Munshi Premchand लिखित उपन्यास आजाद-कथा - खंड 2

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आजाद-कथा - खंड 2 द्वारा  Munshi Premchand in Hindi Novels
मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन...
आजाद-कथा - खंड 2 द्वारा  Munshi Premchand in Hindi Novels
कैदखाने से छूटने के बाद मियाँ आजाद को रिसाले में एक ओहदा मिल गया। मगर अब मुश्किल यह पड़ी कि आजाद के पास रुपए न थे। दस हजा...
आजाद-कथा - खंड 2 द्वारा  Munshi Premchand in Hindi Novels
जोगिन शहसवार से जान बचा कर भागी, तो रास्ते में एक वकील साहब मिले। उसे अकेले देखा, तो छेड़ने की सूझी। बोले - हुजूर को आदाब...
आजाद-कथा - खंड 2 द्वारा  Munshi Premchand in Hindi Novels
जमाना भी गिरगिट की तरह रंग बदलता है। वही अलारक्खी जो इधर-उधर ठोकरें खाती-फिरती थी, जो जोगिन बनी हुई एक गाँव में पड़ी थी,...
आजाद-कथा - खंड 2 द्वारा  Munshi Premchand in Hindi Novels
सुरैया बेगम मियाँ आजाद की जुदाई में बहुत देर तक रोया कीं, कभी दारोगा पर झल्लाईं, कभी अब्बासी पर बिगड़ीं, फिर सोचतीं कि अल...