अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक बिल्डिंग की छत पर खड़ा है। उसकी आंखों की पुतलियाँ गहरी लाल चमकती हैं। करण (मन ही मन) में - मेरा मिशन साफ है, इंसानों को उनकी असली औक़ात दिखानी है। और किसी ऐसे इंसान को अपने जाल में फंसाना है जो दिल से साफ हो। ताकी मैं उसके भोलेपन का फायदा उठा सकूं।पर ये शहर , ये दिल्ली, यहां कुछ ऐसा है जो मुझे रोक रहा है।
Devil की दास्तान - 1
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है।धरती पर एक अजनबी उतरा है। चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है।करण धीरे-धीरे एक बिल्डिंग की छत पर खड़ा है। उसकी आंखों की पुतलियाँ गहरी लाल चमकती हैं।करण (मन ही मन) में -मेरा मिशन साफ है, इंसानों को उनकी असली औक़ात दिखानी है। और किसी ऐसे इंसान को अपने जाल में फंसाना है जो दिल से साफ हो। ताकी मैं उसके भोलेपन का फायदा उठा सकूं।पर ये शहर , ये दिल्ली, यहां कुछ ऐसा है जो मुझे रोक रहा है।वहीं ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 2
ऑफिस का कैबिन। AC की ठंडी हवा चल रही है, लेकिन सिमरन के माथे पर पसीना है। वो डरी-सहमी पर बैठी है। उसके सामने करण, गहरी नज़रों से लगातार उसे घूर रहा है।"कभी-कभी डर शब्दों से नहीं... निगाहों से पैदा होता है।सिमरन के लिए करण की लाल आँखें वही डर थीं... जो उसके सीने की धड़कनें रोक रही थीं।"सिमरन फाइल्स में नोट्स लिख रही है, लेकिन उसका ध्यान बार-बार करण की आंखों की तरफ चला जाता है। वो घबराकर नज़रें झुका लेती है।सिमरन (मन ही मन) में बोली -हे भगवान जी! ये बार-बार मुझे क्यों देखते हैं? ये इंसान ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 3
ऑफिस का ओपन एरिया। कुछ कर्मचारी कॉफी मशीन के पास खड़े होकर सिमरन का मज़ाक बना रहे हैं।कर्मचारी 1 हुए बोला -अरे ये तो बिलकुल बच्ची जैसी है। अठारह साल की है पर दिमाग़ से तेरह का।कर्मचारी 2 मज़ाक उड़ाते हुए बोला -कल तो ट्रैफिक सिग्नल पर भी खड़ी रह गई थी। हाहाहा।बाकी सब हंसने लगते हैं। सिमरन का चेहरा लाल पड़ जाता है। उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। वह चुपचाप अपना काम करने की कोशिश करती है, पर उसका दिल टूट रहा है।अचानक कमरे का माहौल बदल जाता है। करण अपने केबिन से बाहर आता है। ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 4
ऑफिस का देर रात का सीन। घड़ी में रात के 12 बज रहे हैं। पूरा फ्लोर खाली है। टेबल फाइलें बिखरी हैं। सिमरन थकी हुई कुर्सी पर बैठी-बैठी सो जाती है। उसके मासूम चेहरे पर नींद की झलक है।सिमरन मासूम और थकी हुई।उसे नहीं पता था कि उसकी नींद किसी और के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान थी।करण अंधेरे से बाहर आता है। उसकी आँखें लाल चमक रही हैं। वह धीरे-धीरे सिमरन की ओर बढ़ता है। उसके चेहरे पर पजेसिव गुस्सा और अंदर से निकलती भूख साफ दिखाई देती है।करण धीरे से खुद से फुसफुसाते हुए बोलायही मौका है।ये मेरे ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 5
(अंधेरा कमरा। बाहर से आती हवा की सीटी, खिड़कियाँ ज़ोर-ज़ोर से हिल रही हैं। दरवाज़े पर बार-बार चोट पड़ है। अचानक...)धड़ाम्म्म!!(दरवाज़ा टूटकर गिर जाता है। वो काली परछाई चाकू लहराते हुए अंदर घुस आती है। उसकी आँखें धुंधली पर डरावनी चमक रही हैं। सिमरन चीख उठती है और पीछे हटने लगती है।)सिमरन (चीखकर) बोली -"आआआ... हे भगवान!"(क्षणभर में करण सिमरन को अपनी बाँहों में खींच लेता है। उसके विशाल पंख फैलकर उसे पूरी तरह ढक लेते हैं। सिमरन उसका सीना कसकर पकड़ लेती है, उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा है। उसके चेहरे पर आँसू हैं और डर से ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 6
(सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही है। सिमरन नींद से उठती है, उसका चेहरा मासूम बेख़बर। वो धीरे-धीरे उठकर पानी पीती है।)"वो रात जो उसके लिए डर और रहस्य से भरी हुई थी... अब उसकी यादों से गायब हो चुकी थी।करण ने उसकी आँखों से वो लम्हे मिटा दिए थे।क्योंकि अगर सच सामने आ जाता... तो सिमरन हमेशा के लिए उससे दूर भाग जाती।"(ऑफिस – सिमरन अपनी टेबल पर बैठी है, मासूम-सी, जैसे कुछ हुआ ही न हो। बाकी एम्प्लॉई उसे देखकर हैरान होते हैं। फुसफुसाते हैं।)Employee 1 (धीमे से) बोले -"कल रात तो इसको ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 7
(शाम का समय। ऑफिस का कमरा सुनसान। सिमरन अपने डेस्क पर बैठी है। बाहर हल्की धूप और कमरे में मिश्रित।)"करण की प्यास बढ़ रही थी।सिमरन अब भी उसकी असली ताक़त और लाल आँखों की प्यास से अनजान थी।लेकिन उसे रोकना मुश्किल था। उसे पास लाना ही पड़ता था।"(करण धीरे-धीरे सिमरन के पास आता है। उसकी आँखें लाल, चेहरा गंभीर।)Karan (धीमे स्वर में) बोला -"तुम आज देर तक अकेलीकाम कर रही हो।ये खतरनाक हो सकता है।मैं तुम्हें सुरक्षित करना चाहता हूँ।"(सिमरन काँपती है। मासूमियत और डर के मिश्रित स्वर में फुसफुसाती है)Simran बोली -"सुरक्षित... आपसे? मुझे डर लग रहा है..."(करण ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 8
(रात का समय। होटल का अँधेरा कॉरिडोर। सिमरन बिस्तर पर बैठी है, डर और थकान में। करण सिमरन के गेट के पास खड़ा है, लाल आँखों से गेट को देख रहा है।)"सिमरन अब भी मासूम थी।उसे नहीं पता कि सामने खड़ा आदमी... इंसान नहीं है।और उसकी प्यास धीरे-धीरे बढ़ रही थी।हर पल उसे रोकना कठिन हो रहा था।"(सिमरन बिस्तर पर सिर दबाए बैठी है। अचानक कमरे का दरवाजा खिसकता है और करण अंदर आता है। उसकी लाल आँखें चमक रही हैं।)Simran (घबराकर, फुसफुसाते हुए) बोली -"S sir अ... आप यहाँ क्यों हो? मुझे डर लग रहा है..."(करण धीरे-धीरे उसके ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 9
(रात का समय। गली का अँधेरा। करण एक क्रिमिनल से लड़ रहा है। उसकी लाल आँखें चमक रही हैं।)"करण प्यास अब और बढ़ चुकी थी।कई दिनों से उसने खून नहीं पिया था।और अब, सामने खड़ा अपराधी उसे रोक नहीं पा रहा था।"(करण क्रिमिनल पर टूट पड़ता है। कुछ ही समय में वह उसे मार देता है और उसका खून पीता है।)(सिमरन, जो छुपकर सब देख रही थी। उसकी आँखों में डर और सन्नाटा।)Simran (धीमे स्वर में, भयभीत होकर) बोली -"ये क्या... वो खून पी रहे हैं... वो... वो शैतान हैं!"(सिमरन डर के मारे पीछे हटती है।)"सिमरन ने करण को ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 10
(ऑफिस का रात का माहौल। सभी लोग जा चुके हैं। सिर्फ़ करण अपनी केबिन में बैठा है। सिमरन फ़ाइल धीरे-धीरे दरवाज़ा खटखटाती है।)Simran (धीमे स्वर में, घबराई हुई) बोली -"स…सर, ये साइन चाहिए थे…"(करण धीरे से सिर उठाता है। उसकी लाल आँखों में हल्की चमक है। सिमरन की नाक से अभी भी हल्की चोट का निशान है। करण की प्यास और बढ़ जाती है।)Karan (आँखें गहरी करते हुए) बोला -"इतनी देर रात… तुम अकेली क्यों रुकी हो?"(सिमरन घबराकर झुक जाती है। उसके हाथ काँप रहे हैं।)Simran (धीरे से) बोली -"वो… आपका ऑर्डर था सर… मैं डरी हुई थी, इसलिए…"(करण ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 11
(सुबह का समय। ऑफिस में सिमरन फाइलों में उलझी बैठी है। उसकी मासूमियत वैसी ही है, जैसे हमेशा। उसे पता उसके चारों ओर मौत का साया मंडरा रहा है।)"सिमरन… जिसके लिए ये दुनिया मासूमियत और डर से भरी थी…अब अनजाने में उस खेल का हिस्सा बन चुकी थीजहाँ इंसानियत और खून की प्यास टकरा रहे थे।"(करण केबिन के शीशे से बाहर सिमरन को देख रहा है। उसकी आँखों में बेचैनी है। उसके मन में बिरादरी की धमकी गूंज रही है।)Karan (मन ही मन) बोला -"अगर मैंने इसे नहीं मारा… तो ये लोग इसे नोच डालेंगे।मुझे इसे इस शहर से, ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 12
(घना जंगल, ऊपर आसमान में अमावस्या की काली चादर फैली हुई है। समंदर का काला पानी हल्की-हल्की तरंगें ले है।)करण अपने पंख फैलाकर सिमरन को अपनी बाँहों में उठाकर आकाश में उड़ रहा है। उसकी रफ्तार किसी चीते से भी तेज़, किसी चील से भी ऊँची। सिमरन डरी-सहमी उसकी छाती से लिपटी है।)*Simran (काँपती आवाज़ में) बोली -"सर… ये क्या हो रहा है? हम कहाँ जा रहे हैं? ये लोग हमारे पीछे क्यों हैं? आप उड़ भी सकते हैं?"(सिमरन ऊपर देखती है कि करण की बिरादरी — दर्जनों लाल आँखों वाले शैतान — हवा में उसका पीछा कर रहे ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 13
चुड़ैल गायब हो चुकी है। सिमरन काँपते हुए उस पेड़ के पास खड़ी है जहाँ से पानी की हल्की सुनाई दे रही है। उसका चेहरा पीला, आँखें फैल गई हैं।)Simran (धीमी, डरती आवाज़ में) बोली -"आ… आप कौन हो? क्यों… क्यों मुझे डराते हो आप?"(करण उसके पास खड़ा है। उसकी लाल आँखों में अब भी आग है, पंख अभी भी फैले हैं।)Karan (धीमे स्वर में, गंभीर होकर) बोला -"मैं… मैं सिर्फ़ तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचने देता।लेकिन ये… ये सिर्फ़ तुम्हारे लिए नहीं है।ये मेरी प्यास है… मेरी ताक़त।और कोई इसे नहीं छू सकता।"(सिमरन अपने हाथों से अपना सिर पकड़ती ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 14
(शादी का हॉल सज चुका है। लाल जोड़े में सिमरन खड़ी है। उसका चेहरा दुःख और डर से फीका है।)"सिमरन… लाल जोड़े में, मासूमियत की आड़ मेंडर और निराशा छिपाए हुए किसी परी की तरह लग रही थी।करण के रिश्तेदार आए थे,पर सिमरन उन्हें असली रूप में देख सकती थी…वो सब शैतान थे।बाकी लोग उन्हें केवल इंसान समझ रहे थे।18 साल की मासूम बच्ची के साथ ये सब हो रहा था।और लोग खुश हो रहे थे, नाच रहे थे, गा रहे थे। "(सिमरन अपने हाथ जोड़कर खड़ी है। उसकी आँखें फैल रही हैं। उसका हृदय तेज़ी से धड़क रहा ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 15
(हवेली के अँधेरे कमरे में सिमरन बैठी है। उसका चेहरा डर और असहायपन में डूबा हुआ है। करण उसके बैठा है। उसके लाल आँखे जल रही हैं, पंख फैल चुके हैं।)"करण की प्यास…उसका जूनून…अब सीमा पार कर चुका था।सिमरन की मासूमियत उसके लिए जैसे जहर और मिठास दोनों थी।"(सिमरन कांपती है, अपने हाथ जोड़कर करण की ओर देखती है।)Simran (घबराकर, धीमी आवाज़ में) बोली -"कृपया… मुझे मत मारिए …मैं तो आपकी पत्नी हूं ना।मैं… मैं डर गई हूँ…"(लेकिन करण की लाल आँखों में अब नियंत्रण कम दिखता है। उसकी प्यास उसे तेजी से खींच रही है।)Karan (धीमी, खतरनाक आवाज़ ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 16
(रात का अँधेरा हवेली में फैला है। तभी बिजली कड़कती है और तेज़ आवाज होती है। सिमरन डर के करण के सीने से चिपक जाती है।)"सिमरन सहमी-सहमी थी।अपने डर और असहायपन में वह करण के सीने से चिपक गई।उसकी मासूमियत ने उसे इस तरह अपने पास खींच लिया कि करण पहली बार हड़बड़ाया।"(सिमरन किसी बच्चे की तरह पूरी तरह से सो गई। उसके छोटे हाथ करण की तरफ फैले हुए हैं।)"सिमरन ने पूरी तरह नींद में जाकर अपने डर को भुला दिया।किसी बच्चे की तरह वह सो गई—बेबस, मासूम और पूरी तरह निर्भर।"(करण उसकी नींद को देखते हुए बैठा ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 17
हवेली का कमरा। बाहर अँधेरी रात है। लाल परदों से छनकर आती चाँदनी कमरे को और भी रहस्यमयी बना है। करण खिड़की के पास खड़ा है, उसकी आँखें खून की प्यास से लाल हो रही हैं।)"करण के मन में बस एक ही जंग चल रही थी…वो जानता था कि अगर उसने सिमरन का खून नहीं पिया, तो उसकी शैतानी शक्तियाँ कमज़ोर हो जाएँगी,पर सिमरन की मासूमियत उसकी प्यास पर बार-बार लगाम लगा रही थी।"(करण अचानक मुट्ठियाँ भींच लेता है, उसकी नज़रों में जुनून चमक उठता है।)करण (अपने आप से बड़बड़ाता हुआ) बोला -"नहीं… मुझे उसका खून पीना ही होगा… ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 18
(रात का गहरा सन्नाटा… चारों ओर बस पेड़ों की सरसराहट, चाँद की हल्की रौशनी, और झींगुरों की आवाज़ें। सिमरन पड़ी अपने पति को ढूंढने। )“सिमरन को नहीं पता था कि वो जिस राह पर निकली है, वहाँ वापसी का कोई रास्ता नहीं।वो बस एक ही चीज़ जानती थी — करण को ढूँढना है… चाहे जान चली जाए।”(सिमरन लाल साड़ी पहने किसी सुहागन की तरह जंगल के बीच चल रही है। उसके कदमों की आहट सूखे पत्तों पर गूंज रही है। हवा ठंडी है, पर उसके माथे पर पसीना है।)सिमरन (धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए) बोली -“करण जी… कहाँ चले गए आप?आपने ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 19
(काली रात... जंगल के पेड़ों से हवा टकरा रही है। झींगुरों की आवाज़ गूँज रही है।सिमरन करण को किसी एक पुराने पेड़ के नीचे ले आती है।करण घायल है, उसकी साँसें टूटी-टूटी सी चल रही हैं।)सिमरन (रोते हुए) बोली -“करण जी... आ आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे?... मेरी तरफ देखिए। ... आपके ज़ख्म... इतना खून...। हेभगवान...मैं क्या करूं?”(वो काँपते हाथों से करण का चेहरा थामती है। करण की आँखें बंद हैं, होंठ सूखे हुए हैं।)सिमरन (घबराकर) बोली -“मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा... मैं क्या करूँ?...भगवान! कोई तो रास्ता दिखा दो...”(वो इधर-उधर भागती है, पत्ते तोड़ती है, झील ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 20
(जंगल में गहरा सन्नाटा छाया है।पेड़ों के बीच से धुंध की परतें निकल रही हैं।18 साल की मासूम सिमरन भी करण की गोद में निढाल पड़ी है।उसकी साँसें थम चुकी हैं। करण की आँखों से लगातार आँसू बह रहे हैं।)करण (टूटे स्वर में, काँपती आवाज़ में) बोला -“सिमरन... उठो न... देखो मैं यहाँ हूँ...तुमसे मुझसे वादा किया था कि कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ेगी...”(वो सिमरन के चहरे को पागलों की तरह बार-बार चूमता है,पर कोई हरकत नहीं होती। उसकी साँसें अब पूरी तरह रुक चुकी हैं।)“वो इंसान थी... और वो राक्षस...दोनों का मिलन तो किस्मत के खिलाफ़ था...”(करण का ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 21
(मंदिर के बाहर सुबह की हल्की किरणें फैल रही हैं।रात का अँधेरा धीरे-धीरे मिट चुका है।करण मंदिर की सीढ़ियों बैठा है, सिमरन उसकी गोद में शांत पड़ी हुई है।करण की आँखों में अब भी आँसू हैं, पर उनमें एक उम्मीद की चमक है।)(अचानक सिमरन की उँगलियाँ हिलती हैं।उसकी साँसें गहरी होती हैं, और वो धीरे-धीरे आँखें खोलती है।)सिमरन (धीरे, मासूम आवाज़ में) बोली -“... क करण जी?...”(करण चौक उठता है। उसकी आँखों से आँसू बह पड़ते हैं।वो सिमरन को गले से कसकर लगा लेता है।)करण (टूटे, पर खुश स्वर में) बोला -“सिमरन!... तुम... तुम ज़िंदा हो!... भगवान ने मेरी ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 22
(रात का वक़्त है।घर के बाहर ठंडी हवा चल रही है।सिमरन सो रही है — उसके चेहरे पर शांति खिड़की के पास खड़ा है, चाँद की तरफ देख रहा है।अचानक दूर किसी गली से कार की ब्रेक की आवाज़ आती है…)(करण चौक जाता है)वो खिड़की से बाहर देखता है — एक काली कार आकर रुकती है।उसमें से एक आदमी उतरता है — काले सूट में, चेहरे पर हल्की दाढ़ी,आँखों में ठंडापन… वही चेहरा — CEO अजय मेहरा।(करण की आँखें सिकुड़ जाती हैं, लाल चमकती हैं।)करण (धीरे से बुदबुदाते हुए) बोला -“वो… लौट आया…”( बाहर, CEO घर के गेट के ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 23
(तेज़ हवाएँ चल रही हैं।आसमान में बिजली चमक रही है।सिमरन करण के पास खड़ी है — उसके चेहरे पर की लकीरें हैं।करण की आँखें लाल हो रही हैं, वो कुछ महसूस कर रहा है।)सिमरन (काँपती आवाज़ में) बोली -“करण जी... ये सब क्या हो रहा है?...ये हवाएँ... ये सन्नाटा... फिर वही डर जैसा...”(करण धीरे से बोलता है, उसकी आवाज़ भारी और गंभीर है।)करण बोला -“मैं जानता हूँ ये कौन है...”(सिमरन उसकी ओर देखती है, उलझन में।)सिमरन बोली -“ क कौन?... कौन है करण जी?”(करण की आँखें धीरे-धीरे चमक उठती हैं — लाल रोशनी फैल जाती है।वो गहरी साँस लेकर ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 24
(रात का सन्नाटा... हवाओं में ठंडक है।आसमान काला, बिजली की चमक रह-रहकर चारों ओर फैल रही है।करण के घर दरवाज़े पर दस्तक होती है — “ठक... ठक...”)(करण दरवाज़ा खोलता है — सामने सिमरन खड़ी है, भीगी हुई, थकी हुई, पर आँखों में वही सच्चाई।)करण (गुस्से में) बोला -“तुम...? तुम यहाँ क्या कर रही हो?”(सिमरन काँपती हुई आवाज़ में जवाब देती है —)सिमरन बोली -“करण की... मैं यहीं रहना चाहती हूँ...मैं आपकी पत्नी हूँ...”(करण की भौंहें तन जाती हैं। वो एक ठंडी, कटीली हँसी हँसता है।)करण बोला -“पत्नी...?मैने किसी से शादी की , ये तो मुझे याद ही नहीं...मुझे तो ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 25
(सिमरन धीरे-धीरे आँखें खोलती है।वो करवट बदलती है — तभी देखती है, सामने करण खड़ा है।उसकी लाल आँखें हल्के से चमक रही हैं।हाथ में एक छोटा बैग है — जैसे उसे बाहर भेजना चाहता हो।)करण (ठंडे स्वर में) बोला -“उठो... और निकलो यहाँ से।”(सिमरन घबराकर उठने की कोशिश करती है, लेकिन जैसे ही खड़ी होती है —वो अचानक ‘धड़ाम’ से ज़मीन पर गिर पड़ती है।)(उसके मुँह से दर्द भरी सिसकी निकलती है।)सिमरन (कराहते हुए) बोली -“आह... मेरी... मेरी कमर... हाथ... पैर... सब दुख रहे हैं...”(करण पहले तो चुप रहता है, लेकिन जब उसकी नज़र सिमरन पर पड़ती है —वो ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 26
(रात का सन्नाटा फैला हुआ है। बाहर ठंडी हवा बह रही है।कमरे में हल्की पीली रौशनी जल रही है। पर परछाइयाँ कांप रही हैं।)(सिमरन बिस्तर पर पड़ी है — चेहरा पसीने से भीगा हुआ, सांसें तेज़ चल रही हैं।वो अपने पेट को पकड़कर तड़पती है।)सिमरन (धीरे-धीरे कराहते हुए) बोली -“आह... भगवान... बहुत दर्द हो रहा है...अब और नहीं सहा जाता...”(वो करवट बदलने की कोशिश करती है लेकिन दर्द इतना ज़्यादा है कि आँसू अपने आप बह निकलते हैं।)सिमरन (धीरे-धीरे रोते हुए) बोली -“कान्हा जी... बचा लो... अब नहीं सह पाऊँगी...”(करण सो रहा होता है, लेकिन सिमरन की सिसकियाँ सुनकर ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 27
रात का समय है। हवेली में गहरा सन्नाटा है।बाहर तेज़ हवा चल रही है, बादलों के बीच से कभी-कभी झाँकता है।)(करण अपने कमरे में अकेला बैठा है।आईने के सामने, जहाँ उसका प्रतिबिंब बार-बार धुंधला पड़ता है —कभी इंसान की तरह, कभी किसी शैतान की तरह।)करण (अपने आप से, बुदबुदाते हुए) बोला -“क्यों नहीं निकल रही वो यहाँ से?...क्यों उसका चेहरा बार-बार मेरी आँखों के सामने आता है?...वो इंसान है... और मैं...”(उसकी आँखें धीरे-धीरे लाल होने लगती हैं।आईने में उसका चेहरा बदलता है — तेज़ दाँत, लाल आँखें, और डरावना रूप।)शैतानी आवाज़ (करण के अंदर से) बोली -“तू भूल गया ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 28
(शाम का वक्त है। हल्की बारिश हो रही है। सड़क किनारे एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर सिमरन बैठी चेहरा भीगा हुआ है — बारिश से भी, और आँसुओं से भी।)(उसके बाल बिखरे हुए हैं, होंठ काँप रहे हैं।वो अपनी गोद में रखे छोटे बैग को कसकर पकड़े हुए है —जैसे वही अब उसकी आख़िरी पहचान हो।)सिमरन (धीरे-धीरे खुद से, रुँधी आवाज़ में) बोली -“कितना आसान था सब उनके लिए...एक दिन में सब भूल गए... और मैं...”(आँखों से आँसू गिरते हैं)“मैं आज भी उनकी वही सिमरन हूँ... वही जो उनकी परवाह करती है...”(पास से गाड़ियाँ निकलती हैं, कोई उसकी ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 29
करण अपनी हवेली के ऊपरी कमरे में खड़ा है। रात गहरी और चांदनी बहुत हल्की है। हवेली की खिड़कियों हल्की-हल्की हवा आती है। कमरे में केवल उसकी साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही है।)"जब इंसान और शैतान का संगम एक ही हृदय में हो…तो हर धड़कन एक जंग बन जाती है।करण के भीतर भी वही हो रहा था — प्यार और प्यास के बीच।"( उसकी आँखें लाल हैं, दाँत लंबे और नुकीले, हाथ हिल रहे हैं। वह अपने आप से लड़ रहा है।)करण (भीतर से, खुद से लड़ते हुए, फुसफुसाते स्वर में) बोला -"नहीं... मैं उसे नुकसान नहीं पहुँचा ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 30
सुबह का समय। बारिश थमी है। हवेली के बाहर धूप की हल्की किरणें पड़ रही हैं। करण बिस्तर पर है — थका हुआ, बिखरा हुआ। पास में सिमरन उसकी देखभाल कर रही है।)"रात की वो आग अब राख बन चुकी थी...पर उस राख में कुछ चिंगारियाँ अब भी जल रही थीं —यादों की... और अधूरे प्यार की..."(सिमरन धीरे से करण के माथे पर पानी का कपड़ा रखती है। करण करवट बदलता है।)करण (धीरे से बड़बड़ाते हुए) बोला -“खून... लाल... गाड़ी... वो लड़की... वो चिल्ला रही थी…”(सिमरन चौंकती है।)सिमरन (धीरे से) बोली -“करण जी… क्या याद आ रहा है आपको?”(करण ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 31
हवेली की दीवारें हिल रही हैं। टुकड़े-टुकड़े काँच फर्श पर बिखरे हैं। बिजली की चमक में दो परछाइयाँ नज़र रही हैं — करण और रूद्र की।)“वो सिर्फ़ दो जिस्मों की लड़ाई नहीं थी...वो दो आत्माओं का हिसाब था — दोस्ती, धोखे और खून का।”(सिमरन कोने में खड़ी है। उसकी आँखें भय से चौड़ी हैं। करण और रूद्र हवा में टकराते हैं, आवाज़ गूँजती है। बीच-बीच में उनके शब्द सुनाई देते हैं।)रूद्र (गुस्से में) बोला -“याद है करण? पाँच साल पहले... जब हम पहली बार इंसानी खून पीने पृथ्वी पर आए थे?”(करण की आँखों में झिलमिलाती यादें उभरने लगती हैं। ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 32
(जंगल की ठंडी हवा में सिमरन और करण एक सुरक्षित जगह पर बैठे हैं। सिमरन अब कुछ हिम्मत करके की तरफ़ देखती है।)सिमरन (संकोच से, पर गंभीर स्वर में) बोली -“करण जी... एक बात पूछूँ? आप और रुद्र... इतने अच्छे दोस्त थे... फिर अचानक क्यों दुश्मन बन गए?”(करण थोड़ी देर चुप रहता है। उसकी आँखों में दर्द और पछतावा झलकता है जब तुम 18 साल की थी, और अपनी नई नौकरी पर आई थी...”(फ्लैशबैक में समय घूमता है। ऑफिस का दृश्य। सिमरन पहली बार अपने नए ऑफिस में घुसती है, थोड़ी घबराई हुई। करण उसके पास है, उसकी सुरक्षा ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 33
(जंगल में चारों तरफ डेविल्स घिरे हैं। सिमरन अकेली है, इंसान होने के नाते उसका दिल तेज़ धड़क रहा लेकिन उसका दिमाग़ शांत और तेजी से काम कर रहा है।)“सिमरन इंसान थी, लेकिन इंसान का दिमाग़ देवियों और शैतानों के मुकाबले तेज़ और चालाक होता है।उसने हर खतरे का आकलन किया और अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करने का फैसला किया।”(सिमरन चारों डेविल्स की स्थिति देखती है, पेड़ों की शाखाओं, पत्तों और झाड़ियों को ध्यान में रखती है।)सिमरन (अपने आप से, फुसफुसाती हुई) बोली -“अगर मैं सिर्फ डरूंगी तो हम हार जाएंगे…मैं करण जी को बचाऊंगी, चाहे कुछ भी हो।”(वो ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 34
(आसमान में बादल छाए हुए हैं। गुफा के बाहर रात का अँधेरा गहराता जा रहा है।करण अभी भी थोड़ा है, उसकी आँखों में थकान है, पर सिमरन के चेहरे को देखकर वो मुस्कुरा देता है।)करण (धीरे से) बोला -“अब सब ठीक है... बस थोड़ी ताकत लौट आए तो सब ठीक हो जाएगा…”(सिमरन हल्की मुस्कान देती है, लेकिन तभी गुफा के बाहर ज़मीन काँपती है। हवा तेज़ हो जाती है।गुफा की दीवारों से अजीब सी परछाइयाँ फिसलती हैं — और एक गूंजती हुई आवाज़ आती है…)आवाज़ (गूंजती हुई) बोली -“तू जितना भाग ले करण… मौत से नहीं छिप सकता…”(करण चौंकता ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 35
सूरज की पहली किरणें खिड़की से भीतर आ रही थीं। हवा में हल्की सी गर्माहट थी।सिमरन धीरे-धीरे अपनी आँखें है। उसके आसपास का कमरा बिल्कुल अनजान था —सफेद दीवारें, साधारण सा बिस्तर, और एक कोने में बैठा एक अजनबी… करण।)सिमरन (धीरे से) बोली -“मैं... कहाँ हूँ? और आप... आप कौन हैं?”(करण ने एक पल के लिए उसकी ओर देखा।उसकी आँखों में वही पुराना प्यार था, लेकिन चेहरा शांत रखा।)करण (धीरे से मुस्कुराते हुए) बोला -“तुम यहाँ सुरक्षित हो। कल रात तुम रास्ते में बेहोश हो गई थीं… मैंने ही तुम्हें यहाँ लाकर रखा।”सिमरन बोली -“ओह… धन्यवाद… पर मेरा नाम ...और पढ़े
Devil की दास्तान - 36
(रात का वक़्त। आसमान में हल्के बादल हैं, पर उनमें से चाँद की एक हल्की सी झलक दिखती है।सिया में है — सजी धजी लाल साड़ी में , किसी मासूम दुल्हन सी लग रही थी। हाथ में चलनी और थाली लिए हुए।उसकी आँखों में इंतज़ार है, पर चेहरा थका हुआ और फीका लग रहा है।)(धीरे-धीरे हवा तेज़ चलने लगती है, उसके बाल चेहरे पर उड़ते हैं।वो थाली उठाती है, चाँद की ओर देखती है — और मुस्कुरा देती है।)सिया (धीरे से) बोली -“चाँद निकल आया… अब व्रत पूरा हो गया…”(वो चलनी से चाँद देखती है, पर आगे वो canfuse ...और पढ़े