prashant sharma ashk लिखित उपन्यास वजूद.

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वजूद. द्वारा  prashant sharma ashk in Hindi Novels
प्रशांत शर्मा भाग 1 शंकर ओ रे शंकर। हां भाभी, क्या हुआ काहे हमारा नाम पुकारे जा रही हो ? अरे वक्त देख। तेरे भैया वहां खे...
वजूद. द्वारा  prashant sharma ashk in Hindi Novels
भाग 2 शंकर ने कुसुम की बात का जवाब देते हुए कहा- भाभी आप हमें अपना बेटा मानती हो ना, तो फिर हमको इस सब झमेले में मत फंसा...
वजूद. द्वारा  prashant sharma ashk in Hindi Novels
भाग 3 वहीं तो भैया आज घर पर हो तो थोड़ा आराम कर लो रोज तो खेत में काम ही करते हो। ये काम तो हम यूं ही चुटकियों में कर दें...
वजूद. द्वारा  prashant sharma ashk in Hindi Novels
भाग 4 अगले दिन सुबह शंकर जल्दी उठकर गाय को चारा डालने से लेकर घर के बरामदे की सफाई का काम करता है। हरी खेत पर चला जाता ह...
वजूद. द्वारा  prashant sharma ashk in Hindi Novels
भाग 5 काकी वो शहर है अपना गांव नहीं। वहां बहुत काम होता है वक्त नहीं मिला होगा कमल को, इसलिए नहीं आ सका होगा। ऐसे ही बात...