Anandvardhan Ojha लिखित उपन्यास निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा ..

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निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा .. द्वारा  Anandvardhan Ojha in Hindi Novels
[मित्रो, ये चर्चाएं कई किस्तों में पूरी होंगी और क्रमशः एक उपन्यास की शक्ल अख्तियार कर लेंगी शायद। आप इन्हें किस्तों में...
निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा .. द्वारा  Anandvardhan Ojha in Hindi Novels
मेरे रोने की आवाज़ जैसे ही वातावरण में गूंजी, चाचाजी और उस अज्ञात स्त्री की वार्ता अवरुद्ध हो गई। चाचाजी अपनी चौकी से उठक...
निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा .. द्वारा  Anandvardhan Ojha in Hindi Novels
निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... (३) जब मैंने किशोरावस्था की दहलीज़ लांघी और मूंछ की हलकी-सी रेख चहरे पर उभर आई, तो चाचाजी...
निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा .. द्वारा  Anandvardhan Ojha in Hindi Novels
निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा... (४) पूज्य पिताजी ने अपने एक लेख 'मरणोत्तर जीवन' में लिखा है--"मनुष्य-शरीर में आत्मा की स...
निश्छल आत्मा की प्रेम-पिपासा .. द्वारा  Anandvardhan Ojha in Hindi Novels
['यह रूहों की सैरगाह है...!'] दो वर्षों के कानपुर प्रवास के वे दिन मौज-मस्ती से भरे दिन थे। दिन-भर दफ्तर और शाम की मटरगश...