोड पर ठीक बीजेपी मुख्यालय के सामने से वह गुज़र रही थी. उसको लग ही रहा था कि ट्रैफिक सिग्नल की लाइट हरी से पीली में बदलने वाली ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 10
by Mohd Arshad Khan
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‘‘साहब, मेरा नाम बानी है। सोलह बरस की उम्र से यह काम कर रहा हूँ।’’ फेरीवाला कर्तार जी को बता रहा था। वह अधलेटे उसकी बात सुन रहे थे। ...

आदमी और कुत्ता
by Rajesh Bhatnagar
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वह बस से उतर कर उस आदमी से कुछ कदम की दूरी पर पीछे-पीछे चल पड़ी जिस आदमी का चेहरा वह घूंघट के कारण अभी तक ठीक से देख ...

सब का दाता है भगवान  
by Rajesh Maheshwari
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                                        सब का दाता है भगवान     जबलपुर शहर में एक धनाढ्य व्यापारी पोपटमल रहता था। वह कर्म प्रधान व्यक्तित्व का धनी था और गरीबों को दान धर्म, जरूरतमंदो ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 9
by Mohd Arshad Khan
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शुरू-शुरू में तो ऐसा लगता था कि इस साल सूखा पड़ जाएगा, पर बारिश होना शुरू हुई तो शहर को चेरापूँजी बना डाला। आसमान जैसे बादलों के बोझ से ...

आओ घर लौट चलो
by Rajesh Bhatnagar
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आज अचानक रष्मि की असामयिक मृत्यु का समाचार सुनकर वह हतप्रभ रह गया था । एक बार तो उसे अपने कानों पर विष्वास भी न हुआ था । रष्मि ...

अंशकथा
by Kavi Ankit Dwivedi Anal
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कथा 01- मिथ्या की सच्चाई आज कल के परिवेश में ये शब्द ही मिथ्या स्वरुप लगता है। सच्चाई नामक शब्द उसी प्रकार विलुप्त हो रहा है जैसे कि डायनासोर । ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 8
by Mohd Arshad Khan
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रात भर ख़ूब बारिश हुई। लू-धूप की तपी धरती हुलस उठी। पेड़-पौधों पर हरियाली लहलहा उठी। गड्ढे और डबरे लबालब हो उठे। मौसम सुहाना हो गया। आज जहाँ सब लोग ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 7
by Mohd Arshad Khan
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जून ख़त्म होने को था। पर आसमान से जैसे आग बरस रही थी। बादलों का नामोनिशान तक न था। सुबह होती तो सूरज आग के गोले की तरह आ ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 6
by Mohd Arshad Khan
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कर्तार जी को अगर कोई सोता हुआ देख ले तो उसे यह समझते देर नहीं लगेगी कि घोड़े बेचकर सोना किसे कहते हैं। कर्तार जी वैसे तो शाँत प्रकृति ...

अग्नि का भर्म - ऐ.पी.जे अब्दुल कलाम
by Yuvraj Singh
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यह कुछ समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव में अग्नि नाम का लड़का रहता था। अग्नि पढाई में बहुत होशियार और मेहनती था। अग्नि ऐ.पी.जे अब्दुल ...

गुरुकुल की मस्तीया
by Monty Khandelwal
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आज तो  सक्ती जी गणित की कॉपी जाचने वाले हैं |  आगे से किसी की आवाज़ सुनाई दी  अरे ये क्या होग्या मैने तो काम किया ही नहीं  मैने ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 5
by Mohd Arshad Khan
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आधी रात का वक़्त था। सारा मुहल्ला नींद में खोया हुआ था। चारों तरफ सन्नाटा था। अचानक कर्तार जी के दरवाजे़ पर किसी ने दस्तक दी। कर्तार जी चौंक ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 4
by Mohd Arshad Khan
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शाम को जब सारे लोग पार्क में टहल रहे थे तो घोष बाबू ने कहा, ‘‘आज कितना सूना-सूना लग रहा है।’’ ‘‘हाँ, सचमुच,’’ गायकवाड़ उदासी से बोले। ‘‘पंडित जी हम लोगों ...

जिंदगी के रंग खुशियों के संग
by Dr. Vandana Gupta
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     प्राची ने टिफ़िन पैक किया, बैग उठाया और ऑफिस के लिए निकल पड़ी। आजकल वैसे भी घर में उसका मन नहीं लगता है। दस महीने पहले तक ...

ब्राह्मण
by Ajay Kumar Awasthi
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मैं ब्राह्मण कुल में जन्म लेकर अपने भाग्य सराहता हूँ क्यों ???1. हिंसा से दूर-- बचपन से मांस, मछली का भक्षण और क्रूरतापूर्वक पशुवध का मंजर देखने से दूर ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 3
by Mohd Arshad Khan
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‘‘अरे मौलाना साहब, कर्तार जी! सब आ जाओ, जल्दी!’’ एक दिन घोष बाबू ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहे थे। आवाज़ सुनकर जो जिस हालत में था, वैसा ही निकल भागा। मौलाना ...

भविष्य एक विनाशक अंत हैं
by Sohail Saifi
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प्राचीन काल में वर्तमान की तरह ना तो सुख सुवींधा थी ना ही आज के समान प्रगती और उपलब्धी किन्तु इन सब के बिना भी वो लोग हमारी तुलना ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 2
by Mohd Arshad Khan
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जून की रात थी। हवा ठप थी। गर्मी से हाल-बेहाल हो रहा था। मौलाना रहमत अली दरवाजे़ खडे़ पसीना पोंछ रहे थे। ‘‘ओफ्रफोह! आज की रात तो बड़ी मुश्किल से ...

इंद्रधनुष सतरंगा - 1
by Mohd Arshad Khan
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हिलमिल मुहल्ले को लोग अजायब घर कहते हैं। इसलिए कि यहाँ जितने घर हैं, उतनी तरह के लोग हैं। अलग पहनावे, अलग खान-पान, अलग संस्कार, अलग बोली-बानी और अलग ...

भय और आडम्बर का प्रचार - मर गया वह पत्थरदिल इंशान - 2 - 6
by Lakshmi Narayan Panna
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Part-6पत्थर न पूजने से शायद ही हमारा कोई नुकसान हो लेकिन अगर प्रकृति नष्ट हुई तो हमारा अस्तित्व ही नही रहेगा । मतलब कि ईश्वर का अस्तित्व भी तब ...

छोटी सी कोशिश
by Saroj Prajapati
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मैडम, मैं इस बच्चे का एडमिशन अपनी क्लास में नहीं कर सकती । तिमाही परीक्षा भी हो चुकी है । चौथी कक्षा में पिछला सिलेबस कवर करवाना कितना मुश्किल ...

मायका और ससुराल
by Roopanjali singh parmar
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रीना की शादी को चार साल हो गए थे, उसका एक बेटा भी था अभय, जो एक साल का था। पति हर्ष और सास करुणा उसे बहुत प्यार करते ...

डॉ दिवाकर
by Ajay Kumar Awasthi
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डॉक्टर दिवाकर अब 80 साल के हो गए हैं पर आज भी अपनी क्लिनिक में 4 घण्टे बैठते हैं। वे बच्चों के डॉक्टर हैं ,उनके स्नेह और ममता भरे ...

कोरा कागज़
by Manjeet Singh Gauhar
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ये ज़िन्दगी है साहब , इम्तहान तो लेती ही है। और ना सिर्फ़ इंसानो का इम्तहान लेती है, बल्कि संसार में जितना भी कुछ है सब ही का इम्तहान ...

मुर्गे की तीसरी टांग
by r k lal
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“मुर्गे की तीसरी टांग” आर 0 के 0 लाल     शहर में कल्लन भाई की दुकान की बड़ी चर्चा है जहां पर चिकन निहारी, लाहौरी मुर्ग छोले, चिकन ...

ट्रेन वाली बच्ची
by Sarvesh Saxena
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जैसे तैसे मैं धीरे धीरे चलती ट्रेन मे भागते भागते एक सज्जन की मदद से चढ़ गया लेकिन ट्रेन मे घुसते ही ये एहसास हुआ कि एक जंग अभी ...

अजातशत्रु
by Ajay Amitabh Suman
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अचानक एक कठोर आवाज ने उसको अंदर तक हिला दिया। अरे मुर्ख अजय , अजातशत्रु बनने पर क्यों तुला है ? अजय को अपने मास्टरजी की बात समझ नहीं ...

ईश्वर तू महान है
by Abhishek Hada
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गाँव की कच्ची सड़क। तेज धूप। दोपहर का समय। तन को झुलसाती गर्म लू। दूर दूर तक किसी छायादार पेड़ का नामोनिशान नही। सड़क के दोनो तरफ कुछ हरी ...